राज्यसभा में FCI के अधिशेष चावल को इथेनॉल उत्पादन के लिए उपलब्ध कराने की नीति पर चर्चा हुई। विपक्ष ने खाद्य सुरक्षा और गरीबों के अधिकारों को लेकर सवाल उठाए, जबकि सरकार ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली और बफर स्टॉक की जरूरतें पूरी होने के बाद ही अतिरिक्त चावल इथेनॉल संयंत्रों को दिया जाता है।
📍 Location: नई दिल्ली
📰 Date: 29 जुलाई 2026
✍️ Byline: Apurva Choudhary
FCI चावल और इथेनॉल नीति पर राज्यसभा में गरमाई बहस
राज्यसभा में बुधवार को भारतीय खाद्य निगम (FCI) के चावल को इथेनॉल उत्पादन के लिए उपलब्ध कराने की नीति पर विस्तृत चर्चा हुई। विपक्षी सांसदों ने सरकार से पूछा कि जब देश में खाद्य सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है, तब सार्वजनिक भंडार के चावल का उपयोग इथेनॉल उत्पादन के लिए क्यों किया जा रहा है।
सरकार ने इन सवालों का जवाब देते हुए कहा कि केवल अधिशेष (Surplus) स्टॉक का ही उपयोग किया जाता है और इससे गरीबों के लिए चलने वाली सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) या राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम पर कोई असर नहीं पड़ता।
सरकार ने क्या कहा?
सरकार ने सदन में स्पष्ट किया कि FCI के चावल की बिक्री केवल तब की जाती है जब बफर स्टॉक और PDS की सभी आवश्यकताओं को पूरा कर लिया जाता है। इसके बाद बचा हुआ अधिशेष स्टॉक ही इथेनॉल संयंत्रों को उपलब्ध कराया जाता है।
सरकार के अनुसार, यह कदम देश में इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम (Ethanol Blending Programme) को गति देने, पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
OMSS नीति के तहत होगा आवंटन
सरकार ने बताया कि Open Market Sale Scheme (OMSS) के तहत वर्ष 2026-27 की नीति के अनुसार पात्र इथेनॉल संयंत्रों को निर्धारित आरक्षित मूल्य पर FCI का अधिशेष चावल उपलब्ध कराया जा रहा है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि आवंटन की मात्रा स्थायी नहीं है, बल्कि उपलब्ध स्टॉक और समय-समय पर की जाने वाली सरकारी समीक्षा के आधार पर तय की जाती है।
विपक्ष ने उठाए खाद्य सुरक्षा के मुद्दे
विपक्षी सांसदों ने कहा कि देश में करोड़ों लोग सरकारी राशन प्रणाली पर निर्भर हैं। ऐसे में खाद्यान्न का प्राथमिक उपयोग गरीबों और जरूरतमंदों के लिए होना चाहिए। उन्होंने सरकार से इस नीति पर पुनर्विचार करने और खाद्य सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की मांग की।
कुछ सांसदों ने यह भी कहा कि यदि भविष्य में उत्पादन प्रभावित होता है तो ऐसी नीति से सार्वजनिक भंडार पर दबाव बढ़ सकता है।
सरकार का भरोसा
सरकार ने विपक्ष की चिंताओं को खारिज करते हुए कहा कि खाद्य सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। सभी निर्णय वैज्ञानिक स्टॉक आकलन, बफर नॉर्म्स और सार्वजनिक वितरण प्रणाली की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं।
सरकार ने दोहराया कि इथेनॉल नीति और खाद्य सुरक्षा दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है।
आगे क्या?
FCI के चावल और इथेनॉल नीति को लेकर संसद में आगे भी चर्चा जारी रह सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना आने वाले वर्षों में सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण नीति चुनौती बना रहेगा।