कभी अमिताभ से कहा गया, “बहुत लंबे हो, घर जाओ”
सुपरस्टार बनने से पहले अमिताभ को भी मिला था रिजेक्शन
अमिताभ बच्चन ने बताया, कैसे आलोचनाओं के बीच बनाई पहचान
लोकेशन: मुंबई
तारीख: 18 अगस्त 2026
बायलाइन: Mohd Naved
अमिताभ बच्चन ने केबीसी-18 में अपने शुरुआती संघर्षों को याद किया। उन्होंने बताया कि उन्हें एक्टिंग न आने, ज्यादा लंबा होने और सेट पर देर से पहुंचने जैसी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। यह किस्सा बताता है कि आज के सुपरस्टार का करियर भी रिजेक्शन और कड़ी पेशेवर आलोचना के दौर से गुजरा था।
अमिताभ बच्चन का नाम आज हिंदी सिनेमा की सबसे पहचान योग्य शख्सियतों में शुमार है। लेकिन उनके करियर का शुरुआती दौर उस शोहरत से बिल्कुल अलग था, जो बाद में उन्हें मिली। केबीसी-18 के एक विशेष एपिसोड में उन्होंने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि शुरुआती दौर में उन्हें भी रिजेक्शन, डांट और पेशेवर आलोचना का सामना करना पड़ा था।
क्विज रियलिटी शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के 18वें सीजन के विशेष एपिसोड में अमिताभ बच्चन ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के पदक विजेताओं के साथ बातचीत की। इस दौरान जूडो खिलाड़ी अस्मिता डे ने उनसे पूछा कि जिस तरह खिलाड़ियों को ट्रेनिंग के दौरान कोच की डांट सुननी पड़ती है, क्या अभिनेताओं को भी फिल्म के सेट पर निर्देशक से डांट मिलती है।
अमिताभ बच्चन ने जवाब में अपने शुरुआती दिनों का ज़िक्र किया। उन्होंने बताया कि इंडस्ट्री में जगह बनाने की कोशिश के दौरान उन्हें यह तक सुनना पड़ा कि उन्हें एक्टिंग नहीं आती और वह जरूरत से ज्यादा लंबे हैं।
उनके मुताबिक, लोगों ने उनसे कहा था कि “तुमको तो एक्टिंग-वैक्टिंग कुछ आता ही नहीं, बहुत लंबे हो अपने घर जाओ।” यह टिप्पणी उनके शुरुआती करियर में मौजूद उस पेशेवर संदेह को दिखाती है, जिसका सामना उन्हें करना पड़ा था।
अमिताभ बच्चन ने यह किस्सा ऐसे समय में साझा किया है, जब वह ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के 18वें सीजन की मेज़बानी कर रहे हैं। इस सीजन की थीम “इस बार... सोचना पड़ेगा” रखी गई है और शो का फोकस तेज जवाब के बजाय सोच-विचार और निर्णय क्षमता पर रखा गया है।
विशेष एपिसोड में अमिताभ ने अपने अनुभव को खिलाड़ियों के संघर्ष से जोड़ते हुए यह बताया कि किसी भी पेशे में शुरुआती आलोचना और असफलता अंतिम नतीजा तय नहीं करती।
उनका बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि अमिताभ बच्चन आज भारतीय मनोरंजन उद्योग में पांच दशक से ज्यादा लंबा करियर रखने वाले प्रमुख अभिनेताओं में हैं। उनके करियर की शुरुआत हालांकि सीधे अभिनय से नहीं हुई थी।
1969 में मृणाल सेन की फिल्म ‘भुवन शोम’ में अमिताभ बच्चन ने नैरेटर के तौर पर अपनी आवाज दी थी। मृणाल सेन की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, फिल्म 1969 की है और इसमें उत्पल दत्त तथा सुहासिनी मुले प्रमुख भूमिकाओं में थे।
‘भुवन शोम’ भारतीय समानांतर सिनेमा के इतिहास में अहम स्थान रखती है। भारत सरकार के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से जुड़े दस्तावेजों में भी मृणाल सेन की ‘भुवन शोम’ को 1969 के समानांतर सिनेमा आंदोलन से जुड़े महत्वपूर्ण काम के तौर पर दर्ज किया गया है।
अमिताभ की आवाज को लेकर मृणाल सेन से जुड़ा एक पुराना संस्मरण भी सामने आता है। रिपोर्टों के मुताबिक, सेन को फिल्म के नैरेशन के लिए एक नई और प्रभावशाली आवाज की तलाश थी। इसी सिलसिले में अमिताभ बच्चन को मौका मिला और फिल्म के क्रेडिट में उनका नाम केवल “अमिताभ” के रूप में आया था।
यह दौर उस अमिताभ बच्चन से काफी अलग था, जिसे बाद में हिंदी सिनेमा ने “महानायक” के रूप में पहचाना।
केबीसी के दौरान अमिताभ बच्चन का बयान व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित था। उन्होंने अपने शुरुआती करियर में मिली आलोचना और सेट पर पेशेवर दबाव का उल्लेख किया।
उन्होंने एक अन्य घटना भी याद की, जब वह शूटिंग के लिए देर से पहुंचे थे। उनके मुताबिक, उस समय उनके पास अपनी गाड़ी नहीं थी और वह किसी और की गाड़ी से सेट पर पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि निर्देशक सेट के बाहर खड़े थे और देर से पहुंचने के बाद उन्हें फिल्म से ही निकाल दिया गया।
यह प्रसंग उनके बयान का महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि इससे पता चलता है कि शुरुआती दौर में केवल अभिनय क्षमता ही नहीं, बल्कि पेशेवर अनुशासन और समय की पाबंदी भी करियर पर सीधा असर डाल सकती थी।
केबीसी में अमिताभ बच्चन द्वारा साझा किए गए अनुभव की विस्तृत स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध स्रोतों में उसी शब्दावली के साथ नहीं मिलती। इसलिए उनके बयान को उनके व्यक्तिगत संस्मरण के रूप में देखना उचित है।
वहीं, उनके शुरुआती फिल्मी सफर का एक हिस्सा स्वतंत्र स्रोतों से दर्ज है। ‘भुवन शोम’ में उनकी नैरेशन भूमिका और 1969 में फिल्म से जुड़ाव की जानकारी मृणाल सेन की आधिकारिक वेबसाइट और अन्य प्रतिष्ठित स्रोतों में मिलती है।
उनके करियर के बाद के दौर में भी बदलाव स्पष्ट दिखाई देता है। 2000 में अमिताभ बच्चन ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के मेज़बान बने। उस समय उनका फिल्मी करियर और निजी कारोबारी स्थिति मुश्किल दौर से गुजर रही थी। इंडियन एक्सप्रेस की 2026 की रिपोर्ट में उस दौर को उनके करियर का कठिन चरण बताया गया है।
अमिताभ बच्चन का यह बयान मनोरंजन की दुनिया से आगे एक व्यापक पेशेवर संदेश देता है। किसी कलाकार की शुरुआती असफलता या आलोचना को उसके पूरे करियर का अंतिम मूल्यांकन नहीं माना जा सकता।
फिल्म इंडस्ट्री में प्रतिभा के साथ व्यक्तित्व, स्क्रीन प्रेजेंस, आवाज, अनुशासन और सही अवसर भी अहम भूमिका निभाते हैं। अमिताभ के मामले में उनकी विशिष्ट आवाज और लंबा कद शुरुआती दौर में आलोचना का कारण बताए गए, लेकिन बाद में यही विशेषताएं उनकी पहचान का हिस्सा बन गईं।
यहां एक अहम बात यह भी है कि सफलता को पीछे मुड़कर देखने पर शुरुआती संघर्ष अक्सर कम दिखाई देता है। अमिताभ का किस्सा इस धारणा को चुनौती देता है कि बड़े सितारों को शुरुआत से ही स्वीकार्यता मिल जाती है।
इस खबर का कोई प्रत्यक्ष राजनीतिक या नीतिगत प्रभाव नहीं है। इसका महत्व मुख्य रूप से सांस्कृतिक और सामाजिक संदर्भ में है।
अमिताभ बच्चन का सार्वजनिक जीवन कई पीढ़ियों तक फैला हुआ है। इसलिए उनके करियर से जुड़े ऐसे संस्मरण मनोरंजन उद्योग में पेशेवर संघर्ष, अस्वीकृति और अवसरों की प्रकृति पर सार्वजनिक चर्चा को प्रभावित करते हैं।
मनोरंजन उद्योग में किसी कलाकार का शुरुआती रिजेक्शन उसके आर्थिक भविष्य को भी प्रभावित कर सकता है। लंबे समय तक काम नहीं मिलने की स्थिति में कलाकारों के लिए स्थायी आय, पेशेवर नेटवर्क और नए अवसर हासिल करना कठिन हो जाता है।
अमिताभ बच्चन की कहानी में एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहलू यह है कि बाद की सफलता ने शुरुआती आलोचनाओं को उनके सार्वजनिक व्यक्तित्व का हिस्सा बना दिया। आज वही अनुभव उनके प्रशंसकों के लिए संघर्ष और धैर्य की मिसाल के रूप में देखा जाता है।
अमिताभ बच्चन भारतीय सिनेमा की वैश्विक पहचान से जुड़े प्रमुख नामों में हैं। उनके लंबे करियर का असर हिंदी सिनेमा की अंतरराष्ट्रीय पहचान तक पहुंचा है।
उनका शुरुआती जुड़ाव ‘भुवन शोम’ जैसे समानांतर सिनेमा के काम से हुआ और बाद में वह मुख्यधारा के सबसे बड़े सितारों में शामिल हुए। यह सफर भारतीय सिनेमा में अलग-अलग धाराओं के बीच मौजूद बदलाव को भी दर्शाता है।
अमिताभ बच्चन ने केबीसी में जिन शुरुआती आलोचनाओं का जिक्र किया, उनके पीछे किन-किन निर्देशकों या निर्माताओं की टिप्पणियां थीं, इसका विस्तृत विवरण उनके इस बयान में सामने नहीं आया।
इसी तरह, जिस फिल्म से देर से पहुंचने के कारण उन्हें निकाले जाने की बात उन्होंने बताई, उसका नाम भी इस बातचीत में सामने नहीं आया। इसलिए इस घटना को किसी खास फिल्म या निर्देशक से जोड़ना उपलब्ध सामग्री के आधार पर उचित नहीं होगा।
अमिताभ बच्चन ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के 18वें सीजन की मेज़बानी जारी रख रहे हैं। इस सीजन में शो का केंद्रीय विचार सोच-समझकर फैसला लेने पर आधारित है।
उनका अपने संघर्ष का किस्सा इस सीजन के मूल विचार से भी स्वाभाविक रूप से जुड़ता दिखाई देता है। करियर के शुरुआती दौर में मिली आलोचना के बावजूद उन्होंने अभिनय और मनोरंजन जगत में अपनी जगह कायम की और बाद में टेलीविजन पर भी एक अलग पहचान बनाई।
अमिताभ बच्चन की केबीसी में कही बात का सबसे अहम पहलू उनका स्टारडम नहीं, बल्कि वह शुरुआती दौर है जिसे उन्होंने खुद रिजेक्शन और आलोचना से भरा बताया। उनके मुताबिक, कभी उन्हें एक्टिंग न आने और जरूरत से ज्यादा लंबा होने जैसी टिप्पणियां सुननी पड़ीं, तो कभी देर से पहुंचने पर फिल्म से बाहर कर दिया गया।
उपलब्ध रिकॉर्ड यह भी दिखाते हैं कि उनका शुरुआती फिल्मी जुड़ाव 1969 की ‘भुवन शोम’ में नैरेशन से हुआ था।
इसलिए उनके बयान को एक व्यापक पेशेवर सबक के तौर पर देखा जा सकता है। शुरुआती रिजेक्शन किसी व्यक्ति की अंतिम क्षमता का प्रमाण नहीं होता। असली कसौटी यह है कि आलोचना के बाद वह अपने काम और पेशेवर सफर को किस तरह आगे बढ़ाता है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।