एडीएम ने मेधावी छात्रा को दी साइकिल, किताबें और स्टेशनरी
संघर्ष के बीच शिक्षा की लौ को मिला प्रशासन का सहारा
मुजफ्फरनगर में 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' योजना के तहत एक संघर्षशील छात्रा को शिक्षा जारी रखने के लिए आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई गई। यह पहल बताती है कि सरकारी योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य केवल घोषणाएं नहीं बल्कि ज़रूरतमंद बेटियों तक संसाधन पहुंचाना भी है।
📍 मुजफ्फरनगर
📰 24 जुलाई 2026
✍️ वसी सिद्धिकी
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संघर्ष के बीच शिक्षा की लौ को मिला प्रशासन का सहारा
मुजफ्फरनगर में 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' योजना के तहत एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने इस योजना के सामाजिक उद्देश्य को नई पहचान दी। कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान आर्थिक और पारिवारिक कठिनाइयों के बावजूद अपनी पढ़ाई जारी रखने वाली मेधावी छात्रा रुचि गोयल को जिला प्रशासन की ओर से साइकिल, किताबें, स्कूल बैग और स्टेशनरी उपलब्ध कराई गई।
जिलाधिकारी उमेश मिश्रा के निर्देश पर आयोजित कार्यक्रम में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) अनिरुद्ध प्रताप सिंह ने छात्रा को यह सामग्री प्रदान करते हुए शिक्षा जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम का संचालन महिला कल्याण विभाग ने किया।
विपरीत परिस्थितियों में भी नहीं छोड़ी पढ़ाई
रुचि गोयल डी.ए.वी. पीजी कॉलेज में बीएससी द्वितीय वर्ष की छात्रा हैं। वर्ष 2023 में उनके पिता और वर्ष 2024 में उनकी माता का आकस्मिक निधन हो गया। लगातार दो वर्षों में माता-पिता को खोने के बावजूद उन्होंने अपनी शिक्षा बीच में नहीं छोड़ी।
प्रशासन का कहना है कि छात्रा का यह संघर्ष और शिक्षा के प्रति समर्पण ही उन्हें इस सहायता के लिए चयनित किए जाने का प्रमुख आधार बना। यह पहल उन छात्राओं के लिए भी प्रेरणा मानी जा रही है जो सीमित संसाधनों के बावजूद उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहती हैं।
क्या-क्या मिली सहायता
महिला कल्याण विभाग की ओर से छात्रा को कॉलेज आने-जाने के लिए एक साइकिल उपलब्ध कराई गई। इसके साथ बीएससी द्वितीय वर्ष की आवश्यक पाठ्य-पुस्तकें, एक स्कूल बैग तथा स्टेशनरी सामग्री भी दी गई ताकि पढ़ाई में किसी प्रकार की व्यावहारिक बाधा न आए।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि कई बार छोटी आर्थिक सहायता भी विद्यार्थियों की पढ़ाई जारी रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' का व्यापक उद्देश्य
'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' अभियान की शुरुआत बालिका शिक्षा, सुरक्षा और लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी। समय के साथ कई जिलों में इस योजना के तहत स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप सहायता कार्यक्रम भी संचालित किए जा रहे हैं।
मुजफ्फरनगर में महिला कल्याण विभाग का कहना है कि योजना का उद्देश्य केवल जागरूकता तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसी बालिकाओं तक वास्तविक सहायता पहुंचाना भी है जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद शिक्षा प्राप्त करना चाहती हैं।
शिक्षा में आर्थिक बाधाओं की चुनौती
देश के अनेक हिस्सों में आज भी आर्थिक अभाव, परिवहन की समस्या और पारिवारिक परिस्थितियां छात्राओं की शिक्षा पर असर डालती हैं। विशेष रूप से उच्च शिक्षा के स्तर पर कई छात्राएं संसाधनों के अभाव में पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हो जाती हैं।
ऐसे में स्थानीय प्रशासन द्वारा जरूरतमंद छात्राओं की पहचान कर उन्हें समय पर सहायता उपलब्ध कराना सकारात्मक कदम माना जाता है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि ऐसी पहल तभी अधिक प्रभावी होगी जब इसके साथ नियमित निगरानी और दीर्घकालिक सहयोग भी सुनिश्चित किया जाए।
समाज और प्रशासन की साझा जिम्मेदारी
महिला शिक्षा केवल सरकारी योजनाओं से आगे बढ़ने वाला विषय नहीं है। परिवार, समाज, शिक्षण संस्थानों और प्रशासन की संयुक्त भागीदारी से ही बेटियों के लिए बेहतर शैक्षणिक माहौल तैयार किया जा सकता है।
रुचि गोयल जैसी छात्राओं की कहानी यह भी बताती है कि व्यक्तिगत संघर्ष और संस्थागत सहयोग मिलकर सकारात्मक बदलाव की मिसाल बन सकते हैं।
आगे की राह
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जनपद में 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' योजना के अंतर्गत बालिकाओं की शिक्षा और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि संसाधनों की कमी किसी भी बेटी की पढ़ाई में बाधा नहीं बनने दी जाएगी।
यदि ऐसी पहल नियमित रूप से जरूरतमंद छात्राओं तक पहुंचती है तो यह न केवल शिक्षा को बढ़ावा देगी बल्कि समाज में बेटियों की उच्च शिक्षा के प्रति सकारात्मक सोच को भी मजबूत करेगी।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।