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झारखंड छात्र प्रदर्शन: विधानसभा मार्च पर वाटर कैनन
Asif Khan
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2026-08-11 09:06:45
झारखंड में छात्र प्रदर्शन, विधानसभा मार्च पर पुलिस कार्रवाई
जेएसपीसी-जेएसएससी विवाद में छात्रों का विधानसभा मार्च
परीक्षा विवाद पर झारखंड में टकराव, छात्रों पर वाटर कैनन
झारखंड में जेएसपीसी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन विधानसभा मार्च तक पहुंच गया। रांची में बैरिकेडिंग के दौरान पुलिस ने वाटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। छात्र जेएसएससी-सीजीएल रद्द करने, सीबीआई जांच और भर्ती सुधारों की मांग कर रहे हैं। सरकार कई मांगें स्वीकारने का दावा कर रही है।
📍रांची 🗓️10 अगस्त 2026 ✍️ Asif Khan
विधानसभा मार्च से बढ़ा परीक्षा विवाद
झारखंड में जेएसपीसी-जेएसएससी परीक्षा विवाद सोमवार को उस समय और गंभीर हो गया, जब सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्र रांची में विधानसभा की ओर मार्च करने पहुंचे। अंतिम बैरिकेडिंग के पास पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए वाटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। टेलीग्राफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, बैरिकेड पार करने की कोशिश के दौरान लाठीचार्ज भी हुआ और कुछ प्रदर्शनकारियों ने चोट लगने का दावा किया।
छात्रों का कहना है कि आंदोलन का मकसद भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्ष जांच और परीक्षाओं से जुड़े विवादों का स्थायी समाधान है। उनका मुख्य ज़ोर जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने और कथित अनियमितताओं की सीबीआई जांच पर है। राज्य सरकार का रुख इससे अलग है। सरकार का कहना है कि उसने छात्रों की अधिकांश मांगें स्वीकार कर ली हैं और जांच के लिए राज्य की एजेंसियों तथा अन्य संस्थागत व्यवस्थाओं का सहारा लिया जा रहा है।
जेएसपीसी-जेएसएससी विवाद की पृष्ठभूमि
मौजूदा आंदोलन की पृष्ठभूमि 14वीं जेएसपीसी सिविल सर्विसेज प्रारंभिक परीक्षा के नतीजों से जुड़ी है। बिजनेस स्टैंडर्ड के अनुसार, 14वीं जेएसपीसी प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम 5 जुलाई को जारी होने के बाद छात्रों ने भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाए। इसके बाद आंदोलन का दायरा जेएसएससी-सीजीएल और दूसरी भर्ती परीक्षाओं तक फैल गया।
जेएसपीसी झारखंड में राज्य सिविल सेवाओं सहित विभिन्न महत्वपूर्ण सरकारी पदों के लिए भर्ती परीक्षा आयोजित करता है, जबकि जेएसएससी राज्य सरकार की कई अन्य नौकरियों के लिए चयन प्रक्रिया संचालित करता है। इन परीक्षाओं में विवाद का सीधा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ता है, जिन्होंने लंबे समय तक तैयारी, आर्थिक खर्च और कई वर्षों की प्रतीक्षा के बाद भर्ती प्रक्रिया में हिस्सा लिया है।
जेएसपीसी के आधिकारिक रिकॉर्ड में 2025 की झारखंड कंबाइंड सिविल सर्विसेज परीक्षा के लिए 2026 में जारी भर्ती संबंधी अधिसूचनाएं मौजूद हैं। आयोग के रिकॉर्ड यह भी दिखाते हैं कि राज्य में भर्ती परीक्षाओं का सिलसिला कई वर्षों से अलग-अलग चरणों में चलता रहा है।
छात्रों की मुख्य मांग क्या है
आंदोलन के केंद्र में केवल एक परीक्षा नहीं है। प्रदर्शनकारी जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने, कथित अनियमितताओं की सीबीआई जांच, कुछ अन्य परीक्षाओं को रद्द करने, श्रेणीवार कट-ऑफ और ओएमआर शीट से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने तथा भर्ती प्रक्रिया में संस्थागत सुधार की मांग कर रहे हैं। वे यूपीएससी और एसएससी की तर्ज पर निश्चित भर्ती कैलेंडर की मांग भी कर रहे हैं।
छात्र संगठनों और राज्य सरकार के बीच कई दौर की बातचीत के बाद भी सबसे अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी। 9 अगस्त को हुई छठे दौर की बातचीत के बाद भी छात्रों ने 10 अगस्त को विधानसभा मार्च जारी रखने का फैसला किया।
छात्र प्रतिनिधियों के मुताबिक, जब तक सीबीआई जांच और जेएसएससी-सीजीएल सहित उनकी प्रमुख परीक्षा रद्द करने की मांग पर ठोस फैसला नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा। यह रुख बताता है कि विवाद अब केवल परीक्षा परिणाम या प्रक्रिया तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में भर्ती संस्थानों पर भरोसे और जांच की स्वतंत्रता का सवाल भी आ गया है।
सरकार का क्या कहना है
झारखंड सरकार का दावा है कि छात्रों की करीब 98 प्रतिशत मांगें स्वीकार की जा चुकी हैं। राज्य के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के मुताबिक, जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा को सरकार अपने स्तर पर रद्द नहीं कर सकती, क्योंकि इससे जुड़े न्यायिक निर्देशों और प्रक्रिया की स्थिति को भी ध्यान में रखना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच समिति बनाई जा सकती है।
सरकार ने जेएसपीसी से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय की जांच की सिफारिश की है। इसके साथ परीक्षा संबंधी मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट और 90 दिनों के भीतर आरोपपत्र दाखिल करने की योजना की भी जानकारी दी गई है। आईआईटी, आईआईएम और एक्सएलआरआई के विशेषज्ञों को शामिल कर भर्ती व्यवस्था में सुधार की सिफारिश लेने की बात भी सामने आई है।
यहां एक अहम संपादकीय अंतर समझना जरूरी है। सरकार का यह कहना कि उसने अधिकांश मांगें मान ली हैं, और छात्रों का यह कहना कि उनकी मूल मांगें पूरी नहीं हुईं, दोनों अलग दावे हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर दोनों पक्षों के बीच मतभेद मुख्य रूप से जांच की प्रकृति और कुछ परीक्षाओं को रद्द करने के मुद्दे पर कायम है।
विधानसभा मार्च में पुलिस कार्रवाई
10 अगस्त को छात्रों ने रांची के पुराने विधानसभा परिसर के पास धुर्वा क्षेत्र से मार्च शुरू किया। उनका लक्ष्य नया विधानसभा भवन था। टेलीग्राफ इंडिया के मुताबिक, मार्च करीब 10:30 बजे शुरू हुआ और अंतिम बैरिकेड के पास पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी।
पुलिस ने वाटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारियों ने लाठीचार्ज में घायल होने का दावा किया है। इन चोटों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड में व्यापक चिकित्सकीय विवरण सामने नहीं आया है, इसलिए चोटों की संख्या को लेकर किसी निश्चित आंकड़े का दावा करना उचित नहीं होगा।
प्रशासन ने मार्च के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर छात्रों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अपील की थी। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि प्राथमिकता छात्रों की सुरक्षा और किसी अप्रिय घटना को रोकना है। छात्रों के प्रतिनिधियों ने भी सार्वजनिक रूप से आंदोलन को शांतिपूर्ण और संवैधानिक बनाए रखने की बात कही थी।
जेएसपीसी में बड़ा संस्थागत बदलाव
विवाद के बीच जेएसपीसी के तीन सदस्यों ने 9 अगस्त को इस्तीफा दिया। इनमें अजीता भट्टाचार्य, अनिमा हंसदा और जमाल अहमद शामिल हैं। उनके इस्तीफे राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने स्वीकार किए।
टेलीग्राफ इंडिया के मुताबिक, इन सदस्यों से झारखंड सीआईडी ने परीक्षा संबंधी आरोपों की जांच के सिलसिले में पूछताछ की थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जेएसपीसी परीक्षाओं से जुड़ी कथित अनियमितताओं के मामले में अब तक 19 लोगों की गिरफ्तारी हुई है। हालांकि, किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी अपने आप में अपराध सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है। अंतिम जिम्मेदारी जांच और न्यायिक प्रक्रिया से तय होगी।
इसी बिंदु पर रिपोर्टिंग में सावधानी जरूरी है। कथित पेपर लीक, वित्तीय अनियमितता या भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी जैसे आरोपों की जांच चल रही है। जब तक जांच और अदालत की प्रक्रिया किसी आरोप को प्रमाणित नहीं करती, उन्हें स्थापित तथ्य के रूप में पेश करना पत्रकारिता के मानकों के अनुरूप नहीं होगा।
असली विवाद जांच की स्वतंत्रता पर
झारखंड का मौजूदा परीक्षा विवाद एक महत्वपूर्ण संस्थागत सवाल सामने रखता है। छात्रों की मांग है कि जांच सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसी से हो, जबकि सरकार राज्य सीआईडी, ईडी, न्यायिक निगरानी और विशेषज्ञ समितियों के जरिए जांच तथा सुधार की दिशा में आगे बढ़ने की बात कर रही है।
सरकार की दलील का आधार यह है कि अलग-अलग जांच और न्यायिक व्यवस्थाओं के जरिए आरोपों की तहक़ीक़ात की जा सकती है। दूसरी ओर, छात्र आंदोलन का तर्क है कि जिस राज्य की भर्ती व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं, उसी राज्य की संस्थाओं से जांच कराने पर उनकी क्रेडिबिलिटी को लेकर संदेह बना रहेगा।
यह मतभेद आंदोलन को लंबा खींचने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारण दिखाई देता है। इसलिए इसे केवल सरकार बनाम छात्र टकराव के रूप में देखना अधूरा होगा। मूल सवाल यह भी है कि भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच किस व्यवस्था से हो, जिससे अभ्यर्थियों और संस्थानों दोनों को परिणाम पर भरोसा हो।
पहले भी उठते रहे हैं परीक्षा व्यवस्था पर सवाल
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर मौजूदा असंतोष अचानक पैदा नहीं हुआ है। इंडियन एक्सप्रेस ने जुलाई में जेपीएससी की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा को लेकर उठे विवाद की पृष्ठभूमि और आयोग की कार्यप्रणाली पर लंबे समय से जारी सवालों का विश्लेषण किया था।
जेएसएससी-सीजीएल को लेकर भी पहले न्यायिक प्रक्रिया हुई है। दिसंबर 2025 में झारखंड हाई कोर्ट ने सीजीएल परिणाम जारी करने की अनुमति दी थी, जबकि कथित पेपर लीक से संबंधित एसआईटी जांच जारी रखने का निर्देश दिया गया था। अदालत की प्रक्रिया के कारण मौजूदा विवाद में परीक्षा रद्द करने का सवाल केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं रह जाता।
इस पृष्ठभूमि में छात्रों की मांगों को केवल तत्काल राजनीतिक आंदोलन के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। भर्ती परीक्षाओं की समयबद्धता, परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था, उत्तर कुंजी, ओएमआर रिकॉर्ड, परिणाम की पारदर्शिता और शिकायत निवारण जैसे मुद्दे भी सार्वजनिक विश्वास से सीधे जुड़े हैं।
पांच अहम सवाल और उनके जवाब
छात्र आंदोलन क्यों कर रहे हैं?
छात्र जेएसपीसी और जेएसएससी की कई भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच चाहते हैं। उनकी प्रमुख मांगों में जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करना और सीबीआई जांच शामिल है।
सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?
सरकार ने 14वीं जेएसपीसी परीक्षा रद्द करने पर सहमति जताई है। इसके अलावा ईडी जांच की सिफारिश, फास्ट-ट्रैक कोर्ट, विशेषज्ञ सुधार समिति और अन्य जांच व्यवस्थाओं की बात कही गई है।
सीबीआई जांच क्यों विवाद का केंद्र है?
छात्र इसे स्वतंत्र जांच के लिए जरूरी मानते हैं। सरकार का कहना है कि राज्य स्तर पर सीआईडी और दूसरी संस्थागत व्यवस्थाओं से जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
विधानसभा मार्च में क्या हुआ?
रांची में छात्रों ने विधानसभा की ओर मार्च किया। अंतिम बैरिकेड के पास पुलिस ने वाटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया तथा लाठीचार्ज की भी रिपोर्ट सामने आई। कुछ प्रदर्शनकारियों ने घायल होने का दावा किया।
आगे क्या होगा?
तत्काल चुनौती सरकार और छात्रों के बीच भरोसे की बहाली है। जेएसएससी-सीजीएल, सीबीआई जांच और अन्य परीक्षाओं को लेकर फैसले आंदोलन की अगली दिशा तय करेंगे। साथ ही जांच एजेंसियों और अदालतों की कार्रवाई से आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
आगे की राह
मौजूदा हालात में तीन स्तरों पर पेशरफ़्त महत्वपूर्ण होगी। पहला, सरकार को उन मांगों पर स्पष्ट समयसीमा देनी होगी जिन पर सहमति बनी है। दूसरा, जांच की प्रक्रिया और उसके निष्कर्षों में पर्याप्त पारदर्शिता जरूरी होगी। तीसरा, भर्ती आयोगों की कार्यप्रणाली में ऐसे सुधार जरूरी हैं जिनसे भविष्य में अभ्यर्थियों को बार-बार आंदोलन का सहारा न लेना पड़े।
सरकार और छात्रों के बीच मतभेद का समाधान केवल परीक्षा रद्द करने या जांच घोषित करने से नहीं होगा। अभ्यर्थियों के लिए भरोसेमंद व्यवस्था तभी बनेगी जब परीक्षा संचालन, परिणाम, शिकायत निवारण और जवाबदेही के हर चरण की स्पष्ट प्रक्रिया सामने हो।
सम्पादकीय दृष्टिकोण
झारखंड छात्र प्रदर्शन अब एक व्यापक भर्ती व्यवस्था के विवाद में बदल चुका है। यह स्थापित है कि छात्रों ने जेएसपीसी-जेएसएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ लंबा आंदोलन किया, सरकार के साथ कई दौर की बातचीत हुई और 10 अगस्त को विधानसभा मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई हुई।
यह भी स्पष्ट है कि सरकार ने कुछ महत्वपूर्ण कदमों की घोषणा की है, जबकि छात्र सीबीआई जांच और जेएसएससी-सीजीएल सहित अन्य परीक्षाओं को लेकर अपनी मांगों पर कायम हैं। दूसरी ओर, कथित अनियमितताओं की अंतिम सच्चाई जांच और न्यायिक प्रक्रिया से तय होनी बाकी है।
झारखंड छात्र प्रदर्शन का अगला चरण इसलिए केवल आंदोलन की तीव्रता से तय नहीं होगा। असली कसौटी यह होगी कि जांच कितनी स्वतंत्र और पारदर्शी रहती है, लंबित परीक्षाओं पर क्या स्पष्ट निर्णय होता है और राज्य भर्ती व्यवस्था अभ्यर्थियों का भरोसा कितनी जल्दी बहाल करती है।
Asif Khan
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।