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Uttar Pradesh

योगी की पाती में साक्षरता से एआई तक का संदेश, बोले शिक्षा का मकसद सिर्फ पढ़ना-लिखना नहीं

Mohammad Naved • 2026-09-07 12:59:34
योगी की पाती में साक्षरता से एआई तक का संदेश, बोले शिक्षा का मकसद सिर्फ पढ़ना-लिखना नहीं

योगी आदित्यनाथ ने साक्षरता दिवस से पहले शिक्षा को व्यापक सामाजिक जिम्मेदारी बताते हुए डिजिटल और एआई साक्षरता पर जोर दिया। उन्होंने हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जोड़ने की अपील की।


Location: लखनऊ, उत्तर प्रदेश

Date: September 7, 2026

By: Mohd Naved


लखनऊ। अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस से एक दिन पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों और विद्यार्थियों के नाम एक खुला पत्र लिखकर शिक्षा और साक्षरता के व्यापक महत्व पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल बच्चों को पढ़ना और लिखना सिखाना नहीं है, बल्कि उनके भीतर ज्ञान, संस्कार, अनुशासन, आत्मविश्वास और जीवन को सही दिशा देने वाली समझ विकसित करना भी है।

अपने पत्र में योगी आदित्यनाथ ने पारंपरिक साक्षरता के साथ डिजिटल साक्षरता और कृत्रिम मेधा आधारित तकनीक की समझ को भी मौजूदा दौर की जरूरत बताया। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती तकनीक के बीच नागरिकों को नई प्रौद्योगिकियों की जानकारी से जोड़ना शिक्षा व्यवस्था की अहम जिम्मेदारी है।

शिक्षक की भूमिका पर जोर

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश की शुरुआत शिक्षक दिवस के संदर्भ से की। उन्होंने बताया कि पांच सितंबर को उन्हें 81 शिक्षकों को सम्मानित करने का अवसर मिला। उन्होंने शिक्षकों को ज्ञान के विस्तार और आने वाली पीढ़ियों के मार्गदर्शन की अहम कड़ी बताया।

योगी आदित्यनाथ के मुताबिक शिक्षक विद्यार्थियों में केवल पाठ्यक्रम आधारित ज्ञान विकसित नहीं करते, बल्कि जिज्ञासा, अनुशासन, आत्मविश्वास और जिम्मेदारी की भावना को भी मजबूत करते हैं। उनके पत्र में शिक्षा को व्यक्ति के समग्र विकास से जोड़ने पर विशेष जोर दिखाई देता है।

स्कूल का मकसद सिर्फ अक्षर ज्ञान नहीं

मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि बच्चे विद्यालय क्यों जाते हैं। उनके मुताबिक इसका जवाब केवल पढ़ना-लिखना सीखना नहीं है। शिक्षा का मकसद बच्चों को ज्ञान के साथ जीवन मूल्यों और सही निर्णय लेने की समझ देना भी है।

उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा और गुरुकुल व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि पुराने दौर में शिक्षा को जीवन मूल्यों और दायित्वबोध से जोड़ा जाता था। मुख्यमंत्री ने इसी व्यापक दृष्टिकोण को मौजूदा शिक्षा व्यवस्था के लिए प्रासंगिक बताया।

उनका कहना था कि ज्ञान की सार्थकता तभी है, जब वह व्यक्ति के जीवन को बेहतर बनाने के साथ समाज के लिए भी उपयोगी साबित हो।

डिजिटल साक्षरता के साथ एआई ज्ञान

योगी आदित्यनाथ ने तकनीकी बदलाव को शिक्षा के मौजूदा परिदृश्य का अहम हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि डिजिटल साक्षरता के साथ एआई साक्षरता भी समय की जरूरत है।

मुख्यमंत्री के मुताबिक एआई, डीप-टेक और उभरती प्रौद्योगिकियां शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग और रोजगार के क्षेत्र में नए अवसर पैदा कर रही हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश में तकनीक आधारित पहलों का भी उल्लेख किया।

उन्होंने लखनऊ में विकसित हो रहे एआई सिटी पारिस्थितिकी तंत्र और कानपुर में ड्रोन तथा मानव रहित विमान तकनीक से जुड़े प्रयासों को राज्य के तकनीकी भविष्य की संभावनाओं से जोड़ा।

यह संदेश ऐसे समय आया है, जब शिक्षा व्यवस्था में पारंपरिक पाठ्यक्रम के साथ डिजिटल कौशल, तकनीकी दक्षता और रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण की भूमिका लगातार बढ़ रही है।

सरकारी योजनाओं का किया उल्लेख

मुख्यमंत्री ने शिक्षा की गुणवत्ता और युवाओं के कौशल विकास से जुड़ी राज्य सरकार की कई योजनाओं का भी जिक्र किया। इनमें ऑपरेशन कायाकल्प, मिशन प्रेरणा, मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना और कौशल विकास कार्यक्रम शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में दावा किया कि इन प्रयासों के जरिए विद्यालयी सुविधाओं, शिक्षा की गुणवत्ता, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और युवाओं के कौशल विकास पर ध्यान दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या कम करने और अधिक बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में प्रगति हुई है।

इन उपलब्धियों से जुड़े विस्तृत सरकारी आंकड़े मुख्यमंत्री के इस संदेश में अलग से प्रस्तुत नहीं किए गए हैं। इसलिए ड्रॉपआउट में कमी के दावे को सरकार के पक्ष से किए गए दावे के रूप में देखना उचित है।

साक्षरता को सामाजिक जिम्मेदारी बताया

मुख्यमंत्री ने साक्षरता को केवल सरकार या शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी मानने के बजाय सामाजिक सहभागिता से जोड़ने की अपील की।

उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के आसपास कोई ऐसा व्यक्ति है, जो बुनियादी अक्षर ज्ञान से वंचित है, तो उसे पढ़ना-लिखना सिखाने की कोशिश समाज के हर सदस्य की जिम्मेदारी होनी चाहिए।

उनके अनुसार किसी व्यक्ति को पढ़ने और लिखने का ज्ञान देना उसके सामने ज्ञान, आत्मविश्वास और अवसरों के नए रास्ते खोल सकता है। यह अपील अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के सामाजिक उद्देश्य के अनुरूप है, जिसका केंद्र साक्षरता के महत्व और शिक्षा तक व्यापक पहुंच को लेकर जागरूकता बढ़ाना है।

हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचाने का आह्वान

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में चार प्रमुख लक्ष्यों पर जोर दिया। उनका कहना है कि हर बच्चा विद्यालय पहुंचे, हर विद्यार्थी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, हर युवा कौशल और नवाचार से जुड़े तथा हर नागरिक बुनियादी साक्षरता के साथ डिजिटल ज्ञान और एआई के प्रति भी जागरूक हो।

इस अपील में पारंपरिक साक्षरता और नई तकनीकी समझ को एक साथ जोड़ने की कोशिश दिखाई देती है। इसका सीधा संबंध शिक्षा, रोजगार और तकनीकी बदलाव से भी है।

आज डिजिटल सेवाओं, ऑनलाइन शिक्षा, सरकारी सेवाओं और रोजगार के कई अवसर तकनीक से जुड़े हैं। ऐसे में केवल अक्षर ज्ञान के बजाय डिजिटल दुनिया को समझने की क्षमता भी नागरिक भागीदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा बनती जा रही है।

अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस का संदर्भ

अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस आठ सितंबर को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य दुनिया भर में साक्षरता के महत्व को रेखांकित करना और शिक्षा से वंचित आबादी के लिए जागरूकता तथा प्रयासों को बढ़ावा देना है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का इस अवसर पर दिया गया संदेश बुनियादी साक्षरता से आगे बढ़कर डिजिटल और एआई ज्ञान तक पहुंच बनाने पर केंद्रित है। इससे शिक्षा नीति के सामने मौजूद एक व्यापक सवाल भी सामने आता है कि तकनीकी बदलाव के दौर में स्कूल और उच्च शिक्षा संस्थान विद्यार्थियों को किस तरह की नई दक्षताएं दें।

शिक्षा और तकनीक के बीच बढ़ता संबंध

योगी आदित्यनाथ की पाती में शिक्षा और तकनीक को अलग-अलग विषयों के बजाय एक-दूसरे से जुड़े क्षेत्र के तौर पर पेश किया गया है। एआई और डीप-टेक को लेकर उनका जोर उत्तर प्रदेश में तकनीकी ढांचे और कौशल विकास को आगे बढ़ाने की सरकार की प्राथमिकताओं से भी जुड़ता है।

हालांकि तकनीकी साक्षरता को व्यापक स्तर पर लागू करने के लिए स्कूलों में डिजिटल संसाधन, प्रशिक्षित शिक्षक, इंटरनेट सुविधा और विद्यार्थियों की समान पहुंच जैसे सवाल भी अहम रहेंगे। केवल तकनीक की उपलब्धता से साक्षरता का लक्ष्य पूरा नहीं होता। उसके लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षण और निरंतर प्रशिक्षण भी जरूरी है।

आगे की चुनौती

साक्षरता का दायरा अब केवल पढ़ने और लिखने की क्षमता तक सीमित नहीं रह गया है। डिजिटल सेवाओं के विस्तार और एआई आधारित प्रणालियों के बढ़ते इस्तेमाल ने नागरिकों के सामने नई तरह की ज्ञान संबंधी जरूरतें रखी हैं।

उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में इस लक्ष्य को जमीन पर उतारने की चुनौती भी व्यापक है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच संसाधनों की असमानता, विद्यालयी सुविधाओं की गुणवत्ता, शिक्षक प्रशिक्षण और डिजिटल पहुंच जैसे मुद्दे इस दिशा में अहम रहेंगे।

मुख्यमंत्री की पाती में सरकार की योजनाओं और भविष्य की तकनीकी दिशा का उल्लेख है, लेकिन इन लक्ष्यों की वास्तविक कामयाबी का आकलन शिक्षा के परिणामों, सीखने की गुणवत्ता, स्कूल छोड़ने की दर और डिजिटल पहुंच से जुड़े प्रमाणित आंकड़ों के आधार पर ही किया जा सकेगा।

क्या है मुख्यमंत्री का संदेश

योगी आदित्यनाथ का संदेश मूल रूप से शिक्षा को व्यापक सामाजिक विकास से जोड़ता है। इसमें शिक्षक की भूमिका, बच्चों की शिक्षा, युवाओं के कौशल, डिजिटल साक्षरता और एआई ज्ञान को एक ही व्यापक एजेंडे का हिस्सा बताया गया है।

अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस से पहले जारी यह पत्र सरकार की शिक्षा और तकनीकी प्राथमिकताओं को सामने रखता है। अब अहम सवाल यह रहेगा कि साक्षरता और एआई जागरूकता का यह संदेश विद्यालयों, युवाओं और समाज के स्तर पर कितनी प्रभावी तरह लागू होता है।

साक्षरता का लक्ष्य तभी मजबूत होगा, जब पढ़ाई तक पहुंच के साथ सीखने की गुणवत्ता, डिजिटल समझ और रोजगार से जुड़ी दक्षताओं पर भी समान ध्यान दिया जाए। यही वह कसौटी होगी, जिस पर आने वाले समय में शिक्षा से जुड़े इन दावों और पहलों का असर परखा जाएगा।

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Mohammad Naved

Mohammad Naved

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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