सहारनपुर कलक्ट्रेट की मस्जिद ध्वस्त, अखिलेश-मायावती ने उठाए सवाल,इकरा हसन हाउस अरेस्ट
Asif Khan
•
2026-09-05 15:57:44
सहारनपुर कलक्ट्रेट परिसर की मस्जिद अदालत के आदेश के बाद ध्वस्त की गई। प्रशासन ने इसे सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण बताया, जबकि मस्जिद पक्ष ने प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
📍 Saharanpur 🗓️ 5 September 2026✍️ Asif Khan
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को शनिवार सुबह प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई अदालत के आदेश के बाद की गई। पूरे अभियान के दौरान कलक्ट्रेट परिसर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही और आम आवाजाही सीमित रखी गई। प्रशासन ने मस्जिद को सरकारी जमीन पर बना अनधिकृत निर्माण बताया है, जबकि मस्जिद पक्ष ने ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया और आदेश को लेकर आपत्ति दर्ज कराई है।
कार्रवाई से पहले रात में तैयारी
ध्वस्तीकरण अभियान से पहले ही प्रशासन ने कलक्ट्रेट परिसर में तैयारी पूरी कर ली थी। रात के दौरान जेसीबी, डंपर और दूसरे निर्माण हटाने वाले उपकरण परिसर में पहुंचाए गए। शनिवार सुबह कार्रवाई शुरू होने के साथ ही पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद रहे।
सुरक्षा के मद्देनज़र कलक्ट्रेट के सभी पांच प्रवेश द्वार बंद कर दिए गए। आसपास के इलाकों में भी पुलिस बल बढ़ाया गया। संवेदनशीलता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल के साथ रैपिड एक्शन फोर्स की तैनाती की जानकारी सामने आई है। प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा इंतजाम कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए किए गए थे।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई
मामला सरकारी जमीन पर कथित अनधिकृत कब्जे से जुड़ा है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक शिकायत के बाद राजस्व विभाग की जांच और प्रशासनिक कार्रवाई आगे बढ़ी। मार्च 2025 में सरकारी संपत्ति पर कथित अनधिकृत कब्जे को लेकर शिकायत दर्ज होने के बाद संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए गए थे।
प्रशासनिक पक्ष के मुताबिक सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने जुलाई 2026 में परिसर को अनधिकृत निर्माण मानते हुए बेदखली का आदेश दिया। रिपोर्टों में इस आदेश के साथ करीब 6.41 करोड़ रुपये की धनराशि का उल्लेख भी है, जिसे अनधिकृत कब्जे से जुड़ा दंड बताया गया है।
अदालत में चुनौती के बाद क्या हुआ
सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को मस्जिद प्रबंधन समिति ने जिला अदालत में चुनौती दी थी। बाद में जिला जज की अदालत ने अपील को खारिज करते हुए प्रशासनिक आदेश को बरकरार रखा। हालांकि उपलब्ध समाचार रिपोर्टों में इस आदेश की तारीख को लेकर अंतर है। कुछ रिपोर्टों में 2 सितंबर का उल्लेख है, जबकि एक विस्तृत रिपोर्ट में 4 सितंबर की तारीख दी गई है। इसलिए आदेश की मूल प्रति के बिना किसी एक तारीख को अंतिम तथ्य के रूप में रखना उचित नहीं होगा।
प्रशासन का कहना है कि अदालत द्वारा अपील खारिज किए जाने के बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई आगे बढ़ाई गई। सहारनपुर के पुलिस उपमहानिरीक्षक अभिषेक सिंह ने कहा कि सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने निर्माण को सरकारी जमीन पर अवैध पाया था और मस्जिद समिति की अपील खारिज हो चुकी थी। उन्होंने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियाती इंतजामों और कानूनी प्रक्रिया के पालन की बात कही।
मस्जिद पक्ष की क्या आपत्ति है
मस्जिद के मुतवल्ली तनवीर अहमद ने प्रशासन की कार्रवाई पर आपत्ति जताई। उनका दावा है कि सिटी मजिस्ट्रेट ने जुलाई में बेदखली का आदेश दिया था, लेकिन उनके मुताबिक अलग से ध्वस्तीकरण आदेश उपलब्ध नहीं कराया गया। उन्होंने यह भी कहा कि मामले को आगे उच्च न्यायालय में चुनौती दी जाएगी।
इस पक्ष का कहना है कि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान बीता समय बेदखली की तय अवधि की गणना में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। यही वजह है कि मस्जिद प्रबंधन कार्रवाई को लेकर कानूनी सवाल उठा रहा है। इन दावों की अंतिम स्थिति संबंधित न्यायिक अभिलेखों और आगे की अदालत की कार्यवाही से स्पष्ट होगी।
राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज
ध्वस्तीकरण के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी प्रतिक्रिया तेज हो गई। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए धार्मिक स्थलों और सभी धर्मों की आस्था के सम्मान की बात कही। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या संबंधित पक्ष को आगे की अदालतों में जाने का अवसर मिलना चाहिए था।
अखिलेश यादव ने सहारनपुर की कार्रवाई को लेकर सरकार की भूमिका पर आरोप लगाए और कहा कि सामाजिक सौहार्द बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है। उनके बयान को राजनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में देखा जाना चाहिए। इन आरोपों की पुष्टि के लिए सरकार या प्रशासन की ओर से अलग राजनीतिक प्रतिक्रिया को भी समान महत्व के साथ दर्ज करना जरूरी है।
मायावती ने भी जताई आपत्ति
बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने ध्वस्तीकरण पर आपत्ति जताई। उन्होंने उत्तर प्रदेश में धार्मिक स्थलों के खिलाफ होने वाली कार्रवाई में नियम-कानून के समुचित अनुपालन की जरूरत बताई। मायावती ने सरकार से ऐसे मामलों में वैकल्पिक समाधान तलाशने और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की।
मायावती ने संवैधानिक व्यवस्था के तहत सभी धर्मों और धार्मिक स्थलों के प्रति समान सम्मान तथा सुरक्षा की बात कही। उन्होंने यह भी कहा कि कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए और किसी भी समुदाय में असुरक्षा की स्थिति पैदा नहीं होनी चाहिए।
इकरा हसन के हाउस अरेस्ट का दावा
कैराना से समाजवादी पार्टी की लोकसभा सदस्य इकरा हसन ने दावा किया कि उन्हें सहारनपुर जाने से रोकने के लिए उनके कैराना स्थित आवास के बाहर पुलिस बल तैनात किया गया और उन्हें घर से बाहर नहीं निकलने दिया गया। उन्होंने कहा कि वह सहारनपुर जाकर अधिकारियों से मुलाकात करना चाहती थीं।
उनके हाउस अरेस्ट के दावे के बीच पुलिस तैनाती की जानकारी सामने आई है। हालांकि किसी व्यक्ति को औपचारिक रूप से हाउस अरेस्ट किए जाने की प्रशासनिक कानूनी स्थिति और उसका आधार संबंधित अधिकारियों के आधिकारिक बयान से स्पष्ट होना महत्वपूर्ण है। उपलब्ध रिपोर्टों में इकरा हसन का दावा प्रमुख रूप से दर्ज है।
मामले में आगे क्या
सहारनपुर कलक्ट्रेट मस्जिद विवाद अब प्रशासनिक कार्रवाई से आगे न्यायिक समीक्षा के अगले चरण में जा सकता है। मस्जिद पक्ष उच्च न्यायालय जाने की बात कह चुका है। ऐसे में आगे की कानूनी कार्यवाही से यह स्पष्ट होगा कि ध्वस्तीकरण से जुड़े प्रशासनिक और न्यायिक पहलुओं पर अदालत क्या रुख अपनाती है।
इस पूरे प्रकरण में दो अलग पक्ष सामने हैं। प्रशासन और पुलिस के अनुसार निर्माण सरकारी जमीन पर अनधिकृत था और अदालत में अपील खारिज होने के बाद कार्रवाई की गई। दूसरी ओर मस्जिद प्रबंधन प्रक्रिया, बेदखली की अवधि और ध्वस्तीकरण आदेश को लेकर सवाल उठा रहा है। इसलिए मामले की निष्पक्ष रिपोर्टिंग के लिए दोनों पक्षों के दावों और न्यायिक अभिलेखों को साथ देखना जरूरी है।
सहारनपुर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में ऐसी कार्रवाई का असर कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द पर भी पड़ सकता है। प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी कानून का पालन कराने के साथ शांति बनाए रखना है। राजनीतिक दलों और स्थानीय पक्षों से भी संयम की अपेक्षा रहती है। आगे की स्थिति अदालत और प्रशासन के आधिकारिक कदमों से अधिक स्पष्ट होगी।
ADVERTISEMENT
Asif Khan
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।