भारत-अमेरिका नौसेना का ईओडी अभ्यास कोच्चि में शुरू
कोच्चि में भारत-अमेरिका नौसेना की संयुक्त ईओडी ट्रेनिंग
समुद्री सुरक्षा के लिए भारत-अमेरिका का खास ईओडी अभ्यास
कोच्चि में भारतीय और अमेरिकी नौसेना का पांच दिवसीय संयुक्त ईओडी अभ्यास शुरू हुआ है। इसमें विशेषज्ञ डाइविंग, क्रॉस-ट्रेनिंग और उपकरण प्रदर्शन शामिल हैं। अभ्यास का मकसद विस्फोटक खतरों से निपटने की क्षमता, प्रक्रियाओं और ऑपरेशनल इंटरऑपरेबिलिटी को बेहतर करना है। दोनों नौसेनाएं 2005 से ऐसे अभ्यास करती रही हैं।
📍 लोकेशन: कोच्चि, केरल
📰 तारीख: 11 अगस्त 2026
✍️ बाय: आसिफ खान
भारतीय नौसेना और अमेरिकी नौसेना ने कोच्चि स्थित सदर्न नेवल कमांड में संयुक्त ईओडी अभ्यास शुरू किया है। पांच दिन का यह द्विपक्षीय अभ्यास 10 से 14 अगस्त तक चलेगा। इसका मुख्य फोकस दोनों देशों की स्पेशलिस्ट डाइविंग और एक्सप्लोसिव ऑर्डनेंस डिस्पोजल टीमों के बीच ऑपरेशनल इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाना है।
ईओडी यानी एक्सप्लोसिव ऑर्डनेंस डिस्पोजल समुद्री सुरक्षा का बेहद संवेदनशील और तकनीकी क्षेत्र है। इसमें विस्फोटक उपकरणों, अनएक्सप्लोडेड ऑर्डनेंस, समुद्री माइंस और दूसरे खतरनाक ऑर्डनेंस की पहचान, सुरक्षित नियंत्रण और निस्तारण जैसी विशेषज्ञ क्षमताएं शामिल होती हैं।
इस ट्रेनिंग में विषय-विशेषज्ञों का आदान-प्रदान, क्रॉस-ट्रेनिंग, उपकरणों का प्रदर्शन और हालात पर आधारित प्रैक्टिकल ट्रेनिंग शामिल है। इसका मकसद केवल तकनीकी जानकारी साझा करना नहीं, बल्कि दोनों नौसेनाओं के कर्मियों को एक-दूसरे की प्रक्रियाओं और ऑपरेशनल तरीकों को समझने का अवसर देना है।
ईओडी ऑपरेशन्स में छोटी प्रक्रिया संबंधी गलती भी गंभीर जोखिम पैदा कर सकती है। इसलिए ऐसे अभ्यासों में मानक प्रक्रियाओं, सुरक्षा प्रोटोकॉल, उपकरणों और निर्णय लेने की प्रक्रिया के बीच तालमेल अहम होता है।
भारत और अमेरिका के बीच समुद्री सुरक्षा सहयोग पिछले दो दशकों में लगातार विस्तृत हुआ है। संयुक्त ईओडी और साल्वेज अभ्यास इस सहयोग का अपेक्षाकृत कम चर्चित, लेकिन महत्वपूर्ण हिस्सा है।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार दोनों नौसेनाएं 2005 से संयुक्त साल्वेज और ईओडी अभ्यास करती रही हैं। 2023 में आयोजित सातवें संस्करण में भारतीय नौसेना के आईएनएस निरीक्षक और अमेरिकी नौसेना के यूएसएनएस साल्वर के साथ विशेषज्ञ डाइविंग और ईओडी टीमों ने हिस्सा लिया था। उस अभ्यास में माइन डिटेक्शन, न्यूट्रलाइजेशन, रेक लोकेशन और मैरीटाइम साल्वेज जैसे क्षेत्रों में ट्रेनिंग हुई थी।
मौजूदा अभ्यास को इसी दीर्घकालिक सहयोग की अगली कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक यह इस द्विपक्षीय ट्रेनिंग कार्यक्रम का आठवां संस्करण है।
समुद्री इलाकों में विस्फोटक खतरे कई रूपों में सामने आ सकते हैं। बंदरगाहों के आसपास मिले संदिग्ध ऑर्डनेंस से लेकर समुद्र में मौजूद माइंस और जहाजों पर पाए गए अनएक्सप्लोडेड उपकरण तक, हर स्थिति में अलग तकनीकी प्रतिक्रिया की जरूरत होती है।
इस साल जून में भारतीय नौसेना ने कोच्चि से जुड़े एक वास्तविक ऑपरेशन में अपनी ईओडी क्षमता का प्रदर्शन भी किया था। सदर्न नेवल कमांड की विशेषज्ञ टीम ने एमटी ओलंपिक लाइफ नामक क्रूड ऑयल टैंकर से एक अनएक्सप्लोडेड मिसाइल वारहेड सुरक्षित रूप से बरामद किया था। जहाज में यह ऑर्डनेंस ओमान के तट के पास हुई घटना के बाद मौजूद था।
इस ऑपरेशन में वारहेड जहाज के स्ट्रक्चर को पार करके फ्यूल टैंक के भीतर फंस गया था। भारतीय नौसेना ने जोखिम को देखते हुए चरणबद्ध प्रक्रिया अपनाई और वारहेड को सुरक्षित रूप से हटाया। यह घटना बताती है कि ईओडी क्षमता केवल युद्धकालीन जरूरत नहीं है, बल्कि समुद्री यातायात और बंदरगाह सुरक्षा के लिए भी अहम है।
भारत और अमेरिका के बीच संयुक्त साल्वेज तथा ईओडी ट्रेनिंग की शुरुआत 2005 में हुई। इसके बाद दोनों नौसेनाओं ने समय-समय पर विशेषज्ञ डाइविंग और ईओडी क्षमताओं को साझा करने के लिए अभ्यास किए।
जून-जुलाई 2023 में सातवां साल्वेज और ईओडी अभ्यास कोच्चि में हुआ था। यह अभ्यास 26 जून से 6 जुलाई तक चला और इसमें समुद्र तथा जमीन दोनों पर ईओडी ट्रेनिंग की गई।
अगस्त 2026 में कोच्चि में शुरू हुआ मौजूदा अभ्यास इसी सिलसिले में आठवां संस्करण है। पांच दिन की यह ट्रेनिंग बड़े युद्धपोतों वाले पारंपरिक नौसैनिक अभ्यास से अलग है। इसका फोकस सीमित लेकिन अत्यधिक विशेषज्ञता वाले ऑपरेशनल क्षेत्र पर है।
इस अभ्यास को किसी सैन्य गठबंधन या संयुक्त युद्ध अभियान के रूप में देखना सही नहीं होगा। उपलब्ध आधिकारिक और विश्वसनीय रिपोर्टिंग इसे द्विपक्षीय ट्रेनिंग और प्रोफेशनल एक्सचेंज के तौर पर पेश करती है।
इसका प्राथमिक उद्देश्य विशेषज्ञ टीमों के बीच तालमेल, प्रक्रियाओं की समझ और तकनीकी क्षमता को बेहतर करना है। इसे सीधे किसी संभावित सैन्य कार्रवाई की तैयारी बताने के लिए उपलब्ध सूचना पर्याप्त आधार नहीं देती।
यही फर्क महत्वपूर्ण है। भारत और अमेरिका के बीच रक्षा संबंध व्यापक हैं, लेकिन हर संयुक्त अभ्यास का मकसद एक जैसा नहीं होता। ईओडी ट्रेनिंग का केंद्र तकनीकी सुरक्षा, डाइविंग और विस्फोटक निस्तारण जैसी विशिष्ट क्षमताएं हैं।
अमेरिकी नौसेना अपने ईओडी फोर्स को अलग-अलग साझेदार देशों के साथ विशेषज्ञ आदान-प्रदान के जरिए विकसित करती है। अमेरिकी नौसेना की हालिया गतिविधियों में भी ईओडी टीमों ने संयुक्त प्रशिक्षण और सब्जेक्ट मैटर एक्सपर्ट एक्सचेंज के जरिए टैक्टिक्स, टेक्निक्स और प्रोसीजर्स में इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाने पर जोर दिया है।
इस लिहाज से कोच्चि का अभ्यास दोनों पक्षों के लिए दोतरफा सीखने का प्लेटफॉर्म है। भारतीय टीमों को अमेरिकी प्रक्रियाओं और तकनीकी अनुभवों से परिचित होने का अवसर मिलता है, जबकि अमेरिकी टीमों को भारतीय समुद्री परिस्थितियों और ऑपरेशनल अनुभव से सीखने का मौका मिलता है।
भारत के लिए समुद्री सुरक्षा का मसला हिंद महासागर क्षेत्र से सीधे जुड़ा है। देश का बड़ा व्यापारिक और ऊर्जा आवागमन समुद्री रास्तों से होता है। ऐसे में बंदरगाहों, जहाजों और समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर को विस्फोटक खतरों से सुरक्षित रखना राष्ट्रीय सुरक्षा के व्यापक ढांचे का हिस्सा है।
कोच्चि खुद भारतीय नौसेना के लिए अहम प्रशिक्षण और ऑपरेशनल केंद्र है। सदर्न नेवल कमांड से जुड़ी विशेषज्ञ क्षमताओं का इस्तेमाल हाल के वास्तविक समुद्री ऑपरेशन्स में भी हुआ है। जून 2026 की वारहेड रिकवरी इसका ताजा उदाहरण है।
भारत और अमेरिका के रक्षा संबंध अब केवल बड़े बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यासों तक सीमित नहीं हैं। छोटे स्तर के विशेषज्ञ अभ्यास भी दोनों सेनाओं के बीच प्रोफेशनल संबंधों को गहरा करते हैं।
ईओडी जैसी विशेषज्ञ ट्रेनिंग में इंटरऑपरेबिलिटी का अर्थ केवल एक साथ काम करना नहीं है। इसमें शब्दावली, सुरक्षा मानक, उपकरणों की समझ, कम्युनिकेशन और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में तालमेल भी शामिल होता है।
यही वजह है कि ऐसे अभ्यासों का असर अक्सर सार्वजनिक रूप से दिखाई देने वाले बड़े युद्धाभ्यासों से अलग होता है। यहां लक्ष्य युद्धक शक्ति का प्रदर्शन कम और विशेषज्ञ क्षमता का संस्थागत आदान-प्रदान अधिक होता है।
आने वाले वर्षों में समुद्री सुरक्षा में ईओडी और अंडरवॉटर क्षमताओं की अहमियत बढ़ने की संभावना है। समुद्री माइंस, अनएक्सप्लोडेड ऑर्डनेंस, बंदरगाह सुरक्षा और जहाजों से जुड़े जोखिमों से निपटने के लिए विशेषज्ञ टीमों की जरूरत बनी रहेगी।
भारत के लिए ऐसे अभ्यास स्वदेशी तकनीक, ट्रेनिंग स्टैंडर्ड और अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशनल अनुभव को जोड़ने का अवसर भी देते हैं। अमेरिका के साथ इस तरह का सहयोग व्यापक इंडो-पैसिफिक समुद्री सुरक्षा नेटवर्क में भारत की इंटरऑपरेबिलिटी को मजबूत करता है।
कोच्चि में भारत-अमेरिका नौसेना का ईओडी अभ्यास किसी बड़े सैन्य शक्ति प्रदर्शन से ज्यादा एक तकनीकी और पेशेवर सहयोग का मामला है। पांच दिन की इस ट्रेनिंग में विशेषज्ञ डाइविंग, ईओडी प्रक्रियाओं, उपकरणों और प्रैक्टिकल हालात पर आधारित अभ्यास के जरिए दोनों पक्ष अपनी क्षमताओं को परख रहे हैं।
2005 से जारी संयुक्त साल्वेज और ईओडी सहयोग और 2023 के सातवें संस्करण के बाद मौजूदा आठवां अभ्यास इस साझेदारी की निरंतरता दिखाता है।
सबसे अहम बात यह है कि समुद्री सुरक्षा केवल युद्धपोतों और मिसाइलों से तय नहीं होती। कई बार किसी जहाज, बंदरगाह या समुद्री मार्ग को सुरक्षित रखने के लिए एक प्रशिक्षित ईओडी टीम, सही उपकरण और सटीक ऑपरेशनल प्रक्रिया उतनी ही निर्णायक होती है। कोच्चि का यह अभ्यास इसी विशेषज्ञ क्षमता को मजबूत करने की दिशा में भारत-अमेरिका सहयोग का महत्वपूर्ण अध्याय है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।