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ईरान की एयरलाइंस पर ग्लोबल शिकंजा, अमेरिका ने सहयोगी देशों को भी दी चेतावनी
Harish Qureshi
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2026-09-22 12:30:29
अमेरिका ने ईरान की एयरलाइंस के खिलाफ प्रतिबंध कड़े किए हैं। 23 सितंबर से विदेशी एयरपोर्ट, ईंधन और ग्राउंड सर्विस कंपनियों पर भी कार्रवाई का जोखिम बढ़ गया है।
वॉशिंगटन/तेहरान | 22 सितंबर 2026
By Mohd Haris
23 सितंबर की डेडलाइन से क्यों मचा हड़कंप?
ईरान की एविएशन इंडस्ट्री पर अमेरिका का दबाव अब नए चरण में पहुंच गया है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि 23 सितंबर से ईरानी एयरलाइंस को दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय संचालन से बाहर करने की दिशा में अमेरिकी प्रतिबंध लागू होंगे।
बेसेंट ने 21 सितंबर को CNBC से बातचीत में कहा कि अगर ईरानी एयरलाइंस विदेशी एयरपोर्ट पर उतरती हैं, तो उन्हें ईंधन, लैंडिंग सर्विस या टिकटिंग जैसी सेवाएं देने वाली कंपनियां अमेरिकी कार्रवाई के जोखिम में होंगी। उन्होंने डॉलर सिस्टम से बाहर किए जाने की चेतावनी भी दी।
लेकिन एक अहम तथ्य स्पष्ट है। अमेरिका ने दुनिया के सभी देशों के एयरस्पेस को ईरानी विमानों के लिए सीधे बंद करने का आदेश नहीं दिया है। मौजूदा कदम अमेरिकी प्रतिबंध व्यवस्था और विदेशी कंपनियों पर सेकेंडरी सैंक्शंस के दबाव से जुड़ा है।
अमेरिका ने 8 सितंबर को क्या किया था?
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने 8 सितंबर 2026 को ईरान की एविएशन इंडस्ट्री के खिलाफ बड़ा प्रतिबंध पैकेज घोषित किया।
OFAC ने 36 संस्थाओं और व्यक्तियों को निशाना बनाया। इनमें ईरान की 27 एयरलाइंस भी शामिल हैं। अमेरिकी ट्रेजरी का आरोप है कि ईरानी एविएशन नेटवर्क का इस्तेमाल हथियारों, सैन्य कर्मियों और प्रतिबंधित सामान की आवाजाही में किया जाता है।
अमेरिकी सरकार ने विदेशी कंपनियों को भी चेतावनी दी है कि प्रतिबंधित ईरानी एयरलाइंस को विमान, कार्गो, ग्राउंड सर्विस, जनरल सेल्स एजेंट और दूसरे सपोर्ट देने पर उन्हें अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है।
यानी दबाव केवल तेहरान की एयरलाइंस पर नहीं है। अमेरिका उस पूरे सपोर्ट नेटवर्क को निशाना बना रहा है जिसके बिना अंतरराष्ट्रीय उड़ान संचालन मुश्किल हो जाता है।
क्या 23 सितंबर से ईरान की सभी फ्लाइट बंद हो जाएंगी?
इस दावे को थोड़ा सावधानी से समझना जरूरी है।
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव ने कहा है कि 23 सितंबर से सभी ईरानी एयरलाइंस को दुनिया भर में बंद करने की दिशा में कदम उठाया जाएगा। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि 23 सितंबर को हर देश में ईरानी विमान के लिए एयरस्पेस अपने आप बंद हो जाएगा।
असल दबाव एयरपोर्ट, फ्यूल सप्लायर, ग्राउंड हैंडलर, टिकटिंग एजेंट और वित्तीय संस्थानों पर है।
अगर ये कंपनियां अमेरिकी प्रतिबंधों के डर से ईरानी एयरलाइंस को सेवाएं देना बंद करती हैं, तो ईरानी विमानों के लिए विदेशों में नियमित कॉमर्शियल ऑपरेशन जारी रखना मुश्किल हो जाएगा।
यही वजह है कि मौजूदा स्थिति को “ईरान की सभी उड़ानें दुनिया भर में कानूनी तौर पर बंद” कहने के बजाय “ईरानी एयरलाइंस के अंतरराष्ट्रीय संचालन पर अमेरिकी प्रतिबंधों का गंभीर दबाव” कहना अधिक सटीक है।
अमेरिका की धमकी किन देशों और कंपनियों के लिए है?
बेसेंट की चेतावनी का दायरा केवल ईरानी एयरलाइंस तक सीमित नहीं है।
अमेरिकी प्रशासन उन विदेशी कंपनियों पर कार्रवाई की बात कर रहा है जो प्रतिबंधित ईरानी एयरलाइंस को सेवाएं देती हैं। इनमें एयरपोर्ट सर्विस, फ्यूल, लैंडिंग सर्विस, टिकटिंग और अन्य एविएशन सपोर्ट शामिल हैं।
अमेरिकी नीति का प्रमुख हथियार डॉलर आधारित वैश्विक वित्तीय सिस्टम तक पहुंच है।
यही कारण है कि किसी विदेशी कंपनी के लिए ईरान की एयरलाइंस को सेवा देना केवल एक एविएशन कारोबारी फैसला नहीं रह जाता। उसे अमेरिकी प्रतिबंधों और अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग संबंधों के जोखिम का भी आकलन करना पड़ता है।
कुछ देशों में असर पहले ही दिखने लगा
अमेरिकी दबाव के बीच कुछ देशों ने ईरानी एयरलाइंस की सेवाओं को सीमित करना शुरू कर दिया है।
इराक ने 22 सितंबर से प्रतिबंधित ईरानी एयरलाइंस की उड़ानों को रोकने का फैसला किया है। इराकी अधिकारियों ने अमेरिकी ट्रेजरी के फैसले के अनुरूप कार्रवाई की बात कही है और प्रतिबंधों का पालन न करने वाले देशों के लिए अमेरिकी कार्रवाई के जोखिम का उल्लेख किया है।
इराक ईरान के लिए खास महत्व रखता है क्योंकि बड़ी संख्या में ईरानी यात्री नजफ और करबला जैसे धार्मिक स्थलों की यात्रा करते हैं। ऐसे में उड़ानों पर असर धार्मिक यात्रियों और परिवारों दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।
तुर्की से जुड़ी स्थिति भी तेजी से बदली है। Turkish Airlines ने ईरान के लिए अपनी उड़ानें कम से कम मार्च 2027 तक न चलाने की जानकारी दी है।
Mahan Air पर पहले से दबाव
ईरान की Mahan Air अमेरिकी प्रतिबंधों के केंद्र में पहले से रही है।
सितंबर की नई कार्रवाई में अमेरिकी ट्रेजरी ने उसके सपोर्ट नेटवर्क से जुड़े विदेशी संस्थानों को भी निशाना बनाया। Financial Times के अनुसार Mahan Air ने इस्तांबुल, अंकारा और मस्कट से जुड़ी कुछ अंतरराष्ट्रीय सेवाएं रोक दी हैं।
अमेरिका का आरोप है कि Mahan Air ने ईरानी सैन्य और IRGC से जुड़े लॉजिस्टिक नेटवर्क में भूमिका निभाई है। Mahan Air इन अमेरिकी आरोपों को स्वीकार नहीं करती।
भारत पर क्या असर पड़ सकता है?
भारत के लिए यह मुद्दा खास महत्व रखता है क्योंकि अमेरिकी प्रतिबंधों में पहले भारत से जुड़ी एक कंपनी का नाम भी सामने आ चुका है।
रिपोर्ट के अनुसार जुलाई 2026 में अमेरिकी ट्रेजरी ने Mahan Air के कथित जनरल सेल्स एजेंट के तौर पर काम करने वाली भारत स्थित Skiez Travels and Logistics Private Limited को प्रतिबंधित किया था।
लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि भारत के सभी एयरपोर्ट या भारतीय एयरलाइंस ईरानी विमानों की सेवा बंद कर चुके हैं।
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार 23 सितंबर की नई अमेरिकी चेतावनी के बाद भारत में ईरानी उड़ानों पर कोई अलग से नया व्यापक सरकारी प्रतिबंध घोषित होने की पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए इस स्तर पर “भारत से ईरान की सभी उड़ानें बंद” कहना तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं होगा।
ईरान के यात्रियों के लिए क्या बदलेगा?
ईरान से बाहर यात्रा पहले ही मुश्किल हो चुकी है।
ईरान इंटरनेशनल के अनुसार Turkish Airlines, Emirates, Lufthansa और Austrian Airlines जैसी प्रमुख एयरलाइंस की ईरान से जुड़ी सेवाओं में बड़े व्यवधान हैं। Qatar Airways की ईरान सेवाएं भी एयरस्पेस प्रतिबंधों के कारण प्रभावित हैं।
इसका मतलब यह है कि यात्रियों के पास सीधे अंतरराष्ट्रीय हवाई मार्गों के विकल्प कम होते जा रहे हैं।
कुछ यात्री पड़ोसी देशों तक विमान से पहुंचकर वहां से सड़क मार्ग के जरिए ईरान जाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन यह लंबा, महंगा और अनिश्चित विकल्प है।
अमेरिकी प्रतिबंधों का व्यापक मकसद क्या है?
वॉशिंगटन की मौजूदा रणनीति ईरान की अर्थव्यवस्था और उससे जुड़े सपोर्ट नेटवर्क को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था से अलग करने पर केंद्रित है।
8 सितंबर के ट्रेजरी फैसले में एविएशन सेक्टर के साथ विदेशी मध्यस्थों और सप्लाई नेटवर्क को भी निशाना बनाया गया। अमेरिकी सरकार का कहना है कि इससे ईरान की सैन्य और आर्थिक क्षमता को समर्थन देने वाले नेटवर्क पर दबाव बढ़ेगा।
यह नीति केवल एविएशन तक सीमित नहीं है। ईरान से जुड़े ऊर्जा, शिपिंग, टेक्नोलॉजी, वित्त और अन्य क्षेत्रों में भी अमेरिकी सेकेंडरी सैंक्शंस लागू हैं।
ईरान की एविएशन इंडस्ट्री पहले से संकट में
ईरान की विमानन व्यवस्था वर्षों से अमेरिकी प्रतिबंधों के दबाव में है।
अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरानी एयरलाइंस को नए विमान, स्पेयर पार्ट्स और मेंटेनेंस सपोर्ट हासिल करने में कठिनाई रही है। नई कार्रवाई से विदेशी ग्राउंड सर्विस, ईंधन और वित्तीय नेटवर्क पर भी दबाव बढ़ रहा है।
इसका असर केवल एयरलाइंस के कारोबार पर नहीं पड़ेगा। विदेशी यात्रा, पर्यटन, पारिवारिक आवाजाही, मेडिकल ट्रैवल और धार्मिक यात्राओं पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।
आगे क्या होगा?
23 सितंबर के बाद असली तस्वीर इस बात से सामने आएगी कि अलग-अलग देश और विदेशी सेवा प्रदाता अमेरिकी चेतावनी पर कितना अमल करते हैं।
सबसे अहम सवाल एयरपोर्ट सर्विस, फ्यूलिंग, ग्राउंड हैंडलिंग और टिकटिंग कंपनियों के फैसले होंगे।
अगर बड़ी संख्या में कंपनियां ईरानी एयरलाइंस को सेवाएं देने से पीछे हटती हैं, तो अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का नेटवर्क और छोटा हो सकता है।
दूसरी तरफ, कुछ देश अमेरिकी प्रतिबंधों की अपनी व्याख्या के आधार पर अलग नीति अपना सकते हैं। इसलिए 23 सितंबर को एक ही झटके में दुनिया के हर देश में सभी ईरानी उड़ानों के बंद होने की तस्वीर मान लेना सही नहीं होगा।
निष्कर्ष
23 सितंबर की तारीख ईरान की एविएशन इंडस्ट्री के लिए अहम है। अमेरिका ने ईरान की एयरलाइंस और उनके सपोर्ट नेटवर्क पर प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाया है और विदेशी कंपनियों को अमेरिकी वित्तीय सिस्टम से बाहर किए जाने का जोखिम बताया है।
इसका असर कुछ जगहों पर पहले ही दिखने लगा है। इराक ने ईरानी एयरलाइंस पर रोक लगाने का फैसला किया है, जबकि कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ईरान की सेवाएं निलंबित कर चुकी हैं।
फिर भी “दुनियाभर में ईरान की सभी फ्लाइटें सीधे बंद” कहना मौजूदा स्थिति का पूरा और सटीक वर्णन नहीं है। मुख्य बात यह है कि अमेरिका विदेशी एयरपोर्ट और सेवा प्रदाताओं पर सेकेंडरी सैंक्शंस के जरिए दबाव बना रहा है। अब देखना होगा कि 23 सितंबर के बाद कितने देश और कंपनियां इस दबाव के आगे अपनी सेवाएं सीमित करती हैं।
Harish Qureshi
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।