ईरान और ओमान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले प्रस्तावित वाणिज्यिक नौवहन मार्ग के लिए महत्वपूर्ण भौगोलिक मानकों पर सहमति बनाई है। दोनों देशों के बीच पिछले दो महीनों से तकनीकी स्तर पर बातचीत चल रही थी। हालांकि ईरान ने स्पष्ट किया है कि यह समझौता क्षेत्र की सुरक्षा की गारंटी नहीं है और अमेरिकी सैन्य गतिविधियां अब भी चिंता का विषय बनी हुई हैं
📍 Location: तेहरान/मस्कट
📰 Date: 6 अगस्त 2026
✍️ By: Apurva Choudhary
ईरान और ओमान के बीच समुद्री मार्ग पर बनी सहमति
मध्य पूर्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान और ओमान के बीच एक अहम प्रगति सामने आई है। दोनों देशों ने इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से गुजरने वाले प्रस्तावित वाणिज्यिक नौवहन कॉरिडोर के लिए विशेष भौगोलिक मानकों और संचालन व्यवस्था पर सहमति व्यक्त की है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब क्षेत्र में सुरक्षा और समुद्री व्यापार को लेकर लगातार वैश्विक चिंताएं बनी हुई हैं।
दो महीने चली तकनीकी वार्ता, संयुक्त बयान की तैयारी
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माईल बघाई ने बुधवार को बताया कि ईरान और ओमान इस व्यवस्था की रूपरेखा तैयार करने वाले एक संयुक्त बयान को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में हैं। उनके अनुसार, दोनों देशों के बीच पिछले लगभग दो महीनों से तकनीकी स्तर पर विस्तृत वार्ता चल रही थी।
इन वार्ताओं में प्रस्तावित समुद्री मार्ग के कानूनी, सुरक्षा, पर्यावरणीय और परिचालन पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। दोनों पक्षों ने नौवहन व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनाई है।
बाहरी हस्तक्षेप न होने पर जल्द जारी होगा संयुक्त बयान
इस्माईल बघाई ने कहा कि यदि किसी तीसरे पक्ष की ओर से प्रक्रिया में कोई बाधा उत्पन्न नहीं होती है, तो दोनों देशों के साझा दृष्टिकोण को दर्शाने वाला संयुक्त बयान जल्द जारी किया जा सकता है।
ईरान ने सुरक्षा को लेकर जताई चिंता
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस समझौते का अर्थ यह नहीं है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह सुरक्षित हो गया है। उनके अनुसार, क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी चुनौतियां अब भी मौजूद हैं और कई बाहरी कारक समुद्री गतिविधियों को प्रभावित कर रहे हैं।
ईरान का कहना है कि अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी और ईरान के हितों के विरुद्ध होने वाली गतिविधियां अभी भी इस जलमार्ग में असुरक्षा का प्रमुख कारण हैं। इसलिए केवल तकनीकी सहमति से समुद्री जोखिम पूरी तरह समाप्त नहीं होंगे।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था मुख्य रूप से नौवहन संचालन को अधिक व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक कदम है, लेकिन क्षेत्रीय सुरक्षा का प्रश्न अभी भी अलग और जटिल विषय बना हुआ है।
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है। अनुमान है कि दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का लगभग एक-तिहाई हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से गुजरता है। ऐसे में यहां होने वाली किसी भी राजनीतिक या सैन्य गतिविधि का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ता है।
ईरान का क्या कहना है?
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माईल बघाई ने कहा कि ओमान के साथ प्रस्तावित समझौता केवल नौवहन व्यवस्था को व्यवस्थित करने की दिशा में एक कदम है। उन्होंने दोहराया कि इससे यह नहीं माना जाना चाहिए कि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह सुरक्षित हो गया है।
उनके अनुसार, क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी नौसेना की गतिविधियां और ईरान के हितों के विरुद्ध होने वाली अन्य कार्रवाइयां अब भी तनाव का प्रमुख कारण बनी हुई हैं। इसलिए समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केवल तकनीकी समझौता पर्याप्त नहीं होगा।
दो महीने चली तकनीकी वार्ता
ईरान और ओमान के विशेषज्ञों के बीच पिछले लगभग दो महीनों से लगातार तकनीकी स्तर पर चर्चा हुई। इस दौरान नौवहन मार्ग के नक्शे, कानूनी अधिकार, पर्यावरणीय सुरक्षा, जहाजों की आवाजाही, समुद्री निगरानी और परिचालन व्यवस्था जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।
अब दोनों देशों द्वारा तैयार किए गए संयुक्त बयान की अंतिम समीक्षा की जा रही है। यदि प्रक्रिया में कोई नई बाधा नहीं आती, तो इसे जल्द सार्वजनिक किया जा सकता है।
पाकिस्तान और कतर यात्रा पर भी स्थिति स्पष्ट
प्रेस वार्ता के दौरान इस्माईल बघाई ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद-बाकर गालिबफ या विदेश मंत्री अब्बास अरागची की पाकिस्तान अथवा कतर यात्रा की कोई योजना नहीं है। हाल के दिनों में इन संभावित यात्राओं को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं।
अंतरराष्ट्रीय असर
होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी नई व्यवस्था का असर केवल ईरान और ओमान तक सीमित नहीं रहेगा। खाड़ी क्षेत्र के अन्य देशों, एशिया, यूरोप और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। यदि भविष्य में समुद्री मार्ग अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित बनता है, तो अंतरराष्ट्रीय व्यापार को राहत मिल सकती है। वहीं क्षेत्र में तनाव बढ़ने की स्थिति में वैश्विक सप्लाई चेन और ऊर्जा बाजार फिर से दबाव में आ सकते हैं।
ईरान और ओमान के बीच प्रस्तावित वाणिज्यिक नौवहन मार्ग को लेकर बनी सहमति क्षेत्रीय सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। हालांकि ईरान ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा संबंधी चुनौतियां अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में संयुक्त बयान और क्षेत्रीय घटनाक्रम पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।