मनीला में क्षेत्रीय बैठक के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की। भारत ने व्यापार असंतुलन कम करने, भारतीय व्यवसायों के लिए बेहतर बाजार पहुंच, सप्लाई चेन की विश्वसनीयता बढ़ाने और द्विपक्षीय संवाद को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
📍 मनीला
📰 22 जुलाई 2026
✍️ अपूर्वा चौधरी
भारत ने चीन के सामने रखीं आर्थिक चिंताएं
भारत और चीन के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक फिलीपींस की राजधानी मनीला में आयोजित हुई। क्षेत्रीय बैठक के इतर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात कर लंबे समय से लंबित आर्थिक मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
बैठक में भारत ने स्पष्ट रूप से कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को संतुलित बनाने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। भारत ने विशेष रूप से व्यापार असंतुलन को कम करने और भारतीय कंपनियों को चीनी बाजार में बेहतर अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
मार्केट एक्सेस और सप्लाई चेन पर फोकस
वार्ता के दौरान भारत ने चीनी बाजार में भारतीय उत्पादों और कंपनियों के लिए बेहतर बाजार पहुंच सुनिश्चित करने की मांग दोहराई। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच सप्लाई चेन को अधिक भरोसेमंद, स्थिर और पूर्वानुमान योग्य बनाने पर भी चर्चा हुई।
भारत का मानना है कि मजबूत और पारदर्शी व्यापारिक व्यवस्था दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए लाभदायक होगी तथा क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग को भी मजबूती मिलेगी।
द्विपक्षीय संवाद को आगे बढ़ाने पर बनी सहमति
बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने आपसी सहमति के आधार पर द्विपक्षीय संवाद तंत्र (Bilateral Dialogue Mechanisms) को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा की। भारत का मानना है कि नियमित संवाद के माध्यम से व्यापार, निवेश, आर्थिक सहयोग और अन्य लंबित मुद्दों का समाधान अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया कि आर्थिक संबंधों में संतुलन और पारदर्शिता दोनों देशों के हित में है। उन्होंने भरोसेमंद सप्लाई चेन और निष्पक्ष व्यापारिक वातावरण को भविष्य के सहयोग की महत्वपूर्ण शर्त बताया।
भारत-चीन व्यापार संबंध क्यों हैं महत्वपूर्ण?
चीन भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में शामिल है। हालांकि, दोनों देशों के बीच व्यापार लगातार बढ़ा है, लेकिन लंबे समय से भारत का व्यापार घाटा (Trade Deficit) चिंता का विषय बना हुआ है।
भारत लगातार यह मांग करता रहा है कि भारतीय कृषि उत्पादों, दवाओं, आईटी सेवाओं और अन्य वस्तुओं को चीनी बाजार में अधिक अवसर मिलें। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बाजार पहुंच बेहतर होती है और व्यापार असंतुलन कम होता है, तो दोनों देशों के आर्थिक संबंध और मजबूत हो सकते हैं।
आगे किस पर रहेगी नजर?
अब दोनों देशों के बीच भविष्य की बैठकों और आर्थिक वार्ताओं पर नजर रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि व्यापार, निवेश और सप्लाई चेन से जुड़े मुद्दों पर ठोस प्रगति होती है, तो इसका सकारात्मक प्रभाव न केवल भारत-चीन संबंधों बल्कि पूरे एशियाई क्षेत्र की आर्थिक स्थिरता पर भी पड़ सकता है।
मनीला में हुई भारत-चीन वार्ता से स्पष्ट है कि दोनों देश आर्थिक संबंधों को अधिक स्थिर और संतुलित बनाने की दिशा में बातचीत जारी रखना चाहते हैं। भारत ने व्यापार असंतुलन कम करने, भारतीय कंपनियों के लिए बेहतर बाजार पहुंच और भरोसेमंद सप्लाई चेन की आवश्यकता पर जोर दिया। आने वाले समय में इन मुद्दों पर होने वाली प्रगति दोनों देशों के व्यापारिक और रणनीतिक संबंधों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।