मुजफ्फरनगर में जयसिंह कश्यप हत्याकांड, सपा डेलिगेशन को बुढ़ाना में रोका गया
Wasi Siddiqui
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2026-09-29 15:00:07
मुजफ्फरनगर में जयसिंह कश्यप हत्याकांड को लेकर सपा प्रतिनिधिमंडल पीड़ित परिवार से मिलने जा रहा था। बुढ़ाना में रोके जाने पर डॉ. राजपाल कश्यप ने विरोध जताया।
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बुढ़ाना, मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश
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29 सितंबर 2026
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Wasi Siddiqui
खरड़ हत्याकांड पर सपा प्रतिनिधिमंडल का दौरा
मुजफ्फरनगर के फुगाना थाना क्षेत्र के खरड़ गांव में 80 वर्षीय जयसिंह कश्यप की मौत का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। मंगलवार 29 सितंबर को पीड़ित परिवार से मुलाकात के लिए पहुंचे समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधिमंडल को बुढ़ाना कस्बा चौकी पर रोके जाने की सूचना सामने आई है।
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सपा पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजपाल कश्यप कर रहे थे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रतिनिधिमंडल का मकसद जयसिंह कश्यप के परिवार से मुलाकात करना, घटना की जानकारी लेना और पार्टी नेतृत्व को रिपोर्ट देना था।
बुढ़ाना में रोके जाने पर विरोध
उपलब्ध इनपुट के मुताबिक प्रतिनिधिमंडल को बुढ़ाना कस्बा चौकी पर रोका गया। इसके बाद डॉ. राजपाल कश्यप ने पुलिस की कार्रवाई के विरोध में सड़क पर बैठकर अपना विरोध दर्ज कराया।
इस घटनाक्रम से जुड़े दावे को लेकर पुलिस की ओर से अलग विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया फिलहाल उपलब्ध स्रोतों में नहीं मिली है। इसलिए प्रतिनिधिमंडल को रोकने की वजह को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
प्रतिनिधिमंडल में कई सपा नेता
सपा की ओर से जारी जानकारी के अनुसार 29 सितंबर को खरड़ गांव जाने वाले प्रतिनिधिमंडल में डॉ. राजपाल कश्यप के साथ कई वरिष्ठ नेता शामिल थे।
पूर्व सांसद हाजी फजलुर्रहमान, सपा जिलाध्यक्ष जिया चौधरी, सांसद हरेंद्र मलिक, सांसद इकरा हसन, एमएलसी किरण पाल कश्यप, पूर्व राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त मांगे राम कश्यप, प्रदेश सचिव विनय पाल, विशेष आमंत्रित सदस्य धनवीर सिंह कश्यप और विधानसभा अध्यक्ष अकरम खान के नाम प्रतिनिधिमंडल में बताए गए थे।
यूज़र द्वारा दिए गए घटनाक्रम में प्रतिनिधिमंडल में 8 लोगों के शामिल होने की बात कही गई है, जबकि 28 सितंबर को जारी सपा संबंधी जानकारी में प्रतिनिधिमंडल की संख्या 10 बताई गई थी। इसलिए इस रिपोर्ट में संख्या को लेकर दोनों दावों में अंतर स्पष्ट रखा गया है।
15 सितंबर को हुई थी जयसिंह की मौत
खरड़ गांव में 15 सितंबर को जयसिंह कश्यप की मारपीट के बाद मौत हुई थी। प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार उनकी उम्र 80 वर्ष थी। घटना के समय वह सड़क किनारे सिरका बेच रहे थे। विवाद के बाद उनके साथ मारपीट की गई और बाद में उनकी मौत हो गई।
प्रारंभिक रिपोर्टों में पड़ोसियों पर लाठी-डंडों से हमला करने का आरोप सामने आया था। पुलिस ने मामले में नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू की थी।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की
मामले में पुलिस ने पहले मुख्य आरोपी मनोज मलिक को गिरफ्तार किया था। इसके बाद तेजवीर सिंह उर्फ छोटू की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई। 25 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार तीसरे आरोपी रवि उर्फ राजू को भी गिरफ्तार किया गया था। उस रिपोर्ट में 2 अन्य आरोपियों की तलाश जारी होने की बात कही गई थी।
इसलिए मौजूदा उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि हत्याकांड के सभी आरोपी जेल जा चुके हैं। 29 सितंबर की स्थिति पर सभी आरोपियों की गिरफ्तारी की स्वतंत्र और ताजा पुलिस पुष्टि इस रिपोर्ट के लिए उपलब्ध नहीं है।
अंतिम संस्कार से पहले भी हुआ था विरोध
घटना के बाद जयसिंह के शव को लेकर ग्रामीणों और परिजनों ने विरोध किया था। रिपोर्टों के अनुसार ग्रामीणों ने आरोपियों की गिरफ्तारी और अन्य मांगों को लेकर सड़क पर प्रदर्शन किया था। प्रशासनिक अधिकारियों के आश्वासन के बाद अंतिम संस्कार किया गया।
इस दौरान प्रशासन की ओर से परिवार को कार्रवाई का भरोसा दिया गया था। मामले ने स्थानीय स्तर पर कश्यप समाज में भी रोष पैदा किया था।
अब सपा परिवार से लेना चाहती है जानकारी
सपा की ओर से जारी कार्यक्रम के मुताबिक प्रतिनिधिमंडल पीड़ित परिवार से घटना की पूरी जानकारी लेने वाला था। पार्टी ने कहा था कि प्रतिनिधिमंडल अपनी रिपोर्ट प्रदेश कार्यालय को सौंपेगा।
ऐसे में बुढ़ाना चौकी पर प्रतिनिधिमंडल को रोके जाने की घटना ने मामले को नया राजनीतिक आयाम दिया है। हालांकि पुलिस ने किस आधार पर प्रतिनिधिमंडल को रोका, इस पर आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।
आगे क्या होगा
अब पूरे घटनाक्रम में 2 पहलू अहम रहेंगे। पहला, जयसिंह कश्यप मौत मामले में पुलिस जांच और सभी आरोपियों की गिरफ्तारी की मौजूदा स्थिति। दूसरा, सपा प्रतिनिधिमंडल को रोके जाने को लेकर पुलिस और प्रशासन का आधिकारिक पक्ष।
मामले की जांच न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ रही है। इसलिए आरोपियों के खिलाफ लगे आरोपों को अदालत में दोष सिद्ध होने तक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
मुजफ्फरनगर के खरड़ गांव में जयसिंह कश्यप की मौत के मामले ने स्थानीय स्तर पर पहले से ही तनाव और विरोध की स्थिति पैदा की थी। अब पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे सपा प्रतिनिधिमंडल को बुढ़ाना में रोके जाने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है।
डॉ. राजपाल कश्यप के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल का विरोध और परिवार से प्रस्तावित मुलाकात इस मामले को लेकर राजनीतिक निगरानी बढ़ने का संकेत है। आगे पुलिस का आधिकारिक पक्ष और प्रतिनिधिमंडल की रिपोर्ट घटनाक्रम की दिशा स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण होगी।
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Wasi Siddiqui
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।