मुजफ्फरनगर: नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म मामले में डॉ. सम्राट गिरफ्तार
Asif Khan
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2026-08-27 18:36:26
मुजफ्फरनगर में नाबालिग किशोरी के अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म मामले में पुलिस ने सम्राट इंटर कॉलेज के संचालक इरशाद अली को गिरफ्तार किया। जांच जारी है।
📍 मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश
🗓️ 27 अगस्त 2026
✍️ Asif Khan
कॉलेज संचालक पर पुलिस ने कसा शिकंजा
मुजफ्फरनगर में नाबालिग किशोरी के अपहरण के बाद इंटर कॉलेज परिसर में सामूहिक दुष्कर्म के मामले में पुलिस ने गुरुवार को एक और आरोपी को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, सम्राट इंटर कॉलेज के संचालक इरशाद अली उर्फ डॉ. सम्राट को विवेचना के दौरान सामने आए साक्ष्यों के आधार पर मामले में वांछित आरोपी बनाया गया था।
पुलिस का आरोप है कि इरशाद अली की भूमिका घटना की कथित साजिश से जुड़ी हुई सामने आई है। गिरफ्तारी से पहले शहर क्षेत्र के क्षेत्राधिकारी सिद्धार्थ के मिश्रा की निगरानी में जांच टीम ने उससे कई घंटे पूछताछ की। पूछताछ के बाद पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी की पुष्टि की।
मामले की जांच अभी जारी है और पुलिस सभी आरोपियों की भूमिका तथा घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की पड़ताल कर रही है।
पहले भी गिरफ्तार हो चुके हैं आरोपी
पुलिस के अनुसार, इस मामले में मुख्य आरोपी बताए जा रहे नाजिम और डॉ. आदिल समेत 4 आरोपी पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं और जेल भेजे जा चुके हैं। बाद की कार्रवाई में नदीम और कामरान को भी गिरफ्तार किया गया।
पुलिस ने बताया कि मुख्य आरोपी नाजिम ने पुलिस कस्टडी से भागने का प्रयास किया था। इस दौरान वह घायल हुआ था। इसके बाद मामले की जांच आगे बढ़ाते हुए अन्य आरोपियों की तलाश और उनकी कथित भूमिकाओं की पड़ताल की गई।
अब कॉलेज संचालक इरशाद अली की गिरफ्तारी को भी इसी विवेचना की आगे की कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है।
साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई का दावा
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इरशाद अली को केवल पूछताछ के आधार पर आरोपी नहीं बनाया गया, बल्कि विवेचना के दौरान सामने आए साक्ष्यों के आधार पर उसकी भूमिका की जांच की गई। पुलिस का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उसे मामले में वांछित आरोपी बनाया गया था।
पुलिस अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले में विवेचना अभी पूरी नहीं हुई है। घटना से जुड़े सभी तथ्यों, आरोपियों की भूमिका और उनके बीच संभावित संपर्क या संगठित गतिविधियों से जुड़े पहलुओं की जांच की जा रही है।
यहां यह महत्वपूर्ण है कि पुलिस की ओर से लगाए गए आरोप जांच का हिस्सा हैं। अंतिम आपराधिक जिम्मेदारी का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्यों और अदालत के निर्णय के आधार पर होगा।
कई घंटे हुई पूछताछ
सामूहिक दुष्कर्म मामले की जांच कर रहे क्षेत्राधिकारी शहर सिद्धार्थ के मिश्रा ने गुरुवार को कॉलेज संचालक इरशाद अली से पूछताछ की। पुलिस टीम ने उससे घटना और उससे जुड़े अन्य पहलुओं के बारे में जानकारी हासिल की।
पूछताछ के बाद पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी की। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान सामने आए तथ्यों को दूसरे उपलब्ध साक्ष्यों के साथ मिलाकर उसकी कथित भूमिका का आकलन किया गया।
पुलिस अब यह भी देख रही है कि घटना से जुड़े आरोपियों के बीच किसी प्रकार का समन्वय या पूर्व योजना थी या नहीं। इस पहलू पर जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही तस्वीर और स्पष्ट होगी।
पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई पर जोर
मामले को लेकर राज्यमंत्री और नगर विधायक कपिल देव अग्रवाल ने गांधी नगर स्थित अपने आवास पर प्रेस वार्ता की। उन्होंने घटना की निंदा करते हुए कहा कि इसमें शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए पुलिस और प्रशासन गंभीरता से कार्रवाई कर रहे हैं। मंत्री ने यह भी कहा कि जांच के दौरान यदि किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
मंत्री की ओर से दिए गए बयान में जांच को आगे बढ़ाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।
चिकित्सीय योग्यता और अस्पताल से जुड़े दस्तावेजों की जांच
प्रेस वार्ता के दौरान कपिल देव अग्रवाल ने इरशाद अली की चिकित्सीय योग्यता और उसकी प्रैक्टिस से जुड़े दस्तावेजों की जांच कराने की बात कही। इसके साथ ही उसके अस्पताल से संबंधित दस्तावेजों की भी पड़ताल की जानकारी दी गई।
इन दस्तावेजों की जांच का उद्देश्य यह पता लगाना होगा कि संबंधित व्यक्ति की चिकित्सीय योग्यता, प्रैक्टिस और अस्पताल से जुड़े रिकॉर्ड नियमों के अनुरूप हैं या नहीं।
इस संबंध में अंतिम स्थिति संबंधित जांच पूरी होने और सक्षम अधिकारियों की रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी।
मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण की कार्रवाई
मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण की ओर से नोटिस जारी किया गया है। हालांकि, नोटिस से संबंधित विस्तृत कार्रवाई और उसके आधार को लेकर आगे की आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।
ऐसे मामलों में आपराधिक जांच के साथ प्रशासनिक और नियामकीय स्तर पर होने वाली कार्रवाई अलग प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ती है। इसलिए इन दोनों पहलुओं के निष्कर्षों को अलग-अलग देखना जरूरी है।
मुख्यमंत्री को दी गई मामले की जानकारी
राज्यमंत्री ने बताया कि मामले की जानकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी दी गई है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना और घटना में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
मामले में अब पुलिस की अगली कार्रवाई जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों पर निर्भर करेगी। यदि जांच में अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो पुलिस उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई कर सकती है।
नाबालिग पीड़िता की पहचान की सुरक्षा जरूरी
नाबालिग से जुड़े यौन अपराध के मामलों में पीड़िता की पहचान की गोपनीयता बनाए रखना कानून और पत्रकारिता, दोनों दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए इस मामले में पीड़िता की पहचान बताने वाली कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा रही है।
ऐसे मामलों की रिपोर्टिंग में घटना के संवेदनशील पहलुओं को सनसनीखेज तरीके से प्रस्तुत करने के बजाय पुलिस कार्रवाई, कानूनी प्रक्रिया और पीड़ित परिवार के अधिकारों पर ध्यान देना आवश्यक है।
जांच में आगे क्या होगा
पुलिस के सामने अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ, उपलब्ध साक्ष्यों का मिलान और मामले में अन्य संभावित भूमिकाओं की जांच प्रमुख कदम होंगे। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि घटना में शामिल बताए जा रहे लोगों के बीच कोई संगठित गतिविधि या पूर्व योजना थी या नहीं।
कॉलेज संचालक की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा और बढ़ सकता है। हालांकि, किसी भी व्यक्ति की आपराधिक भूमिका को अंतिम रूप से तभी स्थापित माना जाएगा जब जांच और न्यायिक प्रक्रिया में उसके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य सामने आएं।
फिलहाल पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सम्पादकीय दृष्टिकोण
मुजफ्फरनगर के इस संवेदनशील मामले में कॉलेज संचालक इरशाद अली की गिरफ्तारी पुलिस जांच की महत्वपूर्ण कार्रवाई है। पुलिस के मुताबिक, विवेचना के दौरान सामने आए साक्ष्यों के आधार पर उसकी कथित भूमिका की जांच की गई और इसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया।
मामले में पहले से गिरफ्तार आरोपियों के अलावा अब कॉलेज संचालक से जुड़ी भूमिका भी जांच के केंद्र में है। साथ ही पुलिस और प्रशासन द्वारा अन्य संभावित आरोपियों तथा घटना से जुड़े पहलुओं की पड़ताल जारी है।
आगे की स्थिति जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगी। फिलहाल सभी आरोपों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए और अंतिम निष्कर्ष सक्षम अदालत के निर्णय के बाद ही माना जाएगा।
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Asif Khan
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।