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डिलीवरी के बाद गोंद के लड्डू खिलाने की परंपरा के पीछे क्या है कारण?

Neelam Saini 2026-07-16 13:33:19
डिलीवरी के बाद गोंद के लड्डू खिलाने की परंपरा के पीछे क्या है कारण?

गोंद के लड्डू और प्रसव के बाद रिकवरी, जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ

डिलीवरी के बाद महिलाओं को क्यों दिए जाते हैं गोंद के लड्डू? जानिए वजह

प्रसव के बाद महिलाओं को क्यों दिए जाते हैं गोंद के लड्डू, समझिए पूरा नज़रिया

डिलीवरी के बाद महिलाओं को गोंद के लड्डू खिलाने की परंपरा भारत के कई हिस्सों में प्रचलित है। यह परंपरा शरीर को अतिरिक्त ऊर्जा, पोषण और रिकवरी में सहायता देने से जुड़ी मानी जाती है। हालांकि विशेषज्ञ संतुलित मात्रा और व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार सेवन की सलाह देते हैं।


📍 भारत
📰 16 जुलाई 2026
✍️ Neelam Saini

गोंद के लड्डू और मातृत्व की पारंपरिक कहानी

भारतीय समाज में प्रसव के बाद मां की देखभाल को हमेशा विशेष महत्व दिया गया है। यही वजह है कि डिलीवरी के बाद महिलाओं के खानपान में कई पारंपरिक खाद्य पदार्थ शामिल किए जाते हैं। इनमें गोंद के लड्डू एक प्रमुख नाम हैं। वर्षों से दादी-नानी के नुस्खों में शामिल यह मिठाई आज भी कई घरों में नई मां को खिलाई जाती है। हालांकि आधुनिक दौर में स्वास्थ्य और पोषण को लेकर जागरूकता बढ़ी है, लेकिन गोंद के लड्डू की लोकप्रियता कम नहीं हुई है। सवाल यह है कि आखिर इस परंपरा के पीछे वास्तविक वजह क्या है और क्या इसके लाभ वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी समझे जा सकते हैं?

गोंद क्या होता है?

गोंद एक प्राकृतिक रेज़िन होता है जो कुछ विशेष पेड़ों से प्राप्त किया जाता है। भारत में खाने योग्य गोंद का उपयोग लंबे समय से पारंपरिक व्यंजनों और आयुर्वेदिक तैयारियों में किया जाता रहा है। इसे घी में भूनकर विभिन्न मेवों, सूखे फलों और आटे के साथ मिलाकर लड्डू तैयार किए जाते हैं। पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि गोंद स्वयं ऊर्जा का स्रोत माना जाता है, जबकि इसके साथ मिलाए जाने वाले बादाम, काजू, अखरोट, नारियल और घी इसके पोषण मूल्य को और बढ़ा देते हैं।

प्रसव के बाद शरीर को अतिरिक्त ऊर्जा की जरूरत

डिलीवरी के दौरान महिला के शरीर को शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ता है। प्रसव के बाद रिकवरी की प्रक्रिया कई सप्ताह या महीनों तक चल सकती है। इस दौरान शरीर को अतिरिक्त ऊर्जा और पोषण की आवश्यकता होती है।
गोंद के लड्डू में मौजूद घी, मेवे और अन्य सामग्री कैलोरी तथा पोषक तत्व प्रदान करते हैं। पारंपरिक मान्यता के अनुसार यह शरीर की कमजोरी को कम करने और ऊर्जा स्तर बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं। यही कारण है कि कई परिवारों में प्रसव के शुरुआती दिनों से ही इन्हें आहार में शामिल किया जाता है।

क्या मांसपेशियों और हड्डियों को मिलता है सहारा?

डिलीवरी के बाद महिलाओं के शरीर में कई शारीरिक बदलाव होते हैं। कुछ महिलाओं को पीठ दर्द, जोड़ों में कमजोरी और थकान की शिकायत भी रहती है। गोंद के लड्डू में उपयोग किए जाने वाले मेवे, बीज और घी शरीर को आवश्यक फैटी एसिड, खनिज और सूक्ष्म पोषक तत्व प्रदान कर सकते हैं।हालांकि यह कहना वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं होगा कि केवल गोंद के लड्डू ही हड्डियों या मांसपेशियों को मजबूत बना देते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि संतुलित आहार, पर्याप्त प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन और चिकित्सकीय सलाह के साथ ही बेहतर रिकवरी संभव है।

स्तनपान और पारंपरिक मान्यताएं

भारतीय परिवारों में यह धारणा भी प्रचलित है कि गोंद के लड्डू स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए लाभकारी होते हैं। कई क्षेत्रों में इन्हें दूध बढ़ाने वाले पारंपरिक खाद्य पदार्थों की श्रेणी में रखा जाता है। हालांकि इस दावे पर उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं। पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि पर्याप्त तरल पदार्थ, संतुलित भोजन और नियमित स्तनपान ही दूध उत्पादन को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक हैं। इसलिए गोंद के लड्डू को चमत्कारी समाधान के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

परंपरा और विज्ञान के बीच संतुलन

भारत में कई पारंपरिक खाद्य पदार्थ पीढ़ियों के अनुभव पर आधारित हैं। गोंद के लड्डू भी इसी विरासत का हिस्सा हैं। इनमें उपयोग होने वाली सामग्री पोषण प्रदान कर सकती है, लेकिन इनके लाभ व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति, उम्र, वजन और आहार शैली पर भी निर्भर करते हैं। कुछ विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि अत्यधिक मात्रा में सेवन करने से अतिरिक्त कैलोरी शरीर में जमा हो सकती है। विशेष रूप से उन महिलाओं को सावधानी बरतनी चाहिए जिन्हें मधुमेह, मोटापा या अन्य मेटाबॉलिक समस्याएं हों।

क्या सभी महिलाओं के लिए उपयुक्त हैं गोंद के लड्डू?

इस प्रश्न का उत्तर पूरी तरह “हां” या “नहीं” में नहीं दिया जा सकता। हर महिला का शरीर अलग होता है और प्रसव के बाद उसकी स्वास्थ्य आवश्यकताएं भी अलग हो सकती हैं। कुछ महिलाओं को अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जबकि कुछ को नियंत्रित कैलोरी वाला आहार दिया जाता है। डॉक्टर और डाइटिशियन आमतौर पर सलाह देते हैं कि प्रसव के बाद किसी भी पारंपरिक खाद्य पदार्थ को नियमित रूप से लेने से पहले व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखा जाए। विशेषकर यदि महिला को कोई पुरानी बीमारी हो तो विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर माना जाता है।

बदलती जीवनशैली और नई सोच

आज की जीवनशैली पहले की तुलना में काफी अलग है। पहले महिलाओं की शारीरिक गतिविधियां अधिक होती थीं, जबकि अब कई लोग अपेक्षाकृत कम सक्रिय जीवनशैली अपनाते हैं। ऐसे में पारंपरिक आहारों की मात्रा और सेवन का तरीका भी समय के अनुसार बदलना जरूरी हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि परंपरा को पूरी तरह छोड़ना आवश्यक नहीं है, लेकिन उसे आधुनिक पोषण विज्ञान के साथ संतुलित करना अधिक समझदारी भरा कदम होगा।

गोंद के लड्डू क्यों बने हुए हैं भरोसे का हिस्सा?

गोंद के लड्डू केवल एक खाद्य पदार्थ नहीं, बल्कि भारतीय पारिवारिक संस्कृति का हिस्सा भी हैं। यह नई मां के प्रति देखभाल, स्नेह और समर्थन का प्रतीक माने जाते हैं। परिवार की महिलाएं अक्सर इन्हें स्वयं तैयार करती हैं और प्रसव के बाद मां को विशेष रूप से खिलाती हैं। यही सामाजिक और भावनात्मक जुड़ाव इस परंपरा को आज भी जीवित रखे हुए है। हालांकि स्वास्थ्य संबंधी निर्णय हमेशा वैज्ञानिक जानकारी और चिकित्सकीय सलाह के आधार पर लिए जाने चाहिए।

निष्कर्ष

गोंद के लड्डू डिलीवरी के बाद महिलाओं को दिए जाने वाले सबसे लोकप्रिय पारंपरिक खाद्य पदार्थों में शामिल हैं। इनमें मौजूद घी, मेवे और अन्य सामग्री शरीर को ऊर्जा और पोषण प्रदान कर सकती हैं, जिससे रिकवरी प्रक्रिया को सहारा मिल सकता है। हालांकि इनके लाभों को लेकर कई दावे परंपरागत अनुभवों पर आधारित हैं और हर महिला के लिए परिणाम समान नहीं होते। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रसव के बाद संतुलित आहार, पर्याप्त आराम, चिकित्सकीय देखभाल और पोषण संबंधी सही मार्गदर्शन सबसे महत्वपूर्ण है। गोंद के लड्डू इस देखभाल का एक हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन संपूर्ण समाधान नहीं।

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Neelam Saini

Neelam Saini

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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