ग्रीन टी और ब्लैक टी दोनों में पॉलीफेनॉल जैसे प्राकृतिक यौगिक पाए जाते हैं। शोधों में दोनों का हृदय स्वास्थ्य से संभावित संबंध सामने आया है, लेकिन किसी एक को हर व्यक्ति के लिए बेहतर कहना उचित नहीं है।
चाय भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों में रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है। कुछ लोग सुबह या दिन की शुरुआत ग्रीन टी से करते हैं, तो कई लोगों के लिए ब्लैक टी पसंदीदा पेय है। ऐसे में अक्सर सवाल उठता है कि आखिर सेहत के लिहाज से ग्रीन टी और ब्लैक टी में से कौन-सी बेहतर है।वैज्ञानिक शोधों में दोनों तरह की चाय को स्वास्थ्य के कुछ पहलुओं से जोड़ा गया है। हालांकि, उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि एक चाय हर व्यक्ति के लिए दूसरी से बेहतर है। दोनों में मौजूद प्राकृतिक यौगिक, सेवन की मात्रा और व्यक्ति की अपनी स्वास्थ्य स्थिति महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
ग्रीन टी में क्या खास होता है?
ग्रीन टी चाय की पत्तियों से ही तैयार होती है, लेकिन इसके प्रसंस्करण के दौरान ऑक्सीकरण अपेक्षाकृत कम होता है। इसके कारण इसमें कैटेचिन जैसे पॉलीफेनॉल मौजूद रहते हैं। कई अध्ययनों में ग्रीन टी के सेवन और हृदय संबंधी स्वास्थ्य के बीच संभावित सकारात्मक संबंध देखा गया है। एक व्यवस्थित समीक्षा और मेटा-विश्लेषण में ग्रीन टी के सेवन और कोरोनरी हृदय रोग के जोखिम के बीच संबंध का अध्ययन किया गया। इसमें कम से मध्यम मात्रा में ग्रीन टी पीने वालों में कोरोनरी हृदय रोग के कम जोखिम का संबंध देखा गया, हालांकि शोधकर्ताओं ने यह भी कहा कि निश्चित निष्कर्ष के लिए अतिरिक्त अध्ययन जरूरी हैं। ग्रीन टी में मौजूद पॉलीफेनॉल को इसके संभावित स्वास्थ्य प्रभावों का एक महत्वपूर्ण कारण माना जाता है। हालांकि, ग्रीन टी को किसी बीमारी की दवा या इलाज समझना उचित नहीं है।
ब्लैक टी क्यों है खास?
ब्लैक टी भी उसी चाय के पौधे की पत्तियों से बनती है, लेकिन इसके निर्माण में अधिक ऑक्सीकरण होता है। इस प्रक्रिया से इसके स्वाद, रंग और उसमें मौजूद कुछ पॉलीफेनॉल यौगिकों की संरचना बदल जाती है। ब्लैक टी पर हुए शोधों में भी हृदय स्वास्थ्य से जुड़े संभावित लाभों की बात सामने आई है। वर्ष दो हजार छब्बीस में प्रकाशित एक मेटा-विश्लेषण में करीब नौ लाख अट्ठावन हजार प्रतिभागियों से संबंधित चौदह अध्ययनों का विश्लेषण किया गया। इसमें अधिक ब्लैक टी सेवन और कोरोनरी हृदय रोग के कम जोखिम के बीच संबंध पाया गया, हालांकि यह मुख्यतः अवलोकनात्मक अध्ययनों पर आधारित निष्कर्ष है। इसका मतलब यह नहीं है कि ज्यादा ब्लैक टी पीने से हृदय रोग से बचाव निश्चित रूप से हो जाएगा। किसी भी पोषण संबंधी अध्ययन में ऐसे संबंधों को सावधानी से समझना जरूरी है।
दोनों चाय में क्या समानता है?
ग्रीन टी और ब्लैक टी दोनों ही चाय के पौधे से तैयार होती हैं और दोनों में पॉलीफेनॉल सहित कई प्राकृतिक यौगिक पाए जाते हैं। शोधों में सामान्य रूप से चाय के सेवन और हृदय संबंधी स्वास्थ्य के बीच संभावित संबंध देखा गया है। एक बड़े व्यवस्थित समीक्षा और मेटा-विश्लेषण में चाय के सेवन से हृदय रोग संबंधी घटनाओं और मृत्यु के जोखिम में कमी के बीच संबंध पाया गया था। हालांकि, शोधकर्ताओं ने प्रमाण की गुणवत्ता को सभी परिणामों के लिए समान रूप से मजबूत नहीं माना। यानी चाय को संतुलित खान-पान और स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा माना जा सकता है, लेकिन इसे स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव की गारंटी नहीं समझना चाहिए।
क्या ग्रीन टी वजन कम करती है?
ग्रीन टी को अक्सर वजन घटाने से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन केवल ग्रीन टी पीने को वजन कम करने का निश्चित उपाय मानना वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं है।वजन पर वास्तविक प्रभाव के लिए भोजन की कुल गुणवत्ता, कैलोरी सेवन, शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और जीवनशैली जैसे कई कारक महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए वजन कम करने की कोशिश कर रहे व्यक्ति को केवल चाय पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।
क्या ब्लैक टी हृदय के लिए फायदेमंद है?
कुछ शोधों में ब्लैक टी के सेवन और कोरोनरी हृदय रोग के कम जोखिम के बीच संबंध सामने आया है। एक हालिया मेटा-विश्लेषण में सबसे अधिक ब्लैक टी सेवन वाले समूह में कोरोनरी हृदय रोग के जोखिम में कमी का संबंध पाया गया। हालांकि, अध्ययन स्वयं यह दिखाता है कि परिणामों में अलग-अलग क्षेत्रों के अनुसार अंतर भी था। इसलिए ब्लैक टी को हृदय रोग की रोकथाम की दवा कहना सही नहीं होगा।
ग्रीन टी और ब्लैक टी में किसे चुनें?
अगर सवाल यह है कि दोनों में से कौन-सी चाय ज्यादा फायदेमंद है, तो इसका कोई एक सार्वभौमिक जवाब नहीं है।ग्रीन टी में कैटेचिन जैसे यौगिकों की मौजूदगी और कुछ शोधों में हृदय स्वास्थ्य से जुड़े सकारात्मक संबंध इसे एक अच्छा विकल्प बनाते हैं। दूसरी ओर, ब्लैक टी पर भी हृदय स्वास्थ्य से संबंधित सकारात्मक शोध उपलब्ध हैं। इसलिए व्यक्ति अपनी पसंद, सहनशीलता और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार दोनों में से किसी का चुनाव कर सकता है।
चाय पीते समय किन बातों का रखें ध्यान?
चाय का फायदा केवल इस बात पर निर्भर नहीं करता कि वह ग्रीन है या ब्लैक। उसमें डाली जाने वाली चीनी, दूध और सेवन की कुल मात्रा भी महत्वपूर्ण है। बहुत ज्यादा चीनी वाली चाय को नियमित रूप से पीना संतुलित आहार का हिस्सा नहीं माना जा सकता। इसी तरह अत्यधिक चाय पीने की आदत भी उचित नहीं है। चाय में कैफीन होता है। इसलिए जिन लोगों को कैफीन से परेशानी होती है, नींद प्रभावित होती है या डॉक्टर ने कैफीन सीमित करने की सलाह दी है, उन्हें अपने सेवन पर ध्यान देना चाहिए।
क्या ज्यादा चाय पीना ज्यादा फायदा देगा?
ऐसा मानना सही नहीं है कि किसी खाद्य या पेय की मात्रा बढ़ाने से उसका फायदा भी उसी अनुपात में बढ़ जाएगा। चाय के सेवन पर हुए अध्ययनों में अलग-अलग परिणाम मिले हैं और कई निष्कर्ष अवलोकनात्मक अध्ययनों से आए हैं। एक मेटा-विश्लेषण में ग्रीन टी के लिए कम से मध्यम सेवन पर कोरोनरी हृदय रोग के कम जोखिम का संबंध अधिक स्पष्ट दिखा, जबकि ब्लैक टी के लिए सेवन की मात्रा और जोखिम के बीच संबंध रैखिक नहीं था। इसलिए संतुलित मात्रा और व्यक्ति की अपनी जरूरत को प्राथमिकता देना ज्यादा उचित है।
खाली पेट चाय पीना कितना सही?
ग्रीन टी हो या ब्लैक टी, अगर किसी व्यक्ति को खाली पेट चाय पीने से पेट में जलन, बेचैनी या अन्य परेशानी होती है तो उसे खाली पेट लेने से बचना चाहिए। चाय पीने का सही समय व्यक्ति की दिनचर्या और सहनशीलता पर निर्भर करता है। इसी तरह देर शाम या रात में कैफीन वाली चाय लेने से कुछ लोगों की नींद प्रभावित हो सकती है।
विशेषज्ञों की राय को कैसे समझें?
चाय को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे दिखाई देते हैं—जैसे चाय शरीर को पूरी तरह डिटॉक्स करती है, वजन तेजी से घटाती है या कई बीमारियों को रोक देती है। ऐसे दावों को बिना वैज्ञानिक प्रमाण के सच नहीं मानना चाहिए। उपलब्ध वैज्ञानिक साहित्य में ग्रीन और ब्लैक टी दोनों के संभावित स्वास्थ्य लाभों के संकेत मिलते हैं, लेकिन लंबे समय के स्वास्थ्य परिणामों पर मजबूत निष्कर्ष निकालने के लिए बेहतर गुणवत्ता वाले शोध अभी भी महत्वपूर्ण हैं। कुछ नियंत्रित अध्ययनों की समीक्षा में चाय पीने से रक्तचाप और रक्त में वसा पर स्पष्ट प्रभाव नहीं मिला, जिससे यह भी पता चलता है कि सभी शोधों के परिणाम एक जैसे नहीं हैं।
निष्कर्ष
ग्रीन टी और ब्लैक टी दोनों को संतुलित आहार का हिस्सा बनाया जा सकता है। उपलब्ध शोधों में दोनों के सेवन और हृदय स्वास्थ्य के बीच संभावित सकारात्मक संबंध सामने आए हैं, लेकिन किसी एक को सभी लोगों के लिए निश्चित रूप से ज्यादा फायदेमंद कहना उचित नहीं होगा। अगर चाय में बहुत अधिक चीनी न हो और उसका सेवन व्यक्ति की कैफीन सहनशीलता तथा स्वास्थ्य स्थिति के अनुरूप हो, तो ग्रीन टी या ब्लैक टी में से पसंद के अनुसार चुनाव किया जा सकता है। वहीं, किसी बीमारी, गर्भावस्था, दवा के सेवन या कैफीन संबंधी समस्या की स्थिति में डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।