बदायूं के कादरचौक क्षेत्र में मेडिकल स्टोर की जांच के दौरान रुपये के लेनदेन से जुड़ा वीडियो वायरल होने के बाद औषधि विभाग ने कार्रवाई शुरू की है। सहायक आयुक्त ने ड्रग इंस्पेक्टर से जवाब मांगा है। फिलहाल विभागीय जांच जारी है और आरोपों की अंतिम पुष्टि बाकी है।
📍 Location: Badaun
📰 23 अगस्त 2026
✍️ Apurva Choudhary
खबर का असर, औषधि विभाग ने शुरू की जांच
बदायूं: कादरचौक क्षेत्र में मेडिकल स्टोर की जांच के दौरान सामने आए कथित रुपये के लेनदेन से जुड़े वीडियो ने औषधि विभाग का ध्यान खींचा है। मामला सामने आने और इसे लेकर सवाल उठने के बाद सहायक आयुक्त औषधि, बरेली ने ड्रग इंस्पेक्टर लवकुश प्रसाद को तलब कर पूरे घटनाक्रम पर जवाब मांगा है।
विभाग ने जांच के दौरान हुई कार्रवाई के साथ-साथ उस सेवानिवृत्त कर्मचारी की मौजूदगी को लेकर भी जानकारी मांगी है, जो कथित तौर पर ड्रग इंस्पेक्टर के साथ मौके पर गया था। अधिकारियों के स्तर पर अब उपलब्ध तथ्यों और वायरल वीडियो के आधार पर मामले को देखा जा रहा है।
कादरचौक में मेडिकल स्टोर की जांच से शुरू हुआ मामला
पूरा मामला कादरचौक थाना क्षेत्र के जोरी नगला गांव का बताया जा रहा है। यहां बिना लाइसेंस मेडिकल स्टोर संचालित होने की सूचना के बाद ड्रग इंस्पेक्टर जांच के लिए पहुंचे थे।
जांच के दौरान मेडिकल स्टोर खुला मिला। टीम की ओर से वहां उपलब्ध दवाओं, रजिस्टर और दूसरे अभिलेखों को देखने की कार्रवाई की गई। इसी दौरान ड्रग इंस्पेक्टर के साथ एक सेवानिवृत्त कर्मचारी के मौजूद रहने की बात सामने आई।
मामले ने उस समय नया मोड़ लिया, जब कार्रवाई से संबंधित एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में रुपये के लेनदेन से जुड़ा दृश्य होने का दावा किया गया, जिसके बाद विभागीय कार्रवाई की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे।
वायरल वीडियो ने बढ़ाई अधिकारियों की चिंता
सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई। वीडियो में दिखाई देने वाली गतिविधि को लेकर अलग-अलग दावे किए जाने लगे, लेकिन केवल वीडियो के आधार पर पूरे घटनाक्रम की अंतिम स्थिति तय करना उचित नहीं होगा।
यही वजह है कि विभाग ने अब मामले को जांच के दायरे में लिया है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि मौके पर वास्तव में क्या हुआ, रुपये से संबंधित गतिविधि किस संदर्भ में हुई और वहां मौजूद सेवानिवृत्त कर्मचारी की भूमिका क्या थी।
विभागीय जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वायरल वीडियो में दिखाई देने वाली गतिविधि का वास्तविक संदर्भ क्या था।
सहायक आयुक्त ने ड्रग इंस्पेक्टर से मांगा जवाब
मामले को लेकर सहायक आयुक्त औषधि, बरेली संदीप कुमार ने ड्रग इंस्पेक्टर को तलब किया है। उनसे छापेमारी के दौरान की गई कार्रवाई और उनके साथ मौजूद सेवानिवृत्त कर्मचारी के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा गया है।
अधिकारी स्तर से यह भी देखा जा रहा है कि संबंधित कर्मचारी किस हैसियत से जांच के दौरान मौके पर मौजूद था। इसके अलावा मेडिकल स्टोर पर की गई कार्रवाई की प्रक्रिया और उपलब्ध दस्तावेजों की भी समीक्षा की जा रही है।
इस घटनाक्रम के बाद विभागीय स्तर पर मामले को गंभीरता से लिया जाना साफ दिखाई दे रहा है।
सेवानिवृत्त कर्मचारी की भूमिका भी जांच के दायरे में
इस प्रकरण का एक अहम पहलू उस सेवानिवृत्त कर्मचारी की मौजूदगी है, जो कथित तौर पर ड्रग इंस्पेक्टर के साथ जांच के दौरान गया था। विभाग अब यह जानना चाहता है कि उसकी वहां मौजूदगी का आधिकारिक आधार क्या था।
रुपये के कथित लेनदेन को लेकर वायरल वीडियो में इसी व्यक्ति की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोप को सही साबित मानने से पहले विभागीय जांच और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण जरूरी है।
फिलहाल विभाग ने इस मामले में किसी व्यक्ति को दोषी घोषित नहीं किया है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय होने की बात कही गई है।
आरोप और जांच के बीच अंतर समझना जरूरी
मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वायरल वीडियो सामने आने और विभागीय जांच शुरू होने का अर्थ आरोपों की पुष्टि होना नहीं है। अभी प्रशासनिक स्तर पर तथ्य जुटाए जा रहे हैं और संबंधित अधिकारी से जवाब भी मांगा गया है।
किसी वीडियो की मौजूदगी अपने आप में पूरे घटनाक्रम का अंतिम प्रमाण नहीं मानी जा सकती। वीडियो का समय, स्थान, संदर्भ और उसमें दिखाई देने वाली गतिविधि की प्रकृति समेत दूसरे तथ्यों का मिलान जरूरी होता है।
इसलिए फिलहाल इस प्रकरण को आरोपों और विभागीय जांच के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
मेडिकल स्टोर संचालकों के बीच भी चर्चा
मामला सामने आने के बाद कादरचौक और आसपास के क्षेत्र में औषधि विभाग की कार्रवाई को लेकर चर्चा तेज है। मेडिकल स्टोर संचालकों और स्थानीय लोगों के बीच जांच प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर यह मांग भी सामने आ रही है कि औषधि विभाग की कार्रवाई पूरी तरह स्पष्ट और निर्धारित नियमों के मुताबिक हो। इससे जांच के दौरान किसी तरह के विवाद की गुंजाइश कम होगी और विभागीय कार्रवाई पर लोगों का भरोसा भी मजबूत रहेगा।
हालांकि स्थानीय चर्चाओं और दावों को भी आधिकारिक जांच के निष्कर्ष से अलग रखना जरूरी है।
विभाग के सामने अब कई सवाल
जांच के दौरान विभाग को यह स्पष्ट करना होगा कि मेडिकल स्टोर के खिलाफ मूल शिकायत या सूचना क्या थी और मौके पर किस तरह की कार्रवाई की गई। इसके साथ यह भी देखा जाएगा कि जांच से जुड़े दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड नियमानुसार तैयार किए गए थे या नहीं।
इसके अलावा वायरल वीडियो में दिखाई देने वाली गतिविधि का वास्तविक संदर्भ भी जांच का अहम हिस्सा रहेगा। अगर जांच में किसी नियम के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ लागू नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल ऐसा कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है, इसलिए मामले को जांचाधीन ही माना जाना चाहिए।
सहायक आयुक्त ने क्या कहा
सहायक आयुक्त औषधि संदीप कुमार के मुताबिक मामले में ड्रग इंस्पेक्टर से जवाब मांगा गया है। छापेमारी के दौरान की गई कार्रवाई और उनके साथ मौजूद कर्मचारी के संबंध में भी जानकारी ली जा रही है।
उन्होंने संकेत दिया कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा। यानी फिलहाल विभाग ने कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है, लेकिन किसी व्यक्ति के खिलाफ अंतिम निर्णय जांच पूरी होने के बाद ही लिया जाएगा।
यह स्थिति विभागीय जांच के उस सामान्य सिद्धांत के अनुरूप है, जिसमें संबंधित अधिकारी का पक्ष लेने और उपलब्ध सामग्री की समीक्षा के बाद निष्कर्ष निकाला जाता है।
पारदर्शी कार्रवाई की जरूरत
औषधि विभाग की जिम्मेदारी सिर्फ लाइसेंस और दवाओं से जुड़े नियमों की निगरानी तक सीमित नहीं है। जब किसी मेडिकल स्टोर के खिलाफ जांच या छापेमारी होती है, तो पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
ऐसी कार्रवाई में रिकॉर्ड, जब्ती, नमूने, दस्तावेज और अन्य प्रक्रियाओं का स्पष्ट उल्लेख विवाद की स्थिति को कम कर सकता है। इससे विभागीय अधिकारियों के साथ-साथ मेडिकल कारोबार से जुड़े लोगों के लिए भी स्थिति स्पष्ट रहती है।
बदायूं का यह मामला इसी व्यापक सवाल को सामने लाता है कि नियामक कार्रवाई कितनी पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से की जाती है।
अब आगे क्या होगा
फिलहाल ड्रग इंस्पेक्टर को जवाब देना है और विभाग को उपलब्ध वीडियो तथा अन्य तथ्यों की समीक्षा करनी है। इसके बाद जांच अधिकारी यह तय करेंगे कि मामले में आगे किसी विभागीय कार्रवाई की जरूरत है या नहीं।
यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है। दूसरी ओर, यदि उपलब्ध साक्ष्यों से आरोप पुष्ट नहीं होते हैं तो मामले की स्थिति उसी आधार पर तय होगी।
इसलिए इस समय सबसे अहम घटनाक्रम विभागीय जांच की दिशा और उसके निष्कर्ष पर रहेगा।