Synopsis
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) सितंबर की शुरुआत में अपनी लॉन्च गतिविधियों को फिर गति देने की तैयारी कर रहा है। GSLV-F17 से EOS-5, जिसे पहले GISAT-1A के नाम से जाना जाता था, को लॉन्च करने की योजना है। ताजा रिपोर्टों में लॉन्च की संभावित तारीख 4 सितंबर 2026 बताई गई है।
यह Earth Observation Satellite भारत के ऊपर लगभग 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई से लगातार निगरानी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इससे प्राकृतिक आपदाओं और तेजी से बदलने वाली घटनाओं की monitoring में उपयोगी data मिलने की उम्मीद है।
Location: श्रीहरिकोटा, आंध्र प्रदेश, भारत
Date: 28 अगस्त 2026
Byline: अपूर्वा चौधरी
ISRO की लॉन्च गतिविधियों में वापसी
जनवरी 2026 में PSLV-C62/EOS-N1 मिशन सफल नहीं हो पाया था। इसके बाद ISRO की लॉन्च गतिविधियों में एक लंबा अंतराल आया। अब EOS-5 मिशन को इस operational gap के बाद महत्वपूर्ण वापसी के रूप में देखा जा रहा है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि EOS-5 के लिए इस्तेमाल होने वाला GSLV Mk II अलग launch system है। इसलिए इस मिशन को PSLV-C62 की घटना से सीधे जोड़कर देखना उचित नहीं होगा।
EOS-5 क्या है?
EOS-5 एक GEO-imaging Earth Observation Satellite है। इसे पहले GISAT-1A के नाम से जाना जाता था। इसका उद्देश्य भारतीय उपमहाद्वीप की लगातार निगरानी और प्राकृतिक आपदाओं की तेज monitoring में सहायता करना है।
सैटेलाइट से मिलने वाला data बाढ़, चक्रवात, जंगल की आग, बादल और अन्य तेजी से बदलने वाली परिस्थितियों की निगरानी में उपयोगी हो सकता है।
करीब 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई क्यों महत्वपूर्ण?
EOS-5 को geostationary/geosynchronous क्षेत्र में स्थापित करने की योजना है। लगभग 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई से एक बड़े क्षेत्र की लगातार निगरानी संभव होती है।
इसका फायदा यह है कि किसी घटना के दौरान बार-बार observation हासिल करने और उसके development को track करने में मदद मिल सकती है।
GSLV-F17 की भूमिका
EOS-5 को GSLV-F17 के जरिए लॉन्च किया जाना है। ISRO की Annual Report में भी GSLV-F17/EOS-05 को Earth Observation Satellite mission के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
लॉन्च का प्रमुख उद्देश्य satellite को उसकी निर्धारित कक्षा की ओर भेजना और operational Earth-observation capability को आगे बढ़ाना है।
ISRO के लिए क्यों अहम है यह मिशन?
EOS-5 मिशन सिर्फ एक satellite launch नहीं है। यह ISRO के अगले launch cycle की शुरुआत के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।
ISRO चेयरमैन वी. नारायणन ने मौजूदा roadmap के तहत मार्च 2027 तक सात launches करने की योजना की जानकारी दी है। इसमें Gaganyaan programme की पहली uncrewed flight भी शामिल है।
इससे स्पष्ट है कि EOS-5 के बाद ISRO का focus कई महत्वपूर्ण missions को आगे बढ़ाने पर रहेगा।
Gaganyaan से क्या संबंध?
ISRO का अगला बड़ा लक्ष्य मानव अंतरिक्ष उड़ान programme Gaganyaan है। इसके पहले uncrewed mission का उद्देश्य human-rated launch vehicle, orbital module, re-entry और crew module recovery जैसी क्षमताओं को demonstrate करना है।
इसलिए EOS-5 के बाद आने वाले missions ISRO के व्यापक space programme के लिए महत्वपूर्ण operational milestones होंगे।
आपदा प्रबंधन में मिल सकती है मदद
Earth Observation satellites का एक बड़ा उपयोग disaster management में होता है। बाढ़, चक्रवात, जंगल की आग और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान satellite imagery प्रशासन को प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति समझने में मदद कर सकती है।
EOS-5 की continuous observation क्षमता ऐसे मामलों में विशेष रूप से उपयोगी हो सकती है, हालांकि किसी विशेष आपदा में वास्तविक उपयोग satellite data और संबंधित agencies की operational requirements पर निर्भर करेगा।
जनवरी की विफलता के बाद महत्वपूर्ण अगला कदम
12 जनवरी 2026 को PSLV-C62/EOS-N1 mission सफल नहीं हुआ था। उसके बाद ISRO ने जांच और validation प्रक्रिया पर काम किया। EOS-5 मिशन में GSLV Mk II के इस्तेमाल के कारण यह अलग launch architecture के साथ आगे बढ़ रहा है।
इसलिए आगामी लॉन्च ISRO के लिए तकनीकी readiness और mission execution के लिहाज से भी महत्वपूर्ण रहेगा।
क्या 4 सितंबर की तारीख तय है?
फिलहाल उपलब्ध ताजा रिपोर्टों में 4 सितंबर 2026 को EOS-5 की लॉन्चिंग का लक्ष्य बताया गया है। हालांकि space missions में launch date technical readiness, weather और range-related requirements के कारण बदल सकती है। इसलिए अंतिम तारीख के लिए ISRO की official announcement को प्राथमिकता देना उचित होगा।
आगे क्या?
EOS-5 के बाद ISRO के सामने कई महत्वपूर्ण missions का roadmap है। इनमें Earth observation, communication, navigation और Gaganyaan programme से जुड़े missions शामिल हैं।
मार्च 2027 तक सात launches का लक्ष्य पूरा करना ISRO के लिए एक ambitious schedule होगा। इसकी सफलता mission readiness और launch cadence पर निर्भर करेगी।
EOS-5 का प्रस्तावित लॉन्च ISRO के लिए एक अहम operational milestone है। GSLV-F17 के जरिए इस Earth Observation Satellite को अंतरिक्ष में भेजने से भारत की लगातार पृथ्वी निगरानी और disaster-monitoring capabilities को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
लेकिन 4 सितंबर की तारीख को फिलहाल planned launch date के रूप में देखना बेहतर है। अंतिम पुष्टि और launch status के लिए ISRO के आधिकारिक अपडेट को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।