हड़प्पा की ड्रेनेज व्यवस्था इतनी आधुनिक कैसे थी?
नई दिल्ली। आज शहरों में सीवेज और जल निकासी की व्यवस्था को आधुनिक शहरी जीवन की बुनियादी जरूरत माना जाता है, लेकिन करीब चार से पांच हजार साल पहले भारतीय उपमहाद्वीप में विकसित हुई हड़प्पा सभ्यता के नगरों में भी जल निकासी की बेहद व्यवस्थित व्यवस्था के प्रमाण मिलते हैं। मोहनजोदड़ो, हड़प्पा और अन्य पुरातात्विक स्थलों की खुदाई से पता चलता है कि वहां नगर नियोजन के साथ-साथ साफ-सफाई और पानी की निकासी पर भी विशेष ध्यान दिया जाता था।
घरों से जुड़ी थीं नालियां
हड़प्पा सभ्यता के कई नगरों में मकानों से निकलने वाला इस्तेमाल किया हुआ पानी छोटी नालियों के जरिए बड़ी नालियों तक पहुंचाया जाता था। इस तरह पानी को बेतरतीब तरीके से सड़कों पर बहने देने के बजाय उसे एक निर्धारित मार्ग से बाहर निकालने की कोशिश की गई थी।
पक्की ईंटों से बनाई गई नालियां
इन नालियों के निर्माण में पकी हुई ईंटों का इस्तेमाल किया गया था। कई स्थानों पर नालियों को ढकने की व्यवस्था के भी प्रमाण मिले हैं। इससे न केवल रास्ते साफ रखने में मदद मिलती होगी, बल्कि नालियों की सफाई और रखरखाव भी अपेक्षाकृत आसान रहा होगा।
सड़कों के साथ बनाई गई जल निकासी
हड़प्पाई नगरों की एक खास विशेषता उनका योजनाबद्ध स्वरूप था। कई जगह सड़कें एक-दूसरे को लगभग समकोण पर काटती थीं और उनके साथ जल निकासी की व्यवस्था भी विकसित की गई थी। इससे संकेत मिलता है कि नगर बसाने से पहले पानी की निकासी को योजना का हिस्सा बनाया जाता था।
घरों में स्नान की व्यवस्था
पुरातात्विक अवशेषों से कुछ घरों में स्नान के लिए अलग स्थान और पानी की निकासी के प्रबंध का पता चलता है। स्नानघर से निकलने वाला पानी छोटी नाली या निकासी मार्ग से मुख्य जल निकासी प्रणाली की ओर जाता था।
सफाई व्यवस्था का भी रखा जाता था ध्यान
कुछ स्थलों पर नालियों में ऐसे हिस्से मिले हैं जिन्हें निरीक्षण या सफाई के लिए उपयोग किया जा सकता था। हालांकि हर स्थल की व्यवस्था एक जैसी नहीं थी, लेकिन इन प्रमाणों से यह जरूर पता चलता है कि हड़प्पाई समाज में जल प्रबंधन और स्वच्छता को लेकर व्यावहारिक सोच मौजूद थी।
क्या यह आज की सीवर प्रणाली जैसी थी?
इसे सीधे आधुनिक सीवर सिस्टम के बराबर रखना सही नहीं होगा। आज की व्यवस्था में भूमिगत पाइपलाइन, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और वैज्ञानिक जल शोधन जैसी तकनीकें शामिल हैं। हड़प्पा सभ्यता की व्यवस्था अपने समय की तकनीक और जरूरतों के हिसाब से विकसित नगर निकासी प्रणाली थी।
निष्कर्ष
हड़प्पा सभ्यता की ड्रेनेज व्यवस्था यह दिखाती है कि प्राचीन नगरों के निर्माण में केवल मकानों और सड़कों पर ही ध्यान नहीं दिया जाता था, बल्कि स्वच्छता, पानी की निकासी और नगर नियोजन को भी महत्व दिया जाता था। हजारों साल पुराने इन अवशेषों से उस समय के लोगों की इंजीनियरिंग समझ और व्यवस्थित शहरी जीवन की झलक मिलती है।