मुजफ्फरनगर में 2013 दंगों की बरसी पर विवादित होर्डिंग, राजनीतिक हलचल तेज
Asif Khan
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2026-09-07 21:40:22
मुजफ्फरनगर में 2013 दंगों की बरसी पर विवादित होर्डिंग लगाए गए। संदेश के साथ अखिलेश यादव की तस्वीर ने सियासी बहस बढ़ाई, लेकिन लगाने वाले की आधिकारिक पहचान सामने नहीं आई है।
📍 Muzaffarnagar 🗓️ 7 Sept 2026 ✍️ Asif Khan
2013 की हिंसा की बरसी पर मुजफ्फरनगर में लगे विवादित होर्डिंग
मुजफ्फरनगर में 2013 की सांप्रदायिक हिंसा की बरसी के दिन कुछ विवादित होर्डिंग सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। रोडवेज बस स्टैंड के पास लगाए गए इन होर्डिंग पर बड़े अक्षरों में लिखा गया है— ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे।’ इनके साथ समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की एक तस्वीर भी लगाई गई है।
होर्डिंग रातों-रात लगाए जाने की बात सामने आई है। इनके सामने आने के बाद आसपास के इलाकों में चर्चा शुरू हो गई और स्थानीय लोगों के बीच इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
होर्डिंग पर क्या लिखा है?
होर्डिंग पर 2013 की हिंसा की याद से जुड़ा संदेश प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है। संदेश के साथ अखिलेश यादव की तस्वीर होने के कारण इसे राजनीतिक संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
हालांकि, इन होर्डिंग को किस व्यक्ति, संगठन या राजनीतिक समूह ने लगवाया, इसकी आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि इन्हें लगाने के लिए संबंधित प्रशासन से अनुमति ली गई थी या नहीं।
स्थानीय लोगों ने जताई चिंता
स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों ने कहा कि 2013 की हिंसा की बरसी पर इस तरह के संदेश वाले होर्डिंग लगाए जाने से उस दौर की घटनाओं की याद फिर ताजा हो रही है। एक चश्मदीद के मुताबिक, ऐसे संदेश लोगों के बीच डर या तनाव पैदा कर सकते हैं।
हालांकि, इन होर्डिंग का उद्देश्य क्या था और इन्हें लगाने के पीछे वास्तविक मंशा क्या रही, इस बारे में अभी कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
7 सितंबर 2013 के बाद बढ़ी थी हिंसा
मुजफ्फरनगर और आसपास के क्षेत्रों में 2013 में हुई सांप्रदायिक हिंसा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए एक गंभीर घटनाक्रम रही। 7 सितंबर 2013 को नंगला मंदौड़ में हुई पंचायत के बाद हिंसा का दौर तेज हुआ था।
इस हिंसा में 60 से अधिक लोगों की मौत हुई थी और बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए थे। घटनाओं का असर मुजफ्फरनगर के साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में भी देखने को मिला था।
चुनावी माहौल में बढ़ा राजनीतिक संदर्भ
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज होने के बीच पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 2013 की हिंसा का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आया है। ऐसे माहौल में अखिलेश यादव की तस्वीर और हिंसा की बरसी से जुड़े संदेश वाले होर्डिंग को राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
फिर भी, जब तक होर्डिंग लगाने वाले व्यक्ति या संगठन की पहचान और उद्देश्य की आधिकारिक पुष्टि नहीं होती, तब तक इसे किसी खास राजनीतिक दल या समूह से जोड़कर निश्चित निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
प्रशासनिक कार्रवाई पर नजर
फिलहाल सबसे अहम सवाल यही है कि होर्डिंग किसने लगाए, क्या इनके लिए अनुमति ली गई थी और स्थानीय प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है। आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही इन सवालों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
2013 की हिंसा की बरसी पर सामने आए ये होर्डिंग इस बात की याद भी दिलाते हैं कि सांप्रदायिक हिंसा से जुड़े संवेदनशील मुद्दों की रिपोर्टिंग में तथ्यों की पुष्टि और सामाजिक संवेदनशीलता दोनों बेहद जरूरी हैं।
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Asif Khan
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।