दिल्ली में फर्जी NIA-ATS अधिकारियों ने बुजुर्ग दंपति को लाल किला ब्लास्ट से जोड़कर डिजिटल अरेस्ट किया और 30 लाख रुपये ठग लिए।
नई दिल्ली | 2 सितंबर 2026 | शाह टाइम्स
By Mohd Haris
दिल्ली के द्वारका में साइबर ठगी का एक गंभीर मामला सामने आया है। 74 वर्षीय रिटायर्ड रेलवे कर्मचारी और उनकी पत्नी को ठगों ने NIA और ATS अधिकारी बनकर करीब सात दिन तक डिजिटल निगरानी में रखा। आरोपियों ने बुजुर्ग को लाल किला ब्लास्ट की जांच से जोड़ने और आतंकियों को फंडिंग करने का आरोप लगाते हुए गिरफ्तारी की धमकी दी। इसके बाद दंपति से 30 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए गए।
पुलिस के मुताबिक मामला 23 नवंबर 2025 का है। बुजुर्ग किसी रिश्तेदार की शादी में जाने की तैयारी कर रहे थे, तभी शाम करीब 4 बजे उनके पास फोन आया।
फोन करने वाले ने खुद को National Investigation Agency यानी NIA का अधिकारी बताया। उसने दावा किया कि बुजुर्ग का बैंक अकाउंट लाल किला ब्लास्ट से जुड़े आरोपियों की फंडिंग में इस्तेमाल हुआ है।
चूंकि यह कॉल ब्लास्ट की घटना के कुछ ही समय बाद आया था, इसलिए धमकी ने बुजुर्ग पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया। इसके बाद कथित ठगों ने वीडियो कॉल शुरू कर दी। एक व्यक्ति ने खुद को NIA अधिकारी बताया, जबकि दूसरे ने ATS अधिकारी होने का दावा किया।
इसके बाद दंपति को तथाकथित डिजिटल अरेस्ट में रखा गया। उन्हें लगातार फोन और वीडियो कॉल पर उपलब्ध रहने के लिए मजबूर किया गया।
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने दंपति को किसी दूसरे व्यक्ति से मामले की जानकारी साझा करने से मना किया। यहां तक कि उन्हें अपने बच्चों को भी इस बारे में बताने से रोका गया।
ठगों ने WhatsApp पर एक कथित Confidentiality Agreement भेजा। बुजुर्ग से उस दस्तावेज पर हस्ताक्षर भी करवाए गए।
इसके बाद आरोपियों ने बैंक खातों, Fixed Deposits और दूसरी संपत्तियों से जुड़ी जानकारी हासिल की। इस तरह ठगों ने पहले पीड़ित की आर्थिक स्थिति का जायजा लिया और फिर रकम निकालने की प्रक्रिया शुरू की।
कुछ दिनों बाद आरोपियों ने दंपति को बताया कि जांच लगभग पूरी हो चुकी है। अब केवल पैसों के स्रोत की जांच बाकी है।
उन्हें भरोसा दिलाया गया कि रकम एक कथित RBI-approved खाते में भेजनी होगी और जांच पूरी होने के बाद पूरी राशि वापस कर दी जाएगी।
3 दिसंबर को बुजुर्ग ने अपनी Fixed Deposit तोड़ी और 30 लाख रुपये निकाले। पहले 15 लाख रुपये RTGS के जरिए बताए गए खाते में भेजे गए। अगले दिन उनसे 15 लाख रुपये और ट्रांसफर कराए गए।
इसके बाद आरोपियों ने RBI के नाम से एक कथित Verification Letter भेजा। दस्तावेज पर RBI Governor की मुहर होने का दावा किया गया था। इसके बाद आरोपियों ने संपर्क बंद कर दिया।
ठगी की शिकायत के बाद मामला Crime Branch को सौंपा गया। जांचकर्ताओं ने RTGS ट्रांजैक्शन का Money Trail खंगालना शुरू किया।
करीब छह महीने बाद पुलिस को एक अहम सुराग मिला। जांच में सामने आया कि 15 लाख रुपये की एक रकम Shri Balaji Tractor नाम के खाते में गई थी। यह खाता हरियाणा के फतेहाबाद निवासी सुनील सिंगला से जुड़ा था।
पुलिस के मुताबिक, इस खाते का इस्तेमाल पहले भी साइबर फ्रॉड के मामलों में हुआ था। जांच में छह से ज्यादा मामलों में करीब 1 करोड़ रुपये के लेन-देन का पता चला।
पुलिस ने सुनील सिंगला को 11 मई को गिरफ्तार किया। India Today के अनुसार, जांच में उसका संबंध सात अन्य साइबर फ्रॉड मामलों से भी सामने आया।
पुलिस के मुताबिक पूछताछ में सिंगला ने बताया कि वह अपना कारोबार बढ़ाने के लिए ऑनलाइन लोन की तलाश कर रहा था। इसी दौरान एक व्यक्ति ने उससे संपर्क किया और उसके बैंक खाते से बड़े ट्रांजैक्शन कराने के बदले कमीशन देने की पेशकश की।
जांच में पुलिस को यह भी पता चला कि पीड़ित द्वारा भेजी गई 15 लाख रुपये की रकम में से केवल 3 लाख रुपये आगे ट्रांसफर हो सके। इसी वजह से पुलिस 12 लाख रुपये रिकवर करके पीड़ित को वापस कराने में कामयाब रही।
Digital Arrest कोई वास्तविक कानूनी गिरफ्तारी प्रक्रिया नहीं है। इसमें साइबर अपराधी पुलिस, NIA, CBI, RBI या दूसरी सरकारी एजेंसियों के अधिकारी बनकर फोन या वीडियो कॉल करते हैं।
गृह मंत्रालय ने 2024 में ऐसे मामलों को लेकर चेतावनी जारी की थी। मंत्रालय के मुताबिक ठग फर्जी सरकारी दफ्तर, वर्दी, दस्तावेज और वीडियो कॉल का इस्तेमाल करके पीड़ित को विश्वास दिलाते हैं कि वह किसी कानूनी कार्रवाई में फंस चुका है। इसके बाद पैसे की मांग की जाती है।
इस मामले में भी यही पैटर्न दिखाई दिया। पहले गंभीर अपराध से जोड़कर डर पैदा किया गया। फिर कथित जांच के नाम पर निजी और वित्तीय जानकारी ली गई। इसके बाद पैसे को Verification के नाम पर ट्रांसफर कराया गया।
इस तरह की ठगी में केवल फर्जी पहचान ही हथियार नहीं होती। ठग पीड़ित को मानसिक रूप से अलग-थलग करते हैं।
उसे कहा जाता है कि वह किसी से बात न करे। परिवार को जानकारी न दे। कॉल काटे नहीं। कैमरा बंद न करे। फिर लगातार नए दस्तावेज और नए अधिकारी सामने लाकर यह विश्वास पैदा किया जाता है कि जांच वास्तविक है।
गृह मंत्रालय ने लोगों से ऐसे मामलों की सूचना तुरंत National Cyber Crime Reporting Portal या 1930 हेल्पलाइन पर देने की अपील की है।
अगर कोई फोन करके खुद को पुलिस, NIA, CBI, RBI या किसी दूसरी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताता है और गिरफ्तारी या जांच के नाम पर पैसे मांगता है, तो रकम ट्रांसफर न करें।
वीडियो कॉल पर लगातार बने रहने के दबाव में न आएं। परिवार के किसी सदस्य को तुरंत जानकारी दें।
किसी भी कथित अधिकारी की पहचान स्वतंत्र तरीके से संबंधित सरकारी संस्था के आधिकारिक संपर्क माध्यम से सत्यापित करें।
सबसे अहम बात, जांच या गिरफ्तारी से बचाने के नाम पर किसी सरकारी एजेंसी को निजी खाते में पैसे ट्रांसफर करने की मांग को सामान्य कानूनी प्रक्रिया न मानें।
अगर पैसा ट्रांसफर हो चुका है, तो समय बर्बाद न करें। तुरंत 1930 पर शिकायत करें और National Cyber Crime Reporting Portal पर रिपोर्ट दर्ज करें।
इस केस में ठगों ने किसी सामान्य इनाम, लोन या KYC बहाने के बजाय एक हाई-प्रोफाइल आपराधिक घटना को डर पैदा करने के लिए इस्तेमाल किया।
यही इस फ्रॉड का सबसे गंभीर पहलू है। किसी हालिया घटना की जानकारी को आधार बनाकर ठग अपने झूठे दावे को विश्वसनीय बनाने की कोशिश करते हैं।
दंपति से 30 लाख रुपये की ठगी हुई, लेकिन पुलिस की जांच से 12 लाख रुपये वापस भी मिले। यह Money Trail को जल्द रिपोर्ट करने की अहमियत दिखाता है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।