शुक्रवार, 21 August 2026
GOLD ₹0 ▼ 0%
SENSEX 0 ▼ 0%
BITCOIN $0 ▼ 0%
38°C मुजफ्फरनगर
EDITION:
BREAKING
#ShahTimes #Muzaffarnagar #Bijnor #Moradabad #BreakingNews #Politics #Education #Crime #Sports #Business
Book Your Ads With Shah Times
World

हार्वर्ड देगा 47 परिवारों को 507 करोड़, शवों के अंग बेचने का मामला

Shah Times 2026-08-21 14:05:52
हार्वर्ड देगा 47 परिवारों को 507 करोड़, शवों के अंग बेचने का मामला

हार्वर्ड देगा 47 परिवारों को 507 करोड़, शवों के अंग बेचे गए थे

शवों के अंग बेचने का मामला, हार्वर्ड पर 53 मिलियन डॉलर का सेटलमेंट

हार्वर्ड मुर्दाघर कांड में 47 परिवारों को मिलेगा मुआवज़ा


हार्वर्ड मेडिकल स्कूल ने 47 परिवारों से जुड़े सिविल मुकदमों के निपटारे के लिए 53 मिलियन डॉलर देने पर सहमति जताई है। मामला पूर्व मुर्दाघर प्रबंधक कैडरिक लॉज से जुड़ा है, जिसने शोध के लिए दान किए शवों के हिस्से चोरी कर बेचे। अदालत ने सेटलमेंट को प्रारंभिक मंजूरी दी है।


बोस्टन, मैसाचुसेट्स, अमेरिका | 21 अगस्त 2026 | शाह टाइम्स 

By Mohd Haris


हार्वर्ड मेडिकल स्कूल पर 507 करोड़ रुपये का सेटलमेंट

अमेरिका के प्रतिष्ठित हार्वर्ड मेडिकल स्कूल से जुड़े शवों के अंग बेचने के मामले में बड़ा कानूनी फैसला सामने आया है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने 47 परिवारों की ओर से दायर सिविल मुकदमों के निपटारे के लिए 53 मिलियन डॉलर देने पर सहमति जताई है, जिसकी भारतीय मुद्रा में कीमत करीब 507 करोड़ रुपये बैठती है। मामला हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के पूर्व मुर्दाघर प्रबंधक कैडरिक लॉज से जुड़ा है। आरोप और बाद की आपराधिक कार्यवाही के मुताबिक लॉज ने मेडिकल रिसर्च और शिक्षा के लिए दान किए गए मानव अवशेषों के हिस्से चोरी किए और उन्हें खरीदारों को बेच दिया।

मसले की गंभीरता केवल चोरी तक सीमित नहीं है। जिन लोगों ने अपने शरीर मेडिकल साइंस और शिक्षा के लिए दान किए थे, उनके परिवारों का कहना था कि उनके प्रियजनों के अवशेषों के साथ गरिमापूर्ण व्यवहार की जिम्मेदारी संस्था की थी।

47 परिवारों ने क्यों किया मुकदमा

हार्वर्ड के खिलाफ मुकदमा उन 47 रिश्तेदारों ने दायर किया, जिनके परिवार के सदस्यों के अवशेष संभावित रूप से इस मामले से प्रभावित हुए थे। मैसाचुसेट्स सुप्रीम ज्यूडिशियल कोर्ट के 2025 के फैसले में भी इन 47 वादियों का उल्लेख है। परिवारों का आरोप था कि हार्वर्ड की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था इतनी प्रभावी नहीं थी कि लॉज कई वर्षों तक मानव अवशेषों की चोरी और बिक्री कर सके। उन्होंने संस्था पर लापरवाही और दान किए गए शवों के साथ गरिमापूर्ण व्यवहार की जिम्मेदारी पूरी न करने का आरोप लगाया। हार्वर्ड ने कहा है कि उसे लॉज की गतिविधियों की जानकारी या अनुमति नहीं थी। फिर भी मुकदमे का केंद्रीय सवाल यह रहा कि क्या संस्थान ने अपने शारीरिक रचना संबंधी उपहार कार्यक्रम की पर्याप्त निगरानी की थी।

मुर्दाघर प्रबंधक ने कैसे चलाया पूरा नेटवर्क

कैडरिक लॉज हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के शारीरिक रचना संबंधी उपहार कार्यक्रम से जुड़े मुर्दाघर में काम करता था। संघीय अभियोजन के अनुसार उसने करीब 2018 से 2023 में मामला सामने आने तक शवों के विभिन्न हिस्सों को चोरी करके दूसरे राज्यों में खरीदारों तक पहुंचाया।

रिपोर्टों में सिर, चेहरे, दिमाग, त्वचा और हाथ जैसे मानव अवशेषों का उल्लेख है। लॉज और उसकी पत्नी डेनिस लॉज ने कथित तौर पर कुछ अवशेष न्यू हैम्पशायर स्थित अपने घर तक पहुंचाए, जहां से उन्हें खरीदारों को बेचा गया। यह कारोबार एक व्यक्ति तक सीमित नहीं था। अभियोजन के बाद लॉज की पत्नी और कई खरीदारों के खिलाफ भी आपराधिक कार्रवाई हुई। संबंधित आरोपियों में से कई ने दोष स्वीकार किया और उन्हें सजा सुनाई गई।

हार्वर्ड को कब पता चला

यह मामला 2023 में सार्वजनिक हुआ, जब लॉज के खिलाफ संघीय आरोप सामने आए। इसके बाद हार्वर्ड ने जांच की और यह पता लगाने की कोशिश की कि किन दानकर्ताओं के अवशेष प्रभावित हुए हो सकते हैं। संस्थान के लिए समस्या यह थी कि वह हर मामले में निश्चित रूप से यह निर्धारित नहीं कर सका कि किस दानकर्ता के अवशेषों से हिस्से चोरी हुए थे। इसी वजह से प्रभावित परिवारों की पहचान और दायरे को लेकर मुकदमों में व्यापक सवाल उठे। हार्वर्ड ने अपने शारीरिक रचना संबंधी उपहार कार्यक्रम की बाहरी समीक्षा भी कराई और व्यवस्था में सुधार के कदमों की घोषणा की।

अदालत में हार्वर्ड के खिलाफ क्या हुआ

शुरुआत में निचली अदालत ने हार्वर्ड और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ दायर दावों को खारिज कर दिया था। मामला इसके बाद मैसाचुसेट्स सुप्रीम ज्यूडिशियल कोर्ट पहुंचा। अक्टूबर 2025 में राज्य की सर्वोच्च अदालत ने निचली अदालत के फैसले को आंशिक रूप से पलट दिया। अदालत ने कहा कि वादियों ने ऐसे पर्याप्त तथ्य पेश किए हैं जिनसे यह सवाल उठता है कि हार्वर्ड और शारीरिक रचना संबंधी उपहार कार्यक्रम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कानूनी रूप से अपेक्षित “गुड फेथ” मानक पूरा किया था या नहीं। अदालत का यह फैसला परिवारों के लिए अहम कानूनी पेशरफ़्त था। इसके बाद हार्वर्ड के सामने लंबे सिविल मुकदमे को आगे बढ़ाने या समझौते का रास्ता अपनाने का विकल्प था।

53 मिलियन डॉलर की रकम किसे मिलेगी

सेटलमेंट के तहत दो क्लास-एक्शन फंड बनाए जाने हैं। कुल रकम 53 मिलियन डॉलर है और इसका इस्तेमाल संबंधित परिवारों के दावों के निपटारे में होगा। अदालत ने सेटलमेंट को प्रारंभिक मंजूरी दी है, इसलिए इसे अंतिम रूप देने के लिए आगे की न्यायिक प्रक्रिया बाकी है। भारतीय मुद्रा में 53 मिलियन डॉलर की रकम करीब 507 करोड़ रुपये बताई जा रही है। वास्तविक रुपये की कीमत विनिमय दर के अनुसार बदलती रहती है, इसलिए 507 करोड़ रुपये को अनुमानित रूपांतरण के तौर पर देखना चाहिए। यह राशि आपराधिक मामले में लॉज की सजा से अलग है। 53 मिलियन डॉलर का सेटलमेंट हार्वर्ड के खिलाफ दायर सिविल दावों से जुड़ा है।

कैडरिक लॉज को कितनी सजा मिली

लॉज को मानव अवशेषों की चोरी और बिक्री से जुड़े संघीय अपराध में दोषी ठहराए जाने के बाद आठ साल की जेल की सजा मिली। उसकी पत्नी डेनिस लॉज को भी मामले में भूमिका के लिए जेल की सजा सुनाई गई। मामले में शामिल कुछ खरीदारों ने भी दोष स्वीकार किया। अभियोजन के अनुसार यह नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हुआ था और चोरी किए गए मानव अवशेषों की खरीद-बिक्री होती थी। इससे जांच का दायरा हार्वर्ड के कैंपस से बाहर तक पहुंच गया।

हार्वर्ड ने क्या जवाब दिया

हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के डीन जॉर्ज डेली और मेडिकल एजुकेशन के डीन बर्नार्ड चांग ने लॉज की हरकतों की कड़ी निंदा की है। संस्थान ने इसे मेडिकल समुदाय के मूल्यों के साथ गंभीर विश्वासघात बताया। हार्वर्ड ने यह भी कहा कि लॉज की आपराधिक गतिविधियां उसकी जानकारी या अनुमति के बिना हुईं। साथ ही संस्थान ने शारीरिक रचना संबंधी उपहार कार्यक्रम की प्रक्रियाओं और निगरानी को मजबूत करने की पहल की है।

सेटलमेंट में केवल आर्थिक भुगतान ही शामिल नहीं है। हार्वर्ड प्रभावित परिवारों के सामने एक औपचारिक बयान जारी करेगा और दानदाताओं के सम्मान में एक वार्षिक छात्रवृत्ति शुरू करने की योजना भी रखता है।

2027 से शुरू होगी दानदाताओं के नाम पर छात्रवृत्ति

हार्वर्ड मेडिकल स्कूल ने कहा है कि 2027-28 अकादमिक वर्ष से Anatomical Gift Program के सभी दानदाताओं के सम्मान में एक वार्षिक मेडिकल छात्रवृत्ति स्थापित की जाएगी। इसका मकसद उन लोगों की विरासत को सम्मान देना है जिन्होंने मेडिकल रिसर्च और शिक्षा के लिए अपने शरीर दान किए। यह पहल वित्तीय मुआवज़े से अलग है। इसका उद्देश्य संस्थागत भरोसे को दोबारा स्थापित करना और शरीर दान करने वाले लोगों की गरिमा को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करना है।

मामला मेडिकल साइंस के लिए क्यों अहम है

मेडिकल एजुकेशन में शरीर दान करने की प्रक्रिया भरोसे पर आधारित होती है। परिवार अपने प्रियजन के अवशेषों को इस उम्मीद के साथ मेडिकल संस्थान को सौंपते हैं कि उनका इस्तेमाल शिक्षा और रिसर्च के लिए तय नैतिक नियमों के तहत होगा। हार्वर्ड के मामले ने इसी भरोसे और संस्थागत निगरानी पर सवाल खड़े किए हैं। यहां अपराध एक कर्मचारी ने किया, लेकिन मुकदमे का अहम प्रश्न यह बना कि संस्थान की जिम्मेदारी और निगरानी की सीमा कहां तक थी। मैसाचुसेट्स सुप्रीम ज्यूडिशियल कोर्ट ने भी अपने फैसले में इसी संस्थागत जवाबदेही के सवाल को महत्व दिया था।

क्या हार्वर्ड ने माना कि उसने शव बेचे

यहां एक जरूरी तथ्यात्मक फर्क समझना जरूरी है। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार शवों के अंग बेचने का आपराधिक मामला पूर्व मुर्दाघर प्रबंधक कैडरिक लॉज के खिलाफ था। हार्वर्ड ने स्वयं मानव अवशेषों की बिक्री की बात स्वीकार नहीं की है। संस्थान का रुख रहा है कि लॉज ने उसके ज्ञान या अनुमति के बिना यह काम किया। सिविल सेटलमेंट का मतलब भी यह नहीं है कि हार्वर्ड ने आपराधिक रूप से शव बेचने की बात स्वीकार कर ली है।

यह अंतर रिपोर्टिंग में बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि सेटलमेंट और आपराधिक दोषसिद्धि दो अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं।

आगे की कानूनी प्रक्रिया क्या होगी

53 मिलियन डॉलर के सेटलमेंट को अदालत से प्रारंभिक मंजूरी मिल चुकी है। आगे अंतिम मंजूरी और फंड के वितरण से जुड़ी प्रक्रिया पूरी होनी है।

इसके साथ हार्वर्ड को अपने मेडिकल डोनेशन सिस्टम में किए गए सुधारों को लागू करना होगा। बाहरी समीक्षा और शारीरिक रचना संबंधी उपहार कार्यक्रम की निगरानी इस मामले के बाद संस्थागत सुधार का अहम हिस्सा बन गई है।

बड़ा सवाल संस्थागत जवाबदेही का

हार्वर्ड मुर्दाघर मामला अमेरिकी मेडिकल संस्थानों के लिए एक गंभीर नैतिक और प्रशासनिक चेतावनी है। शरीर दान करने वाले परिवार केवल मेडिकल रिसर्च को समर्थन नहीं देते, वे संस्थानों पर अपने प्रियजनों के अवशेषों की गरिमा बनाए रखने का भरोसा भी करते हैं। 47 परिवारों के मुकदमों का 53 मिलियन डॉलर में निपटारा आर्थिक तौर पर बड़ा कदम है, लेकिन इस मामले का असर रकम से आगे जाता है। असल चुनौती यह सुनिश्चित करने की है कि किसी कर्मचारी को वर्षों तक ऐसे संवेदनशील अवशेषों तक अनियंत्रित पहुंच न मिले।

निष्कर्ष

हार्वर्ड मेडिकल स्कूल का 53 मिलियन डॉलर का सेटलमेंट मानव अवशेषों की चोरी और बिक्री से जुड़े अमेरिकी मेडिकल जगत के सबसे गंभीर संस्थागत विवादों में से एक के सिविल अध्याय को आगे बढ़ाता है। 47 परिवारों को प्रभावित करने वाले मुकदमों में अदालत की प्रारंभिक मंजूरी के बाद अब अंतिम कानूनी प्रक्रिया बाकी है। स्थापित तथ्य यह है कि पूर्व मुर्दाघर प्रबंधक कैडरिक लॉज को मानव अवशेषों की चोरी और बिक्री के मामले में आठ साल की जेल हुई। दूसरी ओर, हार्वर्ड के खिलाफ सिविल दावों का केंद्र संस्थागत निगरानी और जवाबदेही रहा है।

इस मामले की सबसे बड़ी सीख आर्थिक मुआवज़े से आगे जाती है। मेडिकल रिसर्च के लिए शरीर दान करने वाले परिवारों का भरोसा किसी भी संस्थान की बुनियादी नैतिक पूंजी है, और उसे सुरक्षित रखने के लिए मजबूत निगरानी, पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है।

वीडियो देखें

ADVERTISEMENT
Shah Times

Shah Times

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

ताज़ा ख़बरें
BREAKING NEWS
ADVERTISEMENT

Your Ad Here
TRENDING
आज का ई-पेपर
मुजफ्फरनगर (12 पेज)
बिजनौर (10 पेज)
सहारनपुर (11 पेज)
मुरादाबाद (14 पेज)
Home Video Epaper Reel Menu
Chat With Us
SHAH TIMES
ख़बरें छुपाता नहीं, छापता है
🏠 होम ⚡ ब्रेकिंग न्यूज़ 📰 ताज़ा खबरें 🇮🇳 देश 🌍 दुनिया 🏛 राजनीति 🚔 क्राइम 📈 बिजनेस 🏏 स्पोर्ट्स 🎓 शिक्षा ❤️ स्वास्थ्य 📰 ई-पेपर