मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश
21 अगस्त 2026
By Wasi Siddiqui
मुजफ्फरनगर के नचिकेता स्कूल में साइबर अपराध और बाल सुरक्षा पर जागरूकता गोष्ठी आयोजित हुई। पुलिस अधिकारियों ने छात्रों को ऑनलाइन फ्रॉड, साइबर बुलिंग, फेक प्रोफाइल, ग्रूमिंग और ब्लैकमेलिंग से बचने के उपाय बताए। पुलिस ने निजी जानकारी साझा न करने और साइबर अपराध की शिकायत 1930 तथा पोर्टल पर करने की सलाह दी।
मुजफ्फरनगर के नचिकेता स्कूल में 21 अगस्त को साइबर अपराध और बाल सुरक्षा को लेकर जागरूकता गोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक अपराध इन्दु सिद्धार्थ और साइबर क्राइम थाना प्रभारी कर्मवीर सिंह ने विद्यार्थियों और शिक्षकों को डिजिटल दुनिया में मौजूद जोखिमों की जानकारी दी।
पुलिस के मुताबिक, कार्यक्रम का मकसद बच्चों और युवाओं को साइबर अपराध के तौर-तरीकों से परिचित कराना और उन्हें सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के प्रति सजग करना था। गोष्ठी में ऑनलाइन गेमिंग फ्रॉड, सोशल मीडिया फ्रॉड, फेक प्रोफाइल, साइबर बुलिंग, ओटीपी फ्रॉड, फिशिंग लिंक, एपीके फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन वित्तीय ठगी, ऑनलाइन ग्रूमिंग और ब्लैकमेलिंग जैसे मामलों पर चर्चा हुई।
पुलिस की ओर से विद्यार्थियों को बताया गया कि साइबर अपराधी सोशल मीडिया, गेमिंग प्लेटफॉर्म और चैटिंग एप्स के जरिए बच्चों से संपर्क स्थापित कर सकते हैं। शुरुआत में सामान्य बातचीत या दोस्ती के जरिए भरोसा कायम करने के बाद अपराधी निजी जानकारी, फोटो, वीडियो या लोकेशन हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं।
पुलिस ने छात्रों से अज्ञात लोगों के साथ व्यक्तिगत जानकारी साझा न करने की अपील की। किसी अनजान व्यक्ति की ओर से अनुचित संदेश, फोटो की मांग या धमकी मिलने पर अभिभावकों, शिक्षकों या पुलिस को तत्काल सूचना देने की सलाह दी गई।
स्कूली बच्चों का डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ता इस्तेमाल साइबर सुरक्षा को शिक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा बना रहा है। ऑनलाइन गेमिंग, सोशल मीडिया और मैसेजिंग एप्स बच्चों को संवाद और सीखने के अवसर देते हैं, लेकिन इन्हीं प्लेटफॉर्म पर फर्जी पहचान, धोखाधड़ी और ऑनलाइन शोषण का खतरा भी मौजूद रहता है।
दिल्ली शिक्षा निदेशालय की 2026 की साइबर सुरक्षा गाइडलाइन में भी ऑनलाइन ग्रूमिंग को बच्चों के लिए गंभीर जोखिम बताया गया है। गाइडलाइन में निजी जानकारी साझा न करने, संदिग्ध निजी बातचीत से बचने और किसी अनुचित संपर्क की जानकारी अभिभावक या शिक्षक को देने की सलाह दी गई है।
मुजफ्फरनगर पुलिस की ओर से साइबर अपराध के खिलाफ जागरूकता अभियान पहले भी चलाए जाते रहे हैं। इस वर्ष जिले में साइबर सुरक्षा से जुड़े अलग-अलग जागरूकता कार्यक्रमों में पुलिस अधीक्षक अपराध इन्दु सिद्धार्थ की भागीदारी की खबरें सामने आई हैं। मई 2026 में स्कूल स्तर पर आयोजित कार्यक्रमों में भी विद्यार्थियों को सोशल मीडिया, ऑनलाइन फ्रॉड और साइबर बुलिंग के प्रति सतर्क किया गया था।
जिले में साइबर अपराध के मामलों पर पुलिस कार्रवाई भी सामने आती रही है। 2026 में मुजफ्फरनगर साइबर क्राइम थाना पुलिस ने ऑनलाइन धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में आरोपियों की गिरफ्तारी और साइबर ठगी की रकम वापस कराने की कार्रवाई की है।
नचिकेता स्कूल में आयोजित मौजूदा कार्यक्रम इसी व्यापक साइबर जागरूकता अभियान की कड़ी के रूप में सामने आया है। मूल पुलिस सूचना के मुताबिक, विद्यालय के छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों ने इसमें हिस्सा लिया।
पुलिस अधीक्षक अपराध इन्दु सिद्धार्थ ने विद्यार्थियों को ऑनलाइन गतिविधियों के दौरान सतर्क रहने की सलाह दी। पुलिस का जोर इस बात पर रहा कि बच्चे किसी अनजान व्यक्ति को अपनी व्यक्तिगत जानकारी, फोटो, वीडियो या लोकेशन उपलब्ध न कराएं।
साइबर क्राइम थाना प्रभारी कर्मवीर सिंह और टीम ने साइबर सुरक्षा से जुड़े व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी। इनमें अज्ञात लिंक और क्यूआर कोड से बचना, संदिग्ध एप डाउनलोड न करना और बैंकिंग से जुड़ी गोपनीय जानकारी साझा न करना शामिल रहा।
भारत सरकार के साइबर अपराध रिपोर्टिंग सिस्टम के मुताबिक, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध समेत विभिन्न प्रकार के साइबर अपराधों की शिकायत के लिए इस्तेमाल होता है। वित्तीय साइबर फ्रॉड की स्थिति में 1930 हेल्पलाइन के जरिए तत्काल शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2023-24 से 2025-26 के दौरान राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर 53.87 लाख से अधिक साइबर फ्रॉड शिकायतें दर्ज हुईं। इसी अवधि में 5,6087 करोड़ रुपये से अधिक की रकम रिपोर्ट की गई और 9,079 करोड़ रुपये से अधिक की रकम पर लियन मार्क किया गया।
ये आंकड़े यह दिखाते हैं कि साइबर अपराध अब केवल तकनीकी समस्या नहीं रहा। इसका सीधा असर परिवारों, छात्रों, कारोबारियों और आम नागरिकों पर पड़ रहा है।
स्कूल स्तर पर जागरूकता का सबसे अहम असर यह हो सकता है कि बच्चे संदिग्ध डिजिटल व्यवहार को शुरुआती चरण में पहचान सकें। खासकर ऑनलाइन ग्रूमिंग और ब्लैकमेलिंग जैसे मामलों में समय पर सूचना देना महत्वपूर्ण है।
ऑनलाइन ग्रूमिंग में अपराधी पहले बच्चे के साथ भरोसे का रिश्ता बनाने की कोशिश करता है। इसके बाद निजी बातचीत, तस्वीरों या अन्य संवेदनशील सामग्री की मांग की जा सकती है। सरकारी साइबर सुरक्षा दिशा-निर्देश भी ऐसे मामलों में बच्चे को चुप रहने के बजाय भरोसेमंद वयस्क को तुरंत जानकारी देने पर जोर देते हैं।
इस कार्यक्रम का सीधा राजनीतिक असर नहीं है। इसका प्रमुख पहलू सार्वजनिक सुरक्षा और डिजिटल साक्षरता से जुड़ा है।
नीतिगत स्तर पर ऐसे कार्यक्रम स्कूलों में साइबर सुरक्षा शिक्षा की जरूरत को रेखांकित करते हैं। केवल पुलिस कार्रवाई से साइबर अपराध पर रोक लगाना कठिन है। बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों को डिजिटल जोखिमों की पहचान और रिपोर्टिंग प्रक्रिया की जानकारी होना भी जरूरी है।
साइबर ठगी का आर्थिक नुकसान परिवारों पर सीधा पड़ता है। बच्चों से जुड़े मामलों में आर्थिक नुकसान के साथ सामाजिक और मानसिक दबाव भी जुड़ सकता है।
फर्जी प्रोफाइल, ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग और साइबर बुलिंग जैसी घटनाएं पीड़ित की सामाजिक स्थिति और पढ़ाई पर असर डाल सकती हैं। इसलिए पुलिस की ओर से स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना रोकथाम की रणनीति का हिस्सा बनता है।
ऑनलाइन अपराध की कोई स्थानीय सीमा नहीं होती। एक अपराधी दूसरे शहर या राज्य से बैठकर किसी छात्र को निशाना बना सकता है। सोशल मीडिया और गेमिंग प्लेटफॉर्म की वैश्विक प्रकृति इस जोखिम को और जटिल बनाती है।
मुजफ्फरनगर जैसे जिलों में स्कूल आधारित जागरूकता कार्यक्रम स्थानीय स्तर पर इसी व्यापक साइबर सुरक्षा चुनौती का जवाब हैं। पुलिस, स्कूल प्रशासन और अभिभावकों के बीच बेहतर समन्वय इस व्यवस्था को ज्यादा प्रभावी बना सकता है।
मौजूदा पुलिस सूचना में यह नहीं बताया गया है कि कार्यक्रम में कितने विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि कार्यक्रम के बाद किसी विशेष साइबर शिकायत या घटना की रिपोर्ट सामने आई या नहीं।
पुलिस सूचना में भविष्य के जागरूकता कार्यक्रमों को जारी रखने की बात कही गई है। इनके परिणामों का आकलन करने के लिए यह देखना जरूरी होगा कि छात्रों और अभिभावकों की साइबर शिकायतों की रिपोर्टिंग तथा डिजिटल सुरक्षा व्यवहार में कितना बदलाव आता है।
मुजफ्फरनगर साइबर थाना की ओर से भविष्य में भी ऐसे जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाने की बात कही गई है। स्कूल स्तर पर साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण को नियमित किया जाता है तो विद्यार्थियों को फ्रॉड, फिशिंग, फेक प्रोफाइल और ऑनलाइन ग्रूमिंग जैसे जोखिमों की पहचान में मदद मिलेगी।
किसी साइबर वित्तीय ठगी की स्थिति में 1930 पर तत्काल शिकायत करना और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल का इस्तेमाल करना सरकारी व्यवस्था का हिस्सा है।
नचिकेता स्कूल की गोष्ठी का केंद्रीय संदेश साफ है। डिजिटल दुनिया में बच्चों की सुरक्षा केवल तकनीकी उपायों से सुनिश्चित नहीं होगी। जागरूकता, परिवार की निगरानी, स्कूल की भूमिका और समय पर शिकायत, चारों स्तर पर कार्रवाई जरूरी है।
मुजफ्फरनगर पुलिस ने छात्रों को साइबर अपराध के विभिन्न रूपों से परिचित कराकर रोकथाम पर जोर दिया है। खासकर ऑनलाइन ग्रूमिंग, ब्लैकमेलिंग और फेक प्रोफाइल जैसे मामलों में बच्चों को चुप रहने के बजाय भरोसेमंद वयस्क और पुलिस तक पहुंचने के लिए प्रोत्साहित करना अहम है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।