दिल्ली: हिरासत में टॉर्चर का आरोप, राहुल गांधी के साथ प्रदर्शन कर रहे NSUI कार्यकर्ताओं का पुलिस पर गंभीर दावा
Mohammad Naved
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2026-10-14 14:08:08
दिल्ली में राहुल गांधी के साथ प्रदर्शन कर रहे NSUI कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर हिरासत के दौरान टॉर्चर और मारपीट का गंभीर आरोप लगाया है।
📍 नई दिल्ली
🗓️ 14 अक्टूबर 2026
✍️ Mohd Naved
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कांग्रेस और नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के विरोध प्रदर्शन के बाद एक नया विवाद खड़ा हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के साथ प्रदर्शन में शामिल NSUI कार्यकर्ताओं ने दिल्ली पुलिस पर हिरासत (Custody) के दौरान टॉर्चर और मारपीट करने के बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं।
हिरासत से रिहा होने के बाद कई प्रदर्शनकारियों ने मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए अपनी आपबीती साझा की। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि पुलिस उन्हें अलग-अलग थानों और स्टेडियमों (जैसे छत्रसाल स्टेडियम) में ले गई, जहां उन्हें लाइन में खड़ा करके पीटा गया। कुछ कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि मारपीट के दौरान उनके कपड़े फाड़ दिए गए और कुछ के हाथ में फ्रैक्चर भी हुआ है।
* आरोप: हिरासत के दौरान पुलिस द्वारा शारीरिक टॉर्चर और मारपीट।
* शिकायतकर्ता: NSUI कार्यकर्ता और प्रदर्शनकारी।
* प्रमुख नेता: राहुल गांधी (जिन्हें भी प्रदर्शन के दौरान कुछ समय के लिए हिरासत में लिया गया था)।
* पुलिस की स्थिति: दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों पर अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी ने इन आरोपों का समर्थन करते हुए पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। कांग्रेस नेताओं के बयानों के अनुसार, यह "लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने और असहमति की आवाज को कुचलने" का प्रयास है। वहीं, हालिया कानूनी घटनाक्रम में दिल्ली की एक अदालत ने हिरासत में टॉर्चर के आरोपों को लेकर पुलिस से जवाब तलब किया है और रिपोर्ट मांगी है।
पिछले कुछ दिनों से दिल्ली में विभिन्न मुद्दों (जैसे मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर विवाद और छात्रों के मुद्दे) पर कांग्रेस और NSUI द्वारा लगातार विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। इन प्रदर्शनों में भारी भीड़ जुटने के कारण पुलिस ने धारा 163 (BNSS) का हवाला देते हुए सैकड़ों कार्यकर्ताओं को एहतियातन हिरासत में लिया था।
* प्रदर्शन और हिरासत का समय: अक्टूबर 2026 का दूसरा सप्ताह।
* हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या: 700 से अधिक (विभिन्न प्रदर्शनों में)।
अदालत द्वारा पुलिस से रिपोर्ट मांगे जाने के बाद अब इस मामले की निष्पक्ष जांच होने की उम्मीद है। यदि मेडिकल जांच में पुलिस की बर्बरता साबित होती है, तो संबंधित अधिकारियों पर गाज गिर सकती है। वहीं, कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर सड़क से संसद तक सरकार को घेरने की तैयारी में है।
शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस की कथित बर्बरता के आरोपों ने दिल्ली में राजनीतिक माहौल को और भी गर्म कर दिया है।
लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन करना विपक्ष और नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है। वहीं, कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है। लेकिन हिरासत में 'टॉर्चर' या मारपीट के आरोप बेहद संवेदनशील और मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़े हैं। पुलिस हिरासत का उद्देश्य कानूनी प्रक्रिया का पालन करना है, न कि सजा देना। अदालत द्वारा इस मामले में रिपोर्ट मांगना एक स्वागत योग्य कदम है। निष्पक्ष और पारदर्शी जांच से ही यह साफ हो पाएगा कि प्रदर्शनकारियों के दावों में कितनी सच्चाई है और यदि ज्यादती हुई है, तो जवाबदेही तय होनी चाहिए।
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Mohammad Naved
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।