हमास के हथियार छोड़ने तक गाजा का पुनर्निर्माण नहीं: कुशनर
गाजा पर अमेरिका की नई शर्त, हमास के निरस्त्रीकरण पर जोर
कुशनर की चेतावनी, हमास डिसआर्ममेंट के बिना गाजा में निर्माण रुकेगा
अमेरिकी विशेष दूत जारेड कुशनर ने कहा कि हमास के निरस्त्रीकरण और गाजा के डिमिलिटराजेशन तक पुनर्निर्माण नहीं होगा। अमेरिका समर्थित रोडमैप में इजरायली वापसी, हमास के हथियारों का नियंत्रण और नई फिलिस्तीनी प्रशासनिक व्यवस्था शामिल है। वार्ता में मुख्य विवाद इन कदमों के क्रम और सुरक्षा गारंटी पर है।
गाजा/यरूशलम |18 अगस्त 2026 |शाह टाइम्स
By Mohd Haris
गाजा पुनर्निर्माण पर कुशनर का बड़ा बयान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत जारेड कुशनर ने कहा है कि हमास के निरस्त्रीकरण से पहले गाजा का पुनर्निर्माण नहीं होने दिया जाएगा। उनका बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका की मध्यस्थता में गाजा युद्ध को समाप्त करने के लिए चल रही बातचीत में इजरायल और हमास के बीच मुख्य मतभेद अभी कायम हैं।
कुशनर ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ लंबी बैठक के बाद यह रुख दोहराया। रॉयटर्स के मुताबिक अमेरिका समर्थित रोडमैप में हमास का निरस्त्रीकरण, इजरायली सैन्य वापसी और गाजा में नई प्रशासनिक व्यवस्था के साथ पुनर्निर्माण की योजना शामिल है। लेकिन दोनों पक्ष इस बात पर सहमत नहीं हैं कि इन कदमों को किस क्रम में लागू किया जाए।
इस समय सबसे बड़ा विवाद हमास के हथियारों को लेकर है। इजरायल का रुख है कि हमास को पूरी तरह निरस्त्र किए बिना इजरायली सेना गाजा से वापस नहीं जाएगी। इसके साथ ही पुनर्निर्माण भी हमास के डिमिलिटराजेशन के बाद ही शुरू करने की शर्त रखी गई है। दूसरी तरफ हमास ने अमेरिकी रोडमैप पर सैद्धांतिक सहमति जताई है, लेकिन वह इजरायली सैन्य वापसी और स्थायी युद्धविराम को प्रक्रिया का अहम हिस्सा मानता है। रॉयटर्स के मुताबिक हमास निरस्त्रीकरण को हथियारों को एक फिलिस्तीनी टेक्नोक्रेटिक अथॉरिटी के नियंत्रण में रखने के रूप में देख रहा है, जबकि इजरायल पूर्ण निरस्त्रीकरण पर जोर दे रहा है। यही अंतर वार्ता को आगे बढ़ने से रोक रहा है। दोनों पक्ष सिद्धांत रूप से राजनीतिक समाधान की बात कर रहे हैं, लेकिन सुरक्षा, हथियार और सैन्य वापसी के सवाल पर एक-दूसरे से पहले कदम उठाने को तैयार नहीं हैं।
जारेड कुशनर ट्रंप प्रशासन के गाजा प्लान में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने मिस्र में हमास के वरिष्ठ नेता खलील अल-हय्या से बातचीत की और उसके बाद यरूशलम में नेतन्याहू से मुलाकात की। यह संपर्क इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका लंबे समय से हमास और इजरायल के बीच प्रत्यक्ष बातचीत के बजाय मध्यस्थ देशों के जरिए रास्ता बनाने की कोशिश करता रहा है। कुशनर की बातचीत में मिस्र, कतर और तुर्की के मध्यस्थ भी शामिल रहे। इन देशों की भूमिका गाजा में युद्धविराम, मानवीय सहायता और राजनीतिक संक्रमण के लिए संपर्क बनाए रखने में महत्वपूर्ण है। लेकिन दो दिनों की बातचीत के बाद कोई निर्णायक समझौता नहीं हुआ। रॉयटर्स ने इसे बिना ब्रेकथ्रू के समाप्त हुई वार्ता बताया है।
अमेरिका समर्थित योजना का मूल ढांचा गाजा में युद्ध समाप्त करने, हमास को निरस्त्र करने, इजरायली सेना की चरणबद्ध वापसी और एक नई नागरिक प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित करने पर आधारित है। इसके बाद बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण शुरू करने की बात है। इस मॉडल में सुरक्षा और प्रशासन को अलग-अलग नहीं देखा गया है। प्रस्तावित व्यवस्था में हमास की सैन्य संरचना को खत्म करने के साथ गाजा में एक फिलिस्तीनी टेक्नोक्रेटिक प्रशासन की भूमिका बढ़ाने की बात है। हथियारों को एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत जमा कराने और बाद में नष्ट करने का मॉडल भी चर्चा में है। योजना का मकसद यह है कि गाजा में ऐसा सुरक्षा ढांचा तैयार हो जिसमें हमास की सैन्य क्षमता दोबारा संगठित न हो सके और नागरिक प्रशासन पुनर्निर्माण की प्रक्रिया संभाल सके।
इजरायल का मुख्य तर्क सुरक्षा से जुड़ा है। नेतन्याहू सरकार का कहना है कि अगर हमास के पास हथियार और सैन्य ढांचा मौजूद रहता है तो इजरायली सेना की वापसी के बाद संगठन दोबारा अपनी सैन्य क्षमता तैयार कर सकता है। इसलिए इजरायल पूर्ण निरस्त्रीकरण को वापसी और पुनर्निर्माण से पहले की शर्त मान रहा है।
इजरायल ने यह भी कहा है कि उसे अपनी सुरक्षा के लिए सैन्य कार्रवाई का अधिकार सुरक्षित रखना होगा। अमेरिकी पक्ष ने भी इजरायल के आत्मरक्षा के अधिकार को पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं करने की बात कही है। हालांकि इस रुख की वजह से युद्धविराम की प्रक्रिया और जटिल होती है। अगर इजरायली सेना तब तक गाजा में रहती है जब तक हमास पूरी तरह निरस्त्र नहीं होता, तो हमास के लिए पहले हथियार छोड़ना राजनीतिक और सुरक्षा दोनों लिहाज से कठिन फैसला बन जाता है।
हमास के नेताओं ने अमेरिकी दूतों से बातचीत में डिमिलिटराजेशन के रास्ते पर आगे बढ़ने की इच्छा जताई है। एक्सियोस के मुताबिक संगठन ने गाजा में हथियारों को एक नई फिलिस्तीनी टेक्नोक्रेटिक अथॉरिटी के नियंत्रण में देने की दिशा में चर्चा की है। लेकिन हमास और इजरायल के बीच इस प्रक्रिया की व्याख्या अलग है। हमास पूर्ण सैन्य आत्मसमर्पण की भाषा से बचता रहा है और चाहता है कि इजरायली सेना की वापसी, स्थायी युद्धविराम और भविष्य की फिलिस्तीनी राजनीतिक व्यवस्था भी समानांतर रूप से आगे बढ़े। इसलिए यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि हमास ने पूरी तरह हथियार डालने पर अंतिम सहमति दे दी है। उपलब्ध रिपोर्टों में सैद्धांतिक प्रतिबद्धता और व्यावहारिक क्रियान्वयन के बीच स्पष्ट अंतर मौजूद है।
गाजा में वर्षों के संघर्ष से बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। आवास, स्वास्थ्य, पानी, स्वच्छता और सार्वजनिक सेवाओं की बहाली के लिए बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय सहायता की जरूरत है। ऐसे में पुनर्निर्माण को निरस्त्रीकरण से जोड़ना मानवीय सहायता और राजनीतिक प्रक्रिया के बीच सीधा संबंध बनाता है। अमेरिकी पक्ष का तर्क है कि बिना सुरक्षा व्यवस्था बदले बड़े पैमाने पर निर्माण शुरू करने से नई बुनियादी सुविधाएं दोबारा संघर्ष में तबाह होने का जोखिम रहेगा। इसी सोच में निरस्त्रीकरण को पुनर्निर्माण की पूर्वशर्त बनाया गया है। लेकिन इस नीति पर मानवीय दृष्टिकोण से सवाल भी उठते हैं। यदि पुनर्निर्माण लंबे समय तक टलता है तो आम फिलिस्तीनी नागरिकों पर इसका असर पड़ सकता है, जबकि हथियारों और राजनीतिक नियंत्रण को लेकर वार्ता जारी रहेगी।
मौजूदा घटनाक्रम से स्पष्ट है कि भरोसे की कमी सबसे बड़ी बाधाओं में से एक है। इजरायल हमास के पुराने सैन्य रिकॉर्ड और भविष्य में दोबारा हथियार जुटाने की आशंका को लेकर चिंतित है। हमास दूसरी तरफ इजरायली सैन्य वापसी और युद्धविराम की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठाता है।
कुशनर ने संकेत दिया है कि वास्तविक प्रगति छोटे और सत्यापित कदमों से शुरू हो सकती है। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने 30 दिनों के भीतर हथियार हटाने की दिशा में शुरुआती प्रगति की संभावना जताई है। अगर हथियारों की पहचान, जमा करने और नष्ट करने की प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय निगरानी में शुरू होती है, तो इससे दोनों पक्षों के बीच भरोसा बढ़ सकता है। लेकिन अगर किसी भी चरण में सुरक्षा या सैन्य कार्रवाई को लेकर विवाद बढ़ता है तो पूरी प्रक्रिया फिर रुक सकती है।
कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद गाजा में सैन्य कार्रवाई जारी है। अल जज़ीरा ने भी कुशनर के बयान के साथ गाजा में जारी इजरायली हमलों का उल्लेख किया है।
यही स्थिति युद्धविराम रोडमैप के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। एक तरफ अमेरिका बातचीत के जरिए राजनीतिक समाधान की कोशिश कर रहा है, दूसरी तरफ जमीन पर हिंसा जारी रहने से विश्वास बहाली कठिन हो रही है। ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से इजरायल से गाजा में हमले रोकने की अपील की है, जबकि इजरायल हमास के निरस्त्रीकरण को अपनी सुरक्षा के लिए अनिवार्य बता रहा है। यह अंतर अमेरिकी मध्यस्थता के लिए भी चुनौती पैदा करता है।
अभी ऐसा कहना सही नहीं होगा। दो दिनों की बातचीत में निर्णायक समझौता नहीं हुआ, लेकिन संपर्क पूरी तरह टूटे भी नहीं हैं। अमेरिका ने इजरायल और हमास दोनों के साथ संवाद जारी रखा है और दो कार्य समूह बनाने पर चर्चा हुई है, जिनमें एक सुरक्षा और निरस्त्रीकरण तथा दूसरा सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा है। यह संकेत देता है कि बातचीत को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की कोशिश जारी है। हालांकि किसी समझौते की समयसीमा या अंतिम स्वरूप अभी तय नहीं हुआ है। सबसे बड़ी अड़चन वही है, कौन पहले कदम उठाएगा। इजरायल हमास के पूर्ण निरस्त्रीकरण को प्राथमिक शर्त मानता है, जबकि हमास इजरायली वापसी और स्थायी युद्धविराम को समान महत्व देता है।
मिस्र, कतर और तुर्की की मध्यस्थ भूमिका इस पूरी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बनी हुई है। इन देशों के पास हमास और अन्य क्षेत्रीय पक्षों के साथ संवाद के अलग-अलग चैनल हैं।
अगर अमेरिका इन मध्यस्थों की मदद से चरणबद्ध समझौता तैयार करता है तो गाजा में सुरक्षा और पुनर्निर्माण दोनों के लिए रास्ता खुल सकता है। लेकिन इजरायल और हमास के बीच बुनियादी अविश्वास कायम रहा तो बाहरी मध्यस्थों की क्षमता भी सीमित रहेगी। क्षेत्रीय देशों के लिए भी गाजा का भविष्य व्यापक मध्य पूर्व सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। इसलिए पुनर्निर्माण, शासन व्यवस्था और हथियार नियंत्रण के फैसले का असर गाजा से बाहर तक जाएगा।
निकट भविष्य में सबसे महत्वपूर्ण संकेत हमास के हथियारों को लेकर वास्तविक कदम होंगे। केवल राजनीतिक बयान या सैद्धांतिक सहमति पर्याप्त नहीं होगी। अमेरिका और इजरायल दोनों ठोस और सत्यापित कार्रवाई चाहते हैं। दूसरी तरफ गाजा में सैन्य कार्रवाई और मानवीय स्थिति भी प्रक्रिया को प्रभावित करेगी। यदि हिंसा जारी रहती है तो हमास के लिए हथियार छोड़ने की घरेलू राजनीतिक लागत बढ़ सकती है और इजरायल के लिए भी किसी सैन्य रियायत को स्वीकार करना कठिन हो सकता है। एक संभावित रास्ता चरणबद्ध व्यवस्था है, जिसमें सीमित निरस्त्रीकरण के बदले सीमित इजरायली वापसी, मानवीय सहायता और बुनियादी पुनर्निर्माण शुरू हो। लेकिन ऐसा मॉडल तभी आगे बढ़ेगा जब दोनों पक्ष निगरानी और सुरक्षा गारंटी पर सहमत हों।
गाजा के पुनर्निर्माण को हमास के निरस्त्रीकरण से जोड़ने का अमेरिकी रुख अब युद्धविराम रोडमैप का केंद्रीय मुद्दा बन गया है। कुशनर का बयान स्पष्ट करता है कि वॉशिंगटन बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण को सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव के साथ जोड़ रहा है। स्थापित तथ्य यह है कि अमेरिका, इजरायल और हमास के बीच बातचीत जारी है, लेकिन दो दिनों की उच्चस्तरीय वार्ता किसी निर्णायक समझौते तक नहीं पहुंची। इजरायल पूर्ण निरस्त्रीकरण पर जोर दे रहा है, जबकि हमास प्रक्रिया को इजरायली वापसी और स्थायी युद्धविराम के साथ जोड़ना चाहता है। आगे की पूरी प्रक्रिया इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या दोनों पक्ष क्रम को लेकर समझौता कर पाते हैं। गाजा के लिए सबसे अहम सवाल यही है कि सुरक्षा, युद्धविराम, शासन और पुनर्निर्माण को किस तरह एक ऐसी व्यवस्था में जोड़ा जाए जिसमें आम नागरिकों की मानवीय जरूरतें राजनीतिक गतिरोध की बंधक न बनें।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।