उत्तर प्रदेश की १२वीं पास गृहिणी पूजा दास ने केबीसी १८ में १२.५ लाख रुपये जीते। २५ लाख के कठिन सवाल पर उन्होंने जोखिम से बचते हुए खेल छोड़ दिया।
लोकेशन
वसीलपुर ग्रांट, उत्तर प्रदेश
Date 4/9/2026
By Wasi Siddiqui
केबीसी १८ में १२वीं पास पूजा दास ने जीते १२.५ लाख, २५ लाख के सवाल पर छोड़ा खेल
उत्तर प्रदेश के वसीलपुर ग्रांट की पूजा दास ने कौन बनेगा करोड़पति के १८वें सीजन में अपनी सूझबूझ और आत्मविश्वास से खास पहचान बनाई। सीमित औपचारिक शिक्षा के बावजूद उन्होंने क्विज शो की हॉट सीट तक पहुंचकर कई सवालों का सामना किया और १२.५ लाख रुपये की रकम अपने नाम की।
पूजा ने २५ लाख रुपये के सवाल तक पहुंचने के बाद जोखिम लेने के बजाय खेल छोड़ने का फैसला किया। बाद में उन्होंने जिस जवाब का अनुमान लगाया, वह भी गलत निकला। ऐसे में उनका फैसला आर्थिक तौर पर सुरक्षित साबित हुआ।
गांव से केबीसी की हॉट सीट तक
पूजा दास उत्तर प्रदेश के वसीलपुर ग्रांट की रहने वाली हैं। केबीसी १८ के २ सितंबर के एपिसोड में उन्होंने अमिताभ बच्चन के सामने अपनी जिंदगी और संघर्ष से जुड़े कई पहलू साझा किए।
उनकी कहानी इसलिए भी चर्चा में रही क्योंकि उन्होंने औपचारिक शिक्षा की सीमाओं के बावजूद अपनी सीखने की इच्छा और आत्मविश्वास को कायम रखा। वह १२वीं कक्षा तक पढ़ी हैं, लेकिन उनकी पढ़ाई का सफर एक ही बार में पूरा नहीं हुआ।
पूजा ने १२वीं की पढ़ाई दो बार पूरी की। पहली बार उन्होंने मानविकी विषयों के साथ परीक्षा दी थी। बाद में ससुराल वालों के प्रोत्साहन पर उन्होंने विज्ञान विषयों के साथ दोबारा १२वीं की परीक्षा दी। यह पहल उनके परिवार की ओर से शिक्षा जारी रखने के समर्थन को भी सामने लाती है।
२५ लाख के सवाल पर लिया बड़ा फैसला
केबीसी में पूजा दास ने लगातार सवालों के जवाब देते हुए १२.५ लाख रुपये की रकम तक सफर तय किया। इसके बाद उनके सामने २५ लाख रुपये का सवाल आया।
इस स्तर तक पहुंचते-पहुंचते उनके पास कोई लाइफलाइन बाकी नहीं थी। उन्होंने महाफ्लिप लाइफलाइन का इस्तेमाल कर सवाल बदला, लेकिन नया सवाल भी उनके लिए कठिन साबित हुआ।
सवाल संयुक्त राष्ट्र स्मारक कब्रिस्तान से जुड़ा था। उनसे पूछा गया कि दुनिया में अपनी तरह के इस विशेष कब्रिस्तान का स्थान किस देश में है। विकल्पों में वियतनाम, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, दक्षिण कोरिया और लेबनान शामिल थे।
पूजा ने जोखिम लेने के बजाय १२.५ लाख रुपये पर खेल छोड़ दिया। खेल से बाहर आने के बाद उन्होंने वियतनाम का अनुमान लगाया, लेकिन सही जवाब दक्षिण कोरिया था। दक्षिण कोरिया के बुसान में स्थित संयुक्त राष्ट्र स्मारक कब्रिस्तान कोरियाई युद्ध में मारे गए लोगों की स्मृति से जुड़ा है।
फैसला क्यों महत्वपूर्ण रहा
क्विज शो में ऊंची रकम वाले सवालों पर सही जवाब देने के साथ जोखिम का आकलन भी अहम होता है। पूजा के सामने दो विकल्प थे। वह जवाब का अनुमान लगाकर आगे बढ़तीं या पहले से सुरक्षित रकम लेकर खेल खत्म करतीं।
उन्होंने दूसरा रास्ता चुना। बाद में उनका अनुमान गलत साबित हुआ। इसलिए १२.५ लाख रुपये पर क्विट करने का फैसला उनकी कुल जीत को सुरक्षित रखने में निर्णायक रहा।
यह प्रसंग केबीसी के खेल के उस पहलू को सामने लाता है जिसमें जानकारी के साथ निर्णय लेने की क्षमता भी मायने रखती है।
कम उम्र में माता-पिता को खोया
शो के दौरान पूजा ने अपने बचपन के कठिन दौर के बारे में भी बताया। उनके मुताबिक, जब वह १५ वर्ष की थीं, तब उनकी मां का निधन हो गया। इसके दो साल बाद उनके पिता भी नहीं रहे।
माता-पिता के निधन के बाद उनके गांव में शादी को लेकर दबाव बनने लगा। पूजा ने बताया कि बाद में २१ वर्ष की उम्र में उनकी शादी हुई। वह करीब तीन साल से विवाहित हैं और उनकी एक छोटी बेटी भी है।
ससुराल से मिला पढ़ाई और काम का समर्थन
पूजा ने अपने ससुराल के माहौल के बारे में भी सकारात्मक बात रखी। उन्होंने खास तौर पर अपनी सास कमला मंडल के समर्थन का उल्लेख किया।
पूजा के मुताबिक, उनकी सास ने उनके सपनों को रोकने के बजाय उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। खाना बनाने के वीडियो से डिजिटल कंटेंट की दुनिया में उनकी शुरुआत भी इसी पारिवारिक माहौल से जुड़ी रही।
यह पहल आगे चलकर उनके लिए एक अलग पहचान का जरिया बनी।
रेसिपी वीडियो से कंटेंट क्रिएशन तक
पूजा ने करीब दो साल पहले कंटेंट बनाना शुरू किया था। शुरुआती दौर में वह अपनी सास के साथ रेसिपी वीडियो तैयार करती थीं। धीरे-धीरे उन्होंने अपना कंटेंट दायरा बदला और महिलाओं से जुड़े मुद्दों तथा महिला सशक्तीकरण जैसे विषयों पर बोलना शुरू किया।
उनका अधिकांश डिजिटल कंटेंट अंग्रेजी भाषा में होता है। शो में उन्होंने बताया कि अंग्रेजी में काम करने के पीछे एक वजह आसपास के लोगों की अनावश्यक दखल से दूरी बनाए रखना भी थी।
उनकी अंग्रेजी बातचीत ने अमिताभ बच्चन का भी ध्यान खींचा। पूजा ने बताया कि उन्होंने अंग्रेजी माध्यम वाले स्कूल से १२वीं तक पढ़ाई की थी, इसलिए भाषा को समझने और बोलने में उन्हें मदद मिली।
सोशल मीडिया पर भी बनाई पहचान
पूजा की पहचान अब केवल केबीसी की प्रतियोगी तक सीमित नहीं है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, सोशल मीडिया पर उनके करीब एक लाख पांच हजार फॉलोअर्स हैं और उन्हें ब्रांड सहयोग भी मिलने लगे हैं।
गांव से आने वाली एक गृहिणी के लिए यह डिजिटल यात्रा उनके बदलते सामाजिक और पेशेवर दायरे को दिखाती है। उन्होंने घरेलू जिम्मेदारियों के साथ कंटेंट निर्माण को आगे बढ़ाया और धीरे-धीरे अपनी अलग ऑडियंस तैयार की।
महिलाओं की स्वतंत्रता पर क्या कहा
पूजा ने अपने गांव की महिलाओं की सामाजिक स्थिति को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि गांव में कई महिलाएं पारंपरिक तरीके से घूंघट करती हैं।
उनका रुख किसी की व्यक्तिगत पसंद की मुखालफत करने का नहीं था। वह महिलाओं को अपनी पसंद के मुताबिक शिक्षा, काम और जीवन के दूसरे अवसर चुनने की आजादी देने की पक्षधर नजर आईं।
उनकी बातचीत में शिक्षा और महिला सशक्तीकरण दोनों मुद्दे जुड़े हुए दिखाई दिए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि उनकी अपनी जिंदगी में शिक्षा को आगे बढ़ाने की इच्छा अभी खत्म नहीं हुई है।
आगे शिक्षिका बनने का सपना
केबीसी में शानदार प्रदर्शन के बाद पूजा ने भविष्य की अपनी इच्छा भी साझा की। वह आगे पढ़ाई जारी रखना चाहती हैं और शिक्षिका बनने का सपना देखती हैं।
यह आकांक्षा उनकी मौजूदा यात्रा से भी जुड़ती है। १२वीं के बाद शिक्षा का सिलसिला रुकने के बावजूद उन्होंने दोबारा परीक्षा दी, डिजिटल कंटेंट बनाना शुरू किया और अब उच्च शिक्षा की दिशा में आगे बढ़ने की इच्छा रखती हैं।
१२.५ लाख की जीत से ज्यादा बड़ी कहानी
पूजा दास की केबीसी यात्रा को केवल १२.५ लाख रुपये की जीत के रूप में देखना अधूरा होगा। उनकी कहानी में शिक्षा, पारिवारिक परिस्थितियां, शुरुआती उम्र में माता-पिता का निधन, विवाह, ससुराल से मिला सहयोग और डिजिटल दुनिया में बनाई गई पहचान जैसे कई पहलू शामिल हैं।
केबीसी के मंच ने उन्हें राष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचने का अवसर दिया। वहीं, २५ लाख रुपये के सवाल पर उनका फैसला इस बात का उदाहरण बना कि बड़े इनाम की दौड़ में जोखिम का आकलन भी उतना ही अहम होता है।
ग्रामीण पृष्ठभूमि और सीमित औपचारिक शिक्षा के बावजूद पूजा ने जिस तरह ज्ञान, संवाद और आत्मविश्वास के सहारे खेल को आगे बढ़ाया, उसने उनकी व्यक्तिगत यात्रा को चर्चा में ला दिया।
आगे की राह
१२.५ लाख रुपये की जीत के बाद पूजा के सामने अपनी शिक्षा और डिजिटल काम को आगे बढ़ाने के नए अवसर हैं। शिक्षिका बनने की उनकी इच्छा बताती है कि केबीसी का मंच उनके लिए केवल आर्थिक उपलब्धि तक सीमित नहीं रहा।
उनकी कहानी का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि सीखने की प्रक्रिया औपचारिक शिक्षा पूरी होने के साथ खत्म नहीं होती। पूजा ने अपने अनुभवों के जरिए शिक्षा, आत्मनिर्भरता और महिलाओं की पसंद से जुड़े सवालों को सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बनाया।
केबीसी १८ में उनकी यात्रा २५ लाख रुपये के सवाल पर समाप्त हुई, लेकिन उनके लिए आगे की दिशा अभी खुली है। १२.५ लाख रुपये की जीत के साथ उन्होंने यह भी दिखाया कि हॉट सीट तक पहुंचने के लिए केवल बड़ी डिग्री नहीं, ज्ञान, तैयारी, आत्मविश्वास और सही समय पर सही फैसला भी जरूरी होता है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।