इस्लामाबाद अस्पताल में आग, 14 नवजातों की मौत
पाकिस्तान के अस्पताल में आग, नर्सरी के 14 बच्चों की मौत
पीआईएमएस अस्पताल में आग, 16 में से 14 नवजातों की मौत
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के पीआईएमएस अस्पताल की नर्सरी में बुधवार सुबह आग लग गई। अधिकारियों के मुताबिक 16 नवजात वहां भर्ती थे, जिनमें 14 की मौत हुई और एक को बचाया गया। शुरुआती जानकारी में एसी कंप्रेसर में खराबी को संभावित वजह बताया गया है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने तत्काल जांच के आदेश दिए हैं।
इस्लामाबाद, पाकिस्तान | 26 अगस्त 2026 | शाह टाइम्स
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के सरकारी पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज यानी पीआईएमएस अस्पताल में बुधवार सुबह भीषण आग लग गई। आग अस्पताल के मदर एंड चाइल्ड हेल्थ वार्ड की नर्सरी में लगी, जहां नवजात बच्चों का इलाज चल रहा था। उपलब्ध आधिकारिक और मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इस हादसे में कम से कम 14 नवजातों की मौत हुई है। रिपोर्ट और स्थानीय मीडिया की शुरुआती रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 15 बताई गई थी, जबकि इस्लामाबाद प्रशासन और पाकिस्तान सरकार की ओर से 14 नवजातों की मौत की पुष्टि की गई है। इसलिए फिलहाल इस रिपोर्ट में 14 का आंकड़ा आधिकारिक पुष्टि के आधार पर लिया जा रहा है।
अधिकारियों के मुताबिक आग लगने के समय नर्सरी में 16 नवजात भर्ती थे। इनमें से एक बच्चे को रेस्क्यू कर लिया गया, जबकि बाकी बच्चों में 14 की मौत की पुष्टि प्रशासन ने की है। शुरुआती रिपोर्टों में एक बच्चे की स्थिति और अंतिम आंकड़े को लेकर अलग-अलग जानकारी सामने आई है, इसलिए जांच पूरी होने तक आधिकारिक आंकड़े पर ही भरोसा करना उचित है। डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक आग अस्पताल के तीसरे फ्लोर पर स्थित मदर एंड चाइल्ड वार्ड में लगी। रेस्क्यू टीमों ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया और प्रभावित इलाके में कूलिंग ऑपरेशन चलाया गया।
स्थानीय मीडिया और रेस्क्यू अधिकारियों के हवाले से शुरुआती जानकारी में कहा गया है कि नर्सरी के अंदर एयर कंडीशनर के कंप्रेसर में धमाका हुआ, जिसके बाद आग तेजी से फैल गई। हालांकि अंतिम कारण की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही होगी। एयर कंडीशनिंग सिस्टम में तकनीकी खराबी को फिलहाल संभावित वजह बताया जा रहा है। इसे अंतिम निष्कर्ष मानना जल्दबाजी होगी, क्योंकि प्रशासन ने घटना की परिस्थितियों और अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था की जांच के लिए समिति गठित की है।
आग की सूचना मिलते ही रेस्क्यू टीमें पीआईएमएस अस्पताल पहुंचीं। डॉन के मुताबिक ऑपरेशन में छह फायर ब्रिगेड वाहन और चार एंबुलेंस शामिल थीं। आग को नियंत्रित करने के बाद प्रभावित हिस्से में कूलिंग ऑपरेशन जारी रखा गया। पाकिस्तान रेडियो ने भी बताया कि रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया और कई महिलाओं तथा बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। हालांकि अलग-अलग स्रोतों में बचाए गए लोगों की संख्या अलग है, इसलिए इस रिपोर्ट में केवल वे आंकड़े रखे गए हैं जिनकी एक से अधिक विश्वसनीय स्रोतों से पुष्टि हो रही है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हादसे पर गहरा दुख जताया और तत्काल जांच के आदेश दिए। उनके कार्यालय के मुताबिक जिम्मेदार लोगों की पहचान करने और लापरवाही सामने आने पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय ने बच्चों की मौत को अपूरणीय क्षति बताया है। इस बयान के बाद प्रशासन पर यह दबाव बढ़ गया है कि वह आग की वजह के साथ-साथ अस्पताल की फायर सेफ्टी, बिजली व्यवस्था, इमरजेंसी रिस्पॉन्स और स्टाफ की मौजूदगी से जुड़े सवालों की भी जांच करे।
इस हादसे की जांच का सबसे अहम हिस्सा आग के वास्तविक स्रोत का पता लगाना होगा। अगर एसी कंप्रेसर में तकनीकी खराबी की पुष्टि होती है, तो यह भी जांचना होगा कि उपकरण का रखरखाव कब हुआ था और क्या किसी खराबी की पहले से शिकायत दर्ज थी। इसके अलावा जांच एजेंसी को यह देखना होगा कि नर्सरी में फायर अलार्म और ऑटोमैटिक फायर कंट्रोल सिस्टम काम कर रहे थे या नहीं। नवजात बच्चों को सुरक्षित निकालने के लिए अस्पताल का इमरजेंसी प्रोटोकॉल कितना प्रभावी था, यह भी अहम सवाल रहेगा। फिलहाल इन सवालों पर अंतिम निष्कर्ष उपलब्ध नहीं है। इसलिए किसी व्यक्ति या अस्पताल प्रशासन को सीधे तौर पर लापरवाही का दोषी ठहराना जांच पूरी होने से पहले उचित नहीं होगा।
पीआईएमएस इस्लामाबाद के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में शामिल है। हादसे ने पाकिस्तान की सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं में सुरक्षा मानकों, रखरखाव और आपातकालीन तैयारी को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट ने भी पाकिस्तान के सरकारी स्वास्थ्य क्षेत्र में संसाधनों की कमी और संस्थागत प्रबंधन से जुड़ी लंबे समय से चली आ रही आलोचनाओं का उल्लेख किया है। लेकिन किसी व्यापक स्वास्थ्य व्यवस्था को इस एक घटना के आधार पर दोषी ठहराना भी सही नहीं होगा। इसके लिए अस्पताल की फायर सेफ्टी व्यवस्था, निरीक्षण रिकॉर्ड, उपकरणों की मेंटेनेंस हिस्ट्री और जांच समिति की रिपोर्ट का इंतजार करना जरूरी है।
अस्पताल में आग लगने की किसी भी घटना में नवजातों की स्थिति बेहद संवेदनशील होती है। वे खुद चलकर सुरक्षित स्थान तक नहीं पहुंच सकते और कई बच्चों को लगातार ऑक्सीजन, निगरानी या अन्य मेडिकल सपोर्ट की जरूरत होती है। यही वजह है कि नर्सरी और एनआईसीयू जैसे इलाकों में फायर सेफ्टी और इमरजेंसी एग्जिट की व्यवस्था सामान्य वार्डों से ज्यादा महत्वपूर्ण होती है। इस घटना के बाद पाकिस्तान में अस्पतालों की ऐसी यूनिट्स के सुरक्षा ऑडिट को लेकर बहस तेज होने की संभावना है।
इस हादसे की शुरुआती रिपोर्टिंग में मृतकों की संख्या 14 और 15 दोनों सामने आई। रिपोर्ट ने स्थानीय प्रसारण चैनल जियो टीवी के हवाले से 15 मौतों की रिपोर्ट दी, जबकि एसोसिएटेड प्रेस और इस्लामाबाद प्रशासन के अनुसार 14 नवजातों की मौत हुई। आजतक की शुरुआती रिपोर्ट में भी 15 मौतों का उल्लेख है। बाद की आधिकारिक जानकारी में 14 की पुष्टि हुई। ऐसी स्थिति में संख्या बदलने की संभावना को देखते हुए अंतिम आधिकारिक आंकड़े को प्राथमिकता देना पत्रकारिता की दृष्टि से ज्यादा सुरक्षित है।
फिलहाल इसे संभावित कारण कहना सही है, अंतिम कारण नहीं। रेस्क्यू अधिकारियों और स्थानीय मीडिया ने एसी कंप्रेसर में धमाके की बात कही है, लेकिन जांच समिति को यह तय करना होगा कि तकनीकी खराबी वास्तव में आग की शुरुआत का कारण थी या कोई अन्य कारक भी इसमें शामिल था। आग किस गति से फैली, धुआं नर्सरी में कैसे जमा हुआ और बच्चों को निकालने में कितनी देर लगी, इन सवालों के जवाब भी हादसे की पूरी तस्वीर समझने के लिए जरूरी होंगे।
अब जांच समिति की रिपोर्ट इस मामले का सबसे अहम दस्तावेज होगी। उससे यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि आग की शुरुआत कैसे हुई, सुरक्षा व्यवस्था में कोई कमी थी या नहीं और बचाव अभियान में किन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। अगर जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो प्रधानमंत्री के निर्देश के मुताबिक जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो सकती है। लेकिन कार्रवाई से पहले जांच के निष्कर्ष सामने आना जरूरी है।
इस्लामाबाद के पीआईएमएस अस्पताल में लगी आग ने 14 नवजातों की जान ले ली। शुरुआती रिपोर्टों में एसी कंप्रेसर में धमाके को आग की संभावित वजह बताया गया है, लेकिन अंतिम कारण जांच के बाद ही सामने आएगा। सबसे बड़ा सवाल अब केवल आग कैसे लगी, यह नहीं है। जांच को यह भी तय करना होगा कि नवजात बच्चों की सुरक्षा के लिए अस्पताल में मौजूद फायर सेफ्टी और इमरजेंसी सिस्टम ने काम क्यों नहीं किया या उन्हें किन परिस्थितियों में चुनौती का सामना करना पड़ा। फिलहाल स्थापित तथ्य 14 नवजातों की मौत, आग का पीआईएमएस के मदर एंड चाइल्ड वार्ड में लगना और तत्काल जांच के आदेश हैं। बाकी सवालों के जवाब जांच रिपोर्ट के बाद ही सामने आएंगे।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।