संजीव बालियान विवाद: धरने के बाद विवेक बालियान का पलटवार
संजीव बालियान विवाद में नया मोड़, आरोपों पर आया जवाब
संजीव बालियान विवाद: मारपीट के आरोपों पर परिवार ने दी सफाई
मुजफ्फरनगर में डॉ. संजीव बालियान के आवास के बाहर धरने के बाद उनके भाई विवेक बालियान ने पत्रकार वार्ता की। उन्होंने मारपीट, कार में तोड़फोड़ और अतिक्रमण से जुड़े आरोपों को खारिज किया। दूसरी ओर अमित बाना पक्ष ने कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग की है। मामले में दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
📍 स्थान: मुजफ्फरनग र, उत्तर प्रदेश
📰 तारीख: 27 जुलाई 2026
✍️ By Wasi Siddiqui
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संजीव बालियान विवाद में नया मोड़, धरने के बाद विवेक बालियान ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
मुजफ्फरनगर के नई मंडी थाना क्षेत्र की ए-टू-ज़ेड कॉलोनी में पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान के आवास के बाहर रविवार देर रात हुए हंगामे और धरने के बाद सोमवार को मामले ने नया रुख ले लिया। डॉ. संजीव बालियान के भाई विवेक बालियान ने पत्रकार वार्ता कर धरना देने वाले पक्ष की ओर से लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज किया और पूरे घटनाक्रम को बेबुनियाद बताया।
यह विवाद उस समय सामने आया, जब स्थानीय निवासी अमित बाना ने आरोप लगाया कि उनके साथ मारपीट की गई और उनकी कार को क्षतिग्रस्त किया गया। उनका दावा था कि घटना में शामिल बताए जा रहे दो युवक बाद में डॉ. संजीव बालियान के आवास के भीतर चले गए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
दूसरी ओर, डॉ. संजीव बालियान और उनके परिवार की तरफ से घटनाक्रम का अलग पक्ष रखा गया है। उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, डॉ. बालियान ने भी आरोपों को निराधार बताया और कहा कि विवाद आतिशबाजी को लेकर हुई कहासुनी के बाद बढ़ा। ऐसे में पूरे मामले में दोनों पक्षों के दावों को अलग-अलग देखना जरूरी है।
कैसे शुरू हुआ विवाद
मीडिया रिपोर्टों में अमित बाना के हवाले से बताया गया है कि रविवार रात वह ए-टू-ज़ेड कॉलोनी में अपनी कार सड़क किनारे रोककर मोबाइल पर बात कर रहे थे। इसी दौरान सिविल ड्रेस में आए दो युवकों से विवाद होने और मारपीट का आरोप लगाया गया।
अमित बाना पक्ष का दावा है कि इस दौरान उनकी कार को भी नुकसान पहुंचाया गया। उनका आरोप है कि घटना के बाद दोनों युवक डॉ. संजीव बालियान के आवास की ओर चले गए। इसी बात को लेकर उन्होंने अपने परिजनों और अन्य लोगों के साथ आवास के बाहर धरना शुरू किया।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अमित बाना ने यह भी आरोप लगाया कि एक युवक ने बेसबॉल के डंडे से हमला किया, जिससे उनके हाथ में चोट आई। वहीं नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट में भी अमित बाना पक्ष के ऐसे ही आरोपों का उल्लेख है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि के लिए पुलिस की जांच, मेडिकल रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज या अन्य स्वतंत्र साक्ष्य सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं।
धरने के बाद पुलिस की मौजूदगी
घटना की जानकारी मिलने के बाद नई मंडी थाना पुलिस मौके पर पहुंची। इसके बाद अमित बाना, उनके भाई डॉ. ललित बाना और अन्य लोगों ने कार्रवाई की मांग को लेकर देर रात आवास के बाहर धरना दिया।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, धरना देने वाले पक्ष ने कथित हमलावरों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ कॉलोनी में कथित अतिक्रमण की जांच की मांग भी उठाई। यह विवाद अब केवल मारपीट के आरोपों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कॉलोनी में निर्माण और जमीन के इस्तेमाल से जुड़े आरोप-प्रत्यारोप भी सामने आ गए हैं।
यहां एक अहम तथ्य यह है कि अभी तक सार्वजनिक रूप से सामने आई जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज की है या किसी आरोपी के खिलाफ औपचारिक कार्रवाई की है। इसलिए इस हिस्से में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक पुलिस अपडेट का इंतज़ार करना जरूरी होगा।
विवेक बालियान ने क्या कहा
सोमवार को पत्रकार वार्ता में विवेक बालियान ने धरना देने वाले पक्ष के आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि उनके आवास पर हुआ निर्माण प्राधिकरण से स्वीकृत है और इससे संबंधित दस्तावेज उनके पास मौजूद हैं।
विवेक बालियान ने कथित अतिक्रमण के आरोपों पर चुनौती देते हुए कहा कि यदि कॉलोनी में एक इंच भी अवैध कब्जा साबित होता है तो प्रशासन कार्रवाई कर सकता है। उनका यह बयान इस विवाद के उस हिस्से पर केंद्रित था, जिसमें कॉलोनी के निर्माण और जमीन के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए गए थे।
हालांकि, किसी निर्माण के वैध या अवैध होने का अंतिम निर्धारण संबंधित प्राधिकरण के स्वीकृत नक्शे, भूमि रिकॉर्ड और मौके की जांच के आधार पर ही किया जा सकता है। इसलिए इस दावे का निष्पक्ष परीक्षण दस्तावेजी जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड से ही संभव है।
दोनों पक्षों के दावों में बड़ा अंतर
इस पूरे मामले में सबसे अहम पहलू यह है कि दोनों पक्ष घटनाक्रम की अलग-अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं। अमित बाना पक्ष का आरोप है कि उनके साथ मारपीट हुई और कार को नुकसान पहुंचाया गया, जबकि डॉ. संजीव बालियान पक्ष ने इसे आतिशबाजी को लेकर हुई कहासुनी से जुड़ा विवाद बताया है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, डॉ. संजीव बालियान ने कहा कि उनके सुरक्षाकर्मियों ने आतिशबाजी को लेकर संबंधित लोगों को टोका था और इसके बाद कहासुनी तथा हल्की धक्का-मुक्की की स्थिति बनी। उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज किया।
यही वह बिंदु है जहां फैक्ट-चेक की जरूरत सबसे ज्यादा है। यदि घटना के समय सीसीटीवी कैमरे सक्रिय थे, तो फुटेज घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर सामने लाने में अहम भूमिका निभा सकती है। इसी तरह, कथित चोट, कार में हुए नुकसान और मौके पर मौजूद लोगों के बयान भी जांच की दिशा तय कर सकते हैं।
अतिक्रमण का आरोप भी विवाद का हिस्सा
धरना देने वाले पक्ष ने कॉलोनी में कथित अतिक्रमण और जमीन के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए। मीडिया रिपोर्टों में अमित बाना के हवाले से पार्क की जमीन पर कथित कब्जे और पार्किंग से जुड़े आरोपों का उल्लेख किया गया है।
वहीं विवेक बालियान ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि निर्माण प्राधिकरण से स्वीकृत है। ऐसे मामलों में राजनीतिक या व्यक्तिगत आरोपों से अलग हटकर राजस्व रिकॉर्ड, स्वीकृत नक्शे और संबंधित विकास प्राधिकरण के दस्तावेजों की जांच सबसे विश्वसनीय आधार होती है।
इसलिए इस विवाद का यह पहलू भी फिलहाल आरोप और प्रत्यारोप के स्तर पर है। जब तक संबंधित प्राधिकरण की आधिकारिक रिपोर्ट या दस्तावेज सार्वजनिक नहीं होते, तब तक किसी पक्ष के दावे को अंतिम सत्य मानना पत्रकारिता के लिहाज से उचित नहीं होगा।
राजनीतिक असर कितना होगा
डॉ. संजीव बालियान मुजफ्फरनगर की राजनीति में एक प्रमुख नाम रहे हैं। ऐसे में उनके आवास से जुड़ा कोई भी विवाद स्थानीय सियासत और सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बनना स्वाभाविक है।
विवेक बालियान ने प्रेसवार्ता में यह भी आरोप लगाया कि राजनीतिक व्यक्ति होने के कारण कुछ लोग ऐसे मामलों का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने धरने में स्थानीय लोगों की संख्या को लेकर भी दावा किया और कहा कि कुछ लोगों को बाहर से बुलाया गया था। इस दावे की भी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
दूसरी तरफ, अमित बाना पक्ष का आरोप है कि उन्होंने पहले कॉलोनी से जुड़े मामलों में शिकायतें की थीं और इसी वजह से विवाद की पृष्ठभूमि बनी। यदि ऐसा कोई पुराना शिकायत रिकॉर्ड मौजूद है, तो वह इस विवाद के संदर्भ को समझने में मदद कर सकता है। फिलहाल सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध रिपोर्टों से इन दावों की पूरी स्वतंत्र पुष्टि नहीं होती।
आगे की जांच पर टिकी नजर
अब इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल पुलिस और प्रशासन की अगली कार्रवाई का है। यदि मारपीट और वाहन में तोड़फोड़ की शिकायत औपचारिक रूप से दर्ज की गई है, तो जांच में सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, मेडिकल दस्तावेज और वाहन के नुकसान का आकलन अहम साक्ष्य बन सकते हैं।
इसी तरह, कथित अतिक्रमण या निर्माण को लेकर उठाए गए सवालों का जवाब संबंधित प्राधिकरण के रिकॉर्ड से ही मिल सकता है। यदि निर्माण स्वीकृत है तो दस्तावेजों के आधार पर स्थिति स्पष्ट हो सकती है और यदि कोई अनियमितता है तो प्रशासनिक जांच से उसका निर्धारण किया जा सकता है।
सम्पादकीय दृष्टिकोण
संजीव बालियान विवाद फिलहाल दो अलग-अलग दावों के बीच खड़ा है। एक तरफ अमित बाना पक्ष ने मारपीट, कार में तोड़फोड़ और कॉलोनी से जुड़े कथित अतिक्रमण का मुद्दा उठाया है, तो दूसरी तरफ विवेक बालियान और डॉ. संजीव बालियान ने आरोपों को खारिज करते हुए विवाद की अलग वजह बताई है।
इस मामले में वास्तविक स्थिति सामने लाने की जिम्मेदारी निष्पक्ष जांच पर है। जब तक पुलिस कार्रवाई, सीसीटीवी फुटेज, मेडिकल रिपोर्ट और प्राधिकरण के दस्तावेज सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आते, तब तक किसी एक पक्ष के दावे को अंतिम निष्कर्ष मानना जल्दबाजी होगी। फिलहाल इस विवाद का सबसे अहम पहलू यही है कि आरोपों से आगे बढ़कर प्रमाणों के आधार पर सच्चाई सामने आए।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।