मुजफ्फरनगर के खतौली क्षेत्र में 29 वर्षीय अतुल की हत्या का पुलिस ने खुलासा किया। 2 दोस्तों को गिरफ्तार कर चाकू और बाइक बरामद की गई। जांच में पुरानी रंजिश सामने आई।
📍 मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश
🗓️ 8 सितंबर 2026
✍️ Mohd Naved
अतुल 29 अगस्त से लापता था। शुरुआती दौर में पुलिस के सामने उसकी गुमशुदगी से जुड़े ऐसे स्पष्ट सुराग नहीं थे, जिनसे हत्या की दिशा तुरंत सामने आती। जांच आगे बढ़ने के साथ पुलिस ने उसके परिचितों और घटनाक्रम से जुड़े लोगों पर फोकस किया।
एसएसपी संजय कुमार वर्मा के अनुसार, पुलिस पूछताछ में सामने आया कि अतुल और आरोपियों के बीच करीब 3 महीने पहले विवाद हुआ था। पुलिस का कहना है कि विवाद अतुल की ओर से आरोपियों की बहन को लेकर की गई कथित अमर्यादित टिप्पणी को लेकर हुआ था।
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने पूछताछ में दावा किया कि विवाद के बाद अतुल को समझाया गया था, लेकिन उनके अनुसार वह अपनी कथित हरकतों से बाज नहीं आया। इसी विवाद को पुलिस ने हत्या की साजिश के पीछे सामने आई प्रमुख वजह के तौर पर बताया है।
हालांकि, इस कथित टिप्पणी की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए इसे पुलिस और आरोपियों से पूछताछ में सामने आए दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
पुलिस के अनुसार, सोनू और तालिब ने अतुल की हत्या की योजना बनाई थी। जांच में आरोपियों के कथित बयान के आधार पर पुलिस ने बताया कि दोनों ने एक दिन साथ बैठकर बीयर पी और अगले दिन अतुल को खेत में अमरूद खाने के बहाने बुलाने की योजना बनाई।
पुलिस का दावा है कि अगले दिन अतुल को खेत में बुलाया गया। वहां दोनों आरोपियों ने कथित तौर पर उसका गला दबाकर हत्या कर दी। इसके बाद उसकी गर्दन पर चाकू से वार किए गए।
हत्या के बाद शव को खेत में छिपाने की बात भी पुलिस ने कही है। पुलिस के मुताबिक, अतुल का मोबाइल फोन भी आरोपी अपने साथ ले गए थे।
पुलिस ने सोनू और तालिब की गिरफ्तारी के बाद उनके कब्जे से वारदात में इस्तेमाल किया गया कथित चाकू और बाइक बरामद करने की जानकारी दी है।
पुलिस के अनुसार, बरामदगी और पूछताछ से हत्या की कड़ियों को जोड़ने में मदद मिली। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है।
इस मामले का एक अहम पहलू यह भी सामने आया है कि पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में शामिल सोनू अतुल के परिजनों के साथ एसएसपी कार्यालय पर हुए धरने में शामिल हुआ था।
पुलिस का कहना है कि अतुल की तलाश के दौरान सोनू लगातार पुलिस के साथ दिखाई देता रहा। वह परिवार के साथ मिलकर अतुल को तलाशने की गतिविधियों में भी मौजूद था।
एसएसपी संजय कुमार वर्मा के मुताबिक, एसएसपी कार्यालय पर धरने के दौरान सोनू ने उनके साथ भी गलत तरीके से व्यवहार किया था और बार-बार धरना देने की चेतावनी दी थी।
यह घटनाक्रम जांच के नजरिए से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि पुलिस के मुताबिक उस समय सोनू खुद भी हत्या की साजिश में शामिल था।
एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने हत्या के खुलासे के दौरान कहा कि कई मामलों में ऐसा देखने को मिलता है कि अपराधी खुद को निर्दोष दिखाने के लिए मृतक के परिजनों के साथ खड़े नजर आते हैं और धरने में भी शामिल हो जाते हैं।
उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को कोई शिकायत या परेशानी हो तो उसे सीधे पुलिस अधिकारियों से संपर्क कर अपनी समस्या बतानी चाहिए। उनके अनुसार धरना किसी समस्या के समाधान का विकल्प नहीं है।
एसएसपी ने इस मामले में पुलिस की जांच को भी महत्वपूर्ण बताया। उनके मुताबिक शुरुआत में मामला ब्लाइंड केस जैसा था और अतुल के बारे में स्पष्ट सुराग नहीं मिल रहे थे।
पुलिस के अनुसार, अतुल के लापता होने के बाद जांच को कई स्तरों पर आगे बढ़ाया गया। सीओ खतौली रूपाली राय चौधरी, थाना प्रभारी निरीक्षक दिनेश बघेल और पुलिस टीम ने घटनाक्रम से जुड़े लोगों से पूछताछ की और उपलब्ध सुरागों को जोड़ने का प्रयास किया।
जांच आगे बढ़ने पर पुलिस का ध्यान अतुल के परिचितों और उसके साथ जुड़े लोगों की ओर गया। पुलिस का दावा है कि इसी प्रक्रिया में सोनू और तालिब की भूमिका सामने आई।
इसके बाद दोनों को गिरफ्तार किया गया और पुलिस के मुताबिक पूछताछ में उन्होंने हत्या की वारदात से जुड़ी जानकारी दी।
हत्या के खुलासे के बाद पुलिस के सामने अब बरामदगी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फोरेंसिक साक्ष्य, मोबाइल फोन और घटनास्थल से जुड़े अन्य सबूतों को कानूनी प्रक्रिया के तहत मजबूत करने की चुनौती है।
आरोपियों के कथित कबूलनामे को अकेले अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। अदालत में मामले की पुष्टि उपलब्ध भौतिक साक्ष्यों, मेडिकल रिपोर्ट, फोरेंसिक जांच, गवाहों और जांच से सामने आए अन्य प्रमाणों के आधार पर होगी।
पुलिस के दावों और आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
अतुल की हत्या का पुलिस खुलासा एक अहम सवाल भी सामने लाता है कि अपराध के बाद आरोपी किस तरह सामान्य व्यवहार करते हुए जांच के बीच मौजूद रह सकते हैं। इस मामले में पुलिस के अनुसार एक आरोपी मृतक के परिजनों के साथ धरने में शामिल हुआ और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल भी उठाता रहा।
फिलहाल पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जांच की दिशा स्पष्ट करने का दावा किया है। अब मामले की अगली कड़ी अदालत में पेश होने वाले साक्ष्यों और जांच के नतीजों पर निर्भर करेगी।
अतुल की गुमशुदगी से शुरू हुई जांच हत्या तक पहुंची है। पुलिस के सामने अब चुनौती है कि गिरफ्तारी और बरामदगी के साथ पूरे घटनाक्रम को ठोस साक्ष्यों के जरिए स्थापित किया जाए, ताकि मामले की वास्तविक तस्वीर न्यायिक जांच में स्पष्ट हो सके।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।