मुजफ्फरनगर में किशोर संप्रेक्षण गृह का निरीक्षण, जनपद न्यायाधीश ने दिए निर्देश
जनपद न्यायाधीश ने परखी किशोर संप्रेक्षण गृह की व्यवस्था, किशोरों से की बातचीत
मुजफ्फरनगर: किशोर संप्रेक्षण गृह पहुंचे जिला जज, व्यवस्थाओं की ली जानकारी
मुजफ्फरनगर के राजकीय संप्रेक्षण गृह (किशोर) का जनपद न्यायाधीश श्री बीरेंद्र कुमार सिंह ने उच्च अधिकारियों के साथ निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान किशोरों से बातचीत कर उनकी समस्याएं जानी गईं तथा शिक्षा, सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं के साथ पूर्व निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
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📍 मुजफ्फरनगर
📰 24 जुलाई 2026
✍️ वसी सिद्धीकी
मुजफ्फरनगर में किशोर संप्रेक्षण गृह का निरीक्षण, व्यवस्थाओं की हुई समीक्षा
निन्यायिक गरानी का उद्देश्य
राजकीय संप्रेक्षण गृह (किशोर), मुजफ्फरनगर में शुक्रवार को जनपद न्यायाधीश श्री बीरेंद्र कुमार सिंह के नेतृत्व में उच्च स्तरीय निरीक्षण किया गया। निरीक्षण का उद्देश्य संस्था में निरुद्ध किशोरों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं, सुरक्षा, शिक्षा तथा पुनर्वास से जुड़ी व्यवस्थाओं की समीक्षा करना था। इस दौरान विभिन्न न्यायिक और प्रशासनिक अधिकारियों ने संस्था की कार्यप्रणाली का जायज़ा लिया।
किशोरों से सीधे संवाद पर रहा जोर
निरीक्षण के दौरान जनपद न्यायाधीश ने संस्था में रह रहे किशोरों से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याओं, आवश्यकताओं और दैनिक व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी ली। इस तरह का संवाद न्यायिक निगरानी का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है क्योंकि इससे संस्थागत व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति समझने में मदद मिलती है।
पूर्व निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पूर्व में दिए गए निर्देशों के अनुपालन की भी समीक्षा की। उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर विभिन्न व्यवस्थाओं का मूल्यांकन किया गया और जहां आवश्यकता महसूस हुई, वहां सुधार के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। निरीक्षण का उद्देश्य केवल कमियों की पहचान करना नहीं बल्कि संस्था की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाना भी था।
उच्च अधिकारियों की रही मौजूदगी
निरीक्षण के दौरान माननीय अपर जिला जज श्रीमती ज्योत्सना शिवांच, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रीमती कविता अग्रवाल, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव डॉ. सत्येंद्र चौधरी, नगर मजिस्ट्रेट पंकज प्रकाश राठौर, जिला प्रोबेशन अधिकारी संजय कुमार तथा क्षेत्राधिकारी सुनील कुमार भी उपस्थित रहे। विभिन्न विभागों की मौजूदगी से यह स्पष्ट हुआ कि बाल संरक्षण से जुड़े मामलों में समन्वित प्रशासनिक व्यवस्था को प्राथमिकता दी जा रही है।
शिक्षा और पुनर्वास पर विशेष ध्यान
संस्था में माध्यमिक शिक्षा विभाग से नामित विज्ञान शिक्षक समर वीर सिंह तथा बेसिक शिक्षा विभाग से नामित सहायक अध्यापक शारिक हुसैन और राकेश कुमार भी मौजूद रहे। इससे यह संकेत मिलता है कि किशोरों के पुनर्वास में शिक्षा को महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। किशोर न्याय व्यवस्था का उद्देश्य केवल संरक्षण देना नहीं बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा में वापस जोड़ने के लिए आवश्यक वातावरण उपलब्ध कराना भी है।
नियमित निरीक्षण क्यों महत्वपूर्ण हैं
किशोर संप्रेक्षण गृहों का समय-समय पर न्यायिक निरीक्षण भारतीय किशोर न्याय प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे निरीक्षण संस्थानों में पारदर्शिता, जवाबदेही और मानवीय दृष्टिकोण को मजबूत करते हैं। इससे यह सुनिश्चित करने का प्रयास होता है कि वहां रहने वाले प्रत्येक किशोर को कानून के अनुरूप सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मानजनक वातावरण प्राप्त हो।
भविष्य की दिशा
निरीक्षण के दौरान दिए गए दिशा-निर्देशों का पालन संस्था की कार्यप्रणाली को और बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है। बाल संरक्षण से जुड़े मामलों में न्यायपालिका और प्रशासन की सक्रिय निगरानी यह सुनिश्चित करने का प्रयास करती है कि पुनर्वास की प्रक्रिया प्रभावी रहे और किशोरों के अधिकार सुरक्षित रहें। नियमित समीक्षा से संस्थागत व्यवस्थाओं में सुधार की संभावना भी बढ़ती है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।