डिजिटल पत्रकारिता पर दिल्ली हाई कोर्ट की अहम टिप्पणी, रेगुलेटरी फ्रेमवर्क पर दिया सुझाव
Asif Khan
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2026-07-18 21:33:00
डिजिटल पत्रकारिता पर हाई कोर्ट ने सरकार को दी अहम सलाह
दिल्ली हाई कोर्ट ने एक जमानत मामले की सुनवाई के दौरान डिजिटल पत्रकारिता की चुनौतियों पर टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता लोकतंत्र के लिए आवश्यक है, लेकिन पेशेवर जवाबदेही और नैतिक मानकों की रक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
📍New Delhi 📰 18 July 2026 ✍️ Asif Khan
डिजिटल पत्रकारिता पर हाई कोर्ट की अहम टिप्पणी
दिल्ली हाई कोर्ट ने डिजिटलपत्रकारिता के बदलते स्वरूप पर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि आज मोबाइल फोन और माइक्रोफोन रखने वाला लगभग हर व्यक्ति स्वयं को रिपोर्टर बताने लगा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पत्रकारिता केवल वीडियो रिकॉर्ड करने या घटनास्थल पर मौजूद रहने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पेशेवर नैतिकता, तथ्यपरकता और कानूनी जवाबदेही से भी जुड़ा दायित्व है।
मामला क्या था
यह टिप्पणी 2025 में दिल्ली के सीमापुरी क्षेत्र में कथित हमले से जुड़े एक जमानत मामले की सुनवाई के दौरान सामने आई। आरोप था कि एक यूट्यूब चैनल से जुड़े दो फ्रीलांस पत्रकार कथित अवैध निर्माण वाले उपासना स्थल की वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहे थे। इसी दौरान उन पर भीड़ ने हमला किया और उनका मोबाइल फोन तथा कैमरे से जुड़ा सामान छीन लिया गया।
पुलिस ने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था। नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने आरोपियों को जमानत प्रदान की।
अदालत ने क्या कहा
जस्टिस गिरीश कठपालिया की एकल पीठ ने कहा कि डिजिटल और सोशल मीडिया के विस्तार ने पत्रकारिता को अधिक सुलभ बनाया है, लेकिन इसके साथ नई चुनौतियां भी सामने आई हैं। अदालत के अनुसार केवल मोबाइल से रिकॉर्डिंग करना किसी व्यक्ति को स्वतः जिम्मेदार पत्रकार नहीं बना देता।
अदालत ने यह भी कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला है। हालांकि, इस स्वतंत्रता के साथ पेशेवर आचरण, नैतिक मानकों और कानून के प्रति जवाबदेही भी अनिवार्य है।
सरकार को क्या सुझाव दिया
अदालत ने कहा कि विधायिका इस बात पर विचार कर सकती है कि ऐसा संतुलित रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार किया जाए, जो एक ओर मीडिया की स्वतंत्रता की रक्षा करे और दूसरी ओर पेशेवर जवाबदेही, नागरिक अधिकारों तथा कानून के शासन को भी मजबूत बनाए।
ध्यान देने योग्य बात यह है कि अदालत ने सरकार को विचार करने का सुझाव दिया है। यह कोई बाध्यकारी निर्देश या नया कानून नहीं है।
व्यापक संदर्भ
पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में स्वतंत्र कंटेंट क्रिएटर और सिटिजन जर्नलिस्ट सक्रिय हुए हैं। इससे सूचना का प्रसार तेज हुआ है, लेकिन तथ्य-जांच, जवाबदेही और पत्रकारिता के मानकों को लेकर बहस भी तेज हुई है।
मीडिया विशेषज्ञों का एक वर्ग मानता है कि किसी भी नियामक व्यवस्था को इस तरह तैयार किया जाना चाहिए कि प्रेस की स्वतंत्रता प्रभावित न हो। वहीं दूसरा पक्ष कहता है कि फर्जी खबरों और गैर-जिम्मेदार रिपोर्टिंग पर प्रभावी नियंत्रण भी आवश्यक है।
सम्पादकीय दृष्टिकोण
दिल्ली हाई कोर्ट की यह टिप्पणी डिजिटल पत्रकारिता पर चल रही राष्ट्रीय बहस को नया आयाम देती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि स्वतंत्र मीडिया लोकतंत्र के लिए आवश्यक है, लेकिन उसके साथ पेशेवर जिम्मेदारी और नैतिक मानकों का पालन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। आगे यह देखना होगा कि सरकार इस सुझाव पर कोई नीति या विधायी पहल करती है या नहीं।
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Asif Khan
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।