बुढ़ाना में जाली नोटों के नेटवर्क का खुलासा, बैंगलौर से कोरियर के जरिए आती थी खेप
Shah Times
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2026-08-06 19:06:15
1 लाख की जाली करेंसी बरामद, बुढ़ाना पुलिस ने तीन आरोपियों को पकड़ा
बैंगलौर से मुजफ्फरनगर तक जाली नोटों का नेटवर्क, तीन गिरफ्तार
500 रुपये के 200 नकली नोट बरामद, कई आरोपी फरार
मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना में पुलिस ने जाली करेंसी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार करने और 500 रुपये के 200 नकली नोट बरामद करने का दावा किया। पुलिस के मुताबिक बैंगलौर से कोरियर के जरिए खेप पहुंचती थी। जांच अब कथित सप्लाई चैन, फरार आरोपियों और नेटवर्क की वास्तविक पहुंच पर केंद्रित है।
📍बुढ़ाना, मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश 📰 6 अगस्त 2026 ✍️ बाय: आसिफ खान
बुढ़ाना में जाली नोट नेटवर्क का खुलासा, 3 गिरफ्तार
मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना में पुलिस ने जाली करेंसी के कथित नेटवर्क का पर्दाफाश करने का दावा किया है। पुलिस के मुताबिक कार्रवाई में 500 रुपये के 200 नकली नोट बरामद किए गए, जिनकी अंकित कीमत एक लाख रुपये है। तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि कई अन्य संदिग्धों की तलाश जारी बताई गई है।
पुलिस के मुताबिक शुरुआती तफ्तीश में बैंगलौर से कोरियर के जरिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक जाली नोट पहुंचाए जाने का कथित कनेक्शन सामने आया है। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड से नहीं हुई है। इसलिए मामले में पुलिस के बयान और अदालत में साबित होने वाले तथ्यों के बीच फर्क बनाए रखना जरूरी है।
पुलिस के मुताबिक कैसे खुला नेटवर्क
पुलिस के अनुसार खुफिया सूचना के आधार पर बुढ़ाना पुलिस ने कार्रवाई की। इस कार्रवाई में सालिम, माजिद और जिशान को गिरफ्तार किए जाने की बात कही गई है। पुलिस का दावा है कि पूछताछ के दौरान जाली करेंसी की सप्लाई और बाजार में उसे खपाने से जुड़े कई अहम सुराग सामने आए।
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों का कथित संपर्क मेरठ और मवाना क्षेत्र में मौजूद कुछ लोगों से था। जांच एजेंसी का दावा है कि एक लाख रुपये की जाली करेंसी करीब 40 हजार रुपये में हासिल की जाती थी। इसके बाद उसे बाजार में चलाने की कोशिश की जाती थी।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि पुलिस पूछताछ में सामने आए आरोप अपने आप में अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं होते। आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप अदालत में साक्ष्यों के आधार पर साबित होना बाकी हैं।
बुढ़ाना जाली नोट मामले में बैंगलौर कनेक्शन
इस मामले का सबसे अहम पहलू कथित बैंगलौर कनेक्शन है। पुलिस के मुताबिक बैंगलौर निवासी माइकल फर्नाडीज जाली करेंसी की सप्लाई चेन में अहम कड़ी बताया जा रहा है। पुलिस का आरोप है कि उसके जरिए कोरियर पार्सल से नोट मुजफ्फरनगर, मेरठ और आसपास के इलाकों तक पहुंचाए जाते थे।
पुलिस के अनुसार पार्सल में कथित तौर पर फर्जी नाम और पते इस्तेमाल किए जाते थे। डिलीवरी के लिए किसी विशेष कोड के इस्तेमाल की बात भी जांच में सामने आने का दावा किया गया है।
अगर जांच में ये दावे प्रमाणित होते हैं, तो मामला स्थानीय स्तर पर नकली नोट चलाने तक सीमित नहीं रहेगा। यह एक ऐसे अंतरराज्यीय सप्लाई नेटवर्क की तरफ इशारा करेगा, जिसमें अलग-अलग शहरों में मौजूद लोग कथित तौर पर अलग-अलग भूमिका निभा रहे थे।
एक लाख रुपये की जाली करेंसी बरामद
पुलिस के मुताबिक कार्रवाई में 500 रुपये के 200 नकली नोट मिले हैं। इन सभी नोटों की अंकित कीमत एक लाख रुपये बताई गई है।
पुलिस का दावा है कि बरामद नोटों की छपाई और क्वालिटी ऐसी थी कि सामान्य नजर से उनके नकली होने का पता लगाना आसान नहीं था। इस दावे की तकनीकी पुष्टि के लिए करेंसी की फोरेंसिक और बैंकिंग जांच अहम होगी।
जाली नोटों की असलियत और उनकी उत्पत्ति का पता लगाना जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि नोट कहां तैयार हुए, किस माध्यम से भेजे गए और किन इलाकों में उनकी सप्लाई हुई।
मुजफ्फरनगर में पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
मुजफ्फरनगर और बुढ़ाना क्षेत्र में पहले भी जाली करेंसी से जुड़े मामले सामने आ चुके हैं। जुलाई 2023 में बुढ़ाना पुलिस और एसओजी की कार्रवाई में 8.29 लाख रुपये से ज्यादा मूल्य की जाली करेंसी बरामद होने और छह लोगों की गिरफ्तारी की रिपोर्ट सामने आई थी। उस मामले में नकली नोट तैयार करने के लिए प्रिंटर और अन्य सामग्री मिलने की बात कही गई थी।
जून 2025 में फुगाना थाना क्षेत्र में पुलिस ने 15.16 लाख रुपये से अधिक की कथित जाली करेंसी बरामद करने का दावा किया था। उस मामले में 500, 200 और 100 रुपये के नकली नोटों का जिक्र हुआ था और दो आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी दी गई थी।
इन पुराने मामलों को मौजूदा प्रकरण से जोड़ना अभी जल्दबाजी होगी। फिर भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाली करेंसी से जुड़े मामलों की मौजूदगी पुलिस के लिए सप्लाई चैन की तहकीकात को अहम बनाती है।
जांच के सामने सबसे बड़े सवाल
मौजूदा कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल जाली नोटों के स्रोत को लेकर है। अगर नोट बाहर से आए थे, तो उनकी प्रिंटिंग कहां हुई और सप्लाई नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे, इसका पता लगाना जरूरी होगा।
दूसरा सवाल कोरियर चैन से जुड़ा है। पुलिस के मुताबिक फर्जी नाम और पते इस्तेमाल किए जाते थे। ऐसे में जांचकर्ताओं को यह देखना होगा कि पार्सल किसने बुक किए, भुगतान किस माध्यम से हुआ और डिलीवरी के बाद रकम या संपर्क किस तरह आगे बढ़ाया गया।
तीसरा सवाल बाजार में पहुंची करेंसी की मात्रा से जुड़ा है। बरामद एक लाख रुपये की जाली करेंसी पूरी खेप का कितना हिस्सा थी, इसका जवाब जांच पूरी होने के बाद ही मिलेगा।
कानून और न्यायिक प्रक्रिया
भारत में जाली करेंसी से जुड़े अपराध गंभीर आपराधिक प्रावधानों के दायरे में आते हैं। भारतीय न्याय संहिता में नकली नोट तैयार करने, उसे असली के तौर पर इस्तेमाल करने, रखने और उससे संबंधित सामग्री या साधन उपलब्ध कराने से जुड़े प्रावधान मौजूद हैं।
किसी आरोपी की गिरफ्तारी का अर्थ दोष सिद्ध होना नहीं है। पुलिस को अदालत के सामने साक्ष्य पेश करने होते हैं और अभियोजन पक्ष को आरोप साबित करने की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
इस मामले में भी पुलिस के आरोप, जांच में सामने आए सुराग और अदालत में स्थापित तथ्य अलग-अलग स्तर हैं। डिजिटल न्यूज़रूम के लिए इन तीनों के बीच स्पष्ट अंतर रखना क्रेडिबिलिटी का अहम हिस्सा है।
आईबी और एलआईयू की भूमिका पर नजर
पुलिस के मुताबिक मामले की गंभीरता को देखते हुए इंटेलिजेंस ब्यूरो और लोकल इंटेलिजेंस यूनिट की भूमिका भी जांच में सामने आई है। हालांकि इन एजेंसियों की वास्तविक कार्रवाई और जांच का दायरा स्वतंत्र रूप से सार्वजनिक नहीं हुआ है।
यदि किसी अंतरराज्यीय नेटवर्क की पुष्टि होती है, तो जांच का दायरा स्थानीय पुलिस से आगे बढ़ सकता है। दूसरे राज्यों की पुलिस, बैंकिंग सिस्टम, कोरियर रिकॉर्ड और डिजिटल ट्रांजैक्शन से जुड़े डेटा की जांच भी अहम हो सकती है।
आर्थिक और सामाजिक असर
जाली करेंसी का असर केवल नकद लेनदेन तक सीमित नहीं रहता। बाजार में नकली नोटों की मौजूदगी से कारोबारियों और आम लोगों के बीच भरोसे पर असर पड़ता है।
छोटे कारोबारियों के लिए जोखिम ज्यादा होता है, क्योंकि रोजाना बड़ी संख्या में नकद लेनदेन होता है। अगर नकली नोट पहचानने में मुश्किल हो, तो नुकसान सीधे कारोबारी की जेब पर पड़ सकता है।
बैंकिंग सिस्टम के लिए भी ऐसे मामलों में फोरेंसिक वेरिफिकेशन, करेंसी सर्कुलेशन और संदिग्ध नोटों की रिपोर्टिंग अहम हो जाती है।
पुलिस के दावे की स्वतंत्र पुष्टि क्यों जरूरी है
इस मामले में पुलिस की तरफ से सामने आए विवरण गंभीर हैं, लेकिन अभी सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। खास तौर पर बैंगलौर कनेक्शन, कथित कोरियर कोड, फर्जी पते और बाजार में जाली नोट खपाने की प्रक्रिया को दस्तावेजी साक्ष्यों से स्थापित करना होगा।
किसी आरोपी को नेटवर्क का अहम सदस्य बताना और अदालत में उस भूमिका को साबित करना दो अलग प्रक्रियाएं हैं। इसी तरह बरामद नोटों का जाली होना और उनके स्रोत का पता लगना भी दो अलग जांच चरण हैं।
यही वजह है कि रिपोर्टिंग में आरोपों को तथ्य के रूप में पेश करने से बचना जरूरी है।
आगे की जांच से क्या तस्वीर सामने आ सकती है
पुलिस की अगली कार्रवाई इस मामले की असल तस्वीर स्पष्ट कर सकती है। बैंगलौर में संभावित दबिश, कोरियर रिकॉर्ड की जांच, मोबाइल और डिजिटल डेटा का विश्लेषण तथा बैंकिंग ट्रेल से कथित सप्लाई चैन के बारे में ज्यादा जानकारी मिल सकती है।
फरार बताए जा रहे लोगों की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ से नेटवर्क के दूसरे हिस्सों का पता चलने की संभावना भी जांच का हिस्सा है। हालांकि इस स्तर पर नेटवर्क की वास्तविक सीमा के बारे में कोई अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
सम्पादकीय दृष्टिकोण
बुढ़ाना जाली नोट मामले में फिलहाल सबसे अहम तथ्य पुलिस द्वारा तीन गिरफ्तारियों और 500 रुपये के 200 नकली नोटों की बरामदगी का दावा है। इसके साथ सामने आया कथित बैंगलौर कोरियर कनेक्शन जांच को स्थानीय स्तर से अंतरराज्यीय स्तर तक ले जाता है।
अब असली कसौटी साक्ष्य होंगे। जाली नोट कहां बने, किसने भेजे, किसने हासिल किए और बाजार तक कैसे पहुंचे, इन सवालों के जवाब जांच और न्यायिक प्रक्रिया से सामने आएंगे। फिलहाल पुलिस के दावों को आरोप के तौर पर देखना और आरोपियों को दोषी घोषित करने से बचना ही तथ्यपरक रिपोर्टिंग का सही रास्ता है।
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Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।