दादी-नानी की पसंद मुल्तानी मिट्टी, गर्मियों में क्यों है खास
चेहरे पर मुल्तानी मिट्टी लगाने के फायदे, जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ
गर्मी में त्वचा को राहत दे सकती है मुल्तानी मिट्टी, समझिए कैसे
गर्मियों में बढ़ती गर्मी, पसीना और प्रदूषण त्वचा पर असर डालते हैं। ऐसे में मुल्तानी मिट्टी का उपयोग भारतीय घरों में लंबे समय से किया जाता रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार यह त्वचा की सफाई और अतिरिक्त तेल को कम करने में मदद कर सकती है, लेकिन इसका उपयोग त्वचा के प्रकार के अनुसार करना चाहिए।
📍 Location: भारत
📰 Date: 17 जुलाई 2026
✍️ Neelam Saini
गर्मियों में मुल्तानी मिट्टी की चर्चा क्यों बढ़ जाती है?
जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, त्वचा से जुड़ी समस्याएं भी बढ़ने लगती हैं। पसीना, धूल, प्रदूषण और अतिरिक्त तैलीयता चेहरे की चमक को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे समय में भारतीय घरों में एक नाम सबसे ज्यादा सुनाई देता है—मुल्तानी मिट्टी। दादी-नानी के घरेलू नुस्खों में मुल्तानी मिट्टी का उपयोग वर्षों से किया जाता रहा है। बदलते दौर और आधुनिक स्किन केयर उत्पादों के बावजूद आज भी यह प्राकृतिक विकल्प के रूप में लोकप्रिय बनी हुई है।
आखिर क्या होती है मुल्तानी मिट्टी
मुल्तानी मिट्टी एक प्राकृतिक मिट्टी है जिसमें विभिन्न खनिज तत्व पाए जाते हैं। इसका उपयोग लंबे समय से सौंदर्य और त्वचा देखभाल के लिए किया जाता रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार इसकी सबसे बड़ी विशेषता अतिरिक्त तेल और गंदगी को अवशोषित करने की क्षमता मानी जाती है। यही कारण है कि गर्मियों में इसका उपयोग अधिक बढ़ जाता है।
तैलीय त्वचा वाले लोगों के लिए क्यों मानी जाती है उपयोगी
गर्मियों में त्वचा से अधिक मात्रा में तेल निकल सकता है। इससे चेहरे पर चिपचिपाहट और मुंहासों की समस्या बढ़ सकती है। मुल्तानी मिट्टी अतिरिक्त तेल को सोखने में मदद कर सकती है। इसी वजह से तैलीय त्वचा वाले लोग इसे फेस पैक के रूप में इस्तेमाल करते हैं। हालांकि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इसका उपयोग संतुलित मात्रा में किया जाए ताकि त्वचा अत्यधिक शुष्क न हो जाए।
त्वचा की गहराई से सफाई में मदद
दिनभर की धूल और प्रदूषण त्वचा के रोमछिद्रों में जमा हो सकते हैं। मुल्तानी मिट्टी को पारंपरिक रूप से त्वचा की सफाई के लिए उपयोग किया जाता रहा है। स्किन केयर विशेषज्ञों का कहना है कि यह त्वचा की सतह पर मौजूद गंदगी और अतिरिक्त तेल को हटाने में सहायक हो सकती है, जिससे त्वचा अधिक ताजगी महसूस कर सकती है।
ठंडक का एहसास क्यों देती है
गर्मियों में मुल्तानी मिट्टी लगाने पर त्वचा को ठंडक महसूस होती है। यही कारण है कि कई लोग तेज गर्मी के दौरान इसका उपयोग करना पसंद करते हैं। हालांकि यह ठंडक अस्थायी होती है और इसे किसी चिकित्सकीय उपचार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। फिर भी गर्म मौसम में यह त्वचा को आराम पहुंचाने वाला अनुभव दे सकती है।
क्या मुंहासों में भी मदद कर सकती है
मुंहासों की समस्या अक्सर अतिरिक्त तेल और बंद रोमछिद्रों से जुड़ी होती है। इसी वजह से मुल्तानी मिट्टी को मुंहासों से राहत देने वाले घरेलू उपायों में शामिल किया जाता है। लेकिन त्वचा रोग विशेषज्ञों का कहना है कि गंभीर या लगातार होने वाले मुंहासों के लिए केवल घरेलू उपाय पर्याप्त नहीं होते। ऐसे मामलों में चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक है।
हर त्वचा के लिए समान रूप से उपयुक्त नहीं
यह धारणा आम है कि प्राकृतिक चीजें हर किसी के लिए पूरी तरह सुरक्षित होती हैं, लेकिन विशेषज्ञ इस विचार से पूरी तरह सहमत नहीं हैं। सूखी या संवेदनशील त्वचा वाले लोगों में मुल्तानी मिट्टी त्वचा को और अधिक रूखा बना सकती है। इसलिए उपयोग से पहले पैच टेस्ट करना और त्वचा के प्रकार को समझना जरूरी माना जाता है।
घरेलू नुस्खों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का संतुलन
भारतीय परिवारों में मुल्तानी मिट्टी को गुलाब जल, दही, एलोवेरा या चंदन के साथ मिलाकर लगाया जाता रहा है। यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। हालांकि वैज्ञानिक समुदाय का कहना है कि किसी भी घरेलू नुस्खे के प्रभाव व्यक्ति की त्वचा, मौसम और उपयोग के तरीके पर निर्भर कर सकते हैं। इसलिए हर दावे को सार्वभौमिक सत्य नहीं माना जा सकता।
क्या रोजाना लगाना सही है
विशेषज्ञों के अनुसार मुल्तानी मिट्टी का अत्यधिक उपयोग त्वचा की प्राकृतिक नमी को प्रभावित कर सकता है। यही कारण है कि इसे सीमित अंतराल पर लगाने की सलाह दी जाती है। त्वचा की जरूरत और प्रकार के अनुसार सप्ताह में एक या दो बार उपयोग पर्याप्त माना जाता है। लगातार और अत्यधिक उपयोग कई बार उल्टा असर भी डाल सकता है।
निष्कर्ष
मुल्तानी मिट्टी के फायदे गर्मियों में विशेष रूप से चर्चा में रहते हैं क्योंकि यह त्वचा की सफाई, अतिरिक्त तेल को नियंत्रित करने और ताजगी का एहसास देने में मदद कर सकती है। यही वजह है कि दादी-नानी इसे गर्म मौसम में लगाने की सलाह देती रही हैं। हालांकि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है, इसलिए इसका उपयोग समझदारी और विशेषज्ञ सलाह के साथ करना अधिक सुरक्षित और प्रभावी माना जाता है।