2026 का आखिरी आंशिक चंद्र ग्रहण 28 अगस्त को होगा। भारतीय समय के अनुसार मुख्य चरण सुबह 8:04 बजे शुरू होगा, अधिकतम 9:43 बजे रहेगा और भारत में दिखाई नहीं देगा।
नई दिल्ली|27 अगस्त 2026|शाह टाइम्स
By Mohd Haris
आसमान में 28 अगस्त को 2026 का आखिरी चंद्र ग्रहण दिखाई देगा। यह आंशिक चंद्र ग्रहण होगा, जिसमें चंद्रमा का बड़ा हिस्सा पृथ्वी की गहरी छाया में प्रवेश करेगा। खगोलीय गणनाओं के मुताबिक ग्रहण का मुख्य आंशिक चरण भारतीय समय के अनुसार सुबह 8:04 बजे शुरू होगा और इसका अधिकतम चरण करीब 9:43 बजे रहेगा। हालांकि भारत में रहने वाले लोग इसे अपनी आंखों से नहीं देख पाएंगे।
साल का आखिरी चंद्र ग्रहण कब होगा
नासा के खगोलीय आंकड़ों के मुताबिक 28 अगस्त 2026 का ग्रहण इस साल होने वाला दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण है। 2026 में इससे पहले 3 मार्च को पूर्ण चंद्र ग्रहण हुआ था। अगस्त का ग्रहण आंशिक होगा। नासा के अनुसार यह ग्रहण पूर्वी प्रशांत क्षेत्र, उत्तर और दक्षिण अमेरिका, यूरोप तथा अफ्रीका के कई हिस्सों में दिखाई देगा। भारतीय समय के हिसाब से आंशिक चरण सुबह 8:04 बजे शुरू होगा। ग्रहण का अधिकतम चरण करीब 9:43 बजे रहेगा और आंशिक ग्रहण का चरण लगभग 11:21 बजे समाप्त होगा। इसके बाद उपछाया वाला चरण भी कुछ समय तक जारी रहेगा। खगोलीय गणनाओं के अनुसार पूरा उपछाया चरण करीब 5 घंटे 35 से 38 मिनट का रहेगा, जबकि मुख्य आंशिक चरण लगभग 3 घंटे 16 से 18 मिनट तक चलेगा।
भारत में क्यों नहीं दिखेगा चंद्र ग्रहण
इस ग्रहण को लेकर सबसे अहम जानकारी भारतीय दर्शकों के लिए इसकी दृश्यता है। 28 अगस्त का चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। ग्रहण के दौरान भारत के अधिकांश हिस्सों में चंद्रमा क्षितिज के ऊपर ऐसी स्थिति में नहीं होगा, जहां से इसे देखा जा सके। खगोलीय दृश्यता के उपलब्ध आंकड़ों में भारत को इस ग्रहण के प्रत्यक्ष दृश्य क्षेत्र से बाहर रखा गया है। इसका मतलब यह है कि भारत में रहने वाले लोगों के लिए सुबह 8:04 बजे से शुरू होने वाला ग्रहण केवल खगोलीय गणना के लिहाज से महत्वपूर्ण समय है। उस दौरान भारत से चंद्रमा पर पृथ्वी की छाया पड़ने का प्रत्यक्ष दृश्य नहीं मिलेगा। नासा की सूची के मुताबिक 28 अगस्त का आंशिक चंद्र ग्रहण अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका के कई हिस्सों में दिखाई देगा। भारत और एशिया के कई अन्य हिस्से इसकी प्रत्यक्ष दृश्यता वाले क्षेत्र में शामिल नहीं हैं।
ग्रहण की पूरी टाइमिंग नोट कर लें
28 अगस्त के चंद्र ग्रहण की टाइमिंग भारतीय समय के अनुसार इस तरह रहेगी।
उपछाया चरण की शुरुआत करीब सुबह 6:55 बजे होगी।
आंशिक चंद्र ग्रहण का मुख्य चरण सुबह 8:04 बजे शुरू होगा।
ग्रहण का अधिकतम चरण करीब सुबह 9:43 बजे होगा।
आंशिक चरण सुबह 11:21 बजे समाप्त होगा।
उपछाया चरण दोपहर करीब 12:30 बजे तक समाप्त हो जाएगा।
इन समयों में एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। ये ग्रहण की खगोलीय गणना के समय हैं। इनका अर्थ यह नहीं है कि भारत में इन्हीं समयों पर चंद्रमा दिखाई देगा। भारत में ग्रहण की प्रत्यक्ष दृश्यता नहीं होगी।
किस तरह का चंद्र ग्रहण होगा
28 अगस्त का ग्रहण पूर्ण चंद्र ग्रहण नहीं है। यह आंशिक चंद्र ग्रहण है। नासा के अनुसार आंशिक चंद्र ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी की गहरी छाया यानी उम्ब्रा के एक हिस्से में प्रवेश करता है, लेकिन पूरी तरह उस छाया में नहीं जाता। इस ग्रहण में चंद्रमा का बड़ा हिस्सा पृथ्वी की गहरी छाया से गुजरेगा। नासा के आंकड़ों में इसकी ग्रहण मैग्निट्यूड करीब 0.930 दर्ज की गई है। इसका अर्थ है कि ग्रहण के चरम पर चंद्रमा का बड़ा हिस्सा पृथ्वी की गहरी छाया में होगा। इसी वजह से यह सामान्य हल्के आंशिक ग्रहण की तुलना में अधिक प्रभावशाली खगोलीय दृश्य बन सकता है, जहां से यह दिखाई देगा।
चंद्र ग्रहण होता कैसे है
चंद्र ग्रहण तब होता है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा लगभग एक सीध में आ जाते हैं और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। पूर्ण चंद्र ग्रहण में चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की गहरी छाया में प्रवेश करता है। आंशिक ग्रहण में चंद्रमा का केवल एक हिस्सा गहरी छाया में जाता है। ग्रहण के दौरान चंद्रमा के रंग में बदलाव भी दिखाई दे सकता है। नासा के मुताबिक पृथ्वी का वायुमंडल सूर्य के प्रकाश को अलग-अलग तरीके से बिखेरता है। लाल और नारंगी तरंगदैर्ध्य अपेक्षाकृत अधिक मात्रा में वायुमंडल से गुजरकर चंद्रमा तक पहुंचते हैं, इसलिए पूर्ण या गहरे ग्रहण के दौरान चंद्रमा लाल या नारंगी आभा वाला दिखाई दे सकता है। हालांकि 28 अगस्त के ग्रहण को भारत से देखा ही नहीं जा सकेगा, इसलिए यहां रहने वाले दर्शकों को लालिमा वाले चंद्रमा का प्रत्यक्ष दृश्य नहीं मिलेगा।
रक्षाबंधन के दिन पड़ेगा ग्रहण
28 अगस्त को रक्षाबंधन भी है। इसी वजह से इस चंद्र ग्रहण को लेकर धार्मिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा बढ़ी है। कई पंचांग आधारित रिपोर्टों में इस ग्रहण और रक्षाबंधन के एक ही दिन होने का उल्लेख किया गया है। ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देने के कारण सूतक को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पंचांग आधारित स्रोतों में भारत के लिए सूतक लागू नहीं होने की जानकारी दी गई है। हालांकि सूतक धार्मिक परंपरा का विषय है और अलग-अलग परंपराओं तथा पंचांगों में मान्यताएं अलग हो सकती हैं। इसलिए धार्मिक अनुष्ठानों से जुड़े निर्णय के लिए संबंधित स्थानीय पंचांग या धार्मिक विद्वान की सलाह लेना उचित रहेगा।
क्या भारत में सूतक लगेगा
खगोलीय दृष्टि से सूतक कोई वैज्ञानिक प्रक्रिया नहीं है। यह धार्मिक परंपरा से जुड़ी मान्यता है। सामान्य धार्मिक परंपरा में चंद्र ग्रहण से पहले एक निश्चित अवधि को सूतक काल माना जाता है, लेकिन इसकी मान्यता ग्रहण की दृश्यता और स्थानीय परंपराओं से जुड़ी होती है। 28 अगस्त का ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसी आधार पर उपलब्ध पंचांग संबंधी जानकारी भारत में सूतक लागू नहीं होने की बात कहती है। यहां विज्ञान और धार्मिक परंपरा के बीच फर्क रखना जरूरी है। ग्रहण का समय, प्रकार और दृश्यता खगोलीय गणनाओं से तय होती है, जबकि सूतक का पालन धार्मिक आस्था और परंपरा का विषय है।
दुनिया में कहां दिखेगा ग्रहण
28 अगस्त का आंशिक चंद्र ग्रहण मुख्य रूप से उत्तर और दक्षिण अमेरिका, यूरोप तथा अफ्रीका के कई हिस्सों से देखा जा सकेगा। पूर्वी प्रशांत और अटलांटिक महासागर के कुछ क्षेत्रों में भी ग्रहण की दृश्यता रहेगी। नासा ने इसे 2026 के आखिरी चंद्र ग्रहण के तौर पर सूचीबद्ध किया है।
ग्रहण का सबसे अच्छा दृश्य उन इलाकों में मिलेगा जहां ग्रहण के दौरान चंद्रमा स्थानीय आकाश में पर्याप्त ऊंचाई पर मौजूद होगा। यूरोप और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में दृश्यता चंद्रमा के अस्त होने के आसपास हो सकती है, जबकि अमेरिका के कई हिस्सों में इसे अधिक अनुकूल परिस्थितियों में देखा जा सकेगा।
अगला चंद्र ग्रहण कब होगा
28 अगस्त के बाद 2026 में कोई और चंद्र ग्रहण नहीं होगा। नासा के अनुसार अगला चंद्र ग्रहण 20 फरवरी 2027 को होगा और वह उपछाया चंद्र ग्रहण होगा। उसकी दृश्यता का क्षेत्र 2026 के अगस्त वाले ग्रहण से अलग रहेगा और एशिया के कुछ हिस्सों में भी दृश्यता होगी।
इस तरह 28 अगस्त का ग्रहण 2026 के खगोलीय कैलेंडर में आखिरी चंद्र ग्रहण है। हालांकि भारत में यह दृश्य नहीं होगा, फिर भी खगोल विज्ञान के लिहाज से यह महत्वपूर्ण घटना है क्योंकि चंद्रमा का बड़ा हिस्सा पृथ्वी की गहरी छाया से होकर गुजरेगा।
क्या इसे देखने के लिए विशेष सावधानी जरूरी है
चंद्र ग्रहण को देखना सूर्य ग्रहण देखने से अलग है। चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा को सामान्य रूप से देखने से आंखों को सूर्य ग्रहण जैसी सीधी क्षति का खतरा नहीं होता। लेकिन 28 अगस्त के मामले में भारत में दृश्यता ही नहीं है, इसलिए यहां से इसे देखने के लिए किसी विशेष उपकरण की जरूरत का सवाल नहीं उठता। जहां ग्रहण दिखाई देगा, वहां लोग दूरबीन या कैमरे के जरिए इसका अध्ययन और फोटोग्राफी कर सकते हैं। खगोल विज्ञान के जानकारों के लिए यह पृथ्वी की छाया और चंद्रमा की कक्षा को समझने का एक उपयोगी अवसर होगा।
निष्कर्ष
28 अगस्त 2026 का चंद्र ग्रहण साल का आखिरी चंद्र ग्रहण होगा। आंशिक ग्रहण का मुख्य चरण भारतीय समय के अनुसार सुबह 8:04 बजे शुरू होगा, अधिकतम चरण करीब 9:43 बजे रहेगा और आंशिक चरण करीब 11:21 बजे समाप्त होगा। भारत के दर्शकों के लिए सबसे अहम तथ्य यह है कि यह ग्रहण यहां दिखाई नहीं देगा। इसलिए ग्रहण की टाइमिंग जानना खगोलीय जानकारी के लिहाज से उपयोगी है, लेकिन भारत से इसे प्रत्यक्ष देखने की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए। रक्षाबंधन के दिन पड़ रहे इस ग्रहण को लेकर धार्मिक मान्यताओं की चर्चा अलग विषय है, जबकि ग्रहण की वास्तविक प्रकृति और समय खगोलीय गणनाओं से स्पष्ट हैं।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।