चीन का तियांगोंग अल्ट्रा ह्यूमनॉइड रोबोट 100 मीटर में 8.64 सेकंड के प्रदर्शन के बाद रफ्तार से आगे बढ़कर औद्योगिक काम और आपातकालीन इस्तेमाल की दिशा में परीक्षण कर रहा है।
बीजिंग | 10 सितंबर 2026
चीन का ह्यूमनॉइड रोबोट तियांगोंग अल्ट्रा अब केवल रफ्तार के प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहना चाहता। अगस्त में बीजिंग में आयोजित विश्व ह्यूमनॉइड रोबोट खेलों में इस रोबोट ने 100 मीटर की दौड़ 8.64 सेकंड में पूरी की, जो जमैका के धावक उसेन बोल्ट के 9.58 सेकंड के मानव विश्व रिकॉर्ड से तेज है। अब इसके डेवलपर्स का फोकस रिकॉर्ड बनाने के बजाय रोबोट को वास्तविक दुनिया में भरोसेमंद और उपयोगी बनाने पर है।
तियांगोंग अल्ट्रा को बीजिंग ह्यूमनॉइड रोबोट इनोवेशन सेंटर ने विकसित किया है। इसके विकास का नेतृत्व जैक गुओ कर रहे हैं। उनके मुताबिक अगला बड़ा लक्ष्य रोबोट की उच्च प्रदर्शन क्षमता को उच्च विश्वसनीयता और उपयोगिता में बदलना है।
यह बदलाव ह्यूमनॉइड रोबोटिक्स उद्योग के लिए अहम है। किसी मशीन का तेज दौड़ना तकनीकी क्षमता दिखाता है, लेकिन फैक्ट्री, अस्पताल, गोदाम या आपदा क्षेत्र में काम करने के लिए उसे लगातार और सुरक्षित ढंग से काम करना पड़ता है।
यही वजह है कि तियांगोंग परियोजना अब रेसिंग ट्रैक से बाहर की परिस्थितियों पर ज्यादा ध्यान दे रही है।
विश्व ह्यूमनॉइड रोबोट खेलों में तियांगोंग अल्ट्रा ने अलग-अलग चरणों में अपना प्रदर्शन लगातार सुधारा। शुरुआती दौर में उसने 9.39 सेकंड का समय दर्ज किया। सेमीफाइनल में समय 8.86 सेकंड रहा और फाइनल में उसने 8.64 सेकंड का प्रदर्शन किया।
मानव 100 मीटर का विश्व रिकॉर्ड 9.58 सेकंड है, जिसे उसेन बोल्ट ने 2009 में बनाया था। इस तुलना ने तियांगोंग अल्ट्रा की उपलब्धि को वैश्विक स्तर पर सुर्खियों में ला दिया।
हालांकि रोबोट और मानव एथलीट की दौड़ पूरी तरह समान परिस्थितियों में होने का दावा करना उचित नहीं होगा। रोबोटिक्स में गति के साथ वजन, ऊर्जा, संतुलन, नियंत्रण प्रणाली और सुरक्षा जैसे अलग तकनीकी मानदंड भी महत्वपूर्ण हैं।
तेज दौड़ने के बाद रोबोट को नियंत्रित तरीके से रुकाना बड़ी चुनौती बनी हुई है। तियांगोंग अल्ट्रा का वजन करीब 75 किलोग्राम है और इसकी अधिकतम गति 17 मीटर प्रति सेकंड से ज्यादा पहुंच सकती है। प्रतियोगिता के दौरान कुछ रोबोट दौड़ खत्म होने के बाद अवरोध से टकराते भी दिखाई दिए।
इंजीनियरों के सामने अब ऐसी नियंत्रण प्रणाली विकसित करने की चुनौती है, जिससे रोबोट अलग-अलग सतहों और परिस्थितियों में तेजी से चलने के साथ सुरक्षित तरीके से गति कम कर सके।
भविष्य के संस्करणों में वजन घटाने, ब्रेकिंग क्षमता सुधारने और अधिक सुरक्षित शारीरिक मुद्रा अपनाने पर काम किया जा रहा है।
तियांगोंग परियोजना की अगली दिशा केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं है। कंपनी के रोबोटों का औद्योगिक वातावरण में शुरुआती परीक्षण हो चुका है।
बीजिंग स्थित फोटोन कमिंस इंजन फैक्ट्री में तियानयी 2.0 रोबोट को बक्से उठाकर शेल्फ पर रखने जैसे कामों में आजमाया गया है। इसमें 8 से 12 किलोग्राम वजन वाले बक्सों को संभालने की क्षमता का परीक्षण किया गया। इसे अभी शुरुआती स्तर का औद्योगिक परीक्षण बताया गया है।
इससे संकेत मिलता है कि रोबोटिक्स कंपनियां अब प्रदर्शन आधारित डेमो से आगे बढ़कर वास्तविक उत्पादन वातावरण में उपयोगिता साबित करने की कोशिश कर रही हैं।
तियांगोंग अल्ट्रा के साथ विकसित छोटे मॉडल ओम्नी ने भी व्यावहारिक क्षमता का प्रदर्शन किया है। आंतरिक परीक्षण में ओम्नी ने एक इमारत की पहली मंजिल से 17वीं मंजिल तक चढ़ने का परीक्षण पूरा किया।
डेवलपर्स का आकलन है कि छोटे ह्यूमनॉइड रोबोटों के लिए शुरुआती अवसर व्यावसायिक सेवाओं और हल्के औद्योगिक कामों में हो सकते हैं।
बड़े और अधिक सक्षम मॉडल को बाहरी निरीक्षण तथा आपातकालीन बचाव जैसे अधिक चुनौतीपूर्ण कार्यों के लिए विकसित करने की दिशा में काम हो रहा है।
तियांगोंग अल्ट्रा की दौड़ केवल मोटर और यांत्रिक ताकत का परिणाम नहीं थी। रोबोट में अलग-अलग मोशन कंट्रोल रणनीतियों का इस्तेमाल किया गया। इन प्रणालियों में रोबोट के जोड़, संतुलन और कदमों को लगातार समायोजित करने वाली तकनीक शामिल है।
टीम ने प्रतियोगिता से पहले कई रणनीतियों को सिमुलेशन में प्रशिक्षित किया। कुछ रणनीतियां पहले से परखी जा चुकी थीं, जबकि कुछ तेज थीं लेकिन कम परीक्षण वाली थीं।
हर दौड़ के बाद इंजीनियरों ने सॉफ्टवेयर और नियंत्रण प्रणाली में बदलाव किए। रोबोटों को उनकी सीमा तक ले जाने के दौरान कई मशीनें असंतुलित हुईं और क्षतिग्रस्त भी हुईं। टीम को लगातार मरम्मत और परीक्षण करना पड़ा।
तियांगोंग अल्ट्रा की उपलब्धि चीन में ह्यूमनॉइड रोबोटिक्स के तेजी से विस्तार के व्यापक संदर्भ में सामने आई है। बीजिंग का यिझुआंग क्षेत्र रोबोटिक्स और हाईटेक उद्योग का एक प्रमुख केंद्र बन रहा है।
तियांगोंग विकसित करने वाले संगठन की स्थापना नवंबर 2023 में हुई थी। इसके निवेशकों में सरकारी और निजी क्षेत्र से जुड़े संस्थान शामिल हैं। रोबोटिक्स कंपनी यूबीटेक के साथ श्याओमी और बैदू जैसे चीनी तकनीकी समूह भी इससे जुड़े हैं।
इस मॉडल में हार्डवेयर, मोशन कंट्रोल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को एक साथ विकसित करने पर जोर है।
ह्यूमनॉइड रोबोटिक्स में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि एक खास काम को सफलतापूर्वक करना और अलग-अलग परिस्थितियों में स्वायत्त तरीके से काम करना दो अलग स्तर की उपलब्धियां हैं।
दौड़ में रोबोट को सीमित और पूर्वनिर्धारित वातावरण मिलता है। वास्तविक दुनिया में उसे सीढ़ियां, बाधाएं, अलग सतहें, इंसानों की आवाजाही, अनियमित वस्तुएं और अचानक बदलती परिस्थितियां संभालनी होंगी।
इसके लिए बेहतर सेंसर, अधिक सक्षम एआई, ऊर्जा दक्षता, संतुलन नियंत्रण और सुरक्षित निर्णय लेने की क्षमता जरूरी होगी।
यही वजह है कि तियांगोंग अल्ट्रा की 8.64 सेकंड की दौड़ महत्वपूर्ण होने के बावजूद इसे रोबोटिक्स की अंतिम उपलब्धि मानना जल्दबाजी होगी।
तियांगोंग टीम के लिए अब सवाल यह नहीं है कि रोबोट कितनी तेजी से दौड़ सकता है। बड़ा सवाल यह है कि वह कितनी देर तक सुरक्षित और लगातार काम कर सकता है।
औद्योगिक क्षेत्र में कंपनियां ऐसी मशीन चाहती हैं जो बार-बार एक जैसा काम करे, कम रखरखाव मांगे और इंसानों के साथ सुरक्षित तरीके से काम करे।
आपातकालीन बचाव जैसे क्षेत्रों में मानक और भी ऊंचे होंगे। वहां मशीन को मलबे, धूल, असमान जमीन और अप्रत्याशित परिस्थितियों में काम करना पड़ सकता है।
चीन की रणनीति केवल कुछ तेज रोबोट तैयार करने तक सीमित नहीं दिखाई देती। हार्डवेयर निर्माण, सप्लाई चेन, एआई और बड़े पैमाने पर परीक्षण को एक साथ आगे बढ़ाने की कोशिश हो रही है।
विश्व ह्यूमनॉइड रोबोट खेलों ने इस प्रतिस्पर्धा को सार्वजनिक मंच भी दिया। लेकिन विशेषज्ञ विश्लेषण में यह बात सामने आती रही है कि प्रदर्शन आधारित उपलब्धियों के बावजूद ह्यूमनॉइड रोबोट अभी व्यापक और बहुउद्देश्यीय वास्तविक उपयोग के शुरुआती चरण में हैं।
इसलिए आने वाले वर्षों में प्रतिस्पर्धा का केंद्र केवल गति और ताकत नहीं रहेगा। विश्वसनीयता, सुरक्षा, स्वायत्तता, ऊर्जा दक्षता और लागत भी उतनी ही अहम होंगी।
तियांगोंग अल्ट्रा की कहानी अब एक स्पोर्ट्स रिकॉर्ड से आगे बढ़ चुकी है। इसके डेवलपर्स इसे बाहरी निरीक्षण, हल्के औद्योगिक कार्य और आपातकालीन बचाव जैसे क्षेत्रों तक ले जाने की तैयारी कर रहे हैं।
लेकिन व्यावसायिक सफलता के लिए अभी कई तकनीकी बाधाएं दूर करनी होंगी। खास तौर पर ब्रेकिंग, स्थिरता, एआई आधारित स्वायत्त निर्णय और अलग-अलग परिस्थितियों में लगातार प्रदर्शन महत्वपूर्ण रहेंगे।
तियांगोंग अल्ट्रा ने यह साबित किया है कि ह्यूमनॉइड रोबोट बेहद तेज गति हासिल कर सकते हैं। अब असली परीक्षा यह साबित करने की है कि वही मशीनें फैक्ट्री, सड़क और आपातकालीन परिस्थितियों में सुरक्षित, भरोसेमंद और आर्थिक रूप से उपयोगी भी साबित हों।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।