मुजफ्फरनगर बॉर्डर पर डीजे कांवड़ों की सख्त जांच जारी है। तय आकार से बड़े वाहनों को रोका जा रहा है। प्रशासन इसे सुरक्षा के लिए जरूरी बता रहा, जबकि शिवभक्त नियमों के अंतर से परेशान हैं।
📍 मुजफ्फरनगर / पुरकाजी बॉर्डर
📰 04 अगस्त 2026
✍️ By Asif Khan
कांवड़ यात्रा अपने चरम पर है और हरिद्वार से लौट रहे शिवभक्तों की भारी भीड़ अब मुजफ्फरनगर पहुंच रही है। इसी बीच डीजे कांवड़ों की एंट्री ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। पुरकाजी बॉर्डर पर बड़ी संख्या में डीजे कांवड़ जांच के लिए रोकी गई हैं।
पुलिस और प्रशासन का फोकस साफ है, तय मानकों से बाहर किसी भी डीजे कांवड़ को यूपी में दाखिल नहीं होने दिया जाएगा। यह सख्ती इस बार पहले के मुकाबले ज्यादा दिखाई दे रही है।
शासन की गाइडलाइन के मुताबिक डीजे कांवड़ की अधिकतम ऊंचाई 10 फीट और चौड़ाई 12 फीट निर्धारित की गई है। प्रशासन इन्हीं पैमानों पर हर वाहन की जांच कर रहा है।
स्थानीय पुलिस का कहना है कि सड़क सुरक्षा, ट्रैफिक मैनेजमेंट और भीड़ नियंत्रण के लिए यह सीमा जरूरी है। बड़े डीजे कांवड़ अक्सर हादसों और जाम की वजह बनते हैं।
हाल ही में नियमों का उल्लंघन करने पर एक डीजे कांवड़ पर 50 हजार रुपये का चालान किया गया। इससे साफ संकेत गया है कि प्रशासन इस बार किसी तरह की ढील देने के मूड में नहीं है।
जांच के दौरान कई शिवभक्तों ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि उन्होंने अपने डीजे कांवड़ यूपी की गाइडलाइन के अनुसार तैयार किए हैं, लेकिन उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के नियमों में अंतर के कारण उन्हें बार-बार रोका जा रहा है।
कई श्रद्धालुओं का दावा है कि हरिद्वार में उन्हें रोका नहीं गया, लेकिन यूपी बॉर्डर पर सख्ती अचानक बढ़ गई। इससे उनकी यात्रा में देरी हो रही है और धार्मिक आयोजन प्रभावित हो रहे हैं।
यह असंतुलन जमीनी स्तर पर एक बड़ा प्रशासनिक मसला बनता दिख रहा है।
एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने साफ किया है कि यह कार्रवाई शासन के निर्देशों के तहत हो रही है। हरिद्वार और मुजफ्फरनगर पुलिस मिलकर संयुक्त जांच कर रही है।
उनका कहना है कि केवल वही डीजे कांवड़ आगे बढ़ेंगे जो निर्धारित मानकों के अनुरूप हैं। यह कदम कांवड़ यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाए रखने के लिए जरूरी है।
प्रशासन का तर्क है कि भीड़ के दबाव में नियमों को नजरअंदाज करना बड़े जोखिम को न्योता दे सकता है।
पिछले वर्षों में डीजे कांवड़ों की संख्या तेजी से बढ़ी है। इसके साथ ही बड़े आकार के वाहनों, तेज आवाज और भारी सजावट ने ट्रैफिक और कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती पैदा की है।
कई मामलों में सड़क हादसे, बिजली के तारों से टकराव और जाम की घटनाएं सामने आईं। इन हालातों को देखते हुए इस बार पहले से ही गाइडलाइन सख्त की गई।
प्रशासनिक नजरिए से यह एक प्रिवेंटिव स्ट्रैटेजी है, ताकि किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।
कांवड़ यात्रा की शुरुआत के साथ ही हरिद्वार से बड़ी संख्या में डीजे कांवड़ रवाना हुईं। शुरुआती चरण में ज्यादा सख्ती नहीं दिखी, लेकिन यूपी सीमा के करीब पहुंचते ही जांच तेज हो गई।
पुरकाजी बॉर्डर पर पुलिस ने हर वाहन की माप शुरू की। इसके बाद कई कांवड़ वहीं रोक दी गईं। चालान की कार्रवाई ने माहौल और सख्त कर दिया।
बॉर्डर पर लंबी कतारें लग गई हैं। कई कांवड़ घंटे भर से ज्यादा समय तक रुकी हुई हैं। इससे ट्रैफिक पर भी असर पड़ा है।
स्थानीय व्यापार और परिवहन गतिविधियों पर भी दबाव दिख रहा है। आसपास के इलाकों में जाम की स्थिति बन रही है।
प्रशासन इसे जरूरी कदम बता रहा है। उनका कहना है कि नियमों के बिना इतनी बड़ी यात्रा को कंट्रोल करना मुश्किल है।
वहीं श्रद्धालु इसे अनावश्यक सख्ती मान रहे हैं। उनका तर्क है कि धार्मिक यात्रा में इस तरह की रुकावटें भावनात्मक और लॉजिस्टिक दोनों स्तर पर असर डालती हैं।
विश्लेषण यह संकेत देता है कि बेहतर समन्वय की कमी इस विवाद की मुख्य वजह है।
कांवड़ यात्रा यूपी की सियासी और सामाजिक संवेदनशीलता से जुड़ा मुद्दा है। ऐसे में प्रशासन की हर कार्रवाई पर नजर रहती है।
यदि असंतोष बढ़ता है, तो यह राजनीतिक बहस का हिस्सा भी बन सकता है। फिलहाल प्रशासन संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।
आने वाले दिनों में कांवड़ यात्रा और तेज होगी। ऐसे में जांच और सख्ती भी जारी रहने की संभावना है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यूपी और उत्तराखंड के बीच नियमों का बेहतर तालमेल जरूरी है। इससे जमीन पर भ्रम और विवाद कम हो सकते हैं।
डीजे कांवड़ जांच अब कांवड़ यात्रा का अहम हिस्सा बन चुकी है। सुरक्षा और आस्था के बीच संतुलन बनाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है।
यदि नियमों में स्पष्टता और राज्यों के बीच समन्वय बेहतर होता है, तो यह विवाद कम हो सकता है। फिलहाल बॉर्डर पर सख्ती जारी है और शिवभक्तों को उसी के अनुसार आगे बढ़ना होगा।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।