फाइबर शरीर के लिए क्यों जरूरी है?
नई दिल्ली। हमारी रोज की थाली में रोटी, चावल, दाल, सब्जी और फल जैसी कई चीजें शामिल होती हैं, लेकिन भोजन की गुणवत्ता सिर्फ कैलोरी, प्रोटीन या वसा से तय नहीं होती। आहार फाइबर भी स्वस्थ खानपान का एक अहम हिस्सा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक १० वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को भोजन से रोजाना कम से कम २५ ग्राम प्राकृतिक आहार फाइबर लेने का लक्ष्य रखना चाहिए।
फाइबर पौधों से मिलने वाला ऐसा घटक है जिसे शरीर पूरी तरह पचा नहीं पाता। यह आंतों की सामान्य कार्यप्रणाली में मदद करता है और अलग-अलग प्रकार के फाइबर शरीर में अलग भूमिका निभाते हैं।आज के समय में जब रिफाइंड अनाज, पैकेज्ड स्नैक्स और अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का इस्तेमाल बढ़ा है, वहीं साबुत अनाज, दालों, फल और सब्जियों का पर्याप्त सेवन कम हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी स्वस्थ आहार के लिए साबुत अनाज, फल, सब्जियों और दालों को प्रमुख स्रोतों के रूप में शामिल करने की सलाह देता है।
फाइबर की कमी से सबसे पहले पाचन प्रभावित हो सकता है
फाइबर की पर्याप्त मात्रा नहीं मिलने पर सबसे आम परेशानी कब्ज हो सकती है। फाइबर मल को अधिक मात्रा देने और आंतों के सामान्य कामकाज को बनाए रखने में मदद करता है।खास तौर पर फल, सब्जियां, दालें और साबुत अनाज जैसे खाद्य पदार्थ रोज के भोजन में शामिल करने से आहार में फाइबर बढ़ाया जा सकता है।हालांकि फाइबर बढ़ाते समय अचानक बहुत ज्यादा मात्रा लेना उचित नहीं है। धीरे-धीरे मात्रा बढ़ाना और पर्याप्त तरल पदार्थ लेना बेहतर रहता है, क्योंकि अचानक अधिक फाइबर लेने पर कुछ लोगों को गैस या पेट फूलने की शिकायत हो सकती है।
वजन नियंत्रित रखने में भी मददगार हो सकता है
फाइबर युक्त भोजन अक्सर अधिक देर तक पेट भरा होने का एहसास दे सकता है। इससे बार-बार कुछ खाने की इच्छा कम हो सकती है और कुल ऊर्जा सेवन को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है।विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार फल और सब्जियों में मौजूद फाइबर पेट भरा होने का एहसास बढ़ाने और भूख को नियंत्रित करने में भूमिका निभा सकता है। हालांकि केवल फाइबर खाने से वजन कम होने की गारंटी नहीं है। वजन प्रबंधन के लिए कुल खानपान, शारीरिक गतिविधि, नींद और जीवनशैली भी महत्वपूर्ण हैं।
रक्त शर्करा के लिए क्यों अहम है फाइबर?
फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों को संतुलित आहार का हिस्सा बनाना रक्त शर्करा प्रबंधन के लिहाज से भी उपयोगी हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार प्राकृतिक आहार फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देना स्वस्थ कार्बोहाइड्रेट सेवन का हिस्सा है। दालें, साबुत अनाज, सब्जियां और साबुत फल जैसे खाद्य पदार्थों में फाइबर के साथ अन्य पोषक तत्व भी मिलते हैं। इसलिए केवल मीठे या रिफाइंड खाद्य पदार्थों की जगह इनका संतुलित इस्तेमाल बेहतर आहार विकल्प हो सकता है।
दिल की सेहत से भी जुड़ा है फाइबर
आहार फाइबर और हृदय स्वास्थ्य के बीच संबंध पर भी लंबे समय से शोध हुआ है। उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों में अधिक फाइबर सेवन को हृदय रोग और टाइप-२ मधुमेह सहित कुछ दीर्घकालिक बीमारियों के कम जोखिम से जोड़ा गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी साबुत अनाज, फल, सब्जियों और दालों से भरपूर स्वस्थ आहार को हृदय रोग, मधुमेह और अन्य गैर-संचारी रोगों के जोखिम को कम करने वाली जीवनशैली का हिस्सा मानता है।
आंतों के लिए क्यों जरूरी है?
फाइबर का बड़ा हिस्सा पाचन तंत्र में काम करता है। कुछ प्रकार के फाइबर पानी सोखकर मल को नरम और भारी बनाने में मदद करते हैं, जबकि कुछ फाइबर आंतों में मौजूद सूक्ष्मजीवों के लिए भोजन का काम कर सकते हैं।इसलिए फाइबर को केवल कब्ज से बचने वाला पोषक घटक समझना सही नहीं होगा। यह समग्र आंत स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण आहार घटक है।
रोज की डाइट में फाइबर कैसे बढ़ाएं?
फाइबर बढ़ाने के लिए महंगे या विशेष खाद्य पदार्थ खरीदना जरूरी नहीं है। भारतीय रसोई में मौजूद कई सामान्य खाद्य पदार्थ इसके अच्छे स्रोत हैं।
१. साबुत अनाज को प्राथमिकता दें
मैदा और अत्यधिक रिफाइंड अनाज की जगह गेहूं का साबुत आटा, जौ, ओट्स, बाजरा, ज्वार, रागी और अन्य साबुत अनाज को अपनी डाइट में शामिल किया जा सकता है।विश्व स्वास्थ्य संगठन कार्बोहाइड्रेट के प्रमुख स्रोत के तौर पर साबुत अनाज, सब्जियां, फल और दालों को प्राथमिकता देने की सलाह देता है।
२. दाल और फलियों को भोजन का हिस्सा बनाएं
मसूर, मूंग, चना, राजमा, लोबिया और अन्य फलियां फाइबर के उपयोगी स्रोत हैं।दाल को केवल कभी-कभार खाने के बजाय नियमित संतुलित भोजन का हिस्सा बनाना आसान तरीका हो सकता है।
३. फल जूस की जगह पूरा फल खाएं
संतरा, अमरूद, सेब, नाशपाती और पपीता जैसे पूरे फल फाइबर प्रदान कर सकते हैं। फल का रस निकालने पर फाइबर की मात्रा और संरचना बदल सकती है, इसलिए सामान्य परिस्थितियों में पूरा फल बेहतर विकल्प है।विश्व स्वास्थ्य संगठन १० वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए रोज कम से कम ४०० ग्राम फल और सब्जियों के सेवन का लक्ष्य सुझाता है।
४. सब्जियों की मात्रा बढ़ाएं
हरी पत्तेदार सब्जियां, गाजर, भिंडी, मटर, फूलगोभी, पत्तागोभी और अन्य सब्जियों को भोजन में अलग-अलग तरीके से शामिल किया जा सकता है।सब्जियों को बहुत ज्यादा पकाने के बजाय उचित तरीके से पकाना बेहतर है, ताकि भोजन का पोषण मूल्य भी बना रहे।
५. मेवे और बीज भी उपयोगी विकल्प
बादाम, अखरोट, मूंगफली, अलसी और चिया जैसे खाद्य पदार्थों में फाइबर के साथ वसा और अन्य पोषक तत्व भी होते हैं। इन्हें संतुलित मात्रा में भोजन का हिस्सा बनाया जा सकता है।लेकिन मेवे और बीज कैलोरी से भरपूर भी हो सकते हैं, इसलिए इन्हें जरूरत से ज्यादा खाना वजन प्रबंधन के लिए उचित नहीं होगा।
फाइबर बढ़ाते समय इन बातों का रखें ध्यान
फाइबर की मात्रा बढ़ाने का मतलब यह नहीं कि एक ही दिन में भोजन में बहुत अधिक फाइबर जोड़ दिया जाए। शरीर को इसकी आदत डालने के लिए धीरे-धीरे मात्रा बढ़ाना बेहतर होता है।इसके साथ पर्याप्त पानी और अन्य तरल पदार्थ लेना भी महत्वपूर्ण है। यदि कोई व्यक्ति बहुत कम फाइबर लेने का आदी है और अचानक काफी ज्यादा फाइबर खाना शुरू कर देता है, तो गैस, पेट फूलना या पेट में असहजता हो सकती है।यदि किसी व्यक्ति को लगातार कब्ज, पेट दर्द, मल में खून, अचानक वजन कम होना या लंबे समय से पाचन संबंधी समस्या है, तो केवल फाइबर बढ़ाने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
क्या हर व्यक्ति को एक जैसी मात्रा में फाइबर चाहिए?
नहीं। फाइबर की जरूरत उम्र, लिंग, कुल ऊर्जा जरूरत और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है।विश्व स्वास्थ्य संगठन १० वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए प्राकृतिक खाद्य स्रोतों से कम से कम २५ ग्राम प्रतिदिन का लक्ष्य सुझाता है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के मधुमेह संबंधी दिशानिर्देशों में सामान्य आबादी के लिए २००० किलो कैलोरी आहार पर करीब ४० ग्राम फाइबर प्रतिदिन का उल्लेख किया गया है और साबुत अनाज, साबुत दालें, हरी पत्तेदार सब्जियां तथा कुछ फलों को शामिल करने की बात कही गई है। इसलिए किसी व्यक्ति की जरूरत के अनुसार आहार विशेषज्ञ या चिकित्सक से सलाह लेना बेहतर हो सकता है।
एक आसान फाइबर युक्त दिन का उदाहरण
सुबह: दलिया या ओट्स के साथ कोई पूरा फल।
दोपहर: साबुत गेहूं की रोटी, दाल, सब्जी और सलाद।
शाम: फल या सीमित मात्रा में मेवे।
रात: दाल या अन्य फलियां, सब्जियां और साबुत अनाज से बना संतुलित भोजन।यह केवल सामान्य उदाहरण है। मधुमेह, किडनी रोग, आंतों की बीमारी या किसी अन्य स्वास्थ्य स्थिति वाले व्यक्ति को अपनी डाइट चिकित्सक या योग्य आहार विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार तय करनी चाहिए।
निष्कर्ष
फाइबर को अक्सर भोजन का छोटा हिस्सा समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, जबकि संतुलित आहार में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। कब्ज और पाचन स्वास्थ्य से लेकर वजन, रक्त शर्करा और हृदय स्वास्थ्य से जुड़े जोखिमों तक, फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों को नियमित भोजन का हिस्सा बनाना उपयोगी हो सकता है। सबसे आसान तरीका है कि प्लेट में साबुत अनाज, दालें, सब्जियां, पूरे फल और जरूरत के अनुसार मेवे-बीज शामिल किए जाएं। साथ ही फाइबर की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाई जाए और पर्याप्त तरल पदार्थ लिए जाएं।