वॉशिंगटन डीसी
31 जुलाई 2026
Asif Khanअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि गाजा में हमास और अन्य हथियारबंद संगठनों के डिसआर्मामेंट को लेकर एक ऐतिहासिक समझौता हुआ है। ट्रंप के मुताबिक यह पहल गाजा में लंबे समय से जारी संघर्ष को समाप्त करने और नई फ़िलिस्तीनी प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में अहम क़दम हो सकती है। हालांकि इस घोषणा के बाद भी कई महत्वपूर्ण सवाल अनुत्तरित हैं क्योंकि न तो हमास और न ही इज़रायली सरकार ने इस पर अंतिम सार्वजनिक सहमति जताई है।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ट्रुथ सोशल पर कहा कि प्रस्ताव के तहत गाजा में सक्रिय हमास और अन्य हथियारबंद गुट चरणबद्ध तरीके से हथियार छोड़ेंगे। इसके साथ ही इज़रायली सेना की क्रमिक वापसी होगी और सुरक्षा व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय स्थिरता बल तथा नए फ़िलिस्तीनी पुलिस ढांचे को सौंपी जाएगी।
ट्रंप का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य गाजा को एक स्थिर प्रशासन देना और भविष्य में सात अक्टूबर 2023 जैसी हिंसक घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना है। उन्होंने इसे अपनी शांति पहल का सबसे महत्वपूर्ण चरण बताया।
घोषणा के अनुसार गाजा में एक नई फ़िलिस्तीनी सरकार गठित करने की योजना है जो स्थानीय प्रशासन, पुनर्निर्माण और सार्वजनिक सेवाओं की ज़िम्मेदारी संभालेगी। प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग से गाजा के पुनर्विकास और प्रशासनिक संस्थाओं को मज़बूत किया जाएगा।
ट्रंप ने मिस्र, कतर और तुर्किये की मध्यस्थ भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि कई महीनों की संवेदनशील बातचीत के बाद यह प्रारूप तैयार हुआ है।
हालांकि ट्रंप ने इसे ऐतिहासिक सफलता बताया है, लेकिन इस घोषणा के तुरंत बाद कई विशेषज्ञों ने इसके व्यावहारिक पहलुओं पर सवाल उठाए हैं। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या हमास वास्तव में अपने सभी हथियार छोड़ने के लिए तैयार होगा।
दूसरी ओर इज़रायल लंबे समय से गाजा के पूर्ण सैन्य निरस्त्रीकरण की मांग करता रहा है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार इज़रायली अधिकारियों का मानना है कि प्रस्ताव में अभी भी कई ऐसे बिंदु हैं जिन पर स्पष्टता आवश्यक है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि समाचार लिखे जाने तक इज़रायली सरकार और हमास की ओर से इस प्रस्ताव पर अंतिम आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। यही वजह है कि समझौते को अभी घोषित पहल के रूप में देखा जा रहा है, न कि पूरी तरह लागू व्यवस्था के रूप में।
विश्लेषकों का कहना है कि किसी भी स्थायी समाधान के लिए सभी पक्षों की सहमति, सुरक्षा व्यवस्था की विश्वसनीय निगरानी और स्वतंत्र सत्यापन आवश्यक होगा।
यदि यह पहल सफल होती है तो इसका असर केवल गाजा तक सीमित नहीं रहेगा। इससे पूरे पश्चिम एशिया की डिप्लोमेसी, क्षेत्रीय सिक्योरिटी और अमेरिका की भूमिका पर भी व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। मिस्र, कतर और अन्य मध्यस्थ देशों की भूमिका भी और अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी।
इसके विपरीत यदि समझौता अमल में नहीं आ पाया तो क्षेत्र में तनाव और अविश्वास और बढ़ सकता है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस प्रक्रिया पर कड़ी नज़र बनाए हुए है।
गाजा लंबे समय से युद्ध और मानवीय संकट का सामना कर रहा है। यदि प्रस्ताव लागू होता है तो पुनर्निर्माण, राहत सामग्री, स्वास्थ्य सेवाओं और बुनियादी ढांचे में अंतरराष्ट्रीय निवेश बढ़ सकता है। इससे लाखों विस्थापित लोगों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना बनेगी।
ट्रंप की घोषणा ने मिडिल ईस्ट की सियासत में नई बहस छेड़ दी है। फिलहाल इसे एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन इसकी वास्तविक सफलता ज़मीन पर होने वाले अमल, सभी पक्षों की सहमति और अंतरराष्ट्रीय सत्यापन पर निर्भर करेगी। आने वाले दिनों में जारी होने वाली विस्तृत शर्तें तय करेंगी कि यह पहल वास्तव में स्थायी शांति का रास्ता बनती है या केवल एक महत्वाकांक्षी प्रस्ताव बनकर रह जाती है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।