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मैनपुरी CO अशोक सिंह पर अखिलेश यादव का पलटवार, बोले निलंबन नहीं मांगेंगे, कार्रवाई पर उठाया सवाल

Mohammad Naved • 2026-09-03 12:10:29
मैनपुरी CO अशोक सिंह पर अखिलेश यादव का पलटवार, बोले निलंबन नहीं मांगेंगे, कार्रवाई पर उठाया सवाल

मैनपुरी के CO सिटी अशोक सिंह का वायरल वीडियो चर्चा में है। अखिलेश यादव ने प्रतिक्रिया देते हुए निलंबन की मांग नहीं करने की बात कही और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए।

📍 मैनपुरी, उत्तर प्रदेश

🗓️ 03 सितंबर 2026

✍️ By Mohd Naved

मैनपुरी में पुलिस अधिकारी के एक वायरल वीडियो ने अब सियासी बहस का रूप ले लिया है। मैनपुरी के CO सिटी अशोक कुमार सिंह का वीडियो सामने आने के बाद समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इस मामले पर प्रतिक्रिया दी है। वीडियो में पुलिस अधिकारी कुछ लोगों से बातचीत के दौरान अखिलेश यादव को वीडियो भेजने की बात कहते नजर आते हैं। इसके बाद पुलिस की कार्यशैली और राजनीतिक निष्पक्षता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

मामला कैसे सामने आया

यह पूरा प्रकरण मैनपुरी के एलाऊ थाना क्षेत्र में हुई गोलीबारी की घटना के बाद सामने आया। रिपोर्टों के मुताबिक संतोष नगर गांव में शराब की दुकान के पास एक ट्रक पर गोलीबारी हुई थी। इस घटना में ट्रक के कंडक्टर की मौत हो गई, जबकि चालक घायल हुआ। घटना के बाद पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।

पोस्टमार्टम हाउस के बाहर हुआ विवाद

घटना के बाद मृतक के परिजन पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे थे। इसी दौरान वहां मौजूद कुछ लोगों ने पुलिस अधिकारियों की वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू कर दी। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस अधिकारी ने लोगों से वीडियो बनाने से मना किया। विवाद बढ़ने पर CO सिटी अशोक कुमार सिंह का एक वीडियो रिकॉर्ड हुआ, जिसमें वह अपनी पहचान बताते हुए कैमरे के सामने कड़े अंदाज में बात करते दिखाई दिए।

वीडियो में क्या दिखा

वायरल वीडियो में अशोक सिंह अपनी वर्दी पर लगे नेमप्लेट की ओर इशारा करते हुए अपना नाम बताते दिखाई देते हैं। वह अपनी पहचान और मूल निवास आजमगढ़ से होने का जिक्र करते हुए वीडियो बनाने वालों से इसे अखिलेश यादव तक पहुंचाने की बात कहते नजर आए। वीडियो में उनका मूंछों पर ताव देने वाला अंदाज भी दिखाई देता है।

वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आईं। कुछ लोगों ने इसे पुलिस अधिकारी का कड़ा रवैया बताया, जबकि राजनीतिक बहस में इसे विपक्षी नेता के संदर्भ में पुलिस अधिकारी की भाषा और आचरण से जोड़कर देखा गया। उपलब्ध रिपोर्टों में वीडियो के पूरे संदर्भ को लेकर अलग-अलग विवरण भी सामने आए हैं, इसलिए केवल वायरल अंश के आधार पर पूरे घटनाक्रम का अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

अशोक सिंह ने दी सफाई

वायरल वीडियो पर अशोक कुमार सिंह की ओर से सफाई भी सामने आई है। उनके मुताबिक मामले को वीडियो के एक हिस्से के आधार पर देखा जा रहा है। उन्होंने गोलीबारी की जांच से जुड़े तथ्यों का हवाला देते हुए कहा कि पुलिस ने CCTV फुटेज और घायल चालक की पहचान के आधार पर एक आरोपी को गिरफ्तार किया है।

अधिकारी ने यह भी दावा किया कि एक अन्य व्यक्ति को राजनीतिक दबाव और आपसी रंजिश के कारण मामले में फंसाने का प्रयास किया जा रहा था। उनके मुताबिक घटना के समय संबंधित व्यक्ति घटनास्थल से दूर मैनपुरी में मौजूद था और उसकी मौजूदगी के प्रमाण मिले थे। ये बातें अधिकारी की ओर से दी गई सफाई के रूप में सामने आई हैं और इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की गई है।

अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया

वीडियो सामने आने के बाद अखिलेश यादव ने भी मामले पर प्रतिक्रिया दी। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक सपा प्रमुख ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर वायरल वीडियो को लेकर पुलिस अधिकारी पर निशाना साधा और कहा कि वह उनके निलंबन की मांग नहीं करेंगे।

अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया का राजनीतिक महत्व इसलिए भी है क्योंकि मैनपुरी समाजवादी पार्टी का मजबूत राजनीतिक आधार माना जाता है। ऐसे में पुलिस अधिकारी द्वारा बातचीत के दौरान अखिलेश यादव का नाम लिए जाने से मामला स्थानीय प्रशासनिक विवाद से आगे बढ़कर राजनीतिक बहस में आ गया है।

निलंबन की मांग क्यों नहीं

इस पूरे मामले में अखिलेश यादव के रुख का एक अहम पहलू यह है कि उन्होंने सीधे निलंबन की मांग करने के बजाय पुलिस व्यवस्था और अधिकारी के आचरण को राजनीतिक बहस का विषय बनाया। इससे यह संकेत मिलता है कि सपा इस मामले को केवल एक अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई तक सीमित रखने के बजाय व्यापक प्रशासनिक जवाबदेही के मुद्दे के रूप में पेश करना चाहती है।

हालांकि किसी सरकारी अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई का फैसला संबंधित पुलिस और प्रशासनिक प्राधिकारियों के अधिकार क्षेत्र में आता है। किसी राजनीतिक नेता की प्रतिक्रिया अपने आप में निलंबन या विभागीय कार्रवाई का आधार नहीं होती। इसके लिए आधिकारिक जांच और सेवा नियमों के तहत निर्णय जरूरी होता है।

पुलिस अधिकारी की भूमिका पर सवाल

इस प्रकरण का सबसे महत्वपूर्ण सवाल पुलिस अधिकारियों के सार्वजनिक आचरण से जुड़ा है। पुलिस अधिकारी कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ संवेदनशील परिस्थितियों में संयमित संवाद के लिए भी जिम्मेदार होते हैं। खासकर किसी मृत्यु के बाद पोस्टमार्टम हाउस जैसी जगह पर परिजनों और स्थानीय लोगों के साथ संवाद बेहद संवेदनशील होता है।

दूसरी तरफ, किसी जांच या आधिकारिक कार्रवाई के दौरान पुलिस अधिकारियों की रिकॉर्डिंग को लेकर भी विवाद सामने आते रहे हैं। ऐसे मामलों में पुलिस और नागरिकों दोनों के अधिकार तथा जिम्मेदारियां स्पष्ट रहनी चाहिए। वायरल वीडियो के आधार पर किसी एक पक्ष को पूरी तरह दोषी ठहराने से पहले घटनाक्रम का पूरा संदर्भ सामने आना जरूरी है।

मैनपुरी गोलीबारी का संदर्भ

जिस घटना के बाद यह विवाद सामने आया, उसमें ट्रक पर गोलीबारी और कंडक्टर की मौत का मामला मुख्य आपराधिक प्रकरण है। पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी इस मामले में हमलावरों की पहचान, साक्ष्य जुटाने और निष्पक्ष जांच पूरी करने की है।

वायरल वीडियो ने इस मूल आपराधिक मामले की जगह पुलिस अधिकारी के व्यवहार को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। ऐसे में यह जरूरी है कि गोलीबारी की जांच और अधिकारी के वायरल वीडियो से जुड़ी प्रशासनिक समीक्षा को अलग-अलग देखा जाए।

अशोक सिंह की तैनाती और सेवा पृष्ठभूमि

उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार अशोक कुमार सिंह मूल रूप से आजमगढ़ के रहने वाले हैं और उत्तर प्रदेश पुलिस में अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। जून 2026 में हुए प्रशासनिक फेरबदल के दौरान उनका तबादला औरैया से मैनपुरी किया गया था। वर्तमान में वह मैनपुरी में CO सिटी की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

वायरल वीडियो के बाद उनके पुराने सेवा रिकॉर्ड और पहचान को लेकर भी सोशल मीडिया पर चर्चा हुई। लेकिन किसी अधिकारी के पूरे सेवा आचरण का आकलन केवल एक वायरल वीडियो के आधार पर करना पत्रकारिता के लिहाज से उचित नहीं है। इसके लिए विभागीय रिकॉर्ड, आधिकारिक जांच और संबंधित पक्षों के बयान जरूरी होते हैं।

सियासी असर क्या होगा

मैनपुरी की राजनीति में समाजवादी पार्टी का प्रभाव लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है। ऐसे में किसी पुलिस अधिकारी के बयान में अखिलेश यादव का नाम आने से राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज होना स्वाभाविक है। 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले प्रशासन और विपक्ष के बीच बयानबाजी भी राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन रही है।

इस मामले में सपा के लिए मुद्दा पुलिस प्रशासन की जवाबदेही का है, जबकि प्रशासन के लिए मुख्य चुनौती कानून व्यवस्था और निष्पक्ष जांच को कायम रखना है। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप से अलग वास्तविक जांच के तथ्य सामने आना अधिक महत्वपूर्ण होगा।

अब आगे क्या

फिलहाल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी में वायरल वीडियो को लेकर विवाद और CO अशोक सिंह की सफाई सामने आई है। आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि पुलिस या जिला प्रशासन इस वीडियो को लेकर कोई औपचारिक जांच या विभागीय समीक्षा शुरू करता है या नहीं।

साथ ही गोलीबारी के मूल मामले की विवेचना भी जारी रहना जरूरी है। आरोपी की गिरफ्तारी, CCTV साक्ष्य, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य जांच सामग्री के आधार पर ही आपराधिक मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट होगी।

निष्कर्ष

मैनपुरी का यह प्रकरण एक वायरल वीडियो से शुरू होकर पुलिस आचरण, राजनीतिक प्रतिक्रिया और कानून व्यवस्था की बहस तक पहुंच गया है। अखिलेश यादव ने मामले पर प्रतिक्रिया देकर इसे राजनीतिक विमर्श में जगह दी है, जबकि अशोक सिंह ने वीडियो के संदर्भ को लेकर अपनी सफाई पेश की है।

अब सबसे अहम बात यह है कि वायरल वीडियो से आगे बढ़कर पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष पड़ताल हो। पुलिस अधिकारी का आचरण हो या गोलीबारी की जांच, दोनों मामलों में तथ्य, प्रक्रिया और जवाबदेही को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। किसी भी निष्कर्ष से पहले आधिकारिक जांच और प्रमाणित तथ्यों का इंतजार करना ही सार्वजनिक हित में होगा।

वीडियो देखें

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Mohammad Naved

Mohammad Naved

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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