मुजफ्फरनगर में वामा सारथी और नांदी फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित छह दिवसीय व्यक्तित्व एवं कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन हुआ। प्रशिक्षण का उद्देश्य पुलिस परिवार के सदस्यों को आत्मविश्वास, रोजगारोन्मुखी कौशल और आर्थिक जागरूकता से सशक्त बनाना था। समापन समारोह में प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र और पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
📍 मुजफ्फरनगर
📰 21 जुलाई 2026
✍️ वसी सिद्धीक़ी
वामा सारथी प्रशिक्षण का समापन, पुलिस परिवार को सशक्त बनाने की दिशा में पहल
व्यक्तित्व विकास और आत्मनिर्भरता पर केंद्रित रहा कार्यक्रम
रिजर्व पुलिस लाइंस, मुजफ्फरनगर में उत्तर प्रदेश पुलिस फैमिली वेलफेयर एसोसिएशन (वामा सारथी) और नांदी फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित छह दिवसीय व्यक्तित्व एवं कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम का मंगलवार को समापन हो गया। कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने वाले प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए, जबकि उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
समापन समारोह में वामा सारथी की जनपद अध्यक्षा डॉ. नीलम राय तथा पुलिस अधीक्षक अपराध इन्दु सिद्धार्थ ने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि ऐसे प्रशिक्षण केवल प्रमाणपत्र तक सीमित नहीं रहते, बल्कि जीवन में आत्मविश्वास और सकारात्मक बदलाव का आधार बनते हैं।
पुलिस परिवार के लिए क्यों महत्वपूर्ण है ऐसा प्रशिक्षण
पुलिसकर्मी अक्सर चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में कार्य करते हैं। ऐसे में उनके परिवारों का मानसिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त होना भी उतना ही आवश्यक माना जाता है। इसी सोच के साथ वामा सारथी विभिन्न जिलों में पुलिस परिवारों के लिए व्यक्तित्व विकास, कौशल उन्नयन और स्वरोजगार से जुड़े कार्यक्रम आयोजित करता रहा है।
मुजफ्फरनगर में आयोजित इस प्रशिक्षण का उद्देश्य भी महिलाओं और युवाओं में आत्मनिर्भरता की भावना विकसित करना तथा उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना था।
छह दिनों तक मिला व्यवहारिक प्रशिक्षण
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं दी गई, बल्कि व्यवहारिक अभ्यासों के माध्यम से भी तैयार किया गया। विशेषज्ञ प्रशिक्षकों ने प्रभावी संवाद कौशल, समूह चर्चा, बॉडी लैंग्वेज, प्रोफेशनल ग्रूमिंग, प्रोजेक्ट प्रेजेंटेशन, रोजगार एवं करियर मार्गदर्शन, स्वस्थ जीवनशैली, तनाव प्रबंधन, विवाद समाधान, वित्तीय प्रबंधन और समस्या समाधान जैसे विषयों पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया।
समूह गतिविधियों और अभ्यास सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को वास्तविक परिस्थितियों में निर्णय लेने और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का अवसर भी मिला।
आत्मविश्वास और रोजगार क्षमता बढ़ाने पर विशेष जोर
आज के समय में केवल शैक्षणिक योग्यता पर्याप्त नहीं मानी जाती। व्यक्तित्व विकास, संवाद क्षमता और वित्तीय समझ भी सफलता के महत्वपूर्ण आधार हैं। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण की रूपरेखा तैयार की गई थी।
विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को बताया कि बदलते सामाजिक और आर्थिक परिवेश में नई क्षमताओं का विकास भविष्य के अवसरों तक पहुंच आसान बना सकता है। यही कारण है कि प्रशिक्षण में व्यवहारिक सीख पर विशेष जोर दिया गया।
डॉ. नीलम राय ने दिया सकारात्मक संदेश
समापन समारोह को संबोधित करते हुए डॉ. नीलम राय ने कहा कि प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान तभी सार्थक होगा जब उसे दैनिक जीवन में व्यवहार में उतारा जाए। उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे स्वयं के साथ-साथ अपने परिवार और समाज के अन्य लोगों को भी इस प्रकार की सीख का लाभ पहुंचाने का प्रयास करें।
उनका कहना था कि आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की शक्ति देती है।
एसपी क्राइम इन्दु सिद्धार्थ ने आत्मनिर्भरता पर दिया जोर
एसपी क्राइम इन्दु सिद्धार्थ ने कहा कि पुलिस परिवार की महिलाओं और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने नांदी फाउंडेशन के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में उपयोगी पहल साबित हो सकते हैं।
उन्होंने प्रतिभागियों को भविष्य में भी सीखने की प्रक्रिया जारी रखने और अपने कौशल को लगातार विकसित करने की सलाह दी।
पुलिस कल्याण की व्यापक सोच
देश के विभिन्न राज्यों में पुलिस वेलफेयर से जुड़े कार्यक्रमों का दायरा लगातार बढ़ रहा है। अब केवल स्वास्थ्य सुविधाओं तक सीमित रहने के बजाय व्यक्तित्व विकास, मानसिक स्वास्थ्य, वित्तीय साक्षरता और रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण जैसे विषय भी प्राथमिकता में शामिल किए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पुलिस परिवार सामाजिक और आर्थिक रूप से मजबूत होंगे तो इसका सकारात्मक प्रभाव पुलिसकर्मियों के कार्य प्रदर्शन और सामाजिक सहभागिता पर भी दिखाई देगा।
आगे की राह
मुजफ्फरनगर में आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम पुलिस परिवारों के लिए एक सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि किसी भी प्रशिक्षण की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि प्रतिभागी सीखी गई बातों को अपने जीवन में किस हद तक लागू कर पाते हैं।
संपादकीय दृश्टिकोण
वसी सिद्दीकी
यदि ऐसे कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं और इनमें स्वरोजगार, डिजिटल स्किल्स तथा उद्यमिता जैसे विषयों को भी जोड़ा जाता है, तो पुलिस परिवारों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को और अधिक गति मिल सकती है। इसी उद्देश्य के साथ वामा सारथी जैसी पहल भविष्य में भी पुलिस परिवारों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।