SIR के तहत मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की। अदालत ने केंद्र और चुनाव आयोग से जवाब मांगा। दिल्ली में प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामलों पर भी सुनवाई हुई।
📍 नई दिल्ली
🗓️ 15 अक्टूबर 2026
✍️ Mohd Naved
SIR विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
नई दिल्ली। मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच जारी विवाद 15 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। अदालत ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य विपक्षी नेताओं की ओर से दायर याचिकाओं पर केंद्र सरकार तथा चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया। सुनवाई में मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के साथ दिल्ली में हुए विरोध-प्रदर्शनों से जुड़े मामले भी उठे।
राहुल गांधी के मार्च पर अदालत ने मांगा स्पष्टीकरण
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने 12 अक्टूबर को अदालत की ओर निकाले गए मार्च में राहुल गांधी के आचरण पर सवाल उठाए। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने उनसे इस मामले में स्पष्टीकरण देने को कहा।
यह घटनाक्रम SIR के खिलाफ विपक्ष की ओर से दायर याचिकाओं और चुनाव आयोग की भूमिका पर चल रही कानूनी बहस के बीच सामने आया। अदालत की टिप्पणी को अंतिम फैसला नहीं माना जाना चाहिए।
CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में हुए प्रदर्शन से जुड़े सभी CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि निजी पक्ष भी अपने पास मौजूद वीडियो सुरक्षित रख सकते हैं, ताकि उन्हें जरूरत पड़ने पर साक्ष्य के रूप में पेश किया जा सके।
यह निर्देश प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और महिला पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार से जुड़े आरोपों की जांच के लिहाज से अहम है। अदालत में इस मुद्दे पर आगे की कार्रवाई भी चर्चा में रही।
केंद्र और चुनाव आयोग से जवाब तलब
SIR को लेकर विपक्ष की याचिकाओं में मतदाता सूची में नाम हटाए जाने और संशोधन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं ने स्वतंत्र ऑडिट, मतदाताओं के नाम हटाने से पहले उचित प्रक्रिया और चुनाव आयोग से विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने जैसी मांगें रखी हैं।
ये याचिकाकर्ताओं की मांगें हैं। इन्हें अदालत की ओर से स्वीकार किया गया अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करके जवाब मांगा है।
दिल्ली पुलिस ने हिरासत की कार्रवाई का बचाव किया
प्रदर्शन से जुड़े एक अलग मामले में दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष रखा। पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार के हवाले से उपलब्ध रिपोर्ट में कहा गया कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को संसद मार्च की अनुमति नहीं देना और प्रदर्शनकारियों को एहतियातन हिरासत में लेना कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी था।
पुलिस ने पूर्व प्रदर्शन के दौरान हिंसा, संपत्ति को नुकसान और लोगों के घायल होने से जुड़ी आशंकाओं का भी उल्लेख किया। ये पुलिस की ओर से पेश किए गए तर्क हैं। संबंधित आरोपों का अंतिम न्यायिक निर्धारण अलग विषय है।
मेट्रो प्रतिबंधों पर DMRC का हलफनामा
दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने मेट्रो स्टेशनों पर प्रवेश और निकास प्रतिबंधों से जुड़े मामले में हलफनामा दाखिल किया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, DMRC ने बताया कि दिल्ली मेट्रो के 303 स्टेशनों में से 45 पर प्रवेश और निकास संबंधी प्रतिबंध लगाए गए थे।
DMRC ने शनिवार की सामान्य 58 लाख की तुलना में यात्रियों की संख्या लगभग 32 लाख रहने की बात भी कही। यह आंकड़ा उसके हलफनामे में दर्ज विवरण के रूप में सामने आया है। इसे मेट्रो सेवाओं के पूरी तरह बंद रहने का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।
महिला पत्रकारों से जुड़े आरोप भी सुनवाई में
प्रदर्शन के दौरान महिला पत्रकारों पर कथित हमले का मामला भी अदालत में उठा। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे की जांच के लिए समिति गठित करने का संकेत दिया।
इन आरोपों की स्वतंत्र जांच और संबंधित पक्षों का जवाब महत्वपूर्ण होगा। आरोपों को अंतिम रूप से साबित तथ्य के तौर पर पेश करना उचित नहीं होगा।
जंतर-मंतर के दर्जे पर भी सवाल
सुनवाई में जंतर-मंतर को अधिसूचित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के फैसले पर भी चर्चा हुई। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा कि क्या यह निर्णय अदालत की मौखिक टिप्पणियों के कारण लिया गया था या प्रदर्शन स्थल की उपयोगिता की समीक्षा के बाद।
सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के आदेश को आधार बनाकर नहीं लिया गया था। इस मुद्दे पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट नहीं है।
आगे क्या होगा?
SIR से जुड़ी याचिकाओं पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के जवाब आगे की कार्यवाही के लिए महत्वपूर्ण होंगे। प्रदर्शन, मेट्रो प्रतिबंधों और पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामलों में भी अदालत के निर्देशों के बाद आगे की प्रक्रिया तय होगी।
उपलब्ध रिपोर्टिंग में इन सभी मुद्दों पर अंतिम फैसला दर्ज नहीं है। इसलिए मामले को जारी कानूनी प्रक्रिया के रूप में देखना चाहिए।
इस मामले के 3 प्रमुख पहलू हैं।
चुनावी पारदर्शिता: मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया, नाम हटाने के आधार और मतदाताओं को उपलब्ध शिकायत निवारण व्यवस्था सार्वजनिक भरोसे के लिए महत्वपूर्ण हैं।
विरोध का अधिकार: राजनीतिक प्रदर्शन और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के बीच संतुलन पर अदालत की सुनवाई अहम है।
जवाबदेही: CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश घटनाओं की जांच में उपलब्ध साक्ष्यों की भूमिका को रेखांकित करता है।
इन पहलुओं पर अंतिम आकलन अदालत के आदेशों, चुनाव आयोग के जवाब और जांच में सामने आने वाले प्रमाणों के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।