गाजा में पहले युद्धविराम, फिर ट्रंप की शांति योजना, हमास की नई शर्त
ट्रंप के शांति रोडमैप पर हमास का जवाब, इजरायल से पहले कार्रवाई की मांग
गाजा समझौते पर बढ़ा गतिरोध, हमास बोला, पहले हमले रुकें
गाजा में प्रस्तावित दूसरे चरण के शांति समझौते पर हमास और इजरायल के बीच प्राथमिकताओं को लेकर मतभेद सामने आए हैं। हमास का कहना है कि पहले सैन्य कार्रवाई रुके, जबकि अमेरिकी पक्ष निरस्त्रीकरण और आगे की प्रक्रिया पर जोर दे रहा है।
गाजा पट्टी
1 अगस्त 2026
Asif Khan
गाजा में प्रस्तावित शांति प्रक्रिया एक बार फिर संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गई है। फिलीस्तीनी संगठन हमास ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रस्तावित शांति योजना के दूसरे चरण पर आगे बढ़ने से पहले इजरायल को गाजा में सभी सैन्य हमले और लक्षित हत्याएं पूरी तरह रोकनी होंगी। संगठन का कहना है कि पहले चरण में तय सभी प्रावधानों का पालन भी अनिवार्य है।
हमास के लिखित बयान के अनुसार, दूसरा चरण तभी शुरू हो सकता है जब इजरायल अपनी सैन्य कार्रवाई समाप्त करे और पहले हुए समझौतों को पूरी तरह लागू करे। संगठन ने यह भी कहा कि उसने मध्यस्थ देशों के साथ जारी वार्ताओं में "जिम्मेदार और सकारात्मक" रुख अपनाया है।
दूसरी ओर, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि उनके "बोर्ड ऑफ पीस" ने एक ऐसे समझौते को मंजूरी दी है जिसमें हमास और अन्य सशस्त्र समूहों के चरणबद्ध निरस्त्रीकरण के बाद इजरायली सेना गाजा से हटेगी। हालांकि इस दावे के बावजूद योजना के क्रियान्वयन पर अभी व्यापक सहमति दिखाई नहीं दे रही है।
रॉयटर्स के अनुसार, ट्रंप प्रशासन इस प्रस्ताव को बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि के रूप में पेश कर रहा है, लेकिन इजरायल की ओर से आधिकारिक समर्थन पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। वहीं हमास ने भी संकेत दिया है कि वह पहले सुरक्षा और युद्धविराम संबंधी शर्तों को प्राथमिकता देता है।
एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, प्रस्तावित समझौते में चरणबद्ध युद्धविराम, अंतरराष्ट्रीय निगरानी, गाजा के प्रशासन के लिए एक अंतरिम व्यवस्था और हथियारों के प्रबंधन जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। लेकिन इन चरणों के क्रम को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद बने हुए हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा विवाद का केंद्र यह नहीं है कि समझौता होगा या नहीं, बल्कि यह है कि पहला कदम कौन उठाएगा। इजरायल पहले हमास के निरस्त्रीकरण पर जोर देता है, जबकि हमास पहले सैन्य कार्रवाई रोकने और पहले चरण की प्रतिबद्धताओं के पूर्ण पालन की मांग कर रहा है। यही मतभेद पूरी प्रक्रिया को जटिल बना रहा है।
इस बीच मध्यस्थ देशों के सामने चुनौती यह है कि दोनों पक्षों के बीच विश्वास की कमी को कैसे दूर किया जाए। यदि युद्धविराम, मानवीय सहायता और सुरक्षा संबंधी प्रावधानों पर सहमति बनती है तो शांति प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। अन्यथा दूसरा चरण लंबे समय तक अटका रह सकता है।
फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों से यह स्पष्ट है कि ट्रंप प्रशासन प्रस्तावित रोडमैप को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, जबकि हमास और इजरायल के बीच क्रियान्वयन के क्रम पर गंभीर मतभेद बने हुए हैं। ऐसे में गाजा में स्थायी शांति की दिशा अब भी कूटनीतिक वार्ताओं और मध्यस्थों के प्रयासों पर निर्भर करती दिखाई देती है।
भाग 2: बैकग्राउंड, टाइमलाइन और एडिटोरियल एनालिसिस
गाजा पट्टी पिछले कई वर्षों से इजरायल और हमास के बीच संघर्ष का प्रमुख केंद्र रही है। अक्टूबर 2023 में शुरू हुए व्यापक युद्ध के बाद क्षेत्र में भारी मानवीय संकट पैदा हुआ। अंतरराष्ट्रीय समुदाय, संयुक्त राष्ट्र और कई मध्यस्थ देशों ने समय-समय पर युद्धविराम और बंधकों की रिहाई के लिए प्रयास किए, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल सका।
2026 में अमेरिका ने संघर्ष समाप्त करने के उद्देश्य से एक नया कूटनीतिक रोडमैप आगे बढ़ाने की कोशिश की। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे क्षेत्र में दीर्घकालिक शांति स्थापित करने की पहल बताया। प्रस्तावित योजना में युद्धविराम, बंधकों की रिहाई, गाजा के भविष्य के प्रशासन और सशस्त्र समूहों के निरस्त्रीकरण जैसे मुद्दों को चरणबद्ध तरीके से शामिल करने की बात कही गई।
अक्टूबर 2023
हमास के हमले के बाद इजरायल ने गाजा में व्यापक सैन्य अभियान शुरू किया। इसके बाद संघर्ष लगातार जारी रहा।
2024-2025
कतर, मिस्र और अमेरिका की मध्यस्थता में कई दौर की वार्ताएं हुईं। कुछ अस्थायी युद्धविराम और बंधकों की अदला-बदली हुई, लेकिन स्थायी समझौता नहीं बन सका।
जुलाई 2026
अमेरिकी प्रशासन ने गाजा के लिए नए शांति रोडमैप पर काम तेज किया। इसमें दूसरे चरण के तहत निरस्त्रीकरण और इजरायली सेना की वापसी का प्रस्ताव सामने आया।
1 अगस्त 2026
हमास ने कहा कि दूसरे चरण पर आगे बढ़ने से पहले इजरायल को सभी सैन्य हमले और लक्षित कार्रवाई पूरी तरह रोकनी होगी तथा पहले चरण के सभी प्रावधान लागू करने होंगे।
यह विवाद केवल युद्धविराम तक सीमित नहीं है। इसका असर पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा, क्षेत्रीय कूटनीति और मानवीय स्थिति पर पड़ सकता है।
यदि दूसरा चरण लागू होता है, तो गाजा में राहत सामग्री की आपूर्ति, पुनर्निर्माण और विस्थापित लोगों की वापसी का रास्ता खुल सकता है। वहीं यदि वार्ता विफल होती है, तो संघर्ष और लंबा खिंच सकता है।
हमास का पक्ष
हमास का कहना है कि स्थायी युद्धविराम के बिना किसी भी निरस्त्रीकरण या अगले चरण की प्रक्रिया पर आगे बढ़ना स्वीकार्य नहीं है। संगठन पहले इजरायली सैन्य कार्रवाई रोकने और पूर्व समझौतों के पालन की मांग कर रहा है।
इजरायल का पक्ष
इजरायल लंबे समय से कहता रहा है कि गाजा में स्थायी सुरक्षा तभी संभव है जब हमास की सैन्य क्षमता समाप्त हो। इजरायली नेतृत्व का तर्क है कि भविष्य में हमलों की पुनरावृत्ति रोकना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।
अमेरिका का पक्ष
ट्रंप प्रशासन इस योजना को क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बता रहा है। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि चरणबद्ध समझौते से युद्ध समाप्त करने और दीर्घकालिक सुरक्षा व्यवस्था बनाने का अवसर मिल सकता है।
मध्यस्थ देशों की भूमिका
कतर, मिस्र और अन्य मध्यस्थ देश दोनों पक्षों के बीच विश्वास बहाल करने की कोशिश कर रहे हैं। उनका उद्देश्य ऐसा समझौता तैयार करना है जिसे सभी पक्ष लागू करने पर सहमत हों।
अब तक यह पुष्टि हुई है कि हमास ने दूसरे चरण से पहले युद्धविराम की शर्त सार्वजनिक रूप से रखी है।
यह भी पुष्टि हुई है कि अमेरिकी प्रशासन ने नए शांति प्रस्ताव की घोषणा की है।
हालांकि, योजना के सभी बिंदुओं पर सभी पक्षों की अंतिम सहमति सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है। इसलिए यह कहना कि समझौता पूरी तरह तय हो चुका है, उपलब्ध जानकारी के आधार पर उचित नहीं होगा।
यह घटनाक्रम ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति की बड़ी परीक्षा माना जा रहा है। यदि समझौता आगे बढ़ता है, तो अमेरिका इसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि के रूप में पेश कर सकता है।
इजरायल की आंतरिक राजनीति पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि सुरक्षा और युद्धविराम को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के अलग-अलग रुख हैं।
फिलीस्तीनी पक्ष में भी गाजा के भविष्य, प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस तेज हो सकती है।
गाजा में लंबे समय से जारी संघर्ष ने बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सेवाओं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंचाया है।
यदि स्थायी युद्धविराम लागू होता है, तो अंतरराष्ट्रीय सहायता, पुनर्निर्माण परियोजनाओं और निवेश के अवसर बढ़ सकते हैं। इसके विपरीत संघर्ष जारी रहने से मानवीय और आर्थिक संकट और गहरा सकता है।
गाजा संकट केवल इजरायल और फिलीस्तीन तक सीमित नहीं है। इसका असर पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार मार्गों और वैश्विक कूटनीति पर पड़ता है।
संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय देशों और क्षेत्रीय शक्तियों की नजर भी इस प्रक्रिया पर बनी हुई है। यदि वार्ता सफल होती है, तो यह व्यापक क्षेत्रीय तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
उपलब्ध तथ्यों से यह स्पष्ट है कि सबसे बड़ी चुनौती किसी नए प्रस्ताव की घोषणा नहीं, बल्कि उसके क्रियान्वयन का क्रम है। हमास पहले युद्धविराम चाहता है, जबकि इजरायल सुरक्षा और निरस्त्रीकरण को प्राथमिकता देता है। यही मूल मतभेद वार्ता को जटिल बना रहा है।
किसी भी स्थायी समाधान के लिए केवल राजनीतिक घोषणा पर्याप्त नहीं होगी। सभी पक्षों की स्पष्ट सहमति, स्वतंत्र निगरानी, मानवीय सहायता की निर्बाध आपूर्ति और चरणबद्ध विश्वास निर्माण की आवश्यकता होगी। जब तक इन बिंदुओं पर व्यावहारिक सहमति नहीं बनती, गाजा में स्थायी शांति की राह चुनौतीपूर्ण बनी रहेगी।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।