कोलंबो में राजनाथ सिंह और राष्ट्रपति दिसानायके की बैठक में भारत-श्रीलंका संबंधों, समुद्री साझेदारी, क्षेत्रीय सुरक्षा और हिंद महासागर में शांति व समृद्धि के लिए सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया।
कोलंबो | 9 सितंबर 2026
By Mohd Haris
कोलंबो में भारत और श्रीलंका के बीच रक्षा और रणनीतिक रिश्तों को लेकर अहम कूटनीतिक संवाद हुआ है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 9 सितंबर 2026 को श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके से मुलाकात की। बैठक में दोनों देशों ने द्विपक्षीय सहयोग के साथ क्षेत्रीय सुरक्षा, शांति और समृद्धि के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
राजनाथ सिंह की दिसानायके से मुलाकात
राजनाथ सिंह तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर श्रीलंका पहुंचे हैं। उनकी यात्रा 8 से 10 सितंबर 2026 तक निर्धारित है। यात्रा के दौरान वह श्रीलंका के शीर्ष नेतृत्व के साथ विभिन्न मुद्दों पर बातचीत कर रहे हैं। उनके साथ रक्षा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों वाला उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी है।
कोलंबो में राष्ट्रपति दिसानायके के साथ बैठक के बाद राजनाथ सिंह ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से श्रीलंकाई राष्ट्रपति को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने दिसानायके की सरकार के दो वर्ष पूरे होने पर भी बधाई दी।
दोनों देशों ने रिश्तों की बुनियादी अहमियत दोहराई
बैठक में भारत और श्रीलंका को साझा सभ्यतागत संबंधों वाले करीबी पड़ोसी और समुद्री साझेदार के तौर पर रेखांकित किया गया। दोनों पक्षों ने कहा कि दोनों देशों के विकास और जनता के कल्याण के लिए सहयोग जारी रखना जरूरी है।
राजनाथ सिंह के मुताबिक भारत और श्रीलंका ने क्षेत्र की सुरक्षा, सलामती, शांति और समृद्धि के लिए मिलकर काम करने का संकल्प भी दोहराया। यह पहल हिंद महासागर क्षेत्र में दोनों देशों की रणनीतिक भूमिका के संदर्भ में अहम मानी जा रही है।
रक्षा और समुद्री सहयोग पर खास नजर
राजनाथ सिंह की मौजूदा यात्रा का एक प्रमुख मकसद भारत और श्रीलंका के बीच रक्षा तथा समुद्री साझेदारी को और मजबूत करना है। भारत सरकार ने यात्रा से पहले कहा था कि दोनों देशों के बीच रिश्ते क्षेत्रीय सुरक्षा, रक्षा, आर्थिक और व्यापारिक सहयोग तथा लोगों के बीच मजबूत संपर्क पर आधारित हैं।
हिंद महासागर में समुद्री सुरक्षा भारत और श्रीलंका दोनों के लिए रणनीतिक प्राथमिकता है। श्रीलंका की भौगोलिक स्थिति उसे हिंद महासागर की समुद्री आवाजाही और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण बनाती है। भारत लंबे समय से श्रीलंका के साथ समुद्री सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता को अपनी पड़ोसी नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानता रहा है।
इस संदर्भ में मौजूदा बैठक को केवल रक्षा संवाद तक सीमित करके देखना पर्याप्त नहीं होगा। दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग के साथ आर्थिक संपर्क, ऊर्जा, विकास सहयोग और मानवीय सहायता भी व्यापक द्विपक्षीय रिश्तों का हिस्सा हैं।
श्रीलंका के संकट में भारत की भूमिका
भारत और श्रीलंका के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान आर्थिक और मानवीय सहयोग ने भी महत्वपूर्ण जगह बनाई है। श्रीलंका के आर्थिक संकट के दौरान भारत ने सहायता उपलब्ध कराई थी। वर्ष 2025 में चक्रवात डिटवाह के बाद भी भारत ने राहत और बचाव प्रयासों में मदद की थी। भारत सरकार ने इसे पड़ोसी देश के लिए शुरुआती प्रतिक्रिया के तौर पर रेखांकित किया है।
फरवरी 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति दिसानायके की नई दिल्ली में हुई मुलाकात के दौरान भी दोनों देशों ने कनेक्टिविटी, विकास सहयोग और ऊर्जा सहित कई क्षेत्रों में सहयोग तेज करने पर जोर दिया था। दोनों नेताओं ने हिंद महासागर क्षेत्र की स्थिरता और श्रीलंका की विकास जरूरतों के लिए साझेदारी आगे बढ़ाने की बात कही थी।
द्विपक्षीय रिश्तों का व्यापक एजेंडा
भारत और श्रीलंका के बीच संबंधों का दायरा रक्षा क्षेत्र से काफी व्यापक है। दोनों देशों के बीच कनेक्टिविटी, व्यापार, ऊर्जा, विकास परियोजनाओं, सांस्कृतिक संपर्क और लोगों के बीच रिश्तों को लेकर लगातार बातचीत होती रही है।
अप्रैल 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की श्रीलंका यात्रा के दौरान भारत और श्रीलंका ने कनेक्टिविटी, विकास सहयोग, आर्थिक रिश्तों, रक्षा संबंधों, सुलह प्रक्रिया और मछुआरों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की थी। उस समय भारत ने श्रीलंका को अपनी नेबरहुड फर्स्ट नीति और हिंद महासागर केंद्रित दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण साझेदार के तौर पर रेखांकित किया था।
मार्च 2026 में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति दिसानायके के बीच हुई बातचीत में पश्चिम एशिया की बदलती स्थिति, वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री शिपिंग मार्गों की सुरक्षा पर भी चर्चा हुई थी। दोनों नेताओं ने सुरक्षित और खुले समुद्री मार्गों की अहमियत पर जोर दिया था।
हिंद महासागर की बदलती रणनीतिक तस्वीर
हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और रणनीतिक आवाजाही लगातार महत्वपूर्ण हो रही है। भारत के लिए श्रीलंका की भौगोलिक स्थिति विशेष महत्व रखती है, क्योंकि श्रीलंका प्रमुख समुद्री मार्गों के करीब स्थित है।
ऐसे में भारत-श्रीलंका रक्षा संवाद का असर दोनों देशों के द्विपक्षीय रिश्तों से आगे भी देखा जाता है। समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और आपदा के समय मानवीय सहायता जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच तालमेल हिंद महासागर क्षेत्र की व्यापक सुरक्षा संरचना से जुड़ा हुआ है।
हालांकि, इस बैठक से किसी नए रक्षा समझौते या किसी विशिष्ट सैन्य पहल की घोषणा होने की पुष्टि उपलब्ध आधिकारिक विवरणों में नहीं हुई है। इसलिए बैठक को किसी नए सैन्य गठबंधन या रणनीतिक व्यवस्था के रूप में पेश करना तथ्यों से आगे जाना होगा।
राजनाथ सिंह की यात्रा में आगे क्या
राजनाथ सिंह की श्रीलंका यात्रा 10 सितंबर तक जारी रहेगी। भारत सरकार ने कहा है कि यात्रा के दौरान वह श्रीलंका के नेतृत्व के साथ विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे और कोलंबो में भारतीय समुदाय के साथ भी संवाद करेंगे।
श्रीलंकाई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री हरिनी अमरसूर्या समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भी राजनाथ सिंह की बातचीत प्रस्तावित है। हालांकि अलग-अलग बैठकों के अंतिम नतीजों और किसी संभावित समझौते का आकलन आधिकारिक घोषणाओं के आधार पर ही किया जाना उचित होगा।
भारत के लिए इस यात्रा की अहमियत
भारत के लिए श्रीलंका के साथ स्थिर और भरोसेमंद रिश्ते पड़ोसी कूटनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। आर्थिक संकट और प्राकृतिक आपदा के समय भारत की सहायता ने दोनों देशों के बीच भरोसे को मजबूत किया है। अब रक्षा और समुद्री सहयोग को आगे बढ़ाने की कोशिश इस व्यापक साझेदारी को रणनीतिक आयाम देती है।
श्रीलंका के लिए भी भारत एक महत्वपूर्ण पड़ोसी और विकास साझेदार है। कोलंबो के लिए आर्थिक स्थिरता, ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय संतुलन जैसे मुद्दों में भारत के साथ समन्वय की अपनी अहमियत है।
निष्कर्ष
कोलंबो में राजनाथ सिंह और राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके की बैठक भारत-श्रीलंका रिश्तों में जारी उच्चस्तरीय संवाद की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। दोनों देशों ने सुरक्षा, शांति, समुद्री साझेदारी और आर्थिक विकास के लिए सहयोग जारी रखने का संदेश दिया है।
अब इस यात्रा की वास्तविक अहमियत आगे होने वाली बैठकों और उनसे निकलने वाले ठोस फैसलों से तय होगी। खास तौर पर रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर आने वाले आधिकारिक बयानों पर नजर रहेगी।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।