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रक्षाबंधन पर राहुल गांधी को राखी की चुनौती, अविमुक्तेश्वरानंद ने हिंदू होने पर उठाए सवाल

Asif Khan 2026-08-27 13:43:18
रक्षाबंधन पर राहुल गांधी को राखी की चुनौती, अविमुक्तेश्वरानंद ने हिंदू होने पर उठाए सवाल

मनुस्मृति पर राहुल गांधी के बयान से शुरू हुआ विवाद अब धार्मिक पहचान और हिंदू परंपराओं तक पहुंच गया है। अविमुक्तेश्वरानंद ने राहुल को रक्षाबंधन पर प्रियंका से राखी बंधवाने की चुनौती दी।

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नई दिल्ली

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27 अगस्त 2026

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शाह टाइम्स डिजिटल डेस्क

मनुस्मृति बयान पर बढ़ा विवाद

कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के मनुस्मृति को लेकर दिए गए बयान पर सियासी और धार्मिक बहस लगातार तेज हो रही है। अब ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने राहुल गांधी की टिप्पणी पर कड़ा ऐतराज जताते हुए उनकी हिंदू धार्मिक पहचान पर सवाल उठाए हैं।

राहुल गांधी ने 22 अगस्त को पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में महिलाओं की स्वतंत्रता और उनकी व्यक्तिगत पहचान पर बात की थी। उन्होंने मनुस्मृति का हवाला देते हुए महिलाओं को पिता, पति और पुत्र के अधीन रखने वाली व्यवस्था की आलोचना की और इसे शर्मनाक बताया था। उन्होंने कहा था कि महिलाएं किसी पुरुष की संपत्ति नहीं हैं और उनकी अपनी स्वतंत्र पहचान है।

इसी बयान के बाद अविमुक्तेश्वरानंद ने राहुल गांधी पर धर्मशास्त्रों को संदर्भ से अलग करके पेश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि धार्मिक ग्रंथों पर टिप्पणी करते समय तथ्य, संदर्भ और शास्त्रीय अध्ययन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

रक्षाबंधन पर प्रियंका से राखी की चुनौती

विवाद के बीच स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से राहुल गांधी को रक्षाबंधन के मौके पर बहन प्रियंका गांधी से राखी बंधवाने की चुनौती दिए जाने की बात सामने आई है। यह चुनौती राहुल गांधी की हिंदू परंपराओं और धार्मिक पहचान को लेकर उठाए गए सवालों के संदर्भ में दी गई है।

इस बयान का मकसद राहुल गांधी के सार्वजनिक राजनीतिक रुख और पारंपरिक हिंदू सामाजिक-धार्मिक प्रथाओं के बीच संबंध पर सवाल खड़ा करना है। हालांकि, राखी बंधवाना या किसी धार्मिक परंपरा का पालन करना किसी व्यक्ति की धार्मिक पहचान तय करने का कोई कानूनी पैमाना नहीं है। इसलिए इस बयान को शंकराचार्य के धार्मिक और वैचारिक आकलन के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

राहुल गांधी की ओर से इस चुनौती पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने की पुष्टि उपलब्ध स्रोतों से नहीं होती। ऐसे में उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया होने तक इसे एकतरफा बयान के रूप में ही रिपोर्ट किया जाना उचित है।

राहुल गांधी ने मनुस्मृति को लेकर क्या कहा था

पुणे में राहुल गांधी ने महिलाओं की स्वतंत्रता के मुद्दे पर मनुस्मृति का उल्लेख किया था। उन्होंने कहा था कि ग्रंथ में महिला के जीवन के अलग-अलग चरणों में पिता, पति और पुत्र के अधीन रहने की बात कही गई है और उन्होंने ऐसी व्यवस्था को शर्मनाक बताया।

राहुल गांधी ने महिलाओं को अपनी पहचान और फैसलों के अधिकार से जोड़ते हुए कहा कि किसी महिला की पहचान केवल बेटी, पत्नी या मां तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उनके मुताबिक महिलाओं की अपनी आकांक्षाएं, क्षमता और स्वतंत्र पहचान है।

उनका यह बयान महिला अधिकार, पितृसत्ता और धार्मिक ग्रंथों की व्याख्या को लेकर नई बहस का कारण बना। भाजपा नेताओं और कुछ धार्मिक हस्तियों ने राहुल गांधी की आलोचना की, जबकि कांग्रेस की ओर से उनके बयान को महिलाओं की स्वतंत्रता और समानता के समर्थन के रूप में पेश किया गया है।

अविमुक्तेश्वरानंद का क्या है ऐतराज

अविमुक्तेश्वरानंद ने राहुल गांधी की टिप्पणी को हिंदू धर्मशास्त्रों की गलत या अधूरी व्याख्या बताया है। हालिया बयानों में उन्होंने राहुल गांधी से मनुस्मृति को लेकर माफी मांगने की मांग की है और चेतावनी दी है कि बयान वापस नहीं लेने पर धार्मिक और सामाजिक स्तर पर विरोध अभियान चलाया जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा है कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन धर्मग्रंथों और सांस्कृतिक परंपराओं पर टिप्पणी करते समय मर्यादा और अध्ययन जरूरी है। उनके मुताबिक मनुस्मृति के श्लोकों को मौजूदा राजनीतिक बहस के संदर्भ में एकतरफा तरीके से पेश करना उचित नहीं है।

अविमुक्तेश्वरानंद का यह रुख पहली बार सामने नहीं आया है। जनवरी 2026 में भी उन्होंने राहुल गांधी को हिंदू न होने की बात कहते हुए अयोध्या के राम मंदिर में उनके प्रवेश पर सवाल उठाया था। यह बयान उस समय भी राजनीतिक और धार्मिक बहस का विषय बना था।

हिंदू पहचान पर सवाल कितना अहम

किसी व्यक्ति के हिंदू होने या न होने का सवाल धार्मिक और सामाजिक स्तर पर अलग-अलग तरीके से देखा जाता है। भारत के संवैधानिक ढांचे में किसी राजनीतिक नेता की धार्मिक पहचान पर किसी धार्मिक पदाधिकारी की टिप्पणी अपने आप में कानूनी निर्णय नहीं बन जाती।

इसलिए अविमुक्तेश्वरानंद का राहुल गांधी की धार्मिक पहचान को लेकर दिया गया बयान एक धार्मिक मत और सार्वजनिक टिप्पणी के रूप में रिपोर्ट किया जाना चाहिए। इसे किसी आधिकारिक कानूनी या संवैधानिक फैसले के तौर पर पेश करना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा।

यह फर्क इसलिए भी अहम है क्योंकि मौजूदा विवाद में धार्मिक आस्था, राजनीतिक बयानबाजी और संवैधानिक अधिकार तीन अलग-अलग विमर्श एक साथ जुड़ गए हैं।

मनुस्मृति को लेकर अलग-अलग व्याख्याएं

मनुस्मृति हिंदू धर्म की प्राचीन धर्मशास्त्रीय परंपरा से जुड़ा ग्रंथ है और इसकी व्याख्या को लेकर लंबे समय से अलग-अलग मत रहे हैं। राहुल गांधी ने इसके कुछ कथित प्रावधानों को महिलाओं की स्वतंत्रता के संदर्भ में आलोचना का आधार बनाया।

दूसरी ओर अविमुक्तेश्वरानंद ने इसी विषय को अलग शास्त्रीय संदर्भ में देखने की दलील दी है। उन्होंने पिता, पति और पुत्र द्वारा महिला की रक्षा से जुड़े श्लोक का हवाला देते हुए इसे दायित्व और सुरक्षा की व्यवस्था के रूप में समझाया है।

यही मूल मतभेद मौजूदा विवाद की बुनियाद है। एक पक्ष इसे महिलाओं की स्वायत्तता पर रोक से जोड़कर देख रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे प्राचीन सामाजिक व्यवस्था और संरक्षण के संदर्भ में पढ़ने की बात कर रहा है।

भाजपा के निशाने पर भी राहुल गांधी

राहुल गांधी के बयान पर भाजपा नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा की ओर से उनके बयान को हिंदू धर्म और धार्मिक परंपराओं के खिलाफ बताया गया है। कुछ नेताओं ने राहुल गांधी से धार्मिक ग्रंथों और हिंदू परंपराओं को लेकर अधिक गंभीर अध्ययन करने की अपील की है।

भाजपा नेता स्मृति ईरानी ने भी राहुल गांधी को हिंदू धर्म को समझने और धार्मिक आस्था के साथ जुड़े विषयों को राजनीतिक बहस से अलग नजरिए से देखने की सलाह दी है।

इस बीच कांग्रेस खेमे का तर्क है कि राहुल गांधी की टिप्पणी का मकसद महिलाओं की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और समान अधिकारों की वकालत करना था। कांग्रेस के लिए यह मुद्दा लैंगिक समानता और पितृसत्तात्मक सोच के विरोध से जुड़ा है।

रक्षाबंधन से जुड़ी राजनीतिक बहस

रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा। यह पर्व भाई-बहन के रिश्ते, स्नेह और पारिवारिक बंधन से जुड़ा माना जाता है। ऐसे में प्रियंका गांधी द्वारा राहुल गांधी को राखी बांधने की चुनौती को धार्मिक पहचान की बहस से जोड़ना मौजूदा राजनीतिक विवाद को एक नए सामाजिक प्रतीक से जोड़ता है।

हालांकि, किसी परिवार द्वारा रक्षाबंधन मनाने या किसी धार्मिक परंपरा में हिस्सा लेने को व्यक्ति की आस्था का अंतिम प्रमाण मानना उचित नहीं होगा। धार्मिक पहचान का सवाल निजी आस्था, परंपरा, पारिवारिक पृष्ठभूमि और व्यक्ति के अपने सार्वजनिक रुख से जुड़ा जटिल विषय है।

आगे क्या हो सकता है

अब निगाह राहुल गांधी की संभावित प्रतिक्रिया पर है। यदि राहुल गांधी इस चुनौती पर जवाब देते हैं, तो विवाद का राजनीतिक विमर्श और तेज हो सकता है। दूसरी ओर, यदि कांग्रेस इस मुद्दे को महिला अधिकार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के सवाल से जोड़ती है, तो भाजपा और धार्मिक संगठनों के साथ वैचारिक टकराव बढ़ने की आशंका रहेगी।

अविमुक्तेश्वरानंद पहले ही राहुल गांधी से मनुस्मृति संबंधी टिप्पणी पर माफी की मांग कर चुके हैं। उन्होंने संकेत दिया है कि बयान वापस नहीं लेने की स्थिति में विरोध का अभियान आगे बढ़ाया जा सकता है।

विवाद का व्यापक संदर्भ

मौजूदा विवाद केवल राहुल गांधी और अविमुक्तेश्वरानंद के बीच बयानबाजी तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में तीन बड़े सवाल हैं। पहला, धार्मिक ग्रंथों की आधुनिक राजनीतिक व्याख्या किस सीमा तक की जानी चाहिए। दूसरा, महिलाओं की स्वतंत्रता और पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था के बीच संतुलन कैसे देखा जाए। तीसरा, राजनीतिक बहस में धार्मिक पहचान को किस हद तक मुद्दा बनाया जाना चाहिए।

राहुल गांधी का जोर महिलाओं की स्वायत्तता पर है। अविमुक्तेश्वरानंद का जोर धर्मशास्त्रों की पारंपरिक व्याख्या और धार्मिक मर्यादा पर है। दोनों पक्षों की दलीलों के बीच तथ्य, संदर्भ और सार्वजनिक संवाद की भाषा अहम हो जाती है।

फिलहाल यह विवाद बयानबाजी के स्तर पर है। राहुल गांधी की धार्मिक पहचान को लेकर अविमुक्तेश्वरानंद की टिप्पणी को तथ्यात्मक या कानूनी निष्कर्ष के रूप में नहीं, बल्कि उनके सार्वजनिक धार्मिक मत के तौर पर देखना चाहिए। रक्षाबंधन पर प्रियंका गांधी से राखी बंधवाने की चुनौती भी इसी राजनीतिक और धार्मिक बहस का हिस्सा है।

आगे इस विवाद की दिशा राहुल गांधी और कांग्रेस की प्रतिक्रिया, अविमुक्तेश्वरानंद के अगले बयान और राजनीतिक दलों की रणनीति से तय होगी। सार्वजनिक बहस में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही रहेगा कि धार्मिक आस्था और राजनीतिक आलोचना के बीच संवाद की मर्यादा किस तरह कायम रहती है।

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Asif Khan

Asif Khan

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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