बैंकॉक में आईएमएफ की सलाहकार समिति ने कहा कि युद्ध, महंगी ऊर्जा और बाधित व्यापार मार्ग वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम हैं। उसने वित्तीय दबाव झेल रहे देशों को अधिक मदद देने की अपील की।
बैंकॉक, थाईलैंड | 17 अक्टूबर 2026
By Mohd Haris
दुनिया में जारी युद्ध, ऊर्जा की ऊंची क़ीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर नई चेतावनी सामने आई है।
थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक एवं वित्तीय समिति ने शनिवार, 17 अक्टूबर को जारी बयान में कहा कि आर्थिक जोखिम अभी कम नहीं हुए हैं। समिति ने आगाह किया कि सैन्य संघर्ष और व्यापारिक विवाद बढ़ने से अहम व्यापारिक रास्तों पर आवाजाही प्रभावित हो सकती है।
इससे पेट्रोलियम उत्पादों और दूसरी ज़रूरी वस्तुओं की क़ीमतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। समिति ने उन देशों के लिए अधिक अंतरराष्ट्रीय सहयोग की अपील की है, जो युद्ध और महंगी ऊर्जा के असर से अल्पकालिक वित्तीय मुश्किलों का सामना कर रहे हैं।
मुख्य घटनाक्रम
बैंकॉक में हुई समिति की 54वीं बैठक के बाद अध्यक्ष का बयान जारी किया गया।
समिति के अध्यक्ष और सऊदी अरब के वित्त मंत्री मोहम्मद अल-जदान की ओर से जारी बयान में वैश्विक आर्थिक स्थिरता को लेकर कई अहम मुद्दे उठाए गए।
बयान के मुताबिक दुनिया की अर्थव्यवस्था ने हाल के आर्थिक झटकों का अपेक्षा से बेहतर सामना किया है।
इसके बावजूद आगे की परिस्थितियों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
समिति ने कहा कि संघर्ष बढ़ने और व्यापारिक तनाव गहराने से वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।
विशेष रूप से ऊर्जा उत्पादों की क़ीमतें और खाद्य सुरक्षा चिंता के प्रमुख विषय हैं।
वित्तीय दबाव झेल रहे देशों के लिए अधिक सहयोग की ज़रूरत भी बताई गई है।
युद्ध का अर्थव्यवस्था पर असर
युद्ध का आर्थिक असर केवल संघर्ष वाले देशों तक सीमित नहीं रहता।
जब किसी महत्वपूर्ण व्यापारिक रास्ते पर आवाजाही प्रभावित होती है, तो माल ढुलाई और बीमा की लागत बढ़ सकती है।
तेल तथा गैस की आपूर्ति प्रभावित होने से ऊर्जा आयात करने वाले देशों का खर्च बढ़ता है।
इसका असर परिवहन, उद्योग और रोजमर्रा की वस्तुओं की क़ीमतों पर पड़ सकता है।
समिति ने इसी तरह के जोखिमों को वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण बताया है।
हालांकि, बयान में किसी नई आपूर्ति बाधा से होने वाले नुकसान का निश्चित आर्थिक आंकड़ा जारी नहीं किया गया।
गरीब देशों के लिए चिंता क्यों?
कम आय वाले देशों के पास आर्थिक संकट से निपटने के संसाधन सीमित होते हैं।
इन देशों में ऊर्जा और खाद्य पदार्थों की महंगाई का असर आम परिवारों पर अधिक पड़ सकता है।
इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय कर्ज़ महंगा होने से सरकारी बजट पर दबाव बढ़ता है।
समिति ने वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रहे देशों के लिए अंतरराष्ट्रीय सहायता और नीतिगत सहयोग बढ़ाने पर ज़ोर दिया है।
यह अपील है। इसे किसी नए वित्तीय पैकेज की मंज़ूरी नहीं माना जाना चाहिए।
कर्ज़ और ब्याज दरों पर चिंता
समिति के बयान में सरकारी कर्ज़ और वित्तीय बाज़ार की स्थिति का भी ज़िक्र किया गया है।
कई अर्थव्यवस्थाओं में सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाला प्रतिफल बढ़ने से कर्ज़ लेने की लागत प्रभावित हो रही है।
जिन देशों को पुराने कर्ज़ का भुगतान करने या नया कर्ज़ जुटाने की ज़रूरत है, उनके सामने अतिरिक्त चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।
समिति ने वित्तीय अनुशासन और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने की अहमियत बताई है।
साथ ही केंद्रीय बैंकों की स्वतंत्रता और महंगाई नियंत्रण की नीतियों को महत्वपूर्ण माना है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर भी चर्चा
बैंकॉक में आयोजित वार्षिक बैठकों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आर्थिक असर पर भी चर्चा हुई।
नई तकनीक से उत्पादकता और निवेश बढ़ने की संभावनाएं हैं।
लेकिन रोजगार, वित्तीय बाज़ार और आर्थिक असमानता से जुड़े जोखिम भी सामने आ रहे हैं।
समिति ने तकनीकी बदलावों के असर पर आगे विश्लेषण और नीतिगत तैयारी की ज़रूरत बताई।
भारत के लिए क्या मायने हैं?
भारत वैश्विक ऊर्जा बाज़ार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़ी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।
इसलिए कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय क़ीमतों और आपूर्ति में बदलाव भारत की आयात लागत को प्रभावित कर सकते हैं।
महंगे ऊर्जा आयात से व्यापार घाटे, परिवहन लागत और महंगाई पर दबाव पड़ने की आशंका रहती है।
हालांकि, वास्तविक असर कई बातों पर निर्भर करता है।
इनमें तेल की औसत आयात क़ीमत, रुपये की विनिमय दर, सरकारी कर नीति और घरेलू मांग शामिल हैं।
आईएमएफ की समिति ने इस बयान में भारत के लिए किसी नई आर्थिक पाबंदी या विशेष वित्तीय चेतावनी की घोषणा नहीं की है।
आधिकारिक बयान
समिति के अध्यक्ष की ओर से जारी बयान में वैश्विक आर्थिक जोखिमों के बढ़ने की आशंका जताई गई है।
बयान में कहा गया कि संघर्ष और व्यापारिक तनाव महत्वपूर्ण व्यापार मार्गों को प्रभावित कर सकते हैं।
समिति ने ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा पर संभावित असर को भी चिंता का विषय बताया।
यह समिति का सामूहिक नीतिगत आकलन है। इसे किसी विशेष देश के खिलाफ आर्थिक कार्रवाई की घोषणा नहीं समझना चाहिए।
पृष्ठभूमि
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक एवं वित्तीय समिति वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करती है।
समिति आईएमएफ के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स को नीतिगत सलाह देती है।
इसकी बैठकों में सदस्य देशों के प्रतिनिधि आर्थिक जोखिमों, वित्तीय सहयोग और नीतिगत प्राथमिकताओं पर विचार करते हैं।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।