मुजफ्फरनगर की खतौली तहसील में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान विभिन्न विभागों से जुड़ी 69 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें सात का मौके पर निस्तारण किया गया। जिलाधिकारी ने समयबद्ध, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण कार्रवाई के साथ जलभराव, अतिक्रमण और आईजीआरएस शिकायतों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।
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📍 खतौली, मुजफ्फरनगर
📰 18 जुलाई 2026
✍️ Wasi Siddiqui
खतौली समाधान दिवस में 69 शिकायतें, डीएम ने जलभराव और अतिक्रमण पर सख्ती दिखाई
जनसुनवाई को प्रभावी बनाने पर प्रशासन का ज़ोर
मुजफ्फरनगर के खतौली तहसील सभागार में शनिवार को जिलाधिकारी उमेश मिश्रा और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा की संयुक्त अध्यक्षता में संपूर्ण समाधान दिवस आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य आम नागरिकों की शिकायतों को सीधे सुनना और उनके समयबद्ध समाधान की दिशा में प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करना रहा।
समाधान दिवस में बिजली, राजस्व, समाज कल्याण, राशन कार्ड, भूमि विवाद, नगर पालिका, नगर पंचायत, सड़क, पेंशन, श्रम विभाग तथा पुलिस प्रशासन से संबंधित शिकायतें प्रमुख रूप से सामने आईं।
69 शिकायतें, सात का मौके पर समाधान
प्रशासनिक जानकारी के अनुसार कुल 69 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें से सात का निस्तारण मौके पर ही कर दिया गया। शेष मामलों को संबंधित विभागों को भेजते हुए जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि शिकायतों का एक सप्ताह के भीतर गुणवत्तापूर्ण और संतोषजनक निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि केवल कागजी कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि शिकायतकर्ता से फीडबैक लेकर उसकी संतुष्टि भी सुनिश्चित करनी होगी। साथ ही मौके की फोटो और आवश्यक अभिलेख भी उपलब्ध कराए जाएं।
जलभराव पर विशेष निगरानी के निर्देश
मानसून के मौसम को देखते हुए जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने नगर पालिका और संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए कि क्षेत्र में कहीं भी जलभराव की स्थिति उत्पन्न न होने पाए।
उन्होंने कहा कि यदि किसी स्थान पर पानी भरने की सूचना मिलती है तो तत्काल जल निकासी कराई जाए। प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी क्योंकि जलभराव से आम जनजीवन, यातायात और स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
आईजीआरएस शिकायतों की गुणवत्ता पर ज़ोर
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने अधिकारियों को आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध निस्तारण के निर्देश भी दिए।
उन्होंने कहा कि केवल औपचारिक जवाब देकर शिकायतों को बंद करना पर्याप्त नहीं है। प्रत्येक शिकायत का वास्तविक समाधान किया जाए ताकि नागरिकों का शासन व्यवस्था पर विश्वास मजबूत हो।
सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने के आदेश
जिलाधिकारी ने सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों को लेकर भी सख्त रुख अपनाया। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि जहां कहीं भी सरकारी भूमि पर अतिक्रमण पाया जाए, वहां तत्काल कार्रवाई कर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए।
प्रशासन का मानना है कि सार्वजनिक भूमि की सुरक्षा विकास कार्यों और सरकारी परियोजनाओं के सुचारु संचालन के लिए आवश्यक है।
समाधान दिवस का उद्देश्य केवल शिकायत दर्ज करना नहीं
संपूर्ण समाधान दिवस राज्य सरकार की उस व्यवस्था का हिस्सा है जिसके माध्यम से नागरिक सीधे प्रशासन के सामने अपनी समस्याएं रख सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी जनसुनवाई तभी प्रभावी मानी जाती है जब शिकायतों का वास्तविक और स्थायी समाधान हो तथा शिकायतकर्ता को समय पर राहत मिले। केवल शिकायतों की संख्या या निस्तारण के आंकड़े पर्याप्त नहीं होते, बल्कि समाधान की गुणवत्ता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।
प्रशासनिक जवाबदेही पर बढ़ता फोकस
हाल के वर्षों में उत्तर प्रदेश में आईजीआरएस और समाधान दिवस जैसी व्यवस्थाओं को प्रशासनिक जवाबदेही से जोड़कर देखा जा रहा है। अधिकारियों को अब केवल शिकायतों के निस्तारण की रिपोर्ट ही नहीं बल्कि उसकी गुणवत्ता और नागरिक संतुष्टि पर भी जवाब देना पड़ता है।
खतौली में आयोजित इस समाधान दिवस के दौरान भी जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक अधिकारी स्वयं मौके पर जाकर शिकायतों की जांच करें और निष्पक्षता के साथ समाधान सुनिश्चित करें।
संपादकीय दृश्टिकोण
वसी सिद्दीकी
प्रशासन की ओर से दिए गए निर्देशों का वास्तविक असर आने वाले दिनों में शिकायतों के निस्तारण और फील्ड स्तर पर दिखाई देगा। विशेष रूप से जलभराव, भूमि विवाद और अतिक्रमण जैसे मामलों में त्वरित कार्रवाई नागरिकों के लिए राहत का कारण बन सकती है।
यदि विभाग समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से कार्रवाई करते हैं तो समाधान दिवस जैसी पहल आम लोगों और प्रशासन के बीच भरोसे को और मजबूत कर सकती है।