वैज्ञानिकों के अनुसार 2026 में El Niño मौसम चक्र काफी मजबूत हो सकता है। इससे वैश्विक तापमान, वर्षा के पैटर्न, कृषि, जल संसाधनों और प्राकृतिक आपदाओं पर असर पड़ सकता है। भारत में भी मानसून की स्थिति पर इसकी निगरानी की जा रही है।
📍 Location: Global
📰 Date: 15 जुलाई 2026
✍️ Apurva Choudhary
El Niño 2026 को लेकर वैज्ञानिकों की बढ़ी चिंता
दुनिया भर के जलवायु वैज्ञानिक 2026 में संभावित रूप से मजबूत El Niño की स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। प्रारंभिक आकलनों के अनुसार यदि यह मौसम चक्र और मजबूत होता है, तो कई देशों में तापमान, वर्षा और चरम मौसम की घटनाओं में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
क्या होता है El Niño?
El Niño एक प्राकृतिक जलवायु प्रक्रिया है, जिसमें प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र का समुद्री सतही तापमान सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इसका प्रभाव केवल समुद्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह वायुमंडलीय परिसंचरण को भी प्रभावित करता है, जिससे दुनिया के विभिन्न हिस्सों में मौसम का स्वरूप बदल सकता है।
वैज्ञानिक क्यों हैं चिंतित?
World Meteorological Organization (WMO) और अन्य जलवायु संस्थानों के अनुसार समुद्री तापमान में लगातार हो रही वृद्धि इस बात का संकेत दे रही है कि El Niño अपेक्षा से अधिक प्रभावशाली हो सकता है। हालांकि इसकी वास्तविक तीव्रता आने वाले महीनों में स्पष्ट होगी, लेकिन मौसम विशेषज्ञ लगातार निगरानी कर रहे हैं।
दुनिया पर संभावित प्रभाव
मजबूत El Niño के दौरान कई क्षेत्रों में अत्यधिक गर्मी, लंबे सूखे और कहीं-कहीं सामान्य से अधिक वर्षा की स्थिति बन सकती है। कुछ इलाकों में बाढ़ और चक्रवाती गतिविधियों के स्वरूप में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। ऐसे मौसम परिवर्तन कृषि उत्पादन, जल संसाधनों और खाद्य सुरक्षा को प्रभावित कर सकते हैं।
भारत के लिए क्या मायने हैं?
भारत में El Niño का असर अक्सर दक्षिण-पश्चिम मानसून से जोड़ा जाता है। मजबूत El Niño के दौरान मानसून की बारिश सामान्य से कम या असमान रूप से वितरित हो सकती है। हालांकि भारतीय मौसम पर Indian Ocean Dipole (IOD), हिमालयी परिस्थितियों और अन्य स्थानीय कारकों का भी महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। इसलिए केवल El Niño के आधार पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
कैसे होती है निगरानी?
NASA, WMO और अन्य वैज्ञानिक संस्थान उपग्रहों, समुद्री बुआ (Buoys), समुद्री तापमान मापने वाले उपकरणों और कंप्यूटर मॉडल की सहायता से प्रशांत महासागर की लगातार निगरानी कर रहे हैं। इन आंकड़ों के आधार पर मौसम पूर्वानुमान तैयार किए जाते हैं और संभावित जोखिमों का आकलन किया जाता है।
क्या करनी होगी तैयारी?
विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते चेतावनी प्रणाली को मजबूत करना, जल प्रबंधन, कृषि योजनाओं में बदलाव और आपदा प्रबंधन की बेहतर तैयारी संभावित प्रभावों को काफी हद तक कम कर सकती है।
El Niño 2026 केवल एक मौसम संबंधी घटना नहीं, बल्कि वैश्विक जलवायु, कृषि, अर्थव्यवस्था और मानव जीवन को प्रभावित करने वाला महत्वपूर्ण कारक बन सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि लगातार निगरानी और समय पर तैयारी से इसके संभावित प्रभावों को कम किया जा सकता है।