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लखनऊ मेट्रो का अंडरग्राउंड सफर तय, चारबाग से चौक तक जमीन के नीचे दौड़ेगी ट्रेन
Wasi Siddiqui
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2026-09-12 13:15:05
लखनऊ मेट्रो के ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर में चारबाग से चौक तक अंडरग्राउंड सेक्शन बनेगा। अमीनाबाद, पांडेयगंज और मेडिकल चौराहा जैसे इलाकों को सीधी मेट्रो कनेक्टिविटी मिलेगी।
📍 लखनऊ, उत्तर प्रदेश
🗓️ 12 सितंबर 2026
✍️ Mohd Naved
लखनऊ में मेट्रो विस्तार की नई तस्वीर
लखनऊ के पुराने शहर में सार्वजनिक परिवहन की तस्वीर बदलने की दिशा में ईस्ट-वेस्ट मेट्रो कॉरिडोर अहम परियोजना बनकर सामने आया है। चारबाग से वसंतकुंज के बीच प्रस्तावित इस कॉरिडोर का बड़ा हिस्सा जमीन के नीचे बनेगा, जिससे घनी आबादी और संकरी सड़कों वाले पुराने लखनऊ में मेट्रो को जगह मिल सकेगी।
उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के विस्तृत परियोजना विवरण के मुताबिक इस कॉरिडोर की कुल लंबाई लगभग 11 किलोमीटर है। इसमें करीब 7 किलोमीटर हिस्सा भूमिगत और करीब 4 किलोमीटर हिस्सा एलिवेटेड रखा गया है। पूरे कॉरिडोर पर 12 स्टेशन प्रस्तावित हैं।
चारबाग से वसंतकुंज तक पूरा रूट
ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर चारबाग से शुरू होकर पुराने लखनऊ के प्रमुख इलाकों से गुजरते हुए वसंतकुंज तक पहुंचेगा। इस रूट को फेज़ वन बी के तहत विकसित किया जा रहा है।
भूमिगत हिस्से में 7 स्टेशन होंगे। इनमें चारबाग, गौतम बुद्ध मार्ग, अमीनाबाद, पांडेयगंज, सिटी रेलवे स्टेशन, मेडिकल चौराहा और चौक शामिल हैं।
इसके बाद मेट्रो एलिवेटेड सेक्शन में पहुंचेगी। यहां ठाकुरगंज, बालागंज, सरफराजगंज, मूसा बाग और वसंतकुंज स्टेशन होंगे।
अमीनाबाद और चौक तक जमीन के नीचे मेट्रो
इस परियोजना का सबसे अहम हिस्सा चारबाग से चौक के बीच का भूमिगत मार्ग है। यह हिस्सा पुराने लखनऊ के उन इलाकों से गुजरेगा जहां सड़कें अपेक्षाकृत संकरी हैं और दिनभर यातायात का दबाव रहता है।
अमीनाबाद और चौक लखनऊ के प्रमुख कारोबारी और सांस्कृतिक केंद्रों में शामिल हैं। यहां बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, कारोबारी और बाहर से आने वाले लोग रोजाना पहुंचते हैं।
भूमिगत मेट्रो का मकसद सड़क के मौजूदा ढांचे पर अतिरिक्त दबाव डाले बिना तेज सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराना है। इससे निर्माण के दौरान यातायात प्रबंधन भी एक अहम चुनौती रहेगा।
सात भूमिगत स्टेशन कहां होंगे
चारबाग के बाद भूमिगत रूट पर गौतम बुद्ध मार्ग स्टेशन आएगा। इसके बाद मेट्रो अमीनाबाद की ओर बढ़ेगी।
अमीनाबाद के बाद पांडेयगंज स्टेशन प्रस्तावित है। इसके बाद सिटी रेलवे स्टेशन और मेडिकल चौराहा स्टेशन आएंगे। भूमिगत सेक्शन का अंतिम स्टेशन चौक होगा।
इसके बाद ठाकुरगंज से मेट्रो एलिवेटेड ट्रैक पर आ जाएगी और बालागंज, सरफराजगंज, मूसा बाग होते हुए वसंतकुंज तक पहुंचेगी। आधिकारिक परियोजना दस्तावेज में यही स्टेशन क्रम दर्ज है।
चारबाग बनेगा अहम इंटरचेंज
इस कॉरिडोर की एक बड़ी विशेषता चारबाग में मौजूदा मेट्रो नेटवर्क से इसका जुड़ाव है। चारबाग स्टेशन पर ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर का कनेक्शन मौजूदा नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर से होगा।
इस इंटरचेंज से यात्रियों को मेट्रो बदलकर शहर के दूसरे हिस्सों तक जाने में सुविधा मिलेगी। यानी चारबाग केवल एक स्टेशन नहीं रहेगा, बल्कि लखनऊ के मेट्रो नेटवर्क में एक अहम ट्रांजिट केंद्र के रूप में इसकी भूमिका और बढ़ेगी।
परियोजना की लागत कितनी है
ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2025 में करीब 5801 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत को मंजूरी दी थी। परियोजना की कुल लंबाई 11.165 किलोमीटर निर्धारित की गई है।
परियोजना के लिए पहले नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप और पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड स्तर पर मंजूरी की प्रक्रिया पूरी हुई। इसके बाद केंद्रीय कैबिनेट से निर्माण की मंजूरी मिली।
अंडरग्राउंड निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया
वर्ष 2026 में उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने भूमिगत हिस्से के सिविल निर्माण के लिए करीब 1877.89 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया। इस टेंडर में चारबाग से चौक के बीच 7 भूमिगत स्टेशनों और सुरंग निर्माण से जुड़े कार्य शामिल हैं।
टेंडर के दायरे में चारबाग, गौतम बुद्ध मार्ग, अमीनाबाद, पांडेयगंज, सिटी रेलवे स्टेशन, मेडिकल चौराहा और चौक स्टेशन शामिल हैं।
इससे साफ है कि भूमिगत हिस्सा अब केवल प्रस्तावित योजना तक सीमित नहीं है। इसके निर्माण से जुड़ी औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है।
पुराने लखनऊ को क्या फायदा होगा
ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर का सबसे बड़ा असर पुराने लखनऊ के परिवहन ढांचे पर पड़ने की उम्मीद है। अमीनाबाद, चौक, पांडेयगंज और ठाकुरगंज जैसे इलाके पहले से घनी आबादी, व्यापारिक गतिविधियों और सड़क यातायात के दबाव से जुड़े हैं।
मेट्रो आने से इन क्षेत्रों तक पहुंचने के लिए निजी वाहनों पर निर्भरता घटाने का विकल्प मिलेगा। यात्रियों को चारबाग जैसे बड़े ट्रांजिट केंद्र से पुराने शहर के अलग-अलग हिस्सों तक सीधे मेट्रो संपर्क का फायदा मिलेगा।
इस कॉरिडोर से ऐतिहासिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच भी बेहतर होगी। परियोजना के मार्ग में पुराने लखनऊ के कई प्रमुख क्षेत्र आते हैं, जहां ऐतिहासिक इमारतें, बाजार और खानपान के बड़े केंद्र मौजूद हैं।
यातायात पर भी पड़ेगा असर
लखनऊ के पुराने शहर की कई सड़कों पर पहले से यातायात का दबाव है। ऐसे में मेट्रो का भूमिगत संचालन सड़क की सतह पर अतिरिक्त ट्रैक या बड़े एलिवेटेड ढांचे की जरूरत को सीमित करता है।
हालांकि निर्माण चरण में स्थिति अलग हो सकती है। सुरंग, स्टेशन और भूमिगत ढांचे के निर्माण के दौरान ट्रैफिक डायवर्जन, यूटिलिटी शिफ्टिंग और स्थानीय कारोबार पर असर जैसे मुद्दों का प्रबंधन जरूरी होगा।
इसलिए परियोजना की कामयाबी केवल मेट्रो लाइन तैयार होने से तय नहीं होगी। निर्माण के दौरान यातायात व्यवस्था और स्थानीय नागरिकों के साथ समन्वय भी महत्वपूर्ण रहेगा।
वसंतकुंज तक एलिवेटेड हिस्सा
चौक के बाद कॉरिडोर एलिवेटेड हो जाएगा। ठाकुरगंज, बालागंज, सरफराजगंज और मूसा बाग होते हुए मेट्रो वसंतकुंज तक पहुंचेगी।
इस हिस्से की लंबाई भूमिगत सेक्शन की तुलना में कम है। आधिकारिक दस्तावेज के मुताबिक पूरे कॉरिडोर में लगभग 4.286 किलोमीटर एलिवेटेड और लगभग 6.879 किलोमीटर भूमिगत हिस्सा है।
इस तरह एक ही कॉरिडोर में लखनऊ को भूमिगत और एलिवेटेड, दोनों तरह की मेट्रो संरचना देखने को मिलेगी।
लखनऊ के मौजूदा मेट्रो नेटवर्क से जुड़ाव
लखनऊ में मौजूदा नॉर्थ-साउथ मेट्रो कॉरिडोर पहले से परिचालन में है। यह चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से मुंशीपुलिया तक शहर के प्रमुख हिस्सों को जोड़ता है।
ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के शुरू होने के बाद चारबाग पर दोनों कॉरिडोर के बीच इंटरचेंज की सुविधा यात्रियों के लिए नेटवर्क को अधिक उपयोगी बनाएगी। इससे अलग-अलग दिशाओं में यात्रा करने वाले यात्रियों को रूट बदलने के लिए सड़क परिवहन पर निर्भरता कम करनी पड़ेगी।
परियोजना कब पूरी होगी
परियोजना दस्तावेजों में निर्माण के लिए करीब 5 वर्ष की समयसीमा का उल्लेख किया गया है। हालांकि वास्तविक समय निर्माण की प्रगति, ठेकेदारों की कार्यक्षमता, भूमि और यूटिलिटी से जुड़े मुद्दों तथा अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगा।
इसलिए फिलहाल यात्रियों के लिए किसी निश्चित परिचालन तारीख को अंतिम मानना उचित नहीं होगा।
रूट का पूरा स्टेशन क्रम
चारबाग से वसंतकुंज तक मेट्रो का प्रस्तावित क्रम इस तरह है। चारबाग, गौतम बुद्ध मार्ग, अमीनाबाद, पांडेयगंज, सिटी रेलवे स्टेशन, मेडिकल चौराहा और चौक भूमिगत स्टेशन होंगे।
इसके बाद ठाकुरगंज, बालागंज, सरफराजगंज, मूसा बाग और वसंतकुंज एलिवेटेड स्टेशन होंगे। कुल 12 स्टेशनों में 7 भूमिगत और 5 एलिवेटेड रहेंगे।
यात्रियों के लिए क्यों अहम है यह परियोजना
इस कॉरिडोर का महत्व केवल मेट्रो के विस्तार तक सीमित नहीं है। यह लखनऊ के पुराने और नए हिस्सों के बीच सार्वजनिक परिवहन की बेहतर कड़ी तैयार करेगा।
चारबाग रेलवे स्टेशन और मौजूदा मेट्रो नेटवर्क से कनेक्टिविटी के कारण शहर के दूसरे हिस्सों से आने वाले यात्रियों के लिए अमीनाबाद, चौक और पुराने लखनऊ के अन्य इलाकों तक पहुंच आसान होगी।
वहीं वसंतकुंज की तरफ बढ़ता एलिवेटेड सेक्शन शहर के विस्तार वाले क्षेत्रों को भी मेट्रो नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में काम करेगा।
आगे क्या होगा
अब परियोजना के लिए निर्माण से जुड़ी निविदा और कार्यान्वयन प्रक्रिया अहम होगी। भूमिगत हिस्से के लिए टेंडर जारी हो चुका है, जबकि डिजाइन और अन्य तकनीकी कार्यों के लिए भी प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। वर्ष 2026 में विस्तृत डिजाइन सलाहकार के चयन की प्रक्रिया में एयेसा को सबसे कम बोली लगाने वाला पक्ष घोषित किया गया था।
आने वाले चरण में निर्माण एजेंसियों की नियुक्ति, साइट पर काम, यूटिलिटी प्रबंधन और सुरंग निर्माण से जुड़ी गतिविधियां महत्वपूर्ण रहेंगी।
लखनऊ मेट्रो का ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर पुराने शहर की परिवहन जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना है। चारबाग से चौक तक भूमिगत मेट्रो और उसके बाद वसंतकुंज तक एलिवेटेड मार्ग शहर के अलग-अलग हिस्सों को एक ही कॉरिडोर में जोड़ने की योजना है।
अमीनाबाद, पांडेयगंज, मेडिकल चौराहा और चौक जैसे इलाकों को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ना लखनऊ के दैनिक यात्रियों के लिए अहम बदलाव होगा। हालांकि इसका वास्तविक फायदा निर्माण पूरा होने और नियमित परिचालन शुरू होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
Wasi Siddiqui
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।