दक्षिण दिल्ली में मणिपुरी संगीतकार चोंगथम विक्रम सिंह की कथित पिटाई के बाद मौत हो गई। पुलिस ने सात आरोपियों को गिरफ्तार किया और एक किशोर को पकड़ा।
Location: New Delhi, Delhi
Date: September 8, 2026
By: Mohd Naved
दक्षिण दिल्ली के किलोकरी गांव में मणिपुर के जाने-माने संगीतकार चोंगथम विक्रम सिंह की मौत के मामले में सामने आए सीसीटीवी फुटेज ने जांच को नया आधार दिया है। फुटेज में कथित तौर पर कुछ लोग घटना के बाद इमारत की सीढ़ियों से नीचे जाते दिखाई दे रहे हैं। पुलिस ने मामले में सात वयस्क आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि 15 वर्षीय एक किशोर को भी पकड़ा गया है।
पुलिस और मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक, विवाद रविवार रात उस समय शुरू हुआ जब सिंह ने अपने घर के बाहर हो रहे शोर-शराबे पर आपत्ति जताई। इसके बाद कथित तौर पर विवाद बढ़ा और उनका पीछा करते हुए हमलावर इमारत की तीसरी मंजिल तक पहुंचे, जहां उनके साथ मारपीट की गई। गंभीर रूप से घायल सिंह की सोमवार सुबह इलाज के दौरान मौत हो गई।
पुलिस के अनुसार, चोंगथम विक्रम सिंह रविवार रात करीब साढ़े 11 बजे अपने तीसरी मंजिल स्थित फ्लैट से नीचे आए थे। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक वह कूड़ा फेंकने के लिए बाहर निकले थे। इसी दौरान उन्हें आसपास मौजूद लोगों के शोर और कथित हुड़दंग पर आपत्ति हुई।
बताया गया है कि आसपास के दो ढाबों से जुड़े कुछ कर्मचारी और डिलीवरी से जुड़े लोग वहां मौजूद थे। सिंह और वहां मौजूद लोगों के बीच बहस हुई। इसके बाद स्थिति बिगड़ गई और मामला कथित मारपीट तक पहुंच गया।
मामले से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, विवाद के बाद सिंह अपने घर की तरफ लौटे। आरोप है कि कुछ लोगों ने उनका पीछा किया और उन्हें इमारत की तीसरी मंजिल तक घेर लिया।
बताया गया है कि तीसरी मंजिल के कॉरिडोर में सिंह के साथ मारपीट की गई। इसके बाद आरोपी वहां से निकल गए। इस घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि के लिए पुलिस जांच और सीसीटीवी साक्ष्यों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मामले में सामने आए सीसीटीवी फुटेज को लेकर पूर्व मणिपुर मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने भी जांच की मांग की है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक फुटेज में कई लोग इमारत की सीढ़ियों से नीचे जाते दिखाई दे रहे हैं। यह फुटेज कथित हमले के बाद का बताया गया है।
फुटेज अपने आप में यह स्थापित नहीं करता कि उसमें दिखाई देने वाले हर व्यक्ति ने मारपीट में हिस्सा लिया था। आरोपियों की भूमिका पुलिस जांच, प्रत्यक्षदर्शी बयानों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर तय होगी। यही वजह है कि सीसीटीवी को मामले में एक महत्वपूर्ण जांच साक्ष्य के तौर पर देखा जा रहा है, अंतिम न्यायिक निष्कर्ष के तौर पर नहीं।
दिल्ली पुलिस के दक्षिण-पूर्वी जिले के अधिकारियों के मुताबिक, सनलाइट कॉलोनी थाने को सोमवार रात करीब 1 बजकर 38 मिनट पर मारपीट की सूचना मिली थी। परिवार के लोग सिंह को इलाज के लिए ओखला स्थित निजी अस्पताल ले गए।
रिपोर्टों के अनुसार, गंभीर चोटों के कारण इलाज के दौरान सोमवार सुबह करीब 7 बजे उनकी मौत हो गई। पुलिस ने इसके बाद हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
दिल्ली पुलिस ने जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी निगरानी और स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी का इस्तेमाल करते हुए संदिग्धों की पहचान की। पुलिस के अनुसार सात वयस्कों को गिरफ्तार किया गया है और 15 वर्षीय एक किशोर को भी पकड़ा गया है।
पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(2) और 3(5) के तहत कार्रवाई की है। धारा 103(2) उन परिस्थितियों में समूह द्वारा हत्या से संबंधित है जिन्हें कानून में विशेष रूप से परिभाषित किया गया है। धारा 3(5) कई व्यक्तियों द्वारा साझा मंशा के तहत किए गए कृत्य से संबंधित है। मामले में इन धाराओं का अंतिम कानूनी परीक्षण अदालत की कार्यवाही के दौरान होगा।
चोंगथम विक्रम सिंह मणिपुर के चर्चित संगीतकार और गिटारवादक थे। उन्होंने मणिपुर के रॉक संगीत परिदृश्य में शुरुआती दौर में अहम भूमिका निभाई थी और फीनिक्स जैसे बैंड से जुड़े रहे थे।
बाद के वर्षों में उन्होंने दिल्ली में निजी संगीत शिक्षक के रूप में काम किया। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक वह करीब 17 वर्षों से दिल्ली में रह रहे थे। वह अपनी पत्नी और 20 वर्षीय बेटे के साथ किलोकरी में रहते थे।
उनकी मौत ने मणिपुर के संगीत और सांस्कृतिक समुदाय में शोक की लहर पैदा की है। पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह समेत कई लोगों ने घटना पर प्रतिक्रिया दी और निष्पक्ष जांच तथा त्वरित कार्रवाई की मांग की है।
इस घटना ने दिल्ली में पूर्वोत्तर राज्यों से आने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। हालांकि मौजूदा जांच में हत्या के पीछे वास्तविक मंशा क्या थी, यह अभी पुलिस जांच का विषय है।
शोर-शराबे को लेकर शुरू हुआ विवाद किस तरह घातक हिंसा में बदल गया, यह जांच का अहम पहलू है। साथ ही पुलिस को यह भी स्पष्ट करना होगा कि घटना में शामिल प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका क्या थी और क्या हमले के पीछे कोई अन्य वजह भी मौजूद थी।
किसी आरोपी की पहचान या गिरफ्तारी को दोष सिद्धि नहीं माना जा सकता। अदालत में पेश होने वाले साक्ष्य और जांच के निष्कर्ष ही मामले की कानूनी दिशा तय करेंगे।
सीसीटीवी फुटेज इस मामले में घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में मदद कर सकता है। जांच एजेंसियां फुटेज के जरिए संदिग्धों की गतिविधियों, घटनास्थल पर उनकी मौजूदगी और हमले के बाद उनके निकलने के रास्ते की पड़ताल कर रही हैं।
इसके साथ ही पुलिस के सामने यह चुनौती भी है कि फुटेज में दिखाई देने वाले लोगों की पहचान को दूसरे साक्ष्यों से मिलाया जाए। तकनीकी निगरानी, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्य जांच की अगली कड़ी होंगे।
किलोकरी की घटना ने महानगर में रात के समय सार्वजनिक स्थानों और आवासीय इलाकों में होने वाले विवादों को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। छोटी कहासुनी का हिंसक रूप लेना कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती है।
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि पुलिस आरोपों की निष्पक्ष जांच पूरी करे, प्रत्येक आरोपी की भूमिका स्पष्ट करे और अदालत के सामने पर्याप्त साक्ष्य रखे। साथ ही पूर्वोत्तर राज्यों से आने वाले नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े व्यापक सवालों पर भी प्रशासन को गंभीरता से ध्यान देना होगा।
पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ, सीसीटीवी फुटेज की जांच और घटनाक्रम से जुड़े अन्य साक्ष्यों को जोड़ने की प्रक्रिया में है। पोस्टमार्टम और मेडिकल दस्तावेज भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होंगे।
मामले की कानूनी दिशा जांच के निष्कर्ष और अदालत में पेश होने वाले साक्ष्यों पर निर्भर करेगी। फिलहाल सीसीटीवी फुटेज ने घटना के बाद संदिग्धों की गतिविधियों को लेकर एक महत्वपूर्ण दृश्य साक्ष्य सामने रखा है, लेकिन पूरी वारदात की अंतिम तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
चोंगथम विक्रम सिंह की मौत एक परिवार के लिए गहरा सदमा है और दिल्ली के सांस्कृतिक समुदाय के लिए भी बड़ा नुकसान। अब जांच की विश्वसनीयता इस बात से तय होगी कि पुलिस घटना की हर कड़ी को कितनी पारदर्शिता और साक्ष्य आधारित तरीके से सामने लाती है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।