मुजफ्फरनगर में उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक स्कूल विकास मंच की शिक्षक सभा में शिक्षा के प्रसार और संगठन विस्तार पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने गरीब व निरक्षर बच्चों को शिक्षा से जोड़ने पर जोर दिया। कार्यक्रम में नई जिला कार्यकारिणी गठित की गई और शिक्षकों तथा विद्यालय प्रबंधकों को संगठन से जोड़ने का आह्वान किया गया।
📍 मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश
📰 27 जुलाई 2026
✍️ : वसी सिद्दीकी
शिक्षक सभा में शिक्षा के प्रसार और संगठन विस्तार पर जोर
मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक स्कूल विकास मंच के तत्वावधान में मूनलाइट पब्लिक स्कूल, मदीना चौक में शिक्षक सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जनपद के विभिन्न निजी विद्यालयों के प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों ने शिरकत की। सभा में शिक्षा के प्रसार, जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने को लेकर विचार-विमर्श हुआ।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारतीय किसान यूनियन (तोमर) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी संजीव तोमर रहे। अध्यक्षता अशफाक उल्ला खान स्कूल के प्रबंधक जावेद आलम ने की, जबकि संचालन मास्टर इसरार ने किया। आयोजन में शिक्षा से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ विद्यालय संचालकों और शिक्षकों की सामूहिक भूमिका पर भी चर्चा हुई।
शिक्षा को सामाजिक बदलाव का आधार बताया
सभा में वक्ताओं ने सर्व शिक्षा अभियान को प्रभावी बनाने और ऐसे बच्चों तक शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दिया, जो आर्थिक या सामाजिक कारणों से अभी तक शिक्षा की मुख्यधारा से बाहर हैं। वक्ताओं का कहना था कि विद्यालय केवल पढ़ाई का इदारा नहीं, बल्कि समाज में बदलाव की बुनियाद भी हैं।
इस दौरान शिक्षा को लेकर सामूहिक प्रयासों की जरूरत पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि निजी विद्यालयों के प्रबंधक और शिक्षक बच्चों के भविष्य निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनकी जिम्मेदारी केवल शैक्षणिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के कमजोर तबकों तक शिक्षा पहुंचाना भी महत्वपूर्ण है।
संगठन विस्तार को लेकर बनी रणनीति
न्यू एवरग्रीन पब्लिक स्कूल के प्रबंधक मास्टर ताहिर अली ने संगठन की कार्यशैली और अब तक की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने संगठन को मजबूत करने के लिए विद्यालय संचालकों और शिक्षकों से एकजुट होकर काम करने की अपील की।
प्रदेश अध्यक्ष नसीम अहमद त्यागी ने कहा कि विद्यालय संचालकों और प्रबंधकों के कंधों पर समाज और बच्चों के भविष्य की अहम जिम्मेदारी है। उनके मुताबिक इस जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ निभाना जरूरी है।
सभा में संगठन के विस्तार को लेकर यह संदेश भी सामने आया कि ज्यादा से ज्यादा विद्यालयों और शिक्षकों को साथ जोड़कर एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया जाए। हालांकि कार्यक्रम के दौरान संगठन के विस्तार को लेकर कोई विस्तृत सदस्यता आंकड़ा या भविष्य की समयबद्ध कार्ययोजना सार्वजनिक नहीं की गई।
नई जिला कार्यकारिणी का गठन
कार्यक्रम के दौरान भारतीय किसान यूनियन (तोमर) की शिक्षक सभा के विस्तार की घोषणा की गई। आयोजकों के मुताबिक कई शिक्षकों और विद्यालय प्रबंधकों ने संगठन की सदस्यता ग्रहण की। इसके साथ ही जिला कार्यकारिणी का गठन भी किया गया।
मास्टर ताहिर अली को जिला अध्यक्ष, शहजाद अहमद को जिला उपाध्यक्ष, सरवर आलम को जिला सचिव, मौलाना अब्दुल वाजिद को उप सचिव, मोहम्मद नाजिम को जिला प्रभारी और मोहम्मद फिरोज को नगर अध्यक्ष मनोनीत किया गया।
मुख्य अतिथि चौधरी संजीव तोमर ने नवनियुक्त पदाधिकारियों को पटका पहनाकर सदस्यता ग्रहण कराई और उन्हें शुभकामनाएं दीं। उन्होंने संगठन को मजबूत करने और शिक्षा से जुड़े लोगों को व्यापक स्तर पर जोड़ने का आह्वान किया।
शिक्षा और संगठन को लेकर वक्ताओं का नजरिया
कार्यक्रम संचालक मास्टर इसरार ने शिक्षा को व्यक्ति और समाज की दिशा बदलने वाला महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि संगठन में सामूहिक शक्ति होती है और शिक्षा के जरिए समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की जरूरत है।
साहिल सैफी ने भी संगठन के विस्तार पर जोर दिया। उन्होंने अधिक से अधिक विद्यालयों और शिक्षकों को संगठन के साथ जोड़ने की आवश्यकता बताई। उनका फोकस संगठन की पहुंच को व्यापक बनाने पर रहा।
यहां एक अहम पहलू यह है कि शिक्षा के प्रसार और संगठन विस्तार को एक साथ आगे बढ़ाने की बात कही गई। हालांकि इन दोनों लक्ष्यों को जमीन पर लागू करने के लिए किस तरह की कार्ययोजना तैयार की जाएगी, इसका विस्तृत खाका कार्यक्रम में सामने नहीं आया।
कार्यक्रम की पृष्ठभूमि और व्यापक संदर्भ
मुजफ्फरनगर में निजी विद्यालयों से जुड़े प्रबंधकों और शिक्षकों का यह जमावड़ा ऐसे वक्त में हुआ है, जब शिक्षा व्यवस्था में सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों की भूमिका पर लगातार चर्चा होती रहती है। निजी विद्यालयों की पहुंच कई इलाकों में महत्वपूर्ण है और इन संस्थानों के माध्यम से बड़ी संख्या में बच्चे शिक्षा हासिल करते हैं।
ऐसे में विद्यालय संचालकों और शिक्षकों का किसी संगठन के मंच पर एक साथ आना स्थानीय स्तर पर संवाद और नेटवर्किंग के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा सकता है। हालांकि किसी भी संगठन की वास्तविक प्रभावशीलता का आकलन उसके सदस्य संख्या से अधिक उसके काम, निरंतरता और जमीनी परिणामों के आधार पर होता है।
जमीनी असर कितना होगा, यह आगे तय होगा
सभा में गरीब और निरक्षर बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की बात प्रमुखता से उठाई गई। यह एक व्यापक सामाजिक लक्ष्य है, लेकिन इसे हासिल करने के लिए केवल संगठनात्मक विस्तार पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए स्कूलों की पहुंच, आर्थिक मदद, अभिभावकों में जागरूकता और बच्चों की नियमित उपस्थिति जैसे कई पहलुओं पर समानांतर काम करना होगा।
इसी तरह संगठन में नए पदाधिकारियों की नियुक्ति शुरुआती कदम है। असल चुनौती इन पदों को सक्रिय बनाना और विद्यालयों तथा शिक्षकों के स्तर पर नियमित गतिविधियों को आगे बढ़ाना होगी। आने वाले समय में संगठन की कार्यशैली और कार्यक्रमों से यह स्पष्ट होगा कि मौजूदा घोषणा का जमीनी असर कितना व्यापक होता है।
राजनीतिक और सामाजिक पहलू
कार्यक्रम में भारतीय किसान यूनियन (तोमर) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी संजीव तोमर की मौजूदगी भी उल्लेखनीय रही। हालांकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार सभा का मुख्य फोकस शिक्षा और संगठन विस्तार रहा और किसी राजनीतिक मुद्दे को लेकर कोई विस्तृत प्रस्ताव या घोषणा सामने नहीं आई।
फिर भी शिक्षा और सामाजिक संगठनों से जुड़े कार्यक्रमों में सार्वजनिक जीवन के लोगों की भागीदारी व्यापक सामाजिक संवाद का हिस्सा बन सकती है। ऐसे आयोजनों में राजनीतिक और सामाजिक सरोकारों के बीच अंतर बनाए रखना भी जरूरी होता है, ताकि मूल मुद्दे यानी शिक्षा और बच्चों के भविष्य पर ध्यान केंद्रित रहे।
आर्थिक असर और भविष्य की चुनौतियां
शिक्षा के क्षेत्र में किसी भी संगठनात्मक पहल का आर्थिक असर सीधे तौर पर उसके कार्यक्रमों और संसाधनों पर निर्भर करता है। गरीब बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए आर्थिक सहायता, फीस में राहत, शैक्षणिक सामग्री और अन्य सहयोग की जरूरत पड़ सकती है।
फिलहाल उपलब्ध कार्यक्रम विवरण में ऐसी किसी आर्थिक योजना या बजट का उल्लेख नहीं है। इसलिए इस पहल के आर्थिक प्रभाव को लेकर अभी कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
शिक्षक सभा में शिक्षा के प्रसार और संगठन विस्तार को लेकर जो बातें सामने आईं, उनका वास्तविक मूल्यांकन अब आने वाले समय में होगा। यदि संगठन नए पदाधिकारियों के माध्यम से विद्यालयों और शिक्षकों को सक्रिय रूप से जोड़ने के साथ जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा पर ठोस कार्यक्रम शुरू करता है, तो इसका स्थानीय स्तर पर सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है।
संपादकीय
वसी सिद्दीकी
दूसरी ओर, यदि संगठनात्मक विस्तार केवल पदों और सदस्यता तक सीमित रहता है, तो इसके प्रभाव का दायरा सीमित रह सकता है। इसलिए आने वाले दिनों में संगठन की प्राथमिकताएं, जमीनी गतिविधियां और शिक्षा से जुड़े वास्तविक परिणाम इस पहल की दिशा तय करेंगे।
कार्यक्रम को सफल बनाने में जावेद आलम, शहजाद अहमद, सरवर आलम, मोहम्मद नाजिम, शहजाद सैफी, नसीम अहमद त्यागी, अरशद जलाल बेदी, नसीम अहमद, मास्टर ताहिर अली और मास्टर इसरार समेत अनेक शिक्षकों एवं विद्यालय प्रबंधकों का सहयोग रहा।