लोकेशन
मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश
date 3/9/2026
By Wasi Siddiqui
मुजफ्फरनगर में एक सड़क हादसे ने एक ही परिवार के तीन सदस्यों की जान ले ली। बीमार पिता को दवा दिलाने के लिए स्कूटी से निकले दो बेटों के साथ उनके बुजुर्ग पिता भी हादसे का शिकार हो गए। चरथावल क्षेत्र में नीलगाय से हुई टक्कर के बाद तीनों गंभीर रूप से घायल हुए और अलग-अलग अस्पतालों में इलाज के दौरान एक-एक करके उनकी मौत हो गई। कुछ ही दिनों के भीतर पिता और दोनों बेटों की मौत से परिवार में मातम पसरा है।
हादसा २९ अगस्त को हुआ था। इसके बाद ३० अगस्त को एक बेटे मोहम्मद साजिद की मौत हुई। १ सितंबर को दूसरे बेटे मोहम्मद नाहिद ने दम तोड़ दिया। बुजुर्ग पिता अशफाक की २ सितंबर की रात उपचार के दौरान मौत हुई। इस तरह एक ही हादसे में परिवार के तीन सदस्य जिंदगी की जंग हार गए। उपलब्ध रिपोर्टों में इन घटनाक्रमों की पुष्टि की गई है।
मुजफ्फरनगर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र के मल्लूपुरा इलाके में रहने वाले करीब ८० वर्षीय अशफाक की तबीयत खराब थी। परिवार के मुताबिक उनके दोनों बेटे मोहम्मद नाहिद और मोहम्मद साजिद उन्हें दवा दिलाने के लिए स्कूटी से लेकर निकले थे।
२९ अगस्त की सुबह तीनों चरथावल की तरफ जा रहे थे। बताया गया कि दधेडू के आगे रजवाहे की पुलिया के पास पहुंचने पर जंगल की ओर से अचानक एक नीलगाय सड़क पर आ गई।
स्कूटी चालक को संभलने का पर्याप्त मौका नहीं मिला। स्कूटी नीलगाय से टकरा गई। टक्कर के बाद तीनों सड़क पर गिर पड़े और गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों ने मदद की और पुलिस को सूचना दी।
हादसे की सूचना मिलने के बाद चरथावल पुलिस मौके पर पहुंची। स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया।
घायलों की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें आगे के इलाज के लिए अलग-अलग अस्पतालों में ले जाया गया। मोहम्मद साजिद को बेहतर उपचार के लिए मेरठ के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
चिकित्सकों की कोशिश के बावजूद ३० अगस्त को उपचार के दौरान साजिद की मौत हो गई। परिवार के लिए यह पहला बड़ा सदमा था, लेकिन इसके बाद घटनाक्रम और ज्यादा दर्दनाक हो गया।
साजिद की मौत के बाद परिवार दूसरे घायल बेटे मोहम्मद नाहिद के स्वस्थ होने की उम्मीद लगाए बैठा था। नाहिद का मुजफ्फरनगर के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था।
उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी। १ सितंबर को उपचार के दौरान नाहिद ने भी दम तोड़ दिया। रिपोर्टों के मुताबिक नाहिद अपने पीछे दो बेटियां और एक बेटा छोड़ गए हैं। उनकी सबसे छोटी बेटी की उम्र करीब डेढ़ साल बताई गई है।
दो भाइयों की मौत के बाद परिवार की स्थिति और गंभीर हो गई। एक तरफ बुजुर्ग पिता अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे थे, दूसरी तरफ घर के दो कमाऊ सदस्यों की मौत हो चुकी थी।
हादसे में घायल अशफाक का भी इलाज जारी था। उन्हें रुड़की रोड स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजन लगातार उनके ठीक होने की उम्मीद कर रहे थे।
लेकिन २ सितंबर की रात अशफाक की भी मौत हो गई। इस मौत के साथ हादसे में घायल परिवार के तीनों सदस्यों की जिंदगी खत्म हो गई। २९ अगस्त के हादसे से शुरू हुआ यह घटनाक्रम कुछ ही दिनों में परिवार के लिए अपूरणीय नुकसान में बदल गया।
पीड़ित परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से कमजोर बताई गई है। परिवार मल्लूपुरा में किराए के मकान में रह रहा था।
मोहम्मद नाहिद की मौत के बाद उनके छोटे बच्चों के सामने भविष्य की चिंता भी खड़ी हो गई है। परिवार के तीन महत्वपूर्ण सदस्यों की मौत के बाद रोजमर्रा के खर्च और बच्चों की परवरिश को लेकर मुश्किलें बढ़ गई हैं।
स्थानीय सभासद मोहम्मद खालिद ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि परिवार को तत्काल सरकारी मदद की जरूरत है।
साजिद की मौत की जानकारी मिलने के बाद मुजफ्फरनगर लोकसभा क्षेत्र के सपा सांसद हरेंद्र मलिक पीड़ित परिवार के बीच पहुंचे। उन्होंने परिजनों से मुलाकात कर संवेदना जताई और हरसंभव मदद का भरोसा दिया।
परिवार की तरफ से प्रशासनिक सहायता की मांग भी उठाई गई है। स्थानीय प्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी, सांसद और विधायक समेत संबंधित अधिकारियों से पीड़ित परिवार के लिए सहायता सुनिश्चित करने की अपील की है।
यह हादसा ग्रामीण और अर्धशहरी सड़कों पर अचानक आने वाले बड़े पशुओं से जुड़े जोखिम को भी सामने लाता है। नीलगाय खेतों और जंगल से निकलकर सड़क पार करती हैं। तेज रफ्तार या सीमित दृश्यता की स्थिति में वाहन चालक को प्रतिक्रिया देने का समय बेहद कम रह जाता है।
ऐसी परिस्थितियों में सड़क किनारे सुरक्षा इंतजाम, संवेदनशील हिस्सों की पहचान, चेतावनी संकेत और वाहनों की नियंत्रित रफ्तार अहम हो जाती है। हालांकि इस विशेष हादसे में सुरक्षा व्यवस्था की किसी विशिष्ट कमी को लेकर कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। इसलिए किसी विभाग या व्यक्ति की जिम्मेदारी तय करना अभी जल्दबाजी होगी।
इस घटना की सबसे पीड़ादायक बात यह है कि तीनों एक साथ निकले थे। मकसद सिर्फ बीमार पिता के लिए दवा लाना था। लेकिन रास्ते में हुई एक अप्रत्याशित टक्कर ने परिवार से पिता और दोनों बेटों को छीन लिया।
अब पीछे रह गए परिवार के सामने शोक के साथ जीवन की व्यावहारिक चुनौतियां भी हैं। छोटे बच्चों की परवरिश, आर्थिक जरूरतें और भविष्य की जिम्मेदारियां सबसे बड़ा सवाल बन गई हैं।
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से परिवार को सहायता मिलने की उम्मीद है। साथ ही यह हादसा सड़क सुरक्षा व्यवस्था के उस पहलू पर भी तवज्जो मांगता है, जहां इंसानों और वन्यजीवों की आवाजाही वाले मार्गों पर जोखिम कम करने के लिए स्थानीय स्तर पर ठोस इंतजाम जरूरी होते हैं।
मुजफ्फरनगर की यह घटना एक परिवार के लिए कभी न भरने वाला नुकसान है। इसके साथ ही यह याद दिलाती है कि सड़क पर अचानक सामने आने वाली बाधा कितनी गंभीर त्रासदी में बदल सकती है। ऐसे मार्गों पर सावधानी, नियंत्रित गति और जोखिम वाले हिस्सों की बेहतर पहचान सड़क सुरक्षा के लिए अहम बनी हुई है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।