मुजफ्फरनगर साइबर क्राइम पुलिस ने सोशल मीडिया के जरिए ऑनलाइन निवेश में भारी मुनाफे का लालच देकर ₹1.01 करोड़ की साइबर ठगी करने वाले गिरोह के एक और सदस्य को गिरफ्तार किया है। मामले में पहले भी कई आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं। पुलिस ने ठगी गई राशि में से ₹23 लाख फ्रीज कराकर पीड़ित को वापस दिलाने की प्रक्रिया शुरू की है। यह मामला डिजिटल निवेश धोखाधड़ी के बढ़ते खतरे और साइबर सतर्कता की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
📍 मुजफ्फरनगर
📰 15 जुलाई 2026
✍️ Wasi Siddiqui
मुजफ्फरनगर में साइबर ठगी का बड़ा खुलासा, करोड़ों की निवेश धोखाधड़ी में एक और गिरफ्तारी
फेसबुक की दोस्ती से शुरू हुआ करोड़ों का जाल
सोशल मीडिया पर बनने वाले रिश्ते अब केवल बातचीत तक सीमित नहीं रह गए हैं। कई मामलों में यही प्लेटफॉर्म संगठित साइबर अपराधियों के लिए सबसे प्रभावी हथियार बनते जा रहे हैं। मुजफ्फरनगर में सामने आया यह मामला इसी खतरे की गंभीर तस्वीर पेश करता है, जहां फेसबुक पर हुई एक कथित दोस्ती ने एक व्यक्ति को ₹1.01 करोड़ की साइबर ठगी का शिकार बना दिया।
थाना साइबर क्राइम पुलिस ने इस मामले में गिरोह के एक और सदस्य शहनवाज उर्फ गुड्डू को गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि आरोपी बैंक खाते उपलब्ध कराकर ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में पहुंचाने की भूमिका निभा रहा था।
कैसे रचा गया पूरा साइबर नेटवर्क
पुलिस के अनुसार पीड़ित को फेसबुक पर "गीतिका कपूर उर्फ जीजी" नाम से फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी गई। धीरे-धीरे बातचीत बढ़ाई गई और विश्वास कायम किया गया। इसके बाद ऑनलाइन ट्रेडिंग और निवेश के नाम पर DGXC नामक वेबसाइट पर पैसा लगाने के लिए प्रेरित किया गया।
व्हाट्सएप ग्रुप, फर्जी ट्रेडिंग रिपोर्ट और भारी मुनाफे के स्क्रीनशॉट दिखाकर पीड़ित का भरोसा मजबूत किया गया। शुरुआती निवेश के बाद वेबसाइट पर लगातार बढ़ता हुआ काल्पनिक लाभ दिखाया जाता रहा। जब पीड़ित ने रकम निकालने की कोशिश की तो "फाइनल वेरिफिकेशन", "डेटा रिपेयरिंग" और "एंटी मनी लॉन्ड्रिंग प्रोसेस" जैसे बहाने बनाकर और पैसे जमा कराने का दबाव बनाया गया।
इसी प्रक्रिया में पीड़ित से कुल ₹1,01,02,000 विभिन्न बैंक खातों में जमा करा लिए गए।
गिरफ्तार आरोपी की भूमिका क्या रही
पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी शहनवाज ने पुलिस को बताया कि उसे उसके परिचितों ने बैंक खाते उपलब्ध कराने के बदले कमीशन मिलने का लालच दिया था। उसने अपने रिश्तेदार और परिचितों के बैंक खातों की जानकारी गिरोह तक पहुंचाई, जिनका उपयोग ठगी की रकम जमा कराने में किया गया।
पुलिस का मानना है कि ऐसे मामलों में कई लोग सीधे ठगी नहीं करते, लेकिन बैंक खाते उपलब्ध कराकर पूरे साइबर नेटवर्क की महत्वपूर्ण कड़ी बन जाते हैं।
पहले भी कई आरोपी हो चुके हैं गिरफ्तार
इस मामले में पुलिस पहले ही अब्दुल कादिर, आकिब अली, निखिल त्रिपाठी, बलवंत जायसवाल और मोहित कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। इसके अलावा पंजाब और मध्य प्रदेश के दो अन्य आरोपियों को बी-वारंट पर तलब करने की कार्रवाई भी जारी है।
इससे संकेत मिलता है कि यह कोई स्थानीय घटना नहीं बल्कि विभिन्न राज्यों में फैला संगठित साइबर नेटवर्क हो सकता है।
₹23 लाख की रकम फ्रीज कराना बड़ी उपलब्धि
साइबर अपराधों में सबसे बड़ी चुनौती ठगी गई रकम को तेजी से कई खातों और डिजिटल माध्यमों से आगे भेज दिया जाना होता है। ऐसे मामलों में रकम वापस मिलना कठिन माना जाता है।
मुजफ्फरनगर साइबर क्राइम पुलिस ने इस प्रकरण में लगभग ₹23 लाख की धनराशि फ्रीज कराकर पीड़ित को वापस दिलाने की प्रक्रिया शुरू की है। हालांकि यह पूरी रकम का केवल एक हिस्सा है, फिर भी शुरुआती स्तर पर इसे महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
डिजिटल निवेश के नाम पर बढ़ते साइबर अपराध
हाल के वर्षों में ऑनलाइन ट्रेडिंग, क्रिप्टो, विदेशी निवेश, हाई रिटर्न स्कीम और फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के नाम पर साइबर अपराध तेजी से बढ़े हैं। अपराधी सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप और वीडियो कॉल के जरिए भरोसा बनाकर लोगों को निवेश के लिए प्रेरित करते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई प्लेटफॉर्म असामान्य लाभ का दावा करे, बिना नियामकीय जानकारी के निवेश कराए या निकासी के समय अतिरिक्त शुल्क मांगे तो सतर्क हो जाना चाहिए।
सिर्फ पुलिस कार्रवाई काफी नहीं
ऐसे मामलों में गिरफ्तारी महत्वपूर्ण है, लेकिन केवल गिरफ्तारी से समस्या समाप्त नहीं होती। साइबर अपराधी लगातार नई पहचान, नए बैंक खाते और नए डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हैं।
इसलिए आम लोगों में डिजिटल साक्षरता, सुरक्षित निवेश की समझ और समय रहते शिकायत दर्ज कराने की जागरूकता भी उतनी ही आवश्यक है।
आगे की जांच पर रहेंगी निगाहें
पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क के अन्य सदस्यों, बैंक खातों, डिजिटल लेन-देन और तकनीकी कड़ियों की जांच कर रही है। जांच आगे बढ़ने पर यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस गिरोह का नेटवर्क कितने राज्यों तक फैला हुआ है और क्या अन्य पीड़ित भी इससे प्रभावित हुए हैं।
मामला यह भी दिखाता है कि सोशल मीडिया पर बनने वाला भरोसा यदि बिना सत्यापन के आर्थिक निर्णयों तक पहुंच जाए तो उसका परिणाम बेहद गंभीर हो सकता है।
संपादकीय दृष्टिकोण;वसी सिद्दीकी
मुजफ्फरनगर का यह मामला केवल एक गिरफ्तारी की खबर नहीं, बल्कि डिजिटल दौर में बढ़ते साइबर अपराधों की गंभीर चेतावनी भी है। ऑनलाइन निवेश के हर प्रस्ताव की जांच, अधिक लाभ के दावों पर संदेह और समय पर साइबर हेल्पलाइन या पुलिस से संपर्क ही ऐसे अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। पुलिस की कार्रवाई जारी है और आगे की जांच से इस नेटवर्क के और बड़े खुलासे होने की संभावना बनी हुई है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।